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🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞 ⛅ *दिनांक 05 फरवरी 2019* ⛅ *दिन - मंगलवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2075* ⛅ *शक संवत -1940* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - शिशिर* ⛅ *मास - माघ* ⛅ *पक्ष - शुक्ल* ⛅ *तिथि - प्रतिपदा 06 फरवरी प्रातः 05:15 तक तत्पश्चात द्वितीया* ⛅ *नक्षत्र - धनिष्ठा पूर्ण रात्रि* ⛅ *योग - व्यतिपात सुबह 08:58 तक तत्पश्चात वरीयान्* ⛅ *राहुकाल - शाम 03:18 से शाम 04:39 तक* ⛅ *सूर्योदय - 07:15* ⛅ *सूर्यास्त - 18:29* ⛅ *दिशाशूल - उत्तर दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - गुप्त नवरात्रि प्रारम्भ* 💥 *विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड(कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *गुप्त नवरात्रि* 🌷 🙏🏻 *हिंदू धर्म के अनुसार, एक वर्ष में चार नवरात्रि होती है, लेकिन आमजन केवल दो नवरात्रि (चैत्र व शारदीय नवरात्रि) के बारे में ही जानते हैं। आषाढ़ तथा माघ मास की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस बार माघ मास की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ माघ शुक्ल प्रतिपदा (05 फरवरी, मंगलवार) से हो रहा है, जिसका समापन 14 फरवरी, गुरुवार को होगा। इस नवरात्रि में भी हर तिथि पर माता के एक विशेष रूप की पूजा की जाती है। जानिए गुप्त नवरात्रि में किस दिन देवी के किस रूप की पूजा करें-* 🙏🏻 *पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा* *गुप्त नवरात्रि के पहले दिन (05 फरवरी, मंगलवार) को मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, देवी का यह नाम हिमालय के यहां जन्म होने से पड़ा। हिमालय हमारी शक्ति, दृढ़ता, आधार व स्थिरता का प्रतीक है। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिन योगीजन अपनी शक्ति मूलाधार में स्थित करते हैं व योग साधना करते हैं।* 🙏🏻 *हमारे जीवन प्रबंधन में दृढ़ता, स्थिरता व आधार का महत्व सर्वप्रथम है। अत: इस दिन हमें अपने स्थायित्व व शक्तिमान होने के लिए माता शैलपुत्री से प्रार्थना करनी चाहिए। शैलपुत्री का आराधना करने से जीवन में स्थिरता आती है। हिमालय की पुत्री होने से यह देवी प्रकृति स्वरूपा भी है। स्त्रियों के लिए उनकी पूजा करना ही श्रेष्ठ और मंगलकारी है।* 👉🏻 शेष कल........ 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *गुप्त नवरात्रि* 🌷 👉 *माघ मास, शुक्ल पक्ष की प्रथम नौ तिथियाँ (05 फरवरी से 14 फरवरी, 2019 तक) माघ मास की गुप्त नवरात्रियाँ है l* 🙏 *एक वर्ष में कुल चार नवरात्रियाँ आती हैं , जिनमे से सामान्यतः दो नवरात्रियो के बारे में आपको पता है ,पर शेष दो गुप्त नवरात्रियाँ हैं l* 🌷 *शत्रु को मित्र बनाने के लिए* 🌷 🙏 *नवरात्रि में शुभ संकल्पों को पोषित करने, रक्षित करने, मनोवांछित सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए और शत्रुओं को मित्र बनाने वाले मंत्र की सिद्धि का योग होता है।