🕉श्री हरिहरो विजयतेतराम🕉 🌄सुप्रभातम🌄 🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓 🌻मंगलवार, २३ अप्रैल २०१९🌻 सूर्योदय: 🌄 ०५:५२ सूर्यास्त: 🌅 ०६:४७ चन्द्रोदय: 🌝 २२:५१ चन्द्रास्त: 🌜०८:३९ अयन 🌕 उत्तरायणे (उत्तरगोलीय) ऋतु: 🌳 ग्रीष्म शक सम्वत: 👉 १९४१ (विकारी) विक्रम सम्वत: 👉 २०७६ (परिधापी) मास 👉 वैशाख पक्ष: 👉 कृष्ण तिथि: 👉 चतुर्थी (११:०४ तक) नक्षत्र: 👉 ज्येष्ठा (१७:१७ तक) योग: 👉 परिघ (२५:०० तक) प्रथम करण: 👉 बालव द्वितीय करण: 👉 कौलव 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 ॥ गोचर ग्रहा: ॥ 🌖🌗🌖🌗 सूर्य 🌟 मेष चंद्र 🌟 धनु (१७:१६ से) मंगल 🌟 वृष बुध 🌟 मीन (मार्गी, अस्त पश्चिम) गुरु 🌟 वृश्चिक (२५:०६ से (उदित, वक्री) शुक्र 🌟 मीन (उदित) शनि 🌟 धनु (उदित, पूर्व) राहु 🌟 मिथुन केतु 🌟 धनु 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभाशुभ मुहूर्त विचार ⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳ अभिजित मुहूर्त: 👉 ११:४९ से १२:४१ अमृत काल: 👉 ०८:१८ से ०९:५६ होमाहुति: 👉 मंगल अग्निवास: 👉 पृथ्वी दिशा शूल: 👉 उत्तर नक्षत्र शूल: 👉 पूर्व (१७:१७ तक) चन्द्र वास: 👉 उत्तर (पूर्व १७:१७ से) दुर्मुहूर्त: 👉 ०८:२२ से ०९:१४ राहुकाल: 👉 १५:३० से १७:०७ राहु काल वास: 👉 पश्चिम यमगण्ड: 👉 ०९:०१ से १०:३८ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 ☄चौघड़िया विचार☄ ॥ दिन का चौघड़िया ॥ १ - रोग २ - उद्वेग ३ - चर ४ - लाभ ५ - अमृत ६ - काल ७ - शुभ ८ - रोग ॥रात्रि का चौघड़िया॥ १ - काल २ - लाभ ३ - उद्वेग ४ - शुभ ५ - अमृत ६ - चर ७ - रोग ८ - काल नोट-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभ यात्रा दिशा 🚌🚈🚗⛵🛫 उत्तर-पूर्व (धनिया अथवा दलिया का सेवन कर यात्रा करें) 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 तिथि विशेष 🗓📆🗓📆 〰️〰️〰️〰️ ❌❌❌❌❌ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आज जन्मे शिशुओं का नामकरण 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आज १७:१७ तक जन्मे शिशुओ का नाम ज्येष्ठा तृतीय, चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (यी, यू ) तथा इसके बाद जन्मे शिशुओं का नाम मूल नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय चरण अनुसार क्रमशः (ये, यो, भ) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है। विशेष👉 ज्येष्ठा एवं मूल नक्षत्र के चारोचरण गण्डमूल के अंतर्गत आते है ज्येष्ठा के तृतीय पद में जन्म होने पर माता के लिए अशुभ, चतुर्थ पद में स्वयं के लिए अशुभ तथा मूल के प्रथम पद में जन्म होने पर पिता के जीवन में परिवर्तन, द्वितीय पद में माता के लिए अशुभ, तृतीय पद में संपत्ति के लिए हानिकारक है जन्म से २७ वे जन्म नक्षत्र के दिन नक्षत्र शांति का शास्त्रीय विधान है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 उदय-लग्न मुहूर्त: ०५:४६ - ०६:५४ मेष ०६:५४ - ०८:४९ वृषभ ०८:४९ - ११:०४ मिथुन ११:०४ - १३:२५ कर्क १३:२५ - १५:४४ सिंह १५:४४ - १८:०२ कन्या १८:०२ - २०:२३ तुला २०:२३ - २२:४२ वृश्चिक २२:४२ - २४:४६ धनु २४:४६ - २६:२७ मकर २६:२७ - २७:५३ कुम्भ २७:५३ - २९:१७ मीन २९:१७ - २९:४५ मेष 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 🐐🐂💏💮🐅👩 मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) आज के दिन अनैतिक कार्यो से बच कर रहें मन भ्रमित रहने के कारण निषेधात्मक कार्यो में भटकेगा। लोग आपसे भावनात्मक संबंध बनाएंगे परन्तु आवश्यकता के समय कोई आगे नही आएगा। कार्य क्षेत्र पर भी सहकर्मियो का रूखा व्यवहार रहने से स्वयं के ऊपर ज्यादा निर्भर रहना पड़ेगा। लंबी यात्रा के प्रसंग बनेंगे संभव हो तो आज टालें। पेट अथवा स्वांस, छाती संबंधित व्याधि हो सकती है। अधिकांश समय मानसिक रूप से भी अशान्त रहेंगे। परिवार में अनावश्यक खर्च बढ़ेंगे किसी की गलती का विरोध करना भी बेवजह कलह का कारण बनेगा। वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) आज का दिन काफी उठा पटक वाला रहेगा। व्यावसायिक योजनाओं में अचानक बदलाव करना पड़ेगा। दिन के आरंभ में कार्यो की गति धीमी रहेगी समय पर वादा पूरा ना करने से व्यावसायिक संबंध खराब हो सकते है। कार्यो के प्रति नीरसत अधिक रहेगी। किसी भी कार्य को लेकर ठोस निर्णय नही ले पाएंगे परन्तु जिस भी कार्य में निवेश करेंगे उसमे विलंभ से ही सही सफल अवश्य होंगे धन लाभ भी आवश्यकता अनुसार हों जायेगा लेकिन संध्या पश्चात धन संबंधित कोई भी कार्य-व्यवहार ना करें। परिजन आपके टालमटोल वाले व्यवहार से दुखी रहेंगे। मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) आज के दिन लाभ के अवसर आपकी तलाश में रहेंगे। दिन में जिस किसी के भी संपर्क में रहेंगे उससे कुछ ना कुछ लाभ अवश्य होगा। कार्य क्षेत्र पर भी एक से अधिक साधनो से आय होगी। व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़ी महिलाओ को पदोन्नति के साथ प्रोत्साहन के रूप में आर्थिक सहायता भी मिल सकती है। सामाजिक कार्यो में रुचि ना होने पर भी सम्मिलित होना पड़ेगा मान-सम्मान बढेगा। परिजनों का मार्गदर्शन आज प्रत्येक क्षेत्र पर काम आएगा। महिलाओं का सुख सहयोग मिलेगा। प्रेम प्रसंगों में निकटता रहेगी। कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) आज के दिन आप बुद्धि विवेक से कार्य करेंगे परन्तु परिस्थिति हर तरह से कार्यो में बाधा डालेगी। कार्य व्यवसाय से मन ऊबने लगेगा धैर्य से कार्य करते रहें संध्या तक संतोषजक लाभ अवश्य मिलेगा पारिवारिक एवं सामाजिक क्षेत्र पर आपके विचारो की प्रशंसा होगी लेकिन केवल व्यवहार मात्र के लिए ही। आर्थिक विषयो को लेकर किसी से विवाद ना करें धन डूबने की आशंका है। गृहस्थ में प्रेम स्नेह तो मिलेगा परन्तु स्वार्थ सिद्धि की भावना भी अधिक रहेगी। महिलाये अधिक बोलने की समस्या से ग्रस्त रहेंगी। सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) आज के दिन आप सम्भल कर ही कार्य करेंगे फिर भी सफलता में संशय बना रहेगा। व्यवहारिकता की कमी के कारण जितना लाभ मिलना चाहिए उतना नही मिल सकेगा। घर अथवा बाहर बेवजह कलह के प्रसंग बनेगे। व्यापार व्यवसाय में सहकर्मियो की।मनमानी के कारण असुविधा एवं अव्यवस्था बनेंगी लेकिन फिर भी स्वयं के पराक्रम से खर्च लायक धनार्जन कर ही लेंगे। आस-पड़ोसी एवं भाई बंधुओ से बात का बतंगड़ ना बने इसके लिए मौन रखने की जरूरत है फिर भी महिलाये स्वभावानुसार बनती बात बिगाड़ लेंगी। विपरीत लिंग के प्रति कामासक्त रहेंगे। कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) आज का दिन आर्थिक दृष्टिकोण से उन्नति वाला रहेगा। धन संबंधित समस्याएं काफी हद तक सुलझने पर दिन भर प्रसन्नता रहेगी। कार्य व्यवसाय से प्रारंभिक परिश्रम के बाद दोपहर के समय से धन की आमद शुरू हो जाएगी जो संध्या तक रुक रुक कर चलती रहेगी। मितव्ययी रहने के कारण खर्च भी हिसाब से करेंगे धन कोष में वृद्धि होगी। महिलाये किसी मनोकामना पूर्ति से उत्साहित होंगी। आज महिला वर्ग से कोई भी काम निकालना आसान रहेगा मना नही कर सकेंगी। दाम्पत्य सुख में भी वृद्धि होगी। पर्यटन की योजना बनेगी। तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) आज के दिन आप किसी भी कार्य को लेकर ज्यादा भाग-दौड़ करने के पक्ष में नही रहेंगे। आसानी से जितना मिल जाये उसी में संतोष कर लेंगे। परन्तु महिलाये इसके विपरीत रहेंगी अल्प साधनो से कार्य करने पर भाग्य को दोष देंगी। व्यवसाय की गति पल पल में बदलेगी जिससे सुकून से बैठने का समय नही मिलेगा। किसी पुरानी घटना को याद करके दुखी रहेंगे। पारिवारिक खर्चो में अकस्मात वृद्धि होने से बजट गड़बड़ा सकता है। महिलाओं के मन मे आज उथल पुथल अधिक रहने के कारण बड़ी जिम्मेदारी का कार्य सौपना उचित नही रहेगा। वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) आज के दिन मानसिक चंचलता के कारण बनते कार्यो को दुविधा के कारण आप स्वयं बिगाड़ लेंगे। सरकारी कार्य आज सावधानी से करें अन्यथा लंबित रखें हानि निश्चित रहेगी। संबंधो के प्रति भी आज ईमानदार नही रहेंगे। पारिवारिक वातावरण आपके गलत आचरण से कलुषित होगा। सामाजिक क्षेत्र पर लोग पीठ पीछे बुराई करेंगे। सेहत में मानसिक दबाव के चलते उतार चढ़ाव लगा रहेगा। घर के बुजुर्ग आपसे नाराज रहेंगे। धन लाभ अचानक होने से स्थिति संभाल नही सकेंगे रुपया आते ही हाथ से निकल भी जायेगा। धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे) आपको आज के दिन प्रत्येक कार्यो में सावधान रहने की आवश्यकता है। धन के पीछे भागने की प्रवृति पर आज लगाम लगाकर रखे अन्यथा धन के साथ-साथ मान हानि भी होगी। दोपहर से पहले के भाग में पुराने कार्य पूर्ण होने से थोड़ा बहुत धन मिलने से दैनिक खर्च निकल जाएंगे। इसके बाद का समय प्रतिकूल बनता जाएगा। कार्य व्यवसाय में प्रतिस्पर्धी हर प्रकार से आपके कार्यो में व्यवधान डालने का प्रयास करेंगे। परिजनों से भी मामूली बात पर झगड़ा होगा। वाणी एवं व्यवहार से संयम बरतें। मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी) आज का दिन आशाओं के विपरीत रहने वाला है। सोची हुई योजनाए आरम्भ में सफल होती नजर आएंगी परन्तु मध्यान