*श्रीसारस्वत पञ्चाङ्ग™----------®* 🐚🌺📜आज का पञ्चाङ्ग📜🌺🐚 🔅 आज का दिनाँक 19 जुलाई 2019 🔅 दिन - शुक्रवार 🔅 विक्रम संवत - 2076 🔅 शक संवत - 1941 🔅 अयन - दक्षिणायण 🔅 ऋतु - वर्षा 🔅 मास - श्रावण 🔅 पक्ष - कृष्णपक्ष 🔅 तिथि - द्वितीय 🔅 नक्षत्र - घनिष्ठा 🔅 योग - आयुष्मान 🔅 दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे 🔅 सूर्योदय - 05:56 मिनट 🔅 सूर्यास्त - 19:30 मिनट पर 🔅 चंद्रोदय - 21:25 मिनट +पर 🔅 चंद्रास्त - 07:48 मिनट पर 🔅 राहुकाल - 11:01 - 12:43 अशुभ 🔅 अभिजित -12:12 -13:00 शुभ 🔅 तिथिविशेष - श्रावण मास तृतीय दिवस , पंचक प्रारंभ ****************************************************************************** *🔱⚜ भाग्योदय के लिए क्या करें⚜🔱* *👉जानिए क्या है, महादेव की श्रीखंड यात्रा और क्या है इसका महत्व::-----------------------* *💥भारत वर्ष के सम्पूर्ण हिमालय को महादेव का स्थान माना जाता है, परंतु कुछ स्थान ऐसे भी है जहां पर भगवान शिव से जुड़े बहुत से तथ्य हमारे पुराणों मे आज भी निहित है । अमरनाथ यात्रा में जहां लोगों को करीब 14000 फीट की चढ़ाई करनी पड़ती है तो श्रीखंड महादेव के दर्शन के लिए 18570 फीट ऊंचाई पर चढ़ना होता है। यह स्थान हिमाचल के शिमला के आनी उपमंडल के निरमंड खंड में स्थित बर्फीली पहाड़ी की 18570 फीट की ऊंचाई पर श्रीखंड की चोटीपर स्थित है। 35 किलोमीटर की जोखिम भरी यात्रा के बाद ही यहां पहुंचते हैं। यहां पर स्थित शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 72 फिट है। श्रीखंड महादेव की यात्रा के मार्ग में निरमंड में सात मंदिर, जाओं में माता पार्वती का मंदिर, परशुराम मंदिर, दक्षिणेश्वर महादेव, हनुमान मंदिर अरसु, जोताकली, बकासुर वध, ढंक द्वार आदि कई पवित्र स्थान है। मान्यता अनुसार यहीं पर भगवान विष्णु ने शिवजी से वरदान प्राप्त कर भस्मासुर को नृत्य के लिए राजी किया था। नृत्य करते करते उसने अपना हाथ अपने ही सिर पर रख लिया और वह भस्म हो गया था। मान्यता है कि इसी कारण आज भी यहां की मिट्टी और पानी दूर से ही लाल दिखाई देते हैं।* *For Free Prediction Call Now:* *+919314147672* *??कोई समस्या है या कोई सवाल है तो दिए हुए ईमेल लिंक पे क्लिक कर आप अपनी समस्या और अपने सवाल भेज सकते है.!!* *You can contact us on whatsapp* http://wa.me/919314147672/?text=Hello *# I.k. bhardwaj* *#Astrology* *# vaastu salahkar* *# sri sarswat Jyotish* *👉नोट~~~~ आज आयुष्मान योग में चावल का दान करना शुभफलदायी है।* ================================================== *✍ पंचागकर्ता~~~इन्द्रकृष्ण भारद्वाज(बीकानेर)* *मोबाइल नम्बर ---- +919314147672 9214247672* *Email. --- [email protected]* ================================================== *यह पंचांगबीकानेर की अक्षांश रेखांश पर आधारित है।* 🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻

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[7/19, 7:51 AM] +91 94142 75784: "गुरु गूंगे गुरू बावरे गुरू के रहिये दास " एक बार की बात है नारद जी विष्णु भगवानजी से मिलने गए ! भगवान ने उनका बहुत सम्मान किया ! जब नारद जी वापिस गए तो विष्णुजी ने कहा हे लक्ष्मी जिस स्थान पर नारद जी बैठे थे ! उस स्थान को गाय के गोबर से लीप दो ! जब विष्णुजी यह बात कह रहे थे तब नारदजी बाहर ही खड़े थे ! उन्होंने सब सुन लिया और वापिस आ गए और विष्णु भगवान जी से पुछा हे भगवान जब मै आया तो आपने मेरा खूब सम्मान किया पर जब मै जा रहा था तो आपने लक्ष्मी जी से यह क्यों कहा कि जिस स्थान पर नारद बैठा था उस स्थान को गोबर से लीप दो ! *भगवान ने कहा हे नारद मैंने आपका सम्मान इसलिए किया क्योंकि आप देव ऋषि है और मैंने देवी लक्ष्मी से ऐसा इसलिए कहा क्योंकि आपका कोई गुरु नहीं है ! आप निगुरे है ! जिस स्थान पर कोई निगुरा बैठ जाता है वो स्थान गन्दा हो जाता है !