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🎎🌲🌼शुभ सावन माह🌼🌲🎎 🚩🔱🌹ॐ नमः शिवाय🌹🔱🚩 🚩🐚💐ॐ श्री गणेशाय नमः💐🐚🚩 🌼🌲🌸शुभ सोमवार🌸🌲🌼 🙏🎡🌜शुभरात्रि🌜🎡🙏 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲 🔱प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं जगन्नाथनाथं सदानन्दभाजम । 🔱भवद्भव्यभूतेश्वरं भूतनाथं शिवं शङ्करं शंभुमीशानमीडे ॥१॥ 🚩🔱🌹जय काशी विश्वनाथ जी🌹🔱🚩 🚩शिव शब्द शिव अर्थ शिवहि परमार्थ है। शिव कर्म शिव भाग्य शिवहि पुरूषार्थ है।। 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 👏 आप और आपके पूरे परिवार को 🌹 ⛺पवित्र सावन माह के अंतिम व चौथे सोमवार🌸 🙏की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🎭आप सभी पर देवों के देव महादेव बाबा काशी विश्वनाथ जी की कृपादृष्टि सदा बनी रहे और सभी मनोकामना पूर्ण हो🙏 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱 👏आपका सोमवार की रात्रि अतिसुन्दर शुभ शिवमय शांतिमय चिंतामुक्त और मंगलमय व्यतीत हो🙏 🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵 🔱🌹🌿हर हर महादेव🌿🌹🔱 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱

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🎎🌲🌹शुभ सावन माह🌹🌲🎎 🌳🍑🐍शुभ नागपंचमी🐍🍑🌳 🔱🐍🌹ॐ नमः शिवाय🌹🐍🔱 🚩🌿💐ॐ विष्णुदेवाय नमः💐🌿🚩 🎭🌲💠शुभ सोमवार💠🌲🎭 🌷🍀🌻सुप्रभात🌻🍀🌷 🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴 🎎नाग पंचमी व्रत का माहात्म्य🎎 🐍🐍🐍🐍🐍🐍🐍🐍🐍🐍 🌹ईश्वर बोले – हे महामुने ! श्रावण मास में जो व्रत करने योग्य है वो अब मैं बताऊँगा, आप उसे ध्यान से सुनिए. चतुर्थी तिथि को एक बार भोजन करें और पंचमी को नक्त भोजन करें. स्वर्ण, चाँदी, काष्ठ अथवा मिटटी का पाँच फणों वाला सुन्दर नाग बनाकर पंचमी के दिन उस नाग की भक्तिपूर्वक पूजा करनी चाहिए. द्वार के दोनों ओर गोबर से बड़े-बड़े नाग बनाए और दधि, शुभ दुर्वांकुरों, कनेर-मालती-चमेली-चम्पा के फूलों, गंधों, अक्षतों, धूपों तथाह मनोहर दीपों से उनकी विधिवत पूजा करें. उसके बाद ब्राह्मणों को घृत, मोदक तथा खीर का भोजन कराएं. इसके बाद अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कम्बल, कर्कोटक, अश्व, आठवाँ धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालीय तथा तक्षक – इन सब नागकुल के अधिपतियों को तथा इनकी माता कद्रू को भी हल्दी और चन्दन से दीवार पर लिखकर फूलों आदि से इनकी पूजा करें. 🌷उसके बाद बुद्धिमान को चाहिए कि वामी में प्रत्यक्ष नागों का पूजन करें और उन्हें दूध पिलाएं. घृत तथा शर्करा मिश्रित पर्याप्त दुग्ध उन्हें अर्पित करें. उस दिन व्यक्ति लोहे के पात्र में पूड़ी आदि ना बनाए. नैवेद्य के लिए गोधूम का पायस भक्तिपूर्वक अर्पण करें. भुने हुए चने, धान का लावा तथा जौ सर्पों को अर्पित करना चाहिए और स्वयं भी उन्हें ग्रहण करना चाहिए, बच्चों को भी यही खिलाना चाहिए इससे उनके दाँत मजबूत होते हैं. सांप की बाम्बी के पास श्रृंगारयुक्त स्त्रियों को गायन तथा वादन करना चाहिए और इस दिन को उत्सव की तरह मनाना चाहिए. इस विधि से व्रत करने पर सर्प से कभी भी भय नहीं होता है. हे विप्र ! मैं लोकों के हित की कामना से आपसे कुछ और भी कहूँगा, हे महामुने ! आप उसे सुनिए. हे वत्स ! नाग के द्वारा डसा गया मनुष्य मरने के बाद अधोगति को प्राप्त होता है और अधोगति में पहुंचकर वह तामसी सर्प होता है. इसकी निवृत्ति के लिए पूर्वोक्त विधि से एकभुक्त आदि समस्त कृत्य करें और ब्राह्मणों से नाग निर्माण तथा पूजा आदि आदरपूर्वक कराएं. 