तक इनसे निराशा ही मिलेगी। आज आप जिससे भी सहायता मांगेंगे वो भ्रम की स्थिति में रखेगा। आज आप आत्मनिर्भर होकर अपने कार्यो को करें। भागीदारों से धन को लेकर अनबन हो सकती है। मीठा व्यवहार रखने पर भी लोग आपको केवल कार्य निकालने के लिए इस्तेमाल करेंगे। कार्य क्षेत्र की भड़ास घर पर निकालने से घर का माहौल भी बेवजह खराब होगा। पुराने कार्यो को पूर्ण करने की चिंता रहेगी। प्रेम प्रसंगों से निराश होंगे। कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) आज का दिन कार्य सफलता वाला रहेगा। प्रातः काल जल्दी कार्यो में जुटने का फल शीघ्र ही धन लाभ के रूप में मिलेगा। अधिकांश कार्य थोड़े से परिश्रम से पूर्ण हो जाएंगे। अधिकारी वर्ग मुश्किल कार्यो में सहयोग करेंगे। आज आप जोड़ तोड़ वाली नीति अपना कर कठिन परिस्थितियों में भी अपना काम निकाल लेंगे। सरकारी कार्य मे भी सफलता की उम्मद जागेगी प्रयास करते रहे। दाम्पत्य जीवन मे छोटी-मोटी बातों को दिल पर ना लें स्थिति सामान्य ही रहेगी। मित्रो से कोई दुखद समाचार मिलेगा। मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) आज का दिन भी आशानुकूल रहेगा। सेहत उत्तम रहने से कार्यो को मन लगाकर करेंगे लेकिन किसी के हस्तक्षेप करने से मन विक्षिप्त हो सकता है। किसी के ऊपर ध्यान ना दें एकाग्र होकर अपने कार्य मे लगे रहे धन एवं सम्मान दोनों मिलने के योग है। लेकिन उधार के व्यवहार बढ़ने से असुविधा भी होगी। व्यावसाय में वृद्धि के लिए निवेश करना शुभ रहेगा। भाई-बंधुओ का सहयोग आज अपेक्षाकृत कम ही रहेगा। महिलाओं को छोड़ घर के अन्य सदस्य आपसे ईर्ष्यालु व्यवहार रखेंगे। स्त्री से सुखदायक समाचार मिलेंगे। 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️

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किसे कहते हैं सत्संग? 〰〰🌼〰〰🌼〰〰 सतसंगत मुद मंगल मूला। सोई फल सिधि सब साधन फूला॥ तात स्वर्ग अपबर्ग सुख धरिअ तुला एक अंग। तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग॥ हे तात! स्वर्ग और मोक्ष के सब सुखों को तराजू के एक पलड़े में रखा जाए, तो भी वे सब मिलकर (दूसरे पलड़े पर रखे हुए) उस सुख के बराबर नहीं हो सकते, जो लव (क्षण) मात्र के सत्संग से होता है॥ हमारे देश क पौराणिक और धार्मिक कथा साहित्य बढ़ा समृद्धिशाली हैं, ऋषि- मुनियों ने भारतीय ज्ञान, नीति,सत्य प्रेम न्याय संयम धर्म तथा उच्च कोटि के नैतिक सिद्धांतों को जनता तक पोहचाने के लिए बढे ही मनो वैज्ञानिक ढंग से अनेक प्रकार की धार्मिक कथाओं की रचना की हैं। इनमें दुष्ट प्रवृत्तियों की हमेशा हार दिखाकर उन्हें छोड़ने की प्रेंडा दी गई हैं,इस प्रकार ये कथाएं हमें पापबुध्धि से छुड़ाती हैं। हमारी नैतिक बुध्धि को जगाती हैं जिससे मनुष्य सब्य, सुसंस्कृत और पवित्र बनता हैं भगवान की कथा को भव-भेषज, सांसारिक कष्ट पीड़ाओं और पतन से मुक्ति दिलाने वाली ओषधि कहा जाता हैं,इसलिए कथा सुनने तथा सत्संग का बोहोत महत्त्व होता हैं। वेद व्ययास जी ने भगवत की रचना इसलिए की ताकि लोग