🎄🎄🌹🌹🌹जय श्री राम🌹🌹🌹🎄🎄 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 एक करोड़पति बहुत अड़चन में था। करोड़ों का घाटा लगा था, और सारी जीवन की मेहनत डूबने के करीब थी ! नौका डगमगा रही थी। कभी मन्दिर नहीं गया था, कभी प्रार्थना भी न की थी। फुरसत ही न मिली थी ! पूजा के लिए उसने पुजारी रख छोड़े थे, कई मन्दिर भी बनवाये थे, जहाँ वे उसके नाम से नियमित पूजा किया करते थे लेकिन आज इस दुःख की घड़ी में कांपते हाथों वह भी मंदिर गया। सुबह जल्दी गया, ताकि परमात्मा से पहली मुलाकात उसी की हो, पहली प्रार्थना वही कर सके। कोई दूसरा पहले ही मांग कर परमात्मा का मन खराब न कर चुका हो ! बोहनी की आदत जो होती है, कमबख्त यहाँ भी नहीं छूटी, सो अल्ल-सुबह पहुँचा मन्दिर। लेकिन यह देख कर हैरान हुआ कि गाँव का एक भिखारी उससे पहले से ही मन्दिर में मौजूद था। अंधेरा था, वह भी पीछे खड़ा हो गया, कि भिखारी क्या मांग रहा है ? धनी आदमी सोचता है, कि मेरे पास तो मुसीबतें हैं; भिखारी के पास क्या मुसीबतें हो सकती हैं ? और भिखारी सोचता है, कि मुसीबतें मेरे पास हैं। धनी आदमी के पास क्या मुसीबतें होंगी ? एक भिखारी की मुसीबत दूसरे भिखारी के लिए बहुत बड़ी न थी ! उसने सुना, कि भिखारी कह रहा है- हे परमात्मा ! अगर पांच रुपए आज न मिलें तो जीवन नष्ट हो जाएगा। आत्महत्या कर लूँगा। पत्नी बीमार है और दवा के लिए पांच रुपए होना बिलकुल आवश्यक है। मेरा जीवन संकट में है। अमीर आदमी ने यह सुना और वह भिखारी बंद ही नहीं हो रहा है; कहे जा रहा है और प्रार्थना जारी है ! तो उसने झल्लाकर अपने खीसे से पांच रुपए निकाल कर उस भिखारी को दिए और कहा- जा ये ले जा पांच रुपए, तू ले और जा जल्दी यहाँ से ! अब वह परमात्मा से मुखतिब हुआ और बोला- "प्रभु, अब आप ध्यान मेरी तरफ दें, इस भिखारी की तो यही आदत है। दरअसल मुझे पांच करोड़ रुपए की जरूरत है !” भगवान मुस्करा उठे बोले- एक छोटे भिखारी से तो तूने मुझे छुटकारा दिला दिया, लेकिन तुझसे छुटकारा पाने के लिए तो मुझको तुमसे भी बढ़ा भिखारी ढूँढ़ना पड़ेगा ! तुम सब लोग यहाँ केवल कुछ न कुछ माँगने ही आते हो, कभी मेरी जरूरत का भी ख्याल आया है ? धनी आश्चर्यचकित हुआ बोला - प्रभु आपको क्या चाहिए ? भगवान बोले- प्रेम ! मैं भाव का भूखा हूँ। मुझे निस्वार्थ प्रेम व समर्पित भक्त प्रिय है। कभी इस भाव से मुझ तक आओ; फिर तुम्हे कुछ माँगने की आवश्यकता ही नही पड़ेगी🌸🍀🌸🍀🌸🙏🙏🙏☕

