🕉श्री हरिहरो विजयतेतराम🕉 🌄सुप्रभातम🌄 🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓 🌻मंगलवार, ७ जनवरी २०२०🌻 सूर्योदय: 🌄 ०७:१९ सूर्यास्त: 🌅 ०५:३५ चन्द्रोदय: 🌝 १४:३७ चन्द्रास्त: 🌜२८:३७ अयन 🌕 दक्षिणायने (दक्षिणगोलीय) ऋतु: 🌲 हेमंत शक सम्वत: 👉 १९४१ (विकारी) विक्रम सम्वत: 👉 २०७६ (परिधावी) मास 👉 पौष पक्ष 👉 शुक्ल तिथि: 👉 द्वादशी (२८:१४ तक) नक्षत्र: 👉 कृत्तिका (१५:२४ तक) योग: 👉 शुभ (२२:४३ तक) प्रथम करण: 👉 बव (१६:१३ तक) द्वितीय करण: 👉 बालव (२८:१४ तक) 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰️〰️ ॥ गोचर ग्रहा: ॥ 🌖🌗🌖🌗 सूर्य 🌟 धनु चंद्र 🌟 वृष मंगल 🌟 वृश्चिक (उदित, पूर्व) बुध 🌟 वृश्चिक (अस्त, उदय, पूर्व) गुरु 🌟 धनु (अस्त, पश्चिम, मार्गी) शुक्र 🌟 मकर (उदित, पश्चिम) शनि 🌟 धनु (अस्त, पश्चिम, मार्गी) राहु 🌟 मिथुन केतु 🌟 धनु 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभाशुभ मुहूर्त विचार ⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳ 〰〰〰〰〰〰〰 अभिजित मुहूर्त: 👉 १२:०३ से १२:४३ अमृत काल: 👉 १२:५३ से १४:३४ होमाहुति: 👉 शनि अग्निवास: 👉 पृथ्वी (२८:१४ तक) दिशा शूल: 👉 उत्तर नक्षत्र शूल: 👉 पश्चिम (१५:२४ से) चन्द्र वास: 👉 दक्षिण दुर्मुहूर्त: 👉 ०९:२० से १०:०१ राहुकाल: 👉 १४:५५ से १६:११ राहु काल वास: 👉 पश्चिम यमगण्ड: 👉 ०९:५१ से ११:०७ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ☄चौघड़िया विचार☄ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ ॥ दिन का चौघड़िया ॥ १ - रोग २ - उद्वेग ३ - चर ४ - लाभ ५ - अमृत ६ - काल ७ - शुभ ८ - रोग ॥रात्रि का चौघड़िया॥ १ - काल २ - लाभ ३ - उद्वेग ४ - शुभ ५ - अमृत ६ - चर ७ - रोग ८ - काल नोट-- दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 शुभ यात्रा दिशा 🚌🚈🚗⛵🛫 दक्षिण-पूर्व (धनिया अथवा दलिया का सेवन कर यात्रा करें) 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 तिथि विशेष 🗓📆🗓📆 〰️〰️〰️〰️ सर्वार्थसिद्धि योग प्रातः ०७:३१ से १५:२३ तक, पुत्रदा एकादशी व्रत निम्बार्क मत, त्रिपुष्कर योग प्रातः सुर्योदय से १३:२४ तक आदि। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आज जन्मे शिशुओं का नामकरण 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आज १५:२४ तक जन्मे शिशुओ का नाम कृतिका नक्षत्र के तृतीय, चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (उ, ए) तथा इसके बाद जन्मे शिशुओं का नाम रोहिणी नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय चरण अनुसार क्रमशः (ओ, वा, वी)नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 उदय-लग्न मुहूर्त: ०७:१८ - ०७:४८ धनु ०७:४८ - ०९:२९ मकर ०९:२९ - १०:५५ कुम्भ १०:५५ - १२:१८ मीन १२:१८ - १३:५२ मेष १३:५२ - १५:४७ वृषभ १५:४७ - १८:०२ मिथुन १८:०२ - २०:२३ कर्क २०:२३ - २२:४२ सिंह २२:४२ - २५:०० कन्या २५:०० - २७:२१ तुला २७:२१ - २९:४० वृश्चिक २९:४० - ३१:१८ धनु 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 