कथा के दुवारा ईश्वर के आदर्श रूप को समझें और उसको अपनाकर जीवनलाभ उठाये। भगवान की कथा को आधिभौतिक आदिदैविक एवं आधात्मिक तापों को काटने वाली कहा गया हैं यानि इनका प्रभाव मृत्तु के बाद ही नहीं जीवन में भी दिखाई देने लगता हैं. सांसारिक सफलताओं से लेकर पारलौकिक उपलब्धियों तक उसकी गति बनी रहने से जीवन की दिशा ही बदल जाती हैं। पाप और पूण्य का सही स्वरूप भगवत गीता से समझ आता हैं,इसे अपने हर पापों का छय तथा पुण्यों की वृद्धि की जा सकती हैं,व्यक्ति अपने बंधनो को छोड़ने और तोड़ने में सफल हो जाता हैं,तथा मुक्ति का अधिकारी बन जाता हैं,इससे अलावा कथा सुनने से जीवन की समसयाओं कुंठाओं विडम्बनाओं का समाधान आसानी से मिल जाता हैं। आत्मानुशासन पांच में कहा गया हैं की जो बुध्धिमान हो जिसने समस्त शास्त्रों का रहस्य प्राप्त किया हो लोक मर्यादा जिसके प्रकट हुई हो कांतिमान हो, उपशमि हो, प्रश्न करने से पहले ही जिसने उत्तर जाना हो,बाहूल्यता से प्रश्नों को सहने वाला हो, प्रभु हो, दूसरे की तथा दूसरे के द्वारा अपनी निंदारहित गूढ़ से दूसरे के मन को हरने वाला हो गुण निधान हो जिसके वचन स्पष्ट और मधुर हों सभा का ऐसा नायक धर्मकथा कहें। स्कन्दपुराण में सूतजी कहते हैं- श्री मद्भागवत का जो श्रवण करता हैं,वह अवस्य ही भगवान के दर्शन करता हैं. किन्तु कथा का श्रवण, पाठन, श्रद्धाभक्ति, आस्था के साथ-साथ विधिपूर्वक होना चाहिए अन्यथा सफल की प्राप्ति नहीं होती। श्रीमद्भागवत जी में लिखा हैं की जहाँ भगवत कथा की अमृतमयी सरिता नहीं बहती, जहाँ उसके कहने वाले भक्त, साधुजन निवास नहीं करते, वह चाहें ब्र्म्हलोक ही कियों ना हो, उसका उसका सेवन नहीं करना चाहिए। धर्मिककथा, प्रवचन आदि का महात्म केवल उसके सुनने मात्र तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उनपर स्रद्धपूर्वक मनन ,चिंतन और आचरण करने में हैं। श्रद्धा के लिए मात्र जगदिखाने के लिए कथा आदि सुनने का कोई फल नहीं मिलता. एक बार किसी भक्त ने नारद ने पूछा- भगवान की कथा के प्रभाव से लोगों के अंदर भाव और वैराग्य के भव जागने और पुष्ट होने चाहिए। वह क्यों नहीं होते, नारद ने कहा- ब्राम्हण लोग केवल अन्न, धनादि के लोभवश घर-घर एवं जन-जन को भगवतकथा सुनाने लगे हैं। इसलिए भगवत का प्रभाव चला गया हैं. वीतराग शुकदेवजी के मुहं से राजा परीक्षित ने भगवत पुराण की कथा सुनकर मुक्ति प्राप्त की और स्वर्ग चले गए। सुकदेव ने परमार्थभाव से कथा कही थी और परीक्षित ने उसे आत्मकलियांड के लिए पूर्ण श्रद्धाभाव से सुनकर आत्मा में उत्तर लिया था इसलिए उन्हें मोछ मिला। सत्संग के विषय में कहा जाता हैं की भगवान की कथाएँ कहने वाले और सुनने वाले दोनों का ही मन और शरीर दिव्य एवं तेजमय होता चला जाता हैं. इसी तरह कथा सुनने से पाप कट जाते है और प्रभु कृपा सुलभ होकर परमांनद की अनुभूति होती हैं। भय विपत्ति रोग दरिद्रता में सांत्वना उत्साह और प्रेणा की प्राप्ति होती हैं मन और आत्मा की चिकित्साह पुनरुद्धार प्राणसंचार की अद्भुत शक्तियां मिलती हैं. विपत्ति में धैर्य, आवेस में विवेक व् कलिआण चिंतन में मदत प्राप्त होती हैं। 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰

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रसोई में स्वास्थ्य 🔸🔸🔹🔸🔸 👉 नमक केवल सेन्धा प्रयोग करें। थायराइड, बी पी, पेट ठीक होगा। 👉 कुकर स्टील का ही काम में लें। एल्युमिनियम में मिले lead से होने वाले नुकसानों से बचेंगे। 👉 तेल कोई भी रिफाइंड न खाकर, केवल तिल्ली, सरसों, मूंगफली, नारियल प्रयोग करें। रिफाइंड में बहुत केमिकल होते हैं। 👉 सोयाबीन बड़ी को 2 घण्टे भिगो कर, मसल कर ज़हरीली झाग निकल कर ही प्रयोग करें। 👉 रसोई में एग्जास्ट फैन जरूरी है, प्रदूषित हवा बाहर करें। 👉 काम करते समय स्वयं को अच्छा लगने वाला संगीत चलाएं। खाने में अच्छा प्रभाव आएगा और थकान कम होगी। 👉 देसी गाय के घी का प्रयोग बढ़ाएं। अनेक रोग दूर होंगे, वजन नहीं बढ़ता। 👉 ज्यादा से ज्यादा मीठा नीम/कढ़ी पत्ता खाने की चीजों में डालें, सभी का स्वास्थ्य ठीक करेगा। 👉 ज्यादा चीजें लोहे की कढ़ाई में ही बनाएं। आयरन की कमी किसी को नहीं होगी। 👉 भोजन का समय निश्चित करें, पेट ठीक रहेगा। भोजन के बीच बात न करें, भोजन ज्यादा पोषण देगा। 👉 नाश्ते में अंकुरित अन्न शामिल करें। पोषक विटामिन, फाइबर मिलेंगें। 👉 सुबह के खाने के साथ ताजा दही लें, पेट ठीक रहेगा। 👉 चीनी कम से कम प्रयोग करें, ज्यादा उम्र में हड्डियां ठीक रहेंगी। 👉 चीनी की जगह बिना मसले का गुड़ या देशी शक्कर लें। 👉 छौंक में राई के साथ कलौंजी का भी प्रयोग करें, फायदे इतने कि लिख ही नहीं सकते। 👉 चाय के समय, आयुर्वेदिक पेय की आदत बनाएं व निरोग रहेंगे। 👉 डस्ट बिन एक रसोई में एक बाहर रखें, सोने से पहले रसोई का कचरा बाहर के डस्ट बिन में डालें। 👉 रसोई में घुसते ही नाक में घी या सरसों तेल लगाएं, सर और फेफड़े स्वस्थ रहेंगें। 👉 करेले, मैथी, मूली याने कड़वी सब्जियां भी खाएँ, रक्त शुद्ध रहेगा। 👉 पानी मटके वाले से ज्यादा ठंडा न पिएं, पाचन व दांत ठीक रहेंगे। 👉 रसोई में घुसते ही थोड़े ड्राई फ्रूट (काजू की जगह तरबूज के बीज) खायें, एनर्जी बनी रहेगी। 👉 प्लास्टिक, एल्युमिनियम रसोई से हटाये, केन्सर कारक हैं। 👉 माइक्रोवेव ओवन का प्रयोग केन्सर कारक है। 👉 खाने की ठंडी चीजें कम से कम खाएँ, पेट और दांत को खराब करती हैं। 👉 बाहर का खाना बहुत हानिकारक है, खाने से सम्बंधित ग्रुप से जुड़कर सब घर पर ही बनाएं। 👉 तली चीजें छोड़ें, वजन, पेट, एसिडिटी ठीक रहेंगी। 👉 मैदा, बेसन, छौले, राजमां, उड़द कम खाएँ, गैस की समस्या से बचेंगे। 👉 अदरक, अजवायन का प्रयोग बढ़ाएं, गैस और शरीर के दर्द कम होंगे। 👉 बिना कलौंजी वाला अचार हानिकारक होता है। 👉 पानी का फिल्टर R O वाला नहीं, हानिकारक है। U V वाला ही प्रयोग करें, सस्ता भी और बढ़िया भी। 👉 रसोई में ही बहुत से कॉस्मेटिक्स हैं, इस प्रकार के ग्रुप से जानकारी लें। 👉 रात को आधा चम्मच त्रिफला एक कप पानी में डाल कर रखें, सुबह कपड़े से छान कर eye wash cup में डाल कर आंखें धोएं, चश्मा उतर जाएगा। छान कर जो पाउडर बचे उसे फिर एक गिलास पानी में डाल कर रख दें। रात को पी जाएं। पेट साफ होगा, कोई रोग एक साल में नहीं रहेगा। 