अष्टविनायक महागणपति जी

अष्टविनायक महागणपति जी

🇮🇳🇮🇳भारत माता की जय 🇮🇳🇮🇳
🙏🙏कैलाश अग्रवाल की राम राम🙏🙏 *************************************
माह- भाद्रपद, पक्ष- शुक्लपक्ष, तिथि-एकादशी, दिन-शनिवार, विक्रमी संवत् 2074 दिनांक 02 सितम्बर 2017 का शुभ प्रभात *******************************†*
आज गणेश उत्सव पर श्री महागणपति के शुभ दर्शन करे...

अष्टविनायक मंदिर के आठवें गणेशजी हैं महागणपति। मंदिर पुणे के रांजणगांव में स्थित है। यह पुणे-अहमदनगर राजमार्ग पर 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । इस मंदिर का इतिहास 9-10वीं सदी के बीच माना जाता है। मंदिर का प्रवेश द्वार पूर्व दिशा की ओर है जो कि बहुत विशाल और सुन्दर है। भगवान गणपति की मूर्ति को माहोतक नाम से भी जाना जाता है। यहां की गणेशजी प्रतिमा अद्भुत है। प्रचलित मान्यता के अनुसार मंदिर की मूल मूर्ति तहखाने की छिपी हुई है। पुराने समय में जब विदेशियों ने यहां आक्रमण किया था तो उनसे मूर्ति बचाने के लिए उसे तहखाने में छिपा दिया गया था।

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Ramesh Agrawal Mar 8, 2021

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🥀🥀 Mar 7, 2021

भारतीय संस्कृति ************** भारत के मंदिर भारत के प्रसिध्द मंदिर दर्शन हर रोज एक मंदिर के बारे में जानकारी दी जाएगी। लेख १८१ ०३/०३/२१ * श्री बड़े गणेश मंदिर , उज्जैन मध्य प्रदेश ********** भारत के हर कोने में भगवान गणेशजी के मन्दिरों को देखा जा सकता है और उनके प्रसिद्ध मन्दिरों में से एक है बड़े गणेशजी का मन्दिर , जो कि उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मन्दिर के निकट , एक तालाब के ऊपर स्थित हरसिध्दि मार्ग पर स्थित है। स्थानीय लोग इस मूर्ति को बहुत शक्तिशाली मानते है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस देवता के सामने की गई हर इच्छा कुछ ही समय में पूरी हो जाती है। इस मन्दिर के , भगवान गणेशजी को बडे गणेशजी के नाम से जाना जाता है।यह एक बहुत बडी़ मूर्ति है जिस कारण से इन्हें बडे़ गणेशजी के नाम से पुकारा जाता है । गणेशजी की इस भव्य प्रतिमा का निर्माण पं. नारायणजी व्यास के अथक प्रयासों द्वारा हो सका । यह विशाल गणेश प्रतिमा सीमेंट से नहीं बल्कि ईंट , चूने व बालू रेत से बनी हैं । और इससे भी विचित्र बात यह है कि इस प्रतिमा को बनाने में गुड़ व मेथीदाने का मसाला भी उपयोग में लाया गया था । इसके साथ -- साथ ही इसको बनाने में सभी पवित्र तीर्थ स्थलों का जल मिलाया गया था तथा सात मोक्षपुरियों मथुरा , माया , अयोध्या , काँची , उज्जैन , काशी व द्वारका से लाई गई मिट्टी भी मिलाई गई है जो इसकी महत्ता को दर्शाती है। इस प्रतिमा के निर्माण में ढाई वर्ष का समय लगा जिसके बाद यह मूर्ति अपने विशाल रूप में सबके समक्ष प्रत्यक्ष रूप से विराजमान है। मन्दिर में स्‍थापित गणेशजी की प्रतिमा लगभग 18 फीट ऊँची और 12 फीट चौड़ी है। मूर्ति में भगवान गणेशजी की सूंड दक्षिणावर्ती है। प्रतिमा के मस्तक पर त्रिशूल और स्वास्तिक बना हुआ है। दाहिनी ओर घूमी हुई सूंड में एक लड्डू दबा है। भगवान गणेशजी के कान व‍िशाल हैं और गले में पुष्प माला है। दोनों ऊपरी हाथ जप मुद्रा में और नीचे के दाएं हाथ में माला व बाएं में लड्डू की थाल है। इस मूर्ति की सुंदरता देखते ही बनती है क्योंकि वर्तमान समय में उपलब्ध यह एक दुर्लभ मूर्ति है। मंदिर के परिसर में आप संस्कृत तथा ज्योतिष विद्या सीख सकते है जिसकी व्यवस्था मंदिर के अधिकारियों द्वारा की गई है।

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Krishna Rai Mar 7, 2021

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🍁Raju_Rai.🍁 Mar 6, 2021

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