पञ्चक रहित मुहूर्त: ०७:१८ - ०७:४८ शुभ मुहूर्त ०७:४८ - ०९:२९ मृत्यु पञ्चक ०९:२९ - १०:५५ अग्नि पञ्चक १०:५५ - १२:१८ शुभ मुहूर्त १२:१८ - १३:५२ मृत्यु पञ्चक १३:५२ - १५:२४ अग्नि पञ्चक १५:२४ - १५:४७ शुभ मुहूर्त १५:४७ - १८:०२ रज पञ्चक १८:०२ - २०:२३ शुभ मुहूर्त २०:२३ - २२:४२ चोर पञ्चक २२:४२ - २५:०० शुभ मुहूर्त २५:०० - २७:२१ रोग पञ्चक २७:२१ - २८:१४ शुभ मुहूर्त २८:१४ - २९:४० मृत्यु पञ्चक २९:४० - ३१:१८ अग्नि पञ्चक 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आज का राशिफल 🐐🐂💏💮🐅👩 〰️〰️〰️〰️〰️〰️ मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ) आपके लिये आज का दिन आशा से कम लाभदायक लेकिन फिर भी संतोषजनक रहेगा। संतोषी प्रवृति रहने के कारण व्यर्थ की उलझनों से बचे रहेंगे। आज आपको आर्थिक विषमताओं का सामना करना पड़ेगा कार्य क्षेत्र अथवा घर मे कोई ना कोई आपके व्यवहार से असंतोष जतायेगा लेकिन आप जानकर भी अनजान बनेंगे। धार्मिक पूजा पाठ में सम्मिलित होने के अवसर मिलेंगे परन्तु ध्यान एकाग्र नही रहने के कारण आध्यात्म लाभ नही मिल पायेगा। नौकरी वाले लोग आज कार्य भार कम रहने से शांति अनुभव करेंगे फिर भी अधिकारी वर्ग से आज कम ही बनेगी। बुजुर्गो का आशीर्वाद और मार्गदर्शन मिलेगा। वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो) आज के दिन आप लापरवाहि ज्यादा करेंगे। छोटी-छोटी गलती भी आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है इसका विशेष ध्यान रखना होगा। किसी भी कार्य को दिमाग की जगह दिल से करने के कारण सफलता में संशय रहेगा। धन संबंधित उलझने दिन के आरंभ से ही खड़ी होंगी जो कि संध्या तक यथावत बनी रहेगी संध्या के आस-पास कही से थोड़ा बहुत धन मिलने से दैनिक खर्च निकल जाएंगे। आर्थिक मामलों को लेकर आज ज्यादा तामझाम में ना पढ़ें अन्यथा छोटे लाभ से भी वंचित रहना पडेगा। मित्र रिश्तेदारों के आगे भी धन संबंधित कार्यो को लेकर शर्मिंदा होना पड़ सकता है। उधार किसी से भी ना करे चुकाने में परेशानी आएगी। सेहत में छोटी मोटी व्याधी लगी रहेगी। मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा) आज का दिन भी संघर्ष से भरा रहेगा। दिन के आरंभ में ही कोई दुखद घटना से मन बेचैन रहेगा। दिनचार्य आज अस्त-व्यस्त ही रहेगी। जिस कार्य को करने का मन बनाएंगे उसमे अनिर्णय की स्थिति रहने के कारण विलम्ब होगा हानि के डर से आज कोई जोखिम लेने से बचेंगे केवल यही निर्णय आज सही रहेगा अन्य में कुछ ना कुछ उलझन ही बनेगी। अकस्मात धन क्षय के योग बन रहे है नए कार्यो में धन ना लगाए पहले अधूरे कार्य पूर्ण करें अन्यथा निरस्त किये जा सकते है। पारिवारिक वातावरण में विवेक की कमी रहेगी छोटी-छोटी बात पर आपस में उलझेंगे। शारीरिक दृष्टिकोण से भी आज दिन प्रतिकूल रहेगा। कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) आज के दिन आप अपनी बात मनवाने के लिये सामने वाले पर नाजायज दबाव बनाएंगे जिससे आपसी संबंध खराब