श्री राधा🌺🙌🌺 🌹श्रीराधाजी के प्रति जो श्रीकृष्ण का स्नेह(गाढ़ प्रेम) है मानो वह श्रीराधाजी का सुगन्धित उबटन है ✨*राधा प्रति कृष्ण स्नेह सुगन्धि उद्वर्तन(उबटन)।* ✨*ताते अति सुगन्धि देह उज्ज्वल वरण*।। 🌹 श्रीकृष्ण का श्रीराधारानी के प्रति जो प्रेम है, उसी से श्रीराधारानी का शरीर सुगन्धित और उज्ज्वल हो रहा है 🌺श्रीराधाजी प्रथम स्नान(प्रातः) करुणा की अमृत नदी में करती है ✨*कारुण्य अमृत धाराय स्नान प्रथम* 🌷दोपहर का स्नान नव यौवन रूप अमृत धारा में करती है ✨*तारुण्य अमृत धाराय स्नान मध्यम* 🌷और सायंकालीन स्नान वह मानो लावण्य की अमृत धारा में करती है ✨*लावण्य अमृत धाराय तदुपरि स्नान* 🌷तातपर्य यह है कि श्रीराधारानी करुणा,नव यौवन तथा लावण्य की मूल आश्रय है 🌷वे अपनी लज्जारूप रेशमी साड़ी को परिधान में धारण करती है,अर्थात 🌺वस्त्र की भांति मानो लज्जा से वे अपने समस्त अंगों को ढकती है ✨*निजलज्जा-श्याम-पट शाटी परिधान* ✨*कृष्ण-अनुराग द्वितीय अरुण वसन* 🌹श्रीकृष्ण के प्रति जो श्रीराधाजी का अनुराग है-वह मानो श्रीराधाजी का लाल उत्तरीय वस्त्र है ✨*प्रणय मान कंचुलिकाय वक्ष आच्छादन* 🌷प्रणय मान रूप कंचुलिका श्रीराधाजी पहनती हैं ✨*सौंदर्य कुमकुम सखी प्रणय चन्दन* 🌷सौंदर्य ही उनके शरीर का केसर है।साखियों का प्रणय मानो चन्दन है ✨*स्मित कांति कर्पूर तिने अंग विलेपन* 🌷मृदु मुस्कान ही कांतिपूर्ण कर्पूर है,इनका मानो श्रीराधाजी के अंगों पर लेप हो रहा है ✨*कृष्णेर उज्ज्वल रस मृगमद भर* ✨*शेई मृगमदे विचित्रित कलेवर* 🌹श्रीकृष्ण के श्रृंगार रस रूप कस्तूरी द्वारा उनका कलेवर विशेष रूपसे चित्रित है ✨*प्रच्छन्न-मान-वाम्य धम्मिल विन्यास* 🌷गुप्त रूपसे मान की जो वक्रता है,वह मानो उनकी वेणी( केशपाश ) है ✨*धीराधीर आत्मक गुण अंगे पटवास* 🌷धीराधीर गुण अर्थात अश्रु विमोचन पूर्वक प्रियतम के प्रति जो वक्रोक्ति है,वही मानो श्रीराधाजी के अंगों पर लगा गन्धचूर्ण है ✨*राग ताम्बूल रागे अधर उज्ज्वल* 🌷रागरूप ताम्बूल के लालवर्ण से श्रीराधाजी के अधर लाल हो रहे हैं ✨*प्रेम कुटिलता नेत्र युगले कज्जल* 🌷प्रेम की कुटिलता का वह नेत्रों में कज्जल धारण करती है ✨*सुद्दीप्त सात्विक भाव हर्ष आदि संचारी* ✨*एई सब भाव भूषण सब अंगे भरी* 🌷सुद्दीप्त सात्विक भाव,हर्षादि संचारी भाव-ये मानो उनके अंगों पर भूषण की तरह सुसज्जित है ✨*किलकिंचित आदि भाव विंशति भूषण* 🌷किलकिंचित आदि 20 भाव उनके अलंकार हैं ✨*गुण श्रेणी पुष्प माला सर्वांगे पूरित* 🌷माधुर्यादि गुण ही उनके गले मे पुष्पमाला सदृश हैं ✨*सौभाग्य तिलक चारु ललाटे उज्ज्वल* 🌷उनके माथे पर सौभाग्य रूप मनोहर तिलक शोभा दे रहा है ✨*प्रेम वैचित्य रत्न हृदये तरल* 🌷प्रेम वैचित्य ही उनके हार की मध्यमणि है (तरल=लॉकेट) श्री राधा🌹👣🙇‍♂

