शुभ सु प्र भा त शुभ रविवार शुभ जय सुर्य देवाय

शुभ सु प्र भा त 
शुभ रविवार 
शुभ जय सुर्य देवाय

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कामेंट्स

पवन कुमार Feb 27, 2021
ऊॅ नमःशिवाय जी जय श्री राम राम जी राम राम जी

Rajesh gaur Feb 27, 2021
🙏🌹ॐ श्री सूर्याय देवाय नमो नमः 🙏🌹

B L Yadav.(CMO) Feb 28, 2021
om Shuryadev NAMAH 🙏🙏🙏 Jai Shri Krishna ji 🙏🙏🙏

M.S.Chauhan Feb 28, 2021
*शुभ दिन रविवार* *फरवरी माह के अंतिम दिन रविवार की हार्दिक शुभकामनायें* *ॐ भास्कराय नमः* *ॐ सूर्यदेवाय नमः* *हे सूर्य देव मेरे अपनों* *को यह पैगाम देना* *खुशियों भरा दिन हो* *हंसी की शाम देना* *जब कोई पढ़े प्यार से* *मेरे इस पैगाम को* *तो उसके चेहरे पर* *प्यारी सी मुस्कान देना* *GOOD MORNING* *HAPPY SUNDAY* *HAVE A NICE DAY* 🏵️🌷🦚🙏🦚🌷🏵️

Anilkumar Tailor Feb 28, 2021
शुभ कामना सहित । जय श्रीराम

Vinay Mishra Feb 28, 2021
ॐ सुर्य देवाय नमः सुप्रभात वंदन जी 🥀 ॐ 🙏

Mamta Chauhan Apr 19, 2021

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dhruv wadhwani Apr 19, 2021

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Amar jeet mishra Apr 19, 2021

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*सुख दुख आते जाते रहेंगे* घुप्प अंधेरी रात में एक व्यक्ति नदी में कूद कर आत्महत्या करने का विचार कर रहा था. वर्षा के दिन थे और नदी पूरे उफान पर थी. आकाश में बादल घिरे थे और रह-रहकर बिजली चमक रही थी. वह उस देश का बड़ा धनी व्यक्ति था लेकिन अचानक हुए घाटे से उसकी सारी संपत्ति चली गई. उसके भाग्य का सूरज डूब गया था. चारों ओर निराशा ही निराशा. भविष्य नजर नहीं आ रहा था. उसे कुछ सूझता न था कि क्या करे. उसने स्वयं को समाप्त करने का विचार कर लिया था. नदी में कूदने के लिए जैसे ही चट्टान के छोर पर खड़ा होकर वह अंतिम बार ईश्वर का स्मरण करने लगा तभी दो बुजुर्ग परंतु मजबूत बांहों ने उसे रोक लिया. बिजली की चमक में उसने देखा कि एक वृद्ध साधु उसे पकड़े हुए है ! उस वृद्ध ने उससे निराशा का कारण पूछा. किनारे लाकर उसकी सारी कथा सुनी फिर हंसकर बोला- तो तुम यह स्वीकार करते हो कि पहले तुम सुखी थे. सेठ बोला- हाँ मेरे भाग्य का सूर्य पूरे प्रकाश से चमक रहा था. सब ओर मान-सम्मान संपदा थी. अब जीवन में सिवाय अंधकार और निराशा के कुछ भी शेष नहीं है. वृद्ध फिर हंसा और बोला- दिन के बाद रात्रि है और रात्रि के बाद दिन. जब दिन नहीं टिकता तो रात्रि भी कैसे टिकेगी ? परिवर्तन प्रकृति का नियम है ठीक से सुनो और समझ लो. जब तुम्हारे अच्छे दिन हमेशा के लिए नहीं रहे तो बुरे दिन भी नहीं रहेंगे. जो इस सत्य को जान लेता है वह सुख में सुखी नहीं होता और दुख में दुखी नहीं होता ! उसका जीवन उस अडिग चट्टान की भांति हो जाता है जो वर्षा और धूप में समान ही बनी रहती है ! सुख और दुख को जो समभाव से ले, समझ लो कि उसने स्वयं को जान लिया. सुख-दुख तो आते-जाते रहते हैं. यही प्रकृति की गति है. ईश्वर का इंसाफ. जो न आता है और न जाता है वह है स्वयं का अस्तित्व. इस अस्तित्व में ठहर जाना ही समत्व है. सोचो यदि किसी ने जीवन में एक जैसा ही भाव देखा. हमेशा सुख का ही. जिस चीज की आवश्यकता हुई उससे पहले वह मिल गई. तो क्या वह कुछ उपहार पाने की खुशी का अनुभव कैसे कर सकता है ? *दुख न आए तो सुख का स्वाद क्या होता कोई कैसे जाने ? जो इस शाश्वत नियम को जान लेता है, उसका जीवन बंधनों से मुक्त हो जाता है..!!*

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ramkumarverma Apr 19, 2021

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