होने का भय रहेगा फिर भी देर अबेर अपना काम बना ही लेंगे। नौकरी पेशा जातक अधिकारियों के ऊपर आवश्यकता से अधिक विश्वासः करेंगे जिसका परिणाम आज निराश ही करेगा। व्यवसायी वर्ग धन को लेकर थोड़े चिंतित रहेंगे उधारी के कारण कार्य क्षेत्र पर गरमा गरमी हो सकती है। आध्यात्मिक कार्यो में भी समय निकाल सम्मिलित होंगे लेकिन आज मन अन्यत्र ही भटकेगा। बाहर घूमने की योजना अंत समय मे निरस्त करनी पड़ेगी। सुख सुविधा मिलने पर भी मानसिक रूप से अशान्त रहेंगे। सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) आज का दिन भी आपके अनुकूल बना रहेगा लेकिन आज स्वभाव में थोड़ी तल्खी रहने से आपसी व्यवहारिकता में कमी आएगी। लोग आपसे अपेक्षाये लेकर आएंगे परन्तु निराश होना पड़ेगा। दैनिक कार्य के अतिरिक्त कार्य आने से कुछ समय के लिए असहजता बनेगी। व्यक्तिगत व्यस्तता के कारण सामाजिक कार्यो में बेमन से भाग लेना पड़ेगा फिर भी सम्मान पाने के अधिकारी बनेंगे। काम-धंधे में सुधार आयेगा लेकिन रुके कार्य आज भी पूर्ण होने में संदेह रहेगा। नौकरी पेशाओ एवं महिलाओ का आस-पड़ोसियों से झगड़ा होने की संभावना है। परिवार में किसी से बीमार होने पर चिंता होगी धन खर्च के साथ अतिरिक्त भाग-दौड़ करनी पड़ेगी। अपनी सेहत का भी ख्याल रखें। कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) आज आप धार्मिक कार्यो के लिये अपने नियत कार्यक्रम को रद्द करेंगे जिससे बाद में अधिकांश कार्य अस्त-व्यस्त होंगे। धार्मिक भावनाएं आज बलवती रहेंगी लेकिन परोपकार के कार्य स्वार्थ पूर्ति के लिये ही करेंगे। दिन के आरम्भ में स्वास्थ्य संबंधित शिकायत रहेगी मध्यान तक धीरे धीरे सुधार आने लगेगा दवाओं पर खर्च करना पड़ेगा। व्यवसाय में आज आश्वासनों से ही काम चलाना पड़ेगा। नए अनुबंध हाथ लगेंगे लेकिन आज इनपर कार्य आरम्भ नही कर पाएंगे। गृहस्थ में आज शांति स्थापित होगी फिर भी बुजुर्गो को संतुष्ट रखना नामुमकिन होगा। आय की अपेक्षा खर्च अधिक रहेगा। तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) आज का दिन भी प्रतिकूल रहेगा। शारीरिक रूप से असमर्थ रहने के कारण आवश्यक कार्यो में विलंब होगा स्वभाव में चिड़चिड़ापन रहेगा। मन मे नकारत्मक भाव आएंगे किसी की हित मे कही बाते भी उल्टी लगेंगी। कार्य व्यवसाय में आज किसी के सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी वो भी समय पर नही मिलेगा। धन की आमद अनिश्चित रहेगी खर्च निकालने के लिये भी जोड़-तोड़ करना पड़ेगा। उधार के व्यवहार से बचे अन्यथा बाद में परेशानी होगी। पारिवारिक वातावरण में विरोधाभास लगा रहेगा घर के सदस्य एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करेंगे। घर के बुजुर्ग वर्ग दुखी होंगे। वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू) आज का दिन विजय दिलाने वाला रहेगा। स्वभाव में थोड़ी तेजी रहने के कारण किसी के मार्गदर्शन को भी अहम से जोड़ेंगे आज आप किसी अन्य के आधीन होकर काम करना पसंद नही