श्री राधा रानी मंदिर, बरसाना

Bharatpur, Uttar Pradesh, India

नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कुष्माण्डा देवी के स्वरूप की ही उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन 'अदाहत' चक्र में अवस्थित होता है। अतः इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और अचंचल मन से कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा-उपासना के कार्य में लगना च...

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*अभिलाषामृत 60*

श्रीप्रिया-प्रियतम रास-विहार एवं रात्रि-भोजन के उपरांत शयन-कुञ्ज में विश्रामार्थ पधारते हैं। श्रीललिता जी श्रीप्रिया जी को कोमल शैय्या पर सुला देती हैं। वे प्रियतम से भी सो जाने के लिए अनुरोध करती हैं । श्रीप्रियतम आश्वासन देते है...

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माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है।
इस दिन साधक का मन 'मणिपूर' चक्र में प्रविष्ट होता है।
माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकि...

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नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने ह...

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*अभिलाषामृत 59*

सूर्यास्त में अभी पर्याप्त विलम्ब है। श्रीप्रिया-प्रियतम श्रीराधा-कुण्ड के तट पर खड़े हैं। समीप में सखियाँ-सहचरियां भी है। श्रीप्रिया-प्रियतम श्रीराधा-कुण्ड में स्नान करने वाले हैं। श्रीललिता जी ने श्रीप्रिया जी के गौरांग वपु से भा...

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देवी दुर्गा के नौ रूप होते हैं। दुर्गाजी पहले स्वरूप में 'शैलपुत्री' के नाम से जानी जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इ...

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