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. "फागुन आयो रे" हिन्दू पंचाग का आखिरी महीना होता है फाल्गुन, इसके बाद हिन्दू नववर्ष की शुरुआत होती है। हिन्दू पंचाग के अनुसार चैत्र पहला माह होता है और फाल्गुन आखिरी माह माना जाता है। इस माह में दो महत्वपूर्ण पर्व आते हैं जो हिन्दू धर्म में अपना खास महत्व रखते हैं। महाशिवरात्रि, इस दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है और होली, इस दिन होलिका दहन किया जाता है और अगली सुबह रंगों से होली खेली जाती है। फाल्गुन माह में ही चंद्र देव का जन्म माना जाता है, इस कारण से फाल्गुन में चंद्र देव का पूजन शुभ माना जाता है। इस माह में ऋतु में बड़ा परिवर्तन हो रहा होता, बसंत ऋतु के समय नए फूल आ रहे होते हैं जो प्रकृति को खूबसूरत बनाते हैं। (फाल्गुन माह के व्रत और त्यौहार) 1. जानकी जयन्ती:- (26.02.2019 मंगलवार) फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को माता सीता जयन्ती के रुप में मनाया जाता है। इस दिन माता सीता का जन्म मानकर उनकी पूजा आराधना की जाती है। 2. विजया एकादशी:- (02.03.2019 शनिवार) फाल्गुन के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन एकादशी के व्रत का महत्व होता है और भगवान विष्णु को आराध्य मानकर पूजा जाता है। इस दिन व्रत करने की महत्वता है। 3. महाशिवरात्रि:- (04.03.2019 सोमवार) फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान भोलेनाथ की आराधना की जाती है, इस दिन लोग व्रत करके शिव-पार्वती का ब्याह रचाते हैं। 4. फाल्गुनी अमावस्या:- (06.03.2019 बुधवार) इस दिन को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, इस दिन लोग अपने पूर्वजों के लिए दान-तर्पण करते हैं। इस अमावस्या को श्राद्ध पूजन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। 5. आमलकी एकादशी:- (17.03.2019 रविवार) फाल्गुन की शुक्ल एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस उपवास को करना शुभ माना जाता है। सुख-समृद्धि और मोक्ष की कामना हेतु इस दिन उपवास करने का महत्व है। 6. होली:- (20.03.2019 बुधवार) फाल्गुन की पूर्णिमा के दिन होली का पर्व मनाया जाता है और होलिका पूजन करके शाम के समय दहन किया जाता है। होली दहन के अगले दिन रंगों से होली खेली जाती है। इस पर्व का एक अपना धार्मिक महत्व माना जाता है। "जय जय श्री राधे" ********************************************

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🙌🏼 संतशिरोमणि, नामनिष्ठ, श्रीमीराबाई जी के सदगुरुदेव स्वामी श्री रविदास जी के प्राकट्य उत्सव पर विशेष : श्री रविदास जी का जन्म भगवान विश्वनाथ की पवित्र नगरी काशी में हुआ था। इनके बारे में कुछ विद्वानों का मत है कि यह पूर्वजन्म में ब्राह्मण के घर में पैदा हुए थे। किसी कारणवश गुरु रामानंदजी ने इन्हे श्राप दिया जिसके फलस्वरूप इन्हें चमार के घर जन्म मिला। चूंकि पूर्वजन्म में यह भगवान के परम भक्त थे इसलिए भगवान की कृपा से इन्हें अपने पूर्वजन्म का ज्ञान रहा। इन्होंने जन्म से ही माता का दूध नहीं पिया। बिना गुरुमंत्र के कुछ भी ग्रहण न करने का इन्होंने