* यह सुनकर नारद जी ने कहा हे भगवान आपकी बात सत्य है पर मै गुरु किसे बनाऊ ! नारायण! बोले हे नारद धरती पर चले जाओ जो व्यक्ति सबसे पहले मिले उसे अपना गुरु मानलो ! नारद जी ने प्रणाम किया और चले गए ! जब नारद जी धरती पर आये तो उन्हें सबसे पहले एक मछली पकड़ने वाला एक मछुवारा मिला ! नारद जी वापिस नारायण के पास चले गए और कहा महाराज वो मछुवारा तो कुछ भी नहीं जानता मै उसे गुरु कैसे मान सकता हूँ ? यह सुनकर भगवान ने कहा नारद जी अपना प्रण पूरा करो ! नारद जी वापिस आये और उस मछुवारे से कहा मेरे गुरु बन जाओ ! पहले तो मछुवारा नहीं माना बाद में बहुत मनाने से मान गया ! मछुवारे को राजी करने के बाद नारद जी वापीस भगवान के पास गए और कहा हे भगवान! मेरे गुरूजी को तो कुछ भी नहीं आता वे मुझे क्या सिखायेगे ! यह सुनकर विष्णु जी को क्रोध आ गया और उन्होंने कहा हे नारद गुरु निंदा करते हो जाओ मै आपको श्राप देता हूँ कि आपको 84 लाख योनियों में घूमना पड़ेगा ! यह सुनकर नारद जी ने दोनों हाथ जोड़कर कहा हे भगवान! इस श्राप से बचने का उपाय भी बता दीजिये !भगवान नारायण ने कहा इसका उपाय जाकर अपने गुरुदेव से पूछो ! नारद जी ने सारी बात जाकर गुरुदेव को बताई ! गुरूजी ने कहा ऐसा करना भगवान से कहना 84 लाख योनियों की तस्वीरे धरती पर बना दे फिर उस पर लेट कर गोल घूम लेना और विष्णु जी से कहना 84 लाख योनियों में घूम आया मुझे माफ़ करदो आगे से गुरु निंदा नहीं करूँगा ! नारद जी ने विष्णु जी के पास जाकर ऐसा ही किया उनसे कहा 84 लाख योनिया धरती पर बना दो और फिर उन पर लेट कर घूम लिए और कहा नारायण मुझे माफ़ कर दीजिये आगे से कभी गुरु निंदा नहीं करूँगा ! यह सुनकर विष्णु जी ने कहा देखा जिस गुरु की निंदा कर रहे थे उसी ने मेरे श्राप से बचा लिया !नारदजी गुरु की महिमा अपरम्पार है ! गुरु गूंगे गुरु बाबरे गुरु के रहिये दास, गुरु जो भेजे नरक को, स्वर्ग कि रखिये आस ! गुरु चाहे गूंगा हो चाहे गुरु बाबरा हो (पागल हो) गुरु के हमेशा दास रहना चाहिए ! गुरु यदि नरक को भेजे तब भी शिष्य को यह इच्छा रखनी चाहिए कि मुझे स्वर्ग प्राप्त होगा ,अर्थात इसमें मेरा कल्याण ही होगा! यदि शिष्य को गुरु पर पूर्ण विश्वास हो तो उसका बुरा "स्वयं गुरु" भी नहीं कर सकते ! गुरु पर तो वचन विश्वास रखने वाले का उद्धार निश्चित है। [7/19, 8:39 AM] +91 93176 77380: एक गुरू का दास रोज गुरू के द्वार पर जा कर रोज गुरू को पुकारा करता था लेकिन गुरू के दर्शन नहीं कर पाता था इसलिए वह हमेशा यही सोच कर चला जाता था कि शायद मेरी भक्ति भाव में कुछ कमी है इसलिए वो हर रोज बहुत ही प्रेम भाव से प्रभु के नाम का जाप करता और गुरू के दीदार किये बिना ही चला जाता था बहुत दिनों तक यह चलता रहा ,,, एक दिन गुरू के दूसरे दास से रहा नहीं गया उसने गुरू जी से पूछा कि गुरू जी ये आपके दर्शनों के लिए रोज सच्चे मन से आता है और आपको पता भी होता है तो आप इसको अपने दर्शनों से निहाल क्यों नहीं करते तो गुरू महाराज कहते हैं कि उससे ज्यादा तड़फ मुझे है मिलने की लेकिन जिस प्रेम भाव से वो प्रभु का नाम लेता है मैं छुप कर उसकी अरदास को सुनता रहता हूँ सिर्फ इसी डर से कहीं मेरे दर्शनों के बाद वो नहीं आया तो ऐसी प्रेम भरी अरदास कौन सुनाएगा मुझे इसकी अरदास बहुत अच्छी लगती है इसलिए मैं छुप कर सुनता रहता हूँ ये जरूरी नहीं कि हम रोज गुरू के चरणों में अरदास करते हैं तो गुरू हमारी सुनते नहीं हो सकता है कि गुरू को हमारी अरदास पसंद हो इसलिए बार बार सुनना चाहते हैं सतगुरू जी हमारी हर मोड़ पर संभाल करते हैं इसलिए हर हाल में जैसा भी वक्त हो हमें हर पल शुक्रराना करना चाहिए और हमेशा खुश रहना चाहिए...

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