हरिहर कैलाश ज्ञानपीठ

Tehri Garhwal, Uttarakhand, India

" सम्पूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता "
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अध्याय दो : सांख्ययोग (गीता का सार)
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गतांक से आगे

देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा।
तथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति ।।13।।

जिस प्रकार शरीरधारी आत्मा (वर्तमान...

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श्रीरामचरितमानस तृतीयसोपान
अरण्यकाण्ड 13 वां दिन
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कबन्ध उद्धार
चौपाई :

कोमल चित अति दीनदयाला।
कारन बिनु रघुनाथ कृपाला॥
गीध अधम खग आमिष भोगी।
गति दीन्ही जो जाचत जोगी॥

अर्थ:- श्री रघुनाथजी अत्यंत कोमल चित्त वाले...

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