🔔🎪🍃🎎🌹🎎🍃🎪🔔 🎪जय श्रीकृष्ण🎪राधा सखी👸 🔔🎪🍃🎎🌹🎎🍃🎪🔔 🎪कृष्ण कब प्रकट होते हैं?🎪 आनन्द स्वरूप में भगवान श्री कृष्ण हमेशा नन्द और यशोदा के गोकुल में ही प्रकट होते हैं। ❣️❣️ यशोदा = हमेशा दूसरों को यश प्रदान करने वाली "बुद्धि" नन्द = दूसरों की निन्दा न करने वाला "मन" गोकुल = इन्द्रियों का समूह "शरीर" कृष्णा = भगवान का आनन्द स्वरूप ❣️❣️ जब व्यक्ति की बुद्धि सदैव दूसरों को यश देने वाली हो जाती है तो यह बुद्धि "यशोदा" बन जाती है, और व्यक्ति का मन दूसरों की निन्दा से रहित हो जाता है तो यह मन "नन्द" बन जाता है, तब इन्द्रियों के समूह "गोकुल" रूपी शरीर में आनन्द रूप में भगवान श्रीकृष्ण प्रकट हो जाते हैं। तब हम गाने लगते हैं ------- ❣️❣️ नन्द के आनन्द भयो, जय कन्हैया लाल की। यशोदा के लाला भयो, जय कन्हैया लाल की। गोकुल में आनन्द भयो, जय कन्हैया लाल की। ❣️❣️ क्या हमारे गोकुल में कृष्ण प्रकट हुये? यदि नहीं तो हमें आज से ही बुद्धि को यशोदा और मन को नन्द बनाने का प्रयत्न आरम्भ कर देना चाहिये। !! जय श्री कृष्ण !! 🎪जय श्रीकृष्ण🎪राधा सखी👸 🔔🎪🍃🎎🌹🎎🍃🎪🔔

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प्रेम सत्संग सुधा माला श्री कृष्ण जी इतने सुंदर है कि कहीं एक बार वह कृपा करके स्वपन में भी किसी को एक अपनी हल्की सी झांकी दिखा दें तो अंनत जन्मों की आसक्ति उसी क्षण मिटकर वह उस रूप के पीछे पागल हो जाय, पर वह किसी के वश में तो है नहीं ? श्री कृष्ण कितने स्वतंत्र है, कालियानाग के फण के उपर तो नाचते हैं और उनके चरणों के दर्शन के लिए बड़े-बड़े योगी बेचारे अनंत जन्मों की से बाट देखते हैं ! पर वह सामने नहीं आते ! वे श्री कृष्ण बड़े मौजी है ! एक अनुभवी भक्त कहते हैं.... श्री कृष्ण तुम ग्वालों के आँगन की कीचड़ लोटते हो पर विप्रवरों के यज्ञ में जाते हुए लजाते हो, गौ बचछड़ों की हुंकार का उतर देते हो पर सतपुरूषों की सैकड़ों स्तुतियां सुनकर भी मौन धारण किए रहते हो, गोकुल की पुंशचलियों की दासता करते हो, पर जितेन्द्रिय पुरूषों के चाहने पर भी उनका नहीं बनते ! इससे यह पता चल गया है कि तुम्हारे चरण पंकज युगल केवल प्रेम से ही प्राप्त होते सकते हैं! तात्पर्य यह है कि परम असीम सुंदर होकर भी वे परम स्वतंत्र है! उनकी हल्की सी झाँकी भी वही कर सकता है, जिसे वह कराना चाहते हैं 🙏