करेंगे। मनमौजी व्यवहार अन्य लोगो के लिए परेशानी खड़ी करेगा लेकिन आपके लिये शांति दायक रहेगा। जिस कार्य को करेंगे उसमे ही विलम्ब होगा फिर भी अपनी सूझ बूझ से लाभ बना ही लेंगे। व्यवसायी वर्ग जोखिम वाले कार्य शेयर सट्टे आदि से लाभ कमाएंगे। नौकरी वाले लोग भी कार्य कुशलता के बल पर सम्मान के अधिकारी बनेंगे। परिवार का वातावरण आपसी समझ की कमी के कारण कुछ समय के लिये गरम होगा। पित्त, कफ से परेशानी होगी। धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे) आज के दिन आपके स्वभाव में आलस्य अधिक रहेगा। लापरवाहि में लाभ के अवसर हाथ से निकल सकते है सतर्क रहें। कार्य व्यवसाय में आज बीते कल की अपेक्षा तेजी रहेगी धन कमाने के मौके मिलते रहेंगे आवश्यकता अनुसार लाभ आसानी से हो जाएगा लेकिन लालच में ज्यादा कमाने की वृत्ति कुछ ना कुछ कमी ही करेगी। संतोषी वृति अपनाकर ही आज प्रत्येक कार्य निर्विघ्न सम्पन्न किया जा सकता है इसका विशेष ध्यान रखें। हर में मांगलिक कार्यक्रम होने से वातावरण शांत रहेगा। विपरीत लिंगीय आकर्षण भी कुछ अधिक रहेगा इसके कारण परिवार में गलतफहमी पनपने से खींच तान हो सकती है। सेहत बनी रहेगी। मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी) आज का दिन भी भाग-दौड़ में बीतेगा। दिन के आरम्भ से ही किसी कार्य को करने के लिए व्यस्त हो जाएंगे। कार्य व्यवसाय में आज अधूरे कार्य पूर्ण करने की जल्दबाजी रहेगी फिर भी समय से पूर्ण नही हो पाएंगे। व्यवसायी वर्ग धन सम्बन्धीत व्यवहार के कारण चिंतित रहेंगे समय पर कार्य पूर्ण ना होने कारण खरी-खोटी सुन्नी पड़ेगी। मध्यान बाद का समय राहत वाला रहेगा। धन संबंधित समस्या किसी की सहायता से सुलझेंगी लेकिज आज आर्थिक कारणों से किसी से पुराना संबंध टूटने की संभावना है। परिवार के बीच आप ज्यादा शांत एवं सुरक्षित अनुभव करेंगे। पेट खराब होने पर अन्य व्याधियां बनेगी। कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) आज के दिन आपका स्वभाव बात-बात पर गरम होगा। किसी से किया वादा पूर्ण ना करने पर अपमानित होना पड़ेगा। जल्दबाजी में कार्य करेंगे त्रुटि होने पर बाद में अफसोस होगा। आज धन संबंधित व्यवहार अधिक आवश्यकता पडने पर ही लिख कर ही करें भूल होने की संभावना हैं। धन लाभ को लेकर मध्यान तक चिंतित रहेंगे मध्यान बाद आवश्यकता अनुसार होने से राहत मिलेगी। घर का वातावरण भी आपके रूखे व्यवहार से अशान्त रहेगा। बड़े-बुजुर्गों की बात ना मानने पर कुछ ना कुछ हानि होगी। आज शांति बनाए रखने के लिये मौन रहना ही बेहतर रहेगा। सर-बदन दर्द रक्त चाप संबंधित परेशानी होगी। मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची) आज आप अपने अभिमानी स्वभाव के कारण घर मे बैठे बिठाये झगड़ा मोल लेंगे इसके विपरीत कार्य अथवा सामाजिक क्षेत्र पर ऐश्वर्य वृद्धि होगी। घर से ज्यादा बाहर का वातावरण भायेगा। कार्य व्यवसाय में सोची योजनाए धीमी गति से चलेंगी आज जहां से लाभ की उम्मीद रहेगी वहां की जगह अन्य साधनों से अक्समात होगा। विरोधी आपके खिलाफ षड्यंत्र रचेंगे लेकिन कामयाब नही हो पाएंगे फिर भी मीठा बोलने वालों से सतर्क रहें। अधिकारी वर्ग से नोकझोंक होगी जिससे कागजी कार्य अधूरे रह सकते है। स्वास्थ्य मध्यान बाद नरम रहेगा भागदौड़ के कारण थकान बनेगी। 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰

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लौकी के घरेलू उपचार 🌹🌹🌿🌹🌹🌿🌹🌹 सब्जी के रुप में खाए जाने वाली लौकी हमारे शरीर के कई रोगों को दूर करने में सहायक होती है। यह बेल पर पैदा होती है और कुछ ही समय में काफी बड़ी हो जाती है। वास्तव में यह एक औषधि है और इसका उपयोग हजारों रोगियों पर सलाद के रूप में अथवा रस निकालकर या सब्‍जी के रुप में एक लंबे समय से किया जाता रहा है। लौकी को कच्‍चा भी खाया जाता है, यह पेट साफ करने में भी बड़ा लाभदायक साबित होती है और शरीर को स्‍वस्‍य और शुद्ध भी बनाती है। लंबी तथा गोल दोनों प्रकार की लौकी वीर्य वर्धक , पित्‍त तथा कफनाशक और धातु को पुष्ट करने वाली होती है। आइए इसके औषधीय गुणों पर एक नज़र डालते हैं- 1. हैजा होने पर 25 एम.एल. लौकी के रस में आधा नींबू का रस मिलाकर धीरे-धीरे पिएं। इससे मूत्र बहुत आता है। 2.खांसी, टीबी, सीने में जलन आदि में भी लौकी बहुत उपयोगी होती है। 3.हृदय रोग में, विशेषकर भोजन के पश्चात एक कप लौकी के रस में थोडी सी काली मिर्च और पुदीना डालकर पीने से हृदय रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। 4.लौकी में श्रेष्‍ठ किस्म का पोटेशियम प्रचुर मात्रा में मिलता है, जिसकी वजह से यह गुर्दे के रोगों में बहुत उपयोगी है और इससे पेशाब खुलकर आता है। 5.लौकी श्‍लेषमा रहित आहार है। इसमें खनिज लवण अच्‍छी मात्रा में मिलते है। 6.लौकी के बीज का तेल कोलेस्‍ट्रॉल को कम करता है तथा हृदय को शक्‍ति देता है। यह रक्‍त की नाडि़यों को भी तंदुरस्त बनाता है। लौकी का उपयोग आंतों की कमजोरी, कब्‍ज, पीलिया, उच्‍च रक्‍तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, शरीर में जलन या मानसिक उत्‍तेजना आदि में बहुत उपयोगी है। 🌹🌹🌿🌹🌹🌿🌹🌹🌿🌹🌹🌿🌹🌹

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मन की शांति 🔸🔸🔹🔹 एक गरीब आदमी था। वो हर रोज अपने गुरु के आश्रम जाकर वहां साफ-सफाई करता और फिर अपने काम पर चला जाता था। अक्सर वो अपने गुरु से कहता कि आप मुझे आशीर्वाद दीजिए तो मेरे पास ढेर सारा धन-दौलत आ जाए। एक दिन गुरु ने पूछ ही लिया कि क्या तुम आश्रम में इसीलिए काम करने आते हो। उसने पूरी ईमानदारी से कहा कि हां, मेरा उद्देश्य तो यही है कि मेरे पास ढेर सारा धन आ जाए, इसीलिए तो आपके दरशन करने आता हूं। पटरी पर सामान लगाकर बेचता हूं। पता नहीं, मेरे सुख के दिन कब आएंगे। गुरु ने कहा कि तुम चिंता मत करो। जब तुम्हारे सामने अवसर आएगा तब ऊपर वाला तुम्हें आवाज थोड़ी लगाएगा। बस, चुपचाप तुम्हारे सामने अवसर खोलता जाएगा। युवक चला गया। समय ने पलटा खाया, वो अधिक धन कमाने