🎄🎄🌹🌹🌹जय श्री राम🌹🌹🌹🎄🎄
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿
एक करोड़पति बहुत अड़चन में था। करोड़ों का घाटा लगा था, और सारी जीवन की मेहनत डूबने के करीब थी ! नौका डगमगा रही थी। कभी मन्दिर नहीं गया था, कभी प्रार्थना भी न की थी। फुरसत ही न मिली थी ! पूजा के लिए उसने पुजारी रख छोड़े थे, कई मन्दिर भी बनवाये थे, जहाँ वे उसके नाम से नियमित पूजा किया करते थे लेकिन आज इस दुःख की घड़ी में कांपते हाथों वह भी मंदिर गया। सुबह जल्दी गया, ताकि परमात्मा से पहली मुलाकात उसी की हो, पहली प्रार्थना वही कर सके। कोई दूसरा पहले ही मांग कर परमात्मा का मन खराब न कर चुका हो ! बोहनी की आदत जो होती है, कमबख्त यहाँ भी नहीं छूटी, सो अल्ल-सुबह पहुँचा मन्दिर।
         लेकिन यह देख कर हैरान हुआ कि गाँव का एक भिखारी उससे पहले से ही मन्दिर में मौजूद था। अंधेरा था, वह भी पीछे खड़ा हो गया, कि भिखारी क्या मांग रहा है ? धनी आदमी सोचता है, कि मेरे पास तो मुसीबतें हैं; भिखारी के पास क्या मुसीबतें हो सकती हैं ? और भिखारी सोचता है, कि मुसीबतें मेरे पास हैं। धनी आदमी के पास क्या मुसीबतें होंगी ? एक भिखारी की मुसीबत दूसरे भिखारी के लिए बहुत बड़ी न थी ! उसने सुना, कि भिखारी कह रहा है- हे परमात्मा ! अगर पांच रुपए आज न मिलें तो जीवन नष्ट हो जाएगा। आत्महत्या कर लूँगा। पत्नी बीमार है और दवा के लिए पांच रुपए होना बिलकुल आवश्यक है। मेरा जीवन संकट में है।
        अमीर आदमी ने यह सुना और वह भिखारी बंद ही नहीं हो रहा है; कहे जा रहा है और प्रार्थना जारी है ! तो उसने झल्लाकर अपने खीसे से पांच रुपए निकाल कर उस भिखारी को दिए और कहा- जा ये ले जा पांच रुपए, तू ले और जा जल्दी यहाँ से ! अब वह परमात्मा से मुखतिब हुआ और बोला- "प्रभु, अब आप ध्यान मेरी तरफ दें, इस भिखारी की तो यही आदत है। दरअसल मुझे पांच करोड़ रुपए की जरूरत है !”

          भगवान मुस्करा उठे बोले- एक छोटे भिखारी से तो तूने मुझे छुटकारा दिला दिया, लेकिन तुझसे छुटकारा पाने के लिए तो मुझको तुमसे भी बढ़ा भिखारी ढूँढ़ना पड़ेगा ! तुम सब लोग यहाँ केवल कुछ न कुछ माँगने ही आते हो, कभी मेरी जरूरत का भी ख्याल आया है ? धनी आश्चर्यचकित हुआ बोला - प्रभु आपको क्या चाहिए ? 
         भगवान बोले- प्रेम ! मैं भाव का भूखा हूँ। मुझे निस्वार्थ प्रेम व समर्पित भक्त प्रिय है। कभी इस भाव से मुझ तक आओ; फिर तुम्हे कुछ माँगने की आवश्यकता ही नही पड़ेगी🌸🍀🌸🍀🌸🙏🙏🙏☕

+729 प्रतिक्रिया 171 कॉमेंट्स • 633 शेयर

कामेंट्स

Rajesh Gupta Sep 24, 2020
🙏🌹Jai Shri Sita Ram 🌹🙏 🙏🌹Jai Bajarangbali🌹🙏

SOM DUTT SHARMA Sep 24, 2020
Om Bhgwatae Vashu devay namoh good afternoon ji have a nice day g

Kamla Rawat Sep 24, 2020
Radhe Radhe ji 🌹 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

M .. S Sep 24, 2020
जय स्वामी लक्ष्मी नारायण जी गुड आफ्टरनून जी

Sanjay Sharma Sep 24, 2020
जय श्री राधे श्याम जय श्री सीताराम जय श्री हरि विष्णु ओम् नमः भगवते वासुदेवाय नमः शुभ दोपहरी जी मेरी बहन आप कैसे हैं बहन आप सदा खुश रहिए और जीवन में सदैव कामयाबी हासिल करते रहे ईश्वर मेरी बहन के जीवन में सदैव खुशियों का भंडार भरा रहे आपका हर दिन मंगलमय हो

Ashish Pandey Sep 24, 2020
very good evening ji.🌹🕉️🌹.Jai Shree Krishna 🙏 Radhe Radhe ji..☕🍵👈🌼🌿🌼☺️

Brajesh Sharma Sep 24, 2020
जय जय श्री राधे जी.. जय श्री राधेकृष्णा

Sushil Kumar Sharma 🙏🙏🌹🌹 Sep 24, 2020
Good Evening My Sweet Sister ji 🙏🙏 Very Beautiful Line ji 👌👌 Om Namo Bhagwate Vasudevay Namah ji 🙏🙏🌹🌹 Om Namo Lakshmi Narayan Namah ji 🙏🙏🌹🕉️🕉️🕉️🔔🔔🔔💐🌷🌹🌹 Ki Kripa Dristi Aap Our Aapke Priwar Per Hamesha Sada Bhni Rahe ji 🙏🙏🌹🌷🌷🌷🌷🌹🌹🌹💐💐💐🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹.