संकल्प लिखा था। इधर भगवान को अपने भक्त के संकल्प पर दया आ गई, नवजात शिशु यदि दुग्धपान भी न करेगा तो कैसे जीवित रहेगा ? उन्होंने उसी क्षण स्वामी रामानंद जी को स्वप्न में दर्शन दिए। आपने जिस ब्राह्मण को कठिन श्राप दिया था वह चमार कुल में जन्म ले चुका है। उसने जन्म से ही गुरुमंत्र के बिना दुग्धपान न करने का संकल्प किया है। अब आप उसके पास जाकर उसे गुरुमंत्र दें। रामानंद जी उनके घर पहुंचे और उन्होंने शिशु का नाम ‘रैदास’ रखा और उसके कान में गुरुमंत्र दिया। रैदास जी का संकल्प पूरा हुआ। एक बार महायोगी गोरखनाथ जी कबीरजी से मिलने गए। वहां कबीर जी की बेटी कमाली भी थी। वस्तुत: कमाली कबीर जी की बेटी नहीं थी।वह किसी और की बेटी थी और कबीरजी ने उसे जीवनदान दिया था तब से कमाली कबीरजी की बेटी की तरह रह रही थी। इसके बाद कबीर जी ने गोरखनाथ से संत रैदास के पास जाने को कहा। इस पर गोरखनाथ हिचकिचा गए। वे नाथ पंथ के सिद्ध और एक जूता बनाने वाले के पास जाएं। लेकिन कबीरजी की जिद के आगे गोरखनाथ की एक नहीं चली। कबीर, कमाली और गोरखनाथ तीनों संत रैदास के पास पहुंचे। गोरखनाथ और कबीर जी को देखते ही संत रैदास भाव-विह्वल हो गए। उनकी आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे। जिस समय तीनों पहुंचे, रैदास जूते सी रहे थे। तीनों को बैठने को कह कर रैदास दो गिलास पानी ले आए। एक उन्होंने कबीर जी को दिया और दूसरा गोरखनाथ जी को। कबीर जी ने तुरंत वह पानी पी लिया। लेकिन, गोरखनाथ जी ने पानी नहीं पिया। उन्होंने सोचा कि बिना हाथ धोए रैदास ने चमड़े वाले हाथ से ही उन्हें पानी दे दिया। इस कारण उन्होंने कहा कि रास्ते में वे पानी पीकर आए हैं। तब रैदास ने वह पानी कमाली को दे दिया। इस घटना को काफी दिन हो गए। गोरखनाथ जी अक्सर अदृश्य होकर आकाश मार्ग से विचरते थे। उनके पास इतनी सिद्धियां थीं कि उन्हें इस हालत में विचरते हुए देवता तक नहीं देख सकते थे। उड़ते हुए वे मुल्तान के पास पहुंचे तो उन्हें नीचे से आवाज सुनाई पड़ी...आदेश गुरुजी। गोरखनाथ जी को काफी आश्चर्य हुआ कि मैं अदृश्य होकर आसमान में विचर रहा हूं, ऐसा कौन है जो मुझे प्रणाम कर रहा है। उसने कैसे जाना कि मैं यहां हूं। उससे भी बढ़ कर आश्चर्य की बात यह है कि एक स्त्री ने मुझे पहचान लिया। गोरखनाथ जी नीचे आए। तब उस स्त्री ने कहा कि मैं तो रोज आपको प्रणाम करती थी लेकिन आप बहुत ऊंचाई पर होते थे। आज आप कम ऊंचाई पर थे तो आपको मेरी आवाज सुनाई दे गई। गोरखनाथ जी ने कहा कि मुझे देखने की शक्ति तो देवताओं के पास भी नहीं है, फिर तुम मुझे कैसे देख लेती हो। तब उस स्त्री ने गोरखनाथ जी से कहा कि आपने मुझे पहचाना नहीं। मैं कबीर की बेटी कमाली हूं। जब से मैंने संत रैदास के हाथ का पानी पिया है, तब से मुझे सारी अदृश्य चीजें दिखाई देती हैं। भूत प्रेत, जलचर, नभचर सब कुछ दिखाई देते हैं। यह सब रैदास जी के पानी का ही कमाल है। यह सुनकर गोरखनाथ जी तत्काल कबीर जी को लेकर रैदास जी