🎎इस प्रकार बारह मासों में प्रत्येक मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को इस व्रत का अनुष्ठान करें और वर्ष के पूरा होने पर नागों के निमित्त ब्राह्मणों तथा सन्यासियों को भोजन कराएं. किसी पुराणज्ञाता ब्राह्मण को रत्नजटित सुवर्णमय नाग और सभी उपस्करों से युक्त तथा बछड़े सहित गौ प्रदान करें. दान के समय सर्वव्यापी, सर्वगामी, सब कुछ प्रदान करने वाले, अनंतनारायण का स्मरण करते हुए यह कहना चाहिए – हे गोविन्द ! मेरे कुल में अगर कोई व्यक्ति सर्प दंश से अधोगति को प्राप्त हुए हैं वे मेरे द्वारा किए गए व्रत तथा दान से मुक्त हो जाएं – ऐसा उच्चारण करके अक्षतयुक्त तथा श्वेतचन्दन मिश्रित जल वासुदेव के समक्ष भक्तिपूर्वक जल में छोड़ दें. 🌋हे मुनिसत्तम ! इस विधि से व्रत के करने पर उसके कुल में जो सभी लोग सर्प के काटने से भविष्य में मृत्यु को प्राप्त होगें या पूर्व में मर चुके हैं वे सब स्वर्गगति प्राप्त करेंगे. साथ ही हे कुलनन्दन ! इस विधि से व्रत करने वाला अपने सभी वंशजों का उद्धार करके अप्सराओं के द्वारा सेवित होता हुआ शिव-सान्निध्य प्राप्त करता है. जो मनुष्य वित्तशाठ्य से रहित होता है, वही इस व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त करता है. 🎭जो लोग शुक्ल पक्ष की सभी पंचमी तिथियों में नक्तव्रत करके भक्ति संपन्न होकर पुष्प आदि उपहारों से सौभाग्यशाली नागों का पूजन करते हैं, उनके घरों में मणियों की किरणों से विभूषित अंगोंवाले सर्प उन्हें अभय देने वाले होते हैं और उनके ऊपर प्रसन्न रहते हैं. जो ब्राह्मण गृहदान का प्रतिग्रह करते है, वे भी घोर यातना भोगकर अंत में सर्पयोनि को प्राप्त होते हैं. 🌹हे मुनिसत्तम ! जो कोई भी मनुष्य नागहत्या के कारण इस लोक में मृत संतानों वाले अथवा पुत्रहीन होते हैं और जो कोई मनुष्य स्त्रियों के प्रति कार्पण्य के कारण सर्प योनि में जाते हैं, कुछ लोग धरोहर रखकर उसे स्वयं ग्रहण कर लेते हैं अथवा मिथ्या भाषण के कारण सर्प होते हैं अथवा अन्य कारणों से भी जो मनुष्य सर्पयोनि में जाते हैं उन सभी के प्रायश्चित के लिए यह उत्तम उपाय कहा गया है. 🏵यदि कोई मनुष्य वित्तशाठ्य से रहित होकर नाग पंचमी का व्रत करता है तो उसके कल्याण के लिए सभी नागों के अधिपति शेषनाग तथा वासुकि हाथ जोड़कर प्रभु श्रीहरि से तथा सदाशिव से प्रार्थना करते हैं तब शेष और वासुकि की प्रार्थना से प्रसन्न हुए परमेश्वर शिव तथा विष्णु उस व्यक्ति के सभी मनोरथ पूर्ण कर देते हैं. वह नागलोक में अनेक प्रकार के विपुल सुखों का उपभोग करके बाद में उत्तम वैकुण्ठ अथवा कैलाश में जाकर शिव तथा विष्णु का गण बनकर परम सुख प्राप्त करता है. हे वत्स ! मैंने आपसे नागों के इस पंचमी व्रत का वर्णन कर दिया, इसके बाद अब आप अन्य कौन-सा व्रत सुनना चाहते हैं, उसे बताइए. 🔱🐍🌹ॐ नमः शिवाय🌹🐍🔱 🐉🐉🐉🐉🐉🐉🐉🐉🐉🐉🐉🐉🐉🐉🐉

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जय श्री महाकाली माता की जय श्री महाकाल जी जय श्री गुरुदेव जय श्री राम जय जय राम जय श्री हनुमान जी नमस्कार शुभ प्रभात 🌅 👣 वंदन 🚩 नमस्कार 🙏 मित्रों जय श्री राम 👏 🚩 🙏 🌅 शुभ प्रभात 🙏 शुभ शनिवार जय जय रघुवीर समर्थ नमस्कार 🙏 यदि ठीक सूर्योदय के समय हम स्नान करते हैं तो यह धर्म की नजरिए से बहुत शुभ होता है। शास्त्रों में सुबह जल्दी नहाने के कई चमत्कारी फायदे बताए गए हैं। नहाते समय यहां दी गई बातों का ध्यान रखेंगे तो सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त हो सकती है और कुंडली के दोष भी शांत हो सकते हैं। डेस्क। जो