s.r.pareek Sep 24, 2020
🥀🕉औम नमौ नारायणा🕉🥀 आप पर विष्णु देव की सदैव करपा रहें जी दीर्घायु हों खुश रहें जी हर पल मंगलमय हो खूबसूरत हो जीशुभ रात्रि वंदन जी जय श्री कृष्णा जी प्यारी बहना 🙏🏼🙏🏼🍁🌻🌹🌾🥀🌠🌠

Gour.... Sep 24, 2020
🔔🔔राम राम जी 🕉🕉🙏🙏 🙏श्री हरि विष्णु भगवान जी व माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद आप पर हमेशा बना रहे🚩🔱🙏🙏 🙏 आपका हर पल खुशियों से भरा हो जी🙏🙏🙏🔔🔔🔔राम राम जी 🕉🕉🙏🙏 🙏श्री हरि विष्णु भगवान जी व माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद आप पर हमेशा बना रहे🚩🔱🙏🙏 🙏 आपका हर पल खुशियों से भरा हो जी🙏🙏🙏🔔 जय श्री राधे जय श्री कृष्णा जी********* ऊं साँई राम जी ***** जय श्री राधे जय श्री कृष्णा जी********* ऊं साँई राम जी *****

Janardan Mishra Sep 25, 2020
जै श्री कृष्ण बहुत ही सुन्दर सन्देश

sanjay choudhary Sep 26, 2020
🙏🙏 जय शनिदेव 🙏🙏 *बड़ो की छत्रछाया ,* *हमारी संस्कृति और संस्कार* *बोझ नहीं..* *बल्कि हमारा सुरक्षा कवच है।* *इन्हें बचा कर और सम्भाल कर रखिये।* *🙏शुभ प्रभात*🙏 ❤❤❤ *जय श्री कृष्णा जी*🙏🙏🙏

laltesh kumar sharma Sep 26, 2020
🌹🌿🌹🌿🌹 very very beautiful ji 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 jai shree ram ji 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 jai shree hanuman ji 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 jai jinendra ji 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🙏🙏

Ravi Kumar Taneja Sep 29, 2020
🌺🌺🌺🌺🌺🌺 *जिंदगी दो दिन की है,* *एक दिन आप के हक़ में,* *एक दिन आप के खिलाफ,* *जिस दिन हक़ में हो* *गुरूर मत करना,* *जिस दिन खिलाफ हो,* *थोड़ा सा सब्र जरूर करना* * 🙏🌹 Good Noon ji🙏 🌹 🙏* 🌹 *""सदा मुस्कुराते रहिये""*🌹 🌺🌺🌺🌺🌺🌺

भगवान गणेश की पूजा से घर में आती सुख और समृद्धि, जानिए गणेश जी का परिवार गणेश उत्सव घर में सुख-शांति लाने और घर से विघ्नों को दूर करने का उत्सव है। माना जाता है, जब घर में गणपति आते हैं तो वे अपने साथ सुख, शांति और आनंद लेकर आते हैं। जब वे घर से जाते हैं तो सारे विघ्न, दुःख और कष्टों को अपने साथ लेकर जाते हैं। गणेश के परिवार में उनकी दो पत्नियां रिद्धि-सिद्धि और दो पुत्र क्षेम और लाभ हैं। कुछ मान्यताओं में गणेशजी की एक पुत्री संतोषी भी बताई गई हैं। इन सभी की पूजा एक साथ करना ज्यादा शुभ रहता है। ऐसा है शिवजी का परिवार शिवजी के परिवार में माता पार्वती, कार्तिकेय स्वामी, गणेशजी हैं। शिवजी के वाहन नंदी, माता का शेर, कार्तिकेय का वाहन मयूर, गणेशजी का वाहन मूषक है। कार्तिकेय स्वामी ब्रह्मचारी माने गए हैं। गणेशजी की दो पत्नियां रिद्धि और सिद्धि हैं। इनके दो पुत्र क्षेम और लाभ हैं। मान्यता है कि जो लोग इन सभी की पूजा एक साथ करते हैं, उनके घर में सभी सुखों का आगमन होता है। ये है गणेशजी का जीवन प्रबंधन घर के मुखिया का स्वभाव गंभीर होना चाहिए। गणेशजी का सिर हाथी का और धड़ मनुष्य की तरह है यानी व्यक्ति की बुद्धि हाथी की तरह गंभीर होनी चाहिए। घर-परिवार से जुड़ी सभी बातों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। हाथी खूब सोच-विचार कर ही काम करता है। हाथी को जल्दी क्रोध भी नहीं आता। हाथी की तरह हमेशा धैर्य रखें और शांति से काम करना चाहिए। गणेशजी बुद्धि के देवता है। जब बुद्धि का उपयोग करते हुए धैर्य और शांति के साथ गंभीर होकर काम किया जाता है, तब रिद्धि-सिद्धि यानी सुख-समृद्धि, शुभ-लाभ की प्राप्त होती है। जब ये सब जीवन में आ जाते हैं, तब हमें संतोष मिलता है।🙋‍♀️🙋‍♀️🙋‍♀️🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌿🌿🌿🌿🌿🌿🍎🍎