के पास गए। उनकी समझ में आ चुका था कि क्यों इतना आग्रह कर कबीर जी उन्हें रैदास के पास लेकर गए थे। रैदास ने दोनों को बिठा कर सत्संग की बातें शुरू कर दी। गोरखनाथ जी सोच रहे थे कि आज रैदास पानी के लिए पूछ ही नहीं रहे हैं। यह सब भांप कर रैदास जी ने कहा, गोरखनाथ जी ! वह पानी तो मुल्तान गया। अब मैं चाह कर भी आपको वह पानी नहीं पिला सकता। उस पानी को पीकर कमाली तो अपने ससुराल मुल्तान चली गई। 🙌🏼 श्रीराधारमण दासी परिकर 🙌🏼

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श्री राधा🌺🙌🌺 ✨1 सखी ✨2 नित्य सखी ✨3 प्राण सखी ✨4 प्रिय सखी ✨5 प्रिय नरम सखी 🌷⏩ इन सभी का श्री राधा तथा श्री कृष्ण के प्रति अत्यधिक प्रेम है । ✨1 < 2 < 3 < 4 <5 🌹1)सखी---श्री राधा तथा श्री कृष्ण दोनों से प्रेम करती है ,परन्तु श्री कृष्ण के प्रति अधिक प्रेम । ✨*R < K* 🌹2) नित्य सखि-- श्री राधा तथा श्री कृष्ण से अधिक प्रेम करती है ,सखियो की तुलना में। परन्तु श्री राधा के प्रति अधिक प्रेम । ✨*R > K* 🌹3)प्राण सखी--- नित्य सखियो से अधिक प्रेम करती है श्री राधा और कृष्ण से, परन्तु श्री कृष्ण की तुलना में श्री राधा से प्रेम अधिक करती है। ✨*R > K* 🌹4) प्रिय सखी--श्री राधा तथा कृष्ण से प्राण सखियो की तुलना में अधिक प्रेम करती है ।इनका प्रेम श्री राधा और कृष्ण के लिए समान होता है । ✨*R=K* 🌹5) प्रिय नर्म सखी--श्री राधा तथा कृष्ण से प्रिय सखियो की तुलना में बहुत अधिक प्रेम करती है ।इनका प्रेम श्री राधा और कृष्ण के लिए समान होता है ।परंतु श्री राधा का पक्ष लेती है । ✨*R=k* श्री राधा🌹👣🙇‍♂

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श्री राधा🌺🙌🌺 🌹जितने साधक भक्त या सिद्ध भक्त हैं,जो अनुराग दशा को प्राप्त हैं,उनपर अनुराग की वृत्ति या क्रिया है ✨अर्थात उनपर अनुराग कुछ एक्शन दिखाता है 🌷अब श्री उज्ज्वल नीलमणि ग्रँथ में वर्णित *यावदाश्रय वृत्ति* को समझते हैं 🌹श्रील विश्वनाथ चकवर्ती पाद स्पष्ट करते हैं कि श्रील रूप गोस्वामी पाद ने श्री उज्ज्वल नीलमणि ग्रँथ में एक शब्द छिपाया है,कभी कभी संस्कृत में यह किया जाता है 🌷चकवर्ती पाद के अनुसार इसका विस्तार इस प्रकार है ✨ *यावद आश्रय तावद वृत्ति* ➖ *अर्थात जैसा आश्रय वैसी वृत्ति* 🌷अर्थात आश्रय जैसा है,जिस अवस्था मे उस समय है,उसी के अनुरूप उनमे अनुराग अपनी क्रिया करता है ✨【आश्रय याने गोपियाँ जो कृष्ण प्रेम की आश्रय हैं reservoir हैं।कृष्ण प्रेम विषय हैं】 🌹 पहला तो ये की भक्त की योग्यतानुसार उनमें अनुराग के उत्कर्ष की क्रिया प्रकाशित होती है ✨अर्थात भक्त की योग्यतानुसार अनुराग अपनी क्रिया प्रदर्शित है 🌷राधारानी सर्वोच्च प्रेमाश्रय हैं।जो क्रिया उनमे होती है,दूसरी किसी गोपी में नही हो सकती ✨ अर्थात जब गिरिधारी श्याम सुंदर श्री राधा रानी का विशुद्ध महाप्रेम का आश्रय लेते है 🙏तो उसे यावदा आश्रय कहते है🙏 श्री राधा🙇‍♂🌹👣

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