लोग प्रतिदिन नहाते हैं, उन्हें स्वास्थ्य और धर्म की दृष्टि से कई लाभ प्राप्त होते हैं। यदि ठीक सूर्योदय के समय हम स्नान करते हैं तो यह धर्म की नजरिए से बहुत शुभ होता है। शास्त्रों में सुबह जल्दी नहाने के कई चमत्कारी फायदे बताए गए हैं। नहाते समय यहां दी गई बातों का ध्यान रखेंगे तो सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त हो सकती है और कुंडली के दोष भी शांत हो सकते हैं। प्रतिदिन स्नान यानी नहाना सेहत की दृष्टि से अनिवार्य होता है। लेकिन प्राचीन धर्मग्रंथों में स्नान से जुड़ी पवित्र मान्यताएं हैं। एक सुनिश्चित समय निर्धारित है। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। पढ़ें विस्तार से.... सुबह जल्दी नहाने के फायदे...   शास्त्रों के अनुसार सुबह जल्दी जागना अनिवार्य बताया है। जल्दी जागकर सूर्योदय से पूर्व नहाने से त्वचा की चमक बढ़ती है और दिनभर के कामों में आलस्य का सामना नहीं करना पड़ता है। जबकि जो लोग देर से नहाते हैं, उनमें आलस्य अधिक रहता है, वे जल्दी थक जाते हैं और कम उम्र में ही त्वचा की चमक कम हो सकती है।   सुबह जल्दी जागकर नहाने के बाद प्रतिदिन सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए। सूर्य को जल चढ़ाने से मान-सम्मान प्राप्ति होती है, ऑफिस हो या घर आपके कार्यों को सराहना मिलती है।   नहाने से पहले तेल मालिश करें   नहाने से पहले शरीर की अच्छी तरह से तेल मालिश करना चाहिए। तेल मालिश से स्वास्थ्य और त्वचा, दोनों को ही लाभ प्राप्त होता है। इससे त्वचा की चमक बढ़ती है। -इस संबंध में यह ध्यान रखना चाहिए कि मालिश के आधे घंटे बाद शरीर को रगड़-रगड़ कर नहाना चाहिए। नहाने के बाद तेल पूरी तरह साफ हो जाना चाहिए। तेल मालिश से शरीर के रोम छिद्रों के द्वार साफ हो जाते हैं। रोम छिद्रों की गंदगी नहाने के बाद निकल जाती है। जिससे वातावरण से प्राप्त होने वाली ऊर्जा सीधे-सीधे शरीर का मिलने लगती है। नहाते समय करें मंत्रों का जप   शास्त्रों के अनुसार दिन के सभी आवश्यक कार्यों के लिए अलग-अलग मंत्र बताए गए हैं। नहाते समय भी हमें मंत्र जप करना चाहिए। स्नान करते समय किसी मंत्र का पाठ किया जा सकता है या कीर्तन या भजन या भगवान का नाम लिया जा सकता है। ऐसा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।   नहाते समय इस मंत्र का जप करना श्रेष्ठ रहता है...   मंत्र: गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।। नहाते समय सिर पर डाले पहले पानी   नहाते समय सबसे पहले सिर पर पानी डालना चाहिए इसके बाद पूरे शरीर पर। इसके पीछे भी वैज्ञानिक कारण है, इस प्रकार नहाने से हमारे सिर एवं शरीर के ऊपरी हिस्सों की गर्मी पैरों से बाहर निकल जाती है। इस प्रकार नहाने से पूरे शरीर को शीतलता प्राप्त होती है, जिससे मन शांत होता है, आलस्य और थकावट भी दूर हो जाती है। सुबह के स्नान को धर्मग्रंथों में चार उपनाम दिए है। मुनि स्नान: सुबह 4 से 5 के बीच किया जाता है।  देव स्नान: सुबह 5 से 6 के बीच किया जाता है। मानव स्नान: सुबह 6 से 8 के बीच किया जाता है। राक्षसी स्नान: सुबह 8 के बाद किया जाता है। ` मुनि स्नान सर्वोत्तम है। ` देव स्नान उत्तम है। ` मानव स्नान सामान्य है। ` राक्षसी स्नान धर्म में निषेध है। किसी भी मनुष्य को 8 के बाद स्नान नहीं करना चाहिए। जय श्री राम 👏 शुभ प्रभात 🙏 शुभ शनिवार शुभ दिवस नमस्कार 🙏 जय श्री महाकाली माता की जय श्री गणेश जी जय श्री महाकाल जी नमस्कार 🙏

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