श्रावण के पहले सोमवार पर भगवान महाकालेश्‍वर ने मनमहेश के स्‍वरूप में नगर भ्रमण किया भगवान श्री मनमहेश पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने और भक्‍तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। पालकी जैसे ही श्री महाकालेश्‍वर मंदिर के मुख्‍य द्वार पर पहुंची सशस्‍त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में सवार श्री मनमहेश को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी गई। शिव की नगरी उज्‍जैन शिवमय हुई श्रावण के पहले सोमवार पर भगवान की सवारी के दौरान पूरी नगरी शिवमय हो गई। श्री महाकालेश्‍वर भगवान की सवारी में हजारों भक्‍त झांझ, मंजीरे, डमरू, ढोल आदि वाद्य बजाते हुए महाकाल की आराधना करते हुए पालकी के साथ चल रहे थे। श्री महाकालेश्‍वर की सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी होते हुए रामघाट पहुंची रामघाट पर श्री मनमहेश का मॉ क्षिप्रा के जल से अभिषेक पूजन किया गया। पूजन -अर्चन के बाद भगवान महाकाल की सवारी रामघाट से रामानुज कोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्‍यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची। जहॉ परंपरानुसार सिंधिया स्‍टेट की ओर से गोपाल मंदिर के पुजारी द्वारा पालकी में विराजित श्री मनमहेश का पूजन किया गया। इसके पश्‍चात सवारी गोपाल मंदिर से पटनी बाजार, गुदरी चौराहा होते हुए पुन: श्री महाकालेश्‍वर मंदिर पहुंची। श्री महाकालेश्‍वर भगवान की दूसरी सवारी २९ अगस्‍त सोमवार को निकाली जावेगी जिसमें पालकी में श्री चन्‍द्रमोलेश्‍वर व हाथी पर श्री मनमहेश विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे।

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