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हरत सकल संताप जनम को मिटल तलपो यमकाल की हा हा हा मिटल तलपो यमकाल की हा हा हा मिटल तलपो यमकाल की गोघृत रचित कर्पूर की बाती नन्दोरानी सजयति ऐ गोघृत रचित, हरि भजो नन्दोरानी सजयति मंगल राधे मदन गोपाल, मेरी मंगल राधे मदन गोपाल मेरी मंगल लागे मदन गोपाल, गोपाल जी मंगल लागे मदन गोपाल मेरी मंगल लागे नन्दोरानी सजयति गोघृत रचित कर्पूर की बाती, झलकत कांचन थाल की हा झलकत कांचन थाल की चन्द्र कोटि कोटि भानू कोटि छवि चन्द्र कोटि कोटि भानू कोटि छवि मुख शोभा नन्दलाल की हा हा हा मुख शोभा नन्दलाल की हा हा हा मुख शोभा नन्दलाल की चरण कमल पर नूपुर बाजे धिकताम धिकताम धिकताम बाजे हे चरण कमल हरि भजो धिकताम धिकताम धिकताम बाजे थांका चरण पायल मदन गोपाल देखो थांका चरण पायल मदन गोपाल देखो थांका सोनार पायल मदन गोपाल देखो थांका चरण पाजेब धिकताम धिकताम धिकताम बाजे चरण कमल पर नूपुर बाजे गले झूले बैजन्ती माल की हा गले झूले बैजन्ती माल की मयूर मुकुट पीताम्बर सोहे बाजत वेणु रसाल की हा हा हा बाजत वेणु रसाल की हा हा हा बाजत वेणु रसाल की सुन्दर लोल कपोलन किया छवि झलकत धिकताम छवि हे सुन्दर लोल हरि भजो झलकत धिकताम छवि मेरी मदन गोपाल लाल जी का शोभा रे मेरी मदन गोपाल राधे जी रा शोभा रे मेरी मदन गोपाल लाल जी का शोभा रे मेरी मदन गोपाल राधे जी रा शोभा रे मेरी मदन गोपाल राधे झलकत धिकताम छवि सुन्दर लोल कपोलम् किया छवि निरखत मदन गोपाल की हा निरखत मदन गोपाल की सुर नर मुनि गण हेरतहिं आरती सुर नर मुनि गण हेरतहिं आरती भगत वत्सलो प्रतिपाल की हा हा हा भगत वत्सलो प्रतिपाल की हा हा हा भगत वत्सलो प्रतिपाल की बाजे घंटा ताल मृदंग झंझोरे बाजे नन्दो राजमहल में ऐ बाजे घंटा ताल हरि भजो बाजे नन्दो राजमहल में जय राधागोविन्द हरि बोलो भजो रे जय राधागोविन्द हरि भजो भजो रे जय राधागोविन्द हरि बोलो भजो रे जय राधागोविन्द हरि भजो भजो रे जय राधागोविन्द हरि बाजे नन्दो राजमहल में बाजे घंटा ताल मृदंग झंझोरे आंजली कुसुम गुलाल की हा आंजली कुसुम गुलाल की हुँ हुँ बोलि बोलि रघुनाथदास गोस्वामी मोहन गोकुल लाल की हा हा हा मोहन गोकुल लाल की हा हा हा मोहन गोकुल लाल की मदनगोपाल जय जय यशोदा रो लाल हे यशोदा रो लाल जय श्री नन्द रो दुलाल हे श्री नन्द रो दुलाल जय जय गिरधारी लाल हे राधागोविन्दा गोपाल हे राधागोविन्दा गोपाल हे गोविन्दा गोपाल जय जय राधारमण लाल हे राधारमण लाल जय जय राधाविनोदी लाल हे राधादीनदयाल जय जय राधाकान्तव लाल हे राधाकान्तव लाल जय जय शची रो दुलाल हे भजो गौरो गोपाल भजो गौरो गोपाल हे गौरो गोपाल जय जय निताई दयाल हे निताई दयाल सीता अद्वैतो दयाल हे सीता अद्वैतो दयाल जय जय गौर भक्तवृन्द लाल हे भजो भज गोविन्दा लाल भजो भज गोविन्दा लाल हे भजो भज गोविन्दा लाल जय जय श्री गुरू दयाल हे श्री गुरू दयाल गुरू परम दयाल हे गुरू परम दयाल हे गुरू परम दयाल हे गुरू परम दयाल हे गुरू परम दयाल हे आरती करत राधागोविन्द गोपाल की

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Good luck with your good wishes

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*अभिलाषामृत 61*

शक्ति के अभाव में व्यक्ति कोई भी कार्य कर ही नहीं सकता।
शक्ति ही व्यक्ति को कार्य-व्यापार सम्पन्न करने की क्षमता प्रदान करती है। अवश्य ही शक्ति शक्तिमान के व्यक्तित्व में व्याप्त रहती है। शक्तिमान के अस्तित्व का आधार शक्ति है।

अ...

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श्री राधा रानी जी के बरसाना की 'सुंदर
कथा'
सांकरी गली एक ऐसी गली है जिससे एक - एक
गोपी ही निकल सकती है और उस समय उनसे
श्याम सुंदर दान लेते हैं | सांकरी खोर पर
सामूहिक दान होता है | श्याम सुन्दर के साथ
ग्वाल बाल भी आते हैं | कभी तो वे दही लूटते हैं...

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जय श्री राधे कृष्णा जी.....🙏🙏
🌸💠🌸💠🌸💠🌸
श्याम प्यारे मेरे घर आजाना
मेरे मन की बगिया महकना

रोज़ सबेरे उठके मैं तुझको स्नान कराऊँ
केशर तिलक लगाके फूलों से तुझे सजाऊँ
फिर पहन केसरिया बागा तुम मुरली मधुर बजना
अपने मुरली की धुन से मेरा मन मं...

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