गर्ज-गर्जहि अर्जुन हिज्र भयौ अरु गर्जहि गोविन्द धेनु चरावेँ। गर्जहि द्रौपदी दासी भई अरु गर्जहि भी रसोई पकावेँ।।गर्ज बढी सब लोग मेँ अरु गर्ज बिना कोई आवेँ न जावेँ।कवि गंग कहै सुनु शाह अकब्बर गर्जहि बीबी गुलाम।।जय श्री राधे"...

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