👉 सुबह रसोई में चप्पल न पहनें, शुद्धता भी, एक्यू प्रेशर भी। 👉 रात का भिगोया आधा चम्मच कच्चा जीरा सुबह खाली पेट चबा कर वही पानी पिएं, एसिडिटी खतम। 👉 एक्यू प्रेशर वाले पिरामिड प्लेटफार्म पर खड़े होकर खाना बनाने की आदत बना लें तो भी सब बीमारी शरीर से निकल जायेगी। 👉 चौथाई चम्मच दालचीनी का कुल उपयोग दिन भर में किसी भी रूप में करने पर निरोगता अवश्य होगी। 👉 रसोई के मसालों से बना चाय मसाला स्वास्थ्यवर्धक है। 👉 सर्दियों में नाखून बराबर जावित्री कभी चूसने से सर्दी के असर से बचाव होगा। 👉 सर्दी में बाहर जाते समय, 2 चुटकी अजवायन मुहं में रखकर निकलिए, सर्दी से नुकसान नहीं होगा। 👉 रस निकले नीबू के चौथाई टुकड़े में जरा सी हल्दी, नमक, फिटकरी रखकर दांत मलने से दांतों का कोई भी रोग नहीं रहेगा। 👉 कभी कभी नमक में, हल्दी में 2 बून्द सरसों का तेल डाल कर दांतों को उंगली से साफ करें, दांतों का कोई रोग टिक नहीं सकता। 👉 बुखार में 1 लीटर पानी उबाल कर 250 ml कर लें, साधारण ताप पर आ जाने पर रोगी को थोड़ा थोड़ा दें, दवा का काम करेगा। 👉 सुबह के खाने के साथ घर का जमाया ताजा दही जरूर शामिल करें, प्रोबायोटिक 👉 सूरज डूबने के बाद दही या दही से बनी कोई चीज न खाएं, ज्यादा उम्र में दमा हो सकता है। 👉 दहीबड़े सिर्फ मूंग की दाल के बनने चहिये, उड़द के नुकसान करते हैं। ✏✏✏

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बहुत ही सुन्दर दृष्टांत 🔸🔸🔹🔹🔸🔸 एक माता आटा गूंध रही थीं, इतने में उसका चार साल का बच्चा जाग जाता है, और रोना शुरु कर देता है । मां दौड़कर उसके पास आती है और ढेर सारे खिलौने उसके पास डाल देती है । और एक-दो खिलौने उसके सामने बजा कर उसके हाथ में देना चाहती है । किन्तु बच्चा खिलौने हाथ में लेने के बजाए उन्हें पैरों की ठोकर से दूर फेंक देता है और जमीन मैं पसर जाता है और हाथ-पैर मारकर जोर जोर से रोने लगता है। यह सब देख कर मां प्यार के जोश में आकर बच्चे को अपनी गोदी में उठा लेती है, और उसे खूब चूमती-चाटती है, उसे सहलाती है । बच्चा अपनी मां का प्यार पाकर परम शांति का आनन्द लेता हुआ फिर सो जाता है या शांत बैठ जाता है । मां भी अपने काम में लग जाती है । बस यही कुछ हाल यहां भी होता है जब साधक भजन भक्ति में लगकर रोता गिड़गिगिड़ाता है, फरियाद करता है , तो उसके आगे पीछे भी मोटर , बिल्डिंग गुड़िया, गुड्डे आदि खिलौने डाल दिये जाते हैं ,और वह उन्हीं में उलझ कर रह जाता है । और अपने असली लक्ष्य से भटक कर सत्य मार्ग को खो बैठता है । और जिंदगी भर रोता और दुख उठाता है । अगर वह भी उस बच्चे की तरह उसको लात मार देता तो आज वह भी अपने प्रभु की गोद में बैठा होता । दो नावों में एक साथ बैठना संभव नहीं । या तो दुनिया का मजा लूट लो या आत्मा के आनंद का ।। 🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸

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