* 🙏 *नवरात्रि में स्नानादि से निवृत्त हो तिलक लगाके एवं दीपक जलाकर यदि कोई बीज मंत्र 'हूं' (Hum) अथवा 'अं रां अं' (Am Raam Am) मंत्र की इक्कीस माला जप करे एवं 'श्री गुरुगीता' का पाठ करे तो शत्रु भी उसके मित्र बन जायेंगे l* 👩 *माताओं बहनों के लिए विशेष कष्ट निवारण हेतु प्रयोग 1* 👵 *जिन माताओं बहनों को दुःख और कष्ट ज्यादा सताते हैं, वे नवरात्रि के प्रथम दिन (देवी-स्थापना के दिन) दिया जलायें और कुम-कुम से अशोक वृक्ष की पूजा करें ,पूजा करते समय निम्न मंत्र बोलें :* 🌷 *“अशोक शोक शमनो भव सर्वत्र नः कुले "* 🙏 *" ASHOK SHOK SHAMNO BHAV SARVATRA NAH KULE "* 🙏 *भविष्योत्तर पुराण के अनुसार नवरात्रि के प्रथम दिन इस तरह पूजा करने से माताओ बहनों के कष्टों का जल्दी निवारण होता है l* 👩 *माताओं बहनों के लिए विशेष कष्ट निवारण हेतु प्रयोग 2* 🙏 *माघ मास शुक्ल पक्ष तृतीया (08 फरवरी 2019) के दिन में सिर्फ बिना नमक मिर्च का भोजन करें l (जैसे दूध, रोटी या खीर खा सकते हैं, नमक मिर्च का भोजन ही करें l)* 🌷 • *" ॐ ह्रीं गौरये नमः "* 🌷 🙏 *"Om Hreem Goryaye Namah"* 🙏 *मंत्र का जप करते हुए उत्तर दिशा की ओर मुख करके स्वयं को कुमकुम का तिलक करें l* 🐄 *गाय को चन्दन का तिलक करके गुड़ ओर रोटी खिलाएं l* 💶 *श्रेष्ठ अर्थ (धन) की प्राप्ति हेतु* 💶 💥 *प्रयोग : नवरात्रि में देवी के एक विशेष मंत्र का जप करने से श्रेष्ठ अर्थ कि प्राप्ति होती है* 🙏 *मंत्र ध्यान से पढ़ें* 🙏 🌷 *"ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमल-वासिन्ये स्वाह् "* 🌷 *" OM SHREEM HREEM KLEEM AIM KAMALVAASINYE SWAHA "* 👦 *विद्यार्थियों के लिए* 👦 🙏 *प्रथम नवरात्रि के दिन विद्यार्थी अपनी पुस्तकों को ईशान कोण में रख कर पूजन करें और नवरात्रि के तीसरे तीन दिन विद्यार्थी सारस्वत्य मंत्र का जप करें।* 🙏 *इससे उन्हें विद्या प्राप्ति में अपार सफलता मिलती है l* 🙏 *बुद्धि व ज्ञान का विकास करना हो तो सूर्यदेवता का भ्रूमध्य में ध्यान करें । जिनको गुरुमंत्र मिला है वे गुरुमंत्र का, गुरुदेव का, सूर्यनारायण का ध्यान करें।* 🙏 *अतः इस सरल मंत्र की एक-दो माला नवरात्रि में अवश्य करें और लाभ लें l* 🙏 *–(श्री वेद-व्यास जी , देवी भागवत)* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🙏🏻🌷💐🌸🌼🌹🍀🌺💐🙏🏻

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🌷 *माता सती का क्रोध* 🌷 🕉श्री परमात्मने नमः। 🌺देवी पुराण के अनुसार, भगवान शिव का प्रथम विवाह दक्ष प्रजापति की पुत्री सती से हुआ था। एक बार सती के पिता दक्ष प्रजापति ने बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया। उस यज्ञ में दक्ष प्रजापति ने अपनी पुत्री सती और दामाद शिव को निमंत्रित नहीं किया। यज्ञ के बारे में जान कर सती बिना निमंत्रण ही पिता के यज्ञ में जाने की जिद करने लगी। तब भगवान महादेव ने सती से कहा कि- किसी भी शुभ कार्य में बिना बुलाए जाना और मृत्यु- ये दोनों ही एक समान है। मेरा अपमान करने की इच्छा से ही तुम्हारे पिता ये महायज्ञ कर रहे हैं। यदि ससुराल में अपमान होता है तो वहां जाना मृत्यु से भी बढ़कर होता है। ये बात सुनकर सती बोलीं- महादेव। आप वहां जाएं या नहीं, लेकिन मैं वहां अवश्य जाऊंगी। देवी सती के ऐसा कहने पर शिवजी ने कहा- मेरे रोकने पर भी तुम मेरी बात नहीं सुन रही हो। दुर्बुद्धि व्यक्ति स्वयं गलत कार्य कर दूसरे पर दोष लगाता है। अब मैंने जान लिया है कि तुम मेरे कहने में नहीं रह गई हो। अत: अपनी रूचि के अनुसार तुम कुछ भी करो, मेरी आज्ञा की प्रतीक्षा क्यों कर रही हो। जब महादेव ने यह बात कही तो सती क्षणभर के लिए सोचने लगीं कि इन शंकर ने पहले तो मुझे पत्नी रूप में प्राप्त करने के लिए प्रार्थना की थी और अब ये मेरा अपमान कर रहे हैं। इसलिए अब मैं इन्हें अपना प्रभाव दिखाती हूं। यह सोचकर देवी सती ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया। क्रोध से फड़कते हुए ओठों वाली तथा कालाग्नि के समान नेत्रों वाली उन भगवती सती को देखकर महादेव ने अपने नेत्र बंद कर लिए। भयानक दाढ़ों से युक्त मुख वाली भगवती ने अचानक उस समय अट्टहास किया, जिसे सुनकर महादेव भयभीत हो गए। बड़ी कठिनाई से आंखों को खोलकर उन्होंने भगवती के इस भयानक रूप को देखा। देवी भगवती के इस भयंकर रूप को देखकर भगवान शिव भय के मारे इधर-उधर भागने लगे। शिव को दौड़ते हुए देखकर देवी सती ने कहा-डरो मत-डरो मत। इस शब्द को सुनकर शिव अत्यधिक डर के मारे वहां एक क्षण भी नहीं रुके और बहुत तेजी से भागने लगे। इस प्रकार अपने स्वामी को भयभीत देख देवी भगवती अपने दस श्रेष्ठ रूप धारण कर सभी दिशाओं में स्थित हो गईं। महादेव जिस ओर भी भागते उस दिशा में वे भयंकर रूप वाली भगवती को ही देखते थे। तब भगवान शिव ने अपनी आंखें बंद कर ली और वहीं ठहर गए। जब भगवान शिव ने अपनी आंखें खोली तो उन्होंने अपने सामने भगवती काली को देखा। तब उन्होंने कहा- श्याम वर्ण वाली आप कौन हैं और मेरी प्राणप्रिया सती कहां चली गईं? तब देवी काली बोलीं- क्या अपने सामने स्थित मुझ सती को आप नहीं देख रहे हैं। ये जो अलग-अलग दिशाओं में स्थित हैं ये मेरे ही रूप हैं। इनके नाम काली, तारा, लोकेशी, कमला, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, षोडशी, त्रिपुरसुंदरी, बगलामुखी, धूमावती और मातंगी हैं। देवी सती की बात सुनकर शिवजी बोले- मैं आपको पूर्णा तथा पराप्रकृति के रूप में जान गया हूं। अत: अज्ञानवश आपको न जानते हुए मैंने जो कुछ कहा है, उसे क्षमा करें। ऐसा कहने पर देवी सती का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने महादेव से कहा कि- यदि मेरे पिता दक्ष के यज्ञ में आपका अपमान हुआ तो मैं उस यज्ञ को पूर्ण नहीं होने दूंगी। ऐसा कहकर देवी सती अपने पिता के यज्ञ में चली गईं। 🌺 *जय भवानी-शंकर* 🌺 🌹 *हर हर महादेव* 🌹 ☘☘☘☘🍀🍀🍀🍀

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