Amar Jeet kuar
Amar Jeet kuar Jun 10, 2018

वाहेगुरू जी जिसका जैसा मनहोता।है

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Mahesh Modi Jun 11, 2018
WAHE GURU JI KO NAMAN Veryyyy Veryyyy Veryyyy Veryyyy Nice Video Post Good Morning ji

Vandana Singh Mar 3, 2021

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Ratna Nankani Mar 3, 2021

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Radha Bansal Mar 3, 2021

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"दिखावटी से हकीकत की जमीन... आज फिर सुधा की दीदी मीना चमचमाती गाड़ी से आई थी.... जिसे देखकर सुधा की आँखे एकबारगी फिर से चुधिंया गई... अनेको गहनों से लदी दीदी उसे दुनिया की सबसे सौभाग्यशाली दुल्हन लग रही थी... मीना दीदी की शादी को दो साल हो चुके थे मगर जीजाजी अपनी आँखों से उन्हे एक पल के लिए भी दूर नहीं करते थे सबसे मिलवाकर साथ ही वापिस ले जाते थे.... सुधा की पढ़ाई अब खत्म हो चुकी थी उसने मां से कह दिया था कि उसे भी जीजाजी जैसा ही दूल्हा चाहिए.....अब यह कोई वस्तु तो थी नही जो मां बाजार से खरीदकर ला देती... ऐसे में जो भी रिश्ता आता सुधा को उनके सामने तुच्छ लगता.... मोहन कालेज से ही उसे पसंद करता था और उससे शादी करना चाहता था ....ये बात सुधा बखूबी जानती भी थी मगर वह उसे टरकाती जा रही थी... कयोंकि वह उनके जीजाजी जितना अमीर जो नही था... आज जब मोहन सुधा से मिलने घर आया तो मीनाक्षी दीदी की अनुभवी आंँखो से सुधा के प्रति उसका प्रेम छिप ना सका और ना ही सुधा का रूखापन.... वह तो अभी भी किसी अमीर शहजादे की इंतजार मे थी जो बड़ी सी गाड़ी में उसे ब्याहने आएगा... वह अब छब्बीसवे वर्ष की दहलीज पर थी... मां बाप की चिंता भी उसकी उम्र की तरह बढ़ने लगी थी... मोहन घर में सबको पसंद था...मां ने सुधा को मनाने की जिम्मेदारी मीना को सौंप दी... मोहन के जाते ही मीना दीदी सुधा को अकेले कमरे मे ले आई और समझाते हुए बोली... "सुधा ....जब मोहन इतना प्यार करता है, तो हां क्यो नही कर देती.... मीना दीदी .....सिर्फ़ प्यार के सहारे जिंदगी नही कटती... कहते हुए वह दीदी की सोने की चूड़ियो और कंगनों की चमक में खो सी गई फिर उनकी तरफ़ इशारा करते हुए अचानक वह पूछ बैठी... क्या मोहन मुझे यह सब दे पाएगा .... दीदी कांपती आवाज़ में बोली.... सुधा....जो ऊपर से दिखता है वह होता नही है... कहते-कहते अचानक दीदी ने चूड़ियां और कंगन ऊपर कर दिए.... कलाई पर सिगरेट से जले निशान उनकी साफ चुगली कर रहे थे.... उफ्फ...... ये कया है दीदी......उसकी फटी फटी आंँखो से अविश्वास के अश्रु भरभराकर बह चले..... तुम ....कभी कुछ बताती कयो नही दीदी.... पगली ....मे भी इस दौलत की चंकाचौध मे पागल थी ...मगर भूल गई थी सबसे बडी दौलत प्यार की होती है जो नसीबवालो को मिलता है.... तुझे मिल रहा है इसे मत खोना मेरी लाडो ...कहकर सुधा से लिपट गई .... तभी मीना के पति यानी सुधा के जीजाजी ने वापसी चलने के लिए आवाज लगाई ..... दीदी तो वापस जा रही थी मगर सुधा दिखावटी दुनिया से सच्चाई की जमीन पर वापस लौट चुकी थी उसने फैसला कर लिया था वो अब जीवन की सबसे अनमोल दौलत मोहन के प्यार को नही खोएगी .... अब वो मोहन से शादी को तैयार थी... *एक बहुत ही सुंदर रचना.....👍🌸 *जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸

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