लगा। इतना व्यस्त हो गया कि आश्रम में जाना ही छूट गया। कई वर्षों बाद वह एक दिन सुबह ही आश्रम पहुंचा और साफ-सफाई करने लगा। गुरु ने बड़े ही आश्चर्य से पूछा--क्या बात है, इतने बरसों बाद आए हो, सुना है बहुत बड़े सेठ बन गए हो। वो व्यक्ति बोला--बहुत धन कमाया। अच्छे घरों में बच्चों की शादियां की, पैसे की कोई कमी नहीं है पर दिल में चैन नहीं है। ऐसा लगता था रोज सेवा करने आता रहूं पर आ ना सका। गुरुजी, आपने मुझे सब कुछ दिया पर जिंदगी का चैन नहीं दिया। गुरु ने कहा कि तुमने वह मांगा ही कब था? जो तुमने मांगा वो तो तुम्हें मिल गया ना। फिर आज यहां क्या करने आए हो ? उसकी आंखों में आंसू भर आए, गुरु के चरणों में गिर पड़ा और बोला --अब कुछ मांगने के लिए सेवा नहीं करूंगा। बस दिल को शान्ति मिल जाए। गुरु ने कहा--पहले तय कर लो कि अब कुछ मागने के लिए आश्रम की सेवा नहीं करोगे, बस मन की शांति के लिए ही आओगे। गुरु ने समझाया कि चाहे मांगने से कुछ भी मिल जाए पर दिल का चैन कभी नहीं मिलता इसलिए सेवा के बदले कुछ मांगना नहीं है। वो व्यक्ति बड़ा ही उदास होकर गुरु को देखता रहा और बोला--मुझे कुछ नहीं चाहिए। आप बस, मुझे सेवा करने दीजिए। सच में, मन की शांति सबसे अनमोल है।। 🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸

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संक्षिप्त भविष्य पुराण 〰️〰️🌼🌼🌼〰️〰️ ॐ श्री परमात्मने नमः श्री गणेशाय नमः ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ★ब्राह्म पर्व★ (एक सौ सात वां दिन) श्रीसूर्य नारायण के आयुध-व्योम का लक्षण और महात्म्य...(भाग 1) 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ गतांक से आगे... सुमन्तु मुनि ने कहा-राजन्! अब भगवान् सूर्य के मुख्य आयुध व्योम का लक्षण कहता हूँ, उसे आप सुनें। भगवान् सूर्य का आयुध व्योम सर्वदेवमय है, वह चार शृङ्गों से युक्त है तथा सुवर्ण का बना हुआ है। जिस प्रकार वरुण का पाश, ब्रह्मा का हुंकार, विष्णु का चक्र, त्र्यम्बक का त्रिशूल तथा इन्द्र का आयुध वज्र है, उसी प्रकार भगवान् सूर्य का आयुध व्योम है। उस व्योम में ग्यारह रुद्र, बारह आदित्य, दस विश्वेदेव , आठ वसुगण तथा दो अश्विनी कुमार ये सभी अपनी-अपनी कलाओं के साथ स्थित हैं। हर, शर्व, त्र्यम्बक, वृषा कपि, शम्भु, कपर्दी रैवत, अपराजित, ईश्वर, अहिर्बुध्न्य और भवन (भव)- ये ग्यारह रुद्र हैं। ध्रुव, धर, सोम अनिल, अनल, अप्, प्रत्यूष और प्रभास-ये आठ वसु हैं। नासत्य और दस्र—ये दो अश्विनीकुमार हैं। क्रतु, दक्ष, वसु, सत्य, काल, काम, धृति, कुरु, शंकुमात्र तथा वामन-ये दस विश्वेदेव हैं। इसी प्रकार साध्य, तुषित, मरुत् आदि देवता हैं।। उनमें आदित्य और मरुत कश्यप के पुत्र हैं। विश्वेदेव, कम और साध्य-ये धर्म के पुत्र हैं। धर्म का तीसरा पुत्र वसु (सोम) है और ब्रह्माजी का पुत्र धर्म है। स्वायम्भुव, स्वारोचिष, उत्तम, तामस, रैवत और चाक्षुष-ये छः मनु तो व्यतीत हो गये हैं, वर्तमान में सप्तम वैवस्वत