+9 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर

🌷🌳💐ॐ विष्णुदेवाय नमः💐🌳🌷 🚩🌿🌹ॐ नमः शिवाय🌹🌿🚩 🎎🌲🌺शुभ जया एकादशी🌺🌲🎎 🌋🌿🌸शुभ सोमवार🌸🌿🌋 🌻🐚🏵सुप्रभात🏵🐚🌻 👏आप सभी पर श्री हरि विष्णु जी और महादेव जी की आशीर्वाद हमेसा बनी रहे🚩 🙏आपका सोमवार का दिन शुभ और मंगलमय हो🙏 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 🎎सोमवार और एकादशी का योग 26 को🎎 🎭विष्णुजी के साथ ही शिवजी की पूजा भी करें🎭 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚 🌹एकादशी पर सूर्यास्त के बाद मंदिर में और तुलसी के पास जलाना चाहिए दीपक🌹 🌸सोमवार, 26 अगस्त को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे अजा या जया एकादशी कहा जाता है। एकादशी पर भगवान विष्णु के लिए व्रत-उपवास किए जाते हैं। 🏵सोमवार के स्वामी शिवजी हैं और इस दिन का कारक ग्रह चंद्र है। एकादशी और सोमवार का योग होने से विष्णुजी के साथ ही शिवजी और चंद्रदेव की भी पूजा करनी चाहिए। एकादशी पर व्रत-उपवास, पूजा-पाठ करने से सभी पाप नष्ट हो सकते हैं। 🎎इस दिन कौन-कौन से शुभ काम कर सकते हैं🎎 💐एकादशी पर सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य देव के दर्शन करें। तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। सूर्य को लाल फूल चढ़ाएं। 🌋इस दिन किसी मंदिर जाएं और ध्वज यानी झंडे का दान करें। शिवलिंग के पास दीपक जलाएं और तांबे के लोटो से जल चढ़ाएं, काले तिल चढ़ाएं। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। इस तिथि पर सूर्यास्त के बाद घर के मंदिर में और तुलसी के पास दीपक जलाएं। हनुमानजी के सामने बैठकर सीताराम-सीताराम मंत्र का जाप 108 बार करें। 🎎एकादशी की सुबह जल्दी उठें। स्नान के बाद तुलसी को जल चढ़ाएं। विष्णुजी और महालक्ष्मी की पूजा करें। पूजा की शुरुआत गणेशजी के ध्यान से करें। चंद्रदेव के लिए शिवलिंग पर चांदी के लोटे से दूध चढ़ाएं। ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जाप 108 बार करें। 🎭कैसे कर सकते हैं विष्णुजी की पूजा🎭 स्नान के बाद किसी मंदिर जाएं या घर के मंदिर में ही भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें। पूजा करें। व्रत करने वाले व्यक्ति को दिनभर अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए, अगर ये संभव न हो तो एक समय फलाहार कर सकते हैं। पूजा किसी ब्राह्मण से करवाएंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा। भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद चरणामृत ग्रहण करें। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। एकादशी व्रत के बाद द्वादशी तिथि पर सुबह स्नान के बाद पूजा करें और किसी ब्राह्मण को घर में बैठाकर भोजन कराएं। इसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण करें। 🚩🌲🌷ॐ विष्णुदेवाय नमः🌷🌲🚩 🚩🌿🌹ॐ नमः शिवाय🌿🌹🚩 🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚

+849 प्रतिक्रिया 203 कॉमेंट्स • 17 शेयर

+15 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 2 शेयर

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

🚩जब श्रीराम को हरा दिया भक्त हनुमान जी ने🚩 🌸🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌸 🎎पढ़ें कथा :- 🌸उत्तर रामायण के अनुसार अश्वमेघ यज्ञ पूर्ण होने के पश्चात भगवान श्रीराम ने बड़ी सभा का आयोजन कर सभी देवताओं, ऋषि-मुनियों, किन्नरों, यक्षों व राजाओं आदि को उसमें आमंत्रित किया। सभा में आए नारद मुनि के भड़काने पर एक राजन ने भरी सभा में ऋषि विश्वामित्र को छोड़कर सभी को प्रणाम किया। ऋषि विश्वामित्र गुस्से से भर उठे और उन्होंने भगवान श्रीराम से कहा कि अगर सूर्यास्त से पूर्व श्रीराम ने उस राजा को मृत्यु दंड नहीं दिया तो वो राम को श्राप दे देंगे। 🌹इस पर श्रीराम ने उस राजा को सूर्यास्त से पूर्व मारने का प्रण ले लिया। श्रीराम के प्रण की खबर पाते ही राजा भागा-भागा हनुमान जी की माता अंजनी की शरण में गया तथा बिना पूरी बात बताए उनसे प्राण रक्षा का वचन मांग लिया। तब माता अंजनी ने हनुमान जी को राजन की प्राण रक्षा का आदेश दिया। हनुमान जी ने श्रीराम की शपथ लेकर कहा कि कोई भी राजन का बाल भी बांका नहीं कर पाएगा परंतु जब राजन ने बताया कि भगवान श्रीराम ने ही उसका वध करने का प्रण किया है तो हनुमान जी धर्म संकट में पड़ गए कि राजन के प्राण कैसे बचाएं और माता का दिया वचन कैसे पूरा करें तथा भगवान श्रीराम को श्राप से कैसे बचाएं। 🏵धर्म संकट में फंसे हनुमानजी को एक योजना सूझी। हनुमानजी ने राजन से सरयू नदी के तट पर जाकर राम नाम जपने के लिए कहा। हनुमान जी खुद सूक्ष्म रूप में राजन के पीछे छिप गए। जब राजन को खोजते हुए श्रीराम सरयू तट पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि राजन राम-राम जप रहा है। प्रभु श्रीराम ने सोचा, "ये तो भक्त है, मैं भक्त के प्राण कैसे ले लूं"। 🌷श्री राम ने राज भवन लौटकर ऋषि विश्वामित्र से अपनी दुविधा कही। विश्वामित्र अपनी बात पर अडिग रहे और जिस पर श्रीराम को फिर से राजन के प्राण लेने हेतु सरयू तट पर लौटना पड़ा। अब श्रीराम के समक्ष भी धर्मसंकट खड़ा हो गया कि कैसे वो राम नाम जप रहे अपने ही भक्त का वध करें। राम सोच रहे थे कि हनुमानजी को उनके साथ होना चाहिए था परंतु हनुमानजी तो अपने ही आराध्य के विरुद्ध सूक्ष्म रूप से एक धर्मयुद्ध का संचालन कर रहे थे। हनुमानजी को यह ज्ञात था कि राम नाम जपते हु‌ए राजन को कोई भी नहीं मार सकता,खुद मर्यादा पुरुषोत्तम राम भी नहीं। 🎡श्रीराम ने सरयू तट से लौटकर राजन को मारने हेतु जब शक्ति बाण निकाला तब हनुमानजी के कहने पर राजन राम-राम जपने लगा। राम जानते थे राम-नाम जपने वाले पर शक्तिबाण असर नहीं करता। वो असहाय होकर राजभवन लौट गए। विश्वामित्र उन्हें लौटा देखकर श्राप देने को उतारू हो गए और राम को फिर सरयू तट पर जाना पड़ा। 🌋इस बार राजा हनुमान जी के इशारे पर जय जय सियाराम जय जय हनुमान गा रहा था। प्रभु श्री राम ने सोचा कि मेरे नाम के साथ-साथ ये राजन शक्ति और भक्ति की जय बोल रहा है। ऐसे में कोई अस्त्र-शस्त्र इसे मार नहीं सकता। इस संकट को देखकर श्रीराम मूर्छित हो गए। तब ऋषि व‌शिष्ठ ने ऋषि विश्वामित्र को सलाह दी कि राम को इस तरह संकट में न डालें। उन्होंने कहा कि श्रीराम चाह कर भी राम नाम जपने वाले को नहीं मार सकते क्योंकि जो बल राम के नाम में है और खुद राम में नहीं है। संकट बढ़ता देखकर ऋषि विश्वामित्र ने राम को संभाला और अपने वचन से मुक्त कर दिया। मामला संभलते देखकर राजा के पीछे छिपे हनुमान वापस अपने रूप में आ गए और श्रीराम के चरणों मे आ गिरे। 🚩 तब प्रभु श्रीराम ने कहा कि हनुमानजी ने इस प्रसंग से सिद्ध कर दिया है कि भक्ति की शक्ति सैदेव आराध्य की ताकत बनती है तथा सच्चा भक्त सदैव भगवान से भी बड़ा रहता है। 🎭इस प्रकार हनुमानजी ने राम नाम के सहारे श्री राम को भी हरा दिया।🍥 🚩🌿🌹जय श्री राम🌹🌿🚩 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

+290 प्रतिक्रिया 85 कॉमेंट्स • 64 शेयर

+224 प्रतिक्रिया 91 कॉमेंट्स • 50 शेयर