मनु हैं। अर्कसावर्णि, ब्रह्मसावर्णि, रुद्रसावर्णि, धर्मसावर्णि, दक्षसावर्णि, रौच्य और भौत्य-ये सब मनु आगे होंगे। इन चौदहों मन्वन्तरों में इन्द्रों के नाम इस प्रकार हैं- विष्णुभुक्, विद्युति, विभु, प्रभु, शिखी तथा मनोजव-ये छ: इन्द्र व्यतीत हो गये हैं। ओजस्वी नामक इन्द्र वर्तमान में हैं। बलि, अद्भुत, त्रिदिव, ससात्त्विक, कीर्ति, शतधामा तथा दिवस्पति-ये सात इन्द्र आगे होंगे। कश्यप, अत्रि, वसिष्ठ, भरद्वाज, गौतम, विश्वामित्र और जमदग्नि-ये सप्तर्षि हैं। प्रवह, आवह, उद्वह, संवह, विवह, निवह और परिवह-ये सात मरुत् हैं । (प्रत्येकमें सात-सात मरुद्गणोंका समूह है)। ये उनचास मरुत् आकाशबमें पृथक्-पृथक् मार्गबसे चलते हैं। सूर्याग्नि का नाम शुचि, वैद्युत अग्नि का नाम पावक और अरणि-मन्थनबसे उत्पन्न अग्निबका नाम पवमान है। ये तीन अग्नियाँ हैं। अग्नियों के पुत्र-पौत्र उनचास हैं और मरुत् । भी उनचास ही हैं। संवत्सर, परिवत्सर, इद्वत्सर (इडावत्सर) अनवत्सर और वत्सर-ये पाँच संवत्सर हैं-ये ब्रह्माजी के पुत्र हैं। सौम्य, बर्हिषद् और अग्निष्वात्त-ये तीन पितर हैं। सूर्य, सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु-ये नव ग्रह हैं। ये सदा जगत् का भाव-अभाव सूचित करते हैं । इनमें सूर्य और चन्द्र मण्डलग्रह, भौमादि पाँच ताराग्रह और राहु-केतु छायाग्रह कहलाते हैं। नक्षत्रोंबके अधिपति चन्द्रमा हैं और ग्रहों के राजा सूर्य हैं। सूर्य कश्यप के पुत्र हैं, सोम धर्म के, बुध चन्द्र के, गुरु और शुक्र प्रजापति भृगु के, शनि सूर्य के, राहु सिंहिकाबके और केतु ब्रह्माजी के पुत्र हैं। पृथ्वी को भूलोक कहते हैं। भूलोक के स्वामी अग्नि, भुवर्लोक के वायु और स्वर्लोकबके स्वामी सूर्य हैं। मरुद्गण भुवर्लोक में रहते हैं और रुद्र,अश्विनीकुमार, आदित्य, वसुगण तथा देवगण स्वर्ग र्लोक में निवास करते हैं। चौथा महर्लोक है, जिसमें प्रजापतियों सहित कल्पवासी रहते हैं। पाँचवें जनलोक में भूमिदान करनेबवाले तथा छठे तपोलोक में ऋभु, सनत्कुमार तथा वैराज आदि ऋषि रहते हैं। सातवें सत्यलोक में वे पुरुष रहते हैं, जो जन्म- मरण से मुक्ति पा जाते हैं । इतिहास-पुराण के वक्ता तथा श्रोता भी उस लोक को प्राप्त करते हैं। इसे ब्रह्मलोक भी कहा गया है, इसमें न किसी प्रकार का विघ्न है न किसी प्रकार की बाधा। देव, दानव, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस, नाग, भूत, और विद्याधर-ये आठ देवयोनियाँ हैं । इस प्रकार इस व्योमबमें सातों लोक स्थित हैं। मरुत्, पितर, अग्नि, ग्रह और आठों देवयोनियाँ तथा मूर्त, अमूर्त सब देवता इसी व्योम में स्थित हैं। इसलिये जो भक्ति और श्रद्धा से व्योम का पूजन करता है, उसे सब देवताओं के पूजनबका फल प्राप्त हो जाता है तथा वह सूर्यलोक को जाता है। अत: अपने कल्याण के लिये सदा व्योम का पूजन करना चाहिये। क्रमश... शेष अगले अंक में 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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