+776 प्रतिक्रिया 183 कॉमेंट्स • 743 शेयर

पापांकुशा एकादशी (27 अक्टूबर 2020 मंगलवार) ~~~~~~~~~~~ एकादशी व्रत कथा ~~~~~~~~~~~~~~~~ युधिष्ठिर ने पूछा : हे मधुसूदन ! अब आप कृपा करके यह बताइये कि आश्विन के शुक्लपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है और उसका माहात्म्य क्या है ? भगवान श्रीकृष्ण बोले : राजन् ! आश्विन के शुक्लपक्ष में जो एकादशी होती है, वह ‘पापांकुशा’ के नाम से विख्यात है । वह सब पापों को हरनेवाली, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करनेवाली, शरीर को निरोग बनानेवाली तथा सुन्दर स्त्री, धन तथा मित्र देनेवाली है । यदि अन्य कार्य के प्रसंग से भी मनुष्य इस एकमात्र एकादशी को उपास कर ले तो उसे कभी यम यातना नहीं प्राप्त होती । राजन् ! एकादशी के दिन उपवास और रात्रि में जागरण करनेवाले मनुष्य अनायास ही दिव्यरुपधारी, चतुर्भुज, गरुड़ की ध्वजा से युक्त, हार से सुशोभित और पीताम्बरधारी होकर भगवान विष्णु के धाम को जाते हैं । राजेन्द्र ! ऐसे पुरुष मातृपक्ष की दस, पितृपक्ष की दस तथा पत्नी के पक्ष की भी दस पीढ़ियों का उद्धार कर देते हैं । उस दिन सम्पूर्ण मनोरथ की प्राप्ति के लिए मुझ वासुदेव का पूजन करना चाहिए । जितेन्द्रिय मुनि चिरकाल तक कठोर तपस्या करके जिस फल को प्राप्त करता है, वह फल उस दिन भगवान गरुड़ध्वज को प्रणाम करने से ही मिल जाता है । जो पुरुष सुवर्ण, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, जूते और छाते का दान करता है, वह कभी यमराज को नहीं देखता । नृपश्रेष्ठ ! दरिद्र पुरुष को भी चाहिए कि वह स्नान, जप ध्यान आदि करने के बाद यथाशक्ति होम, यज्ञ तथा दान वगैरह करके अपने प्रत्येक दिन को सफल बनाये । जो होम, स्नान, जप, ध्यान और यज्ञ आदि पुण्यकर्म करनेवाले हैं, उन्हें भयंकर यम यातना नहीं देखनी पड़ती । लोक में जो मानव दीर्घायु, धनाढय, कुलीन और निरोग देखे जाते हैं, वे पहले के पुण्यात्मा हैं । पुण्यकर्त्ता पुरुष ऐसे ही देखे जाते हैं । इस विषय में अधिक कहने से क्या लाभ, मनुष्य पाप से दुर्गति में पड़ते हैं और धर्म से स्वर्ग में जाते हैं । राजन् ! तुमने मुझसे जो कुछ पूछा था, उसके अनुसार ‘पापांकुशा एकादशी’ का माहात्म्य मैंने वर्णन किया । अब और क्या सुनना चाहते हो ? 🚩🚩🚩🙏🙏🙏🌹🌹

+484 प्रतिक्रिया 130 कॉमेंट्स • 453 शेयर

***क्षमा कीजिए पिताश्री*** _एक बार गणेशजी ने भगवान शिवजी से कहा कि पिताजी! आप यह चिताभस्म, लगाकर, मुण्डमाला धारणकर अच्छे नहीं लगते!_ _मेरी माता गौरी अपूर्व सुंदरी और आप उनके साथ इस भयंकर रूप में!_ _पिताजी! आप एक बार कृपा करके अपने सुंदर रूप में माता के सम्मुख आएं, जिससे हम आपका असली स्वरूप देख सकें!_ _भगवान शिवजी मुस्कुराये और गणेशजी की बात मान ली! _कुछ समय बाद जब शिवजी स्नान करके लौटे तो उनके शरीर पर भस्म नहीं थी, बिखरी जटाएं और सँवरी हुई, मुंडमाला उतरी हुई थी!_ _सभी देवता, यक्ष, गंधर्व, शिवगण उन्हें अपलक देखते रह गए, वो ऐसा रूप था कि मोहिनी अवतार रूप भी फीका पड़ जाये!_ _भगवान शिव ने अपना यह रूप कभी भी प्रकट नहीं किया था! शिवजी का ऐसा *अतुलनीय रूप* करोड़ों कामदेवों को भी मलिन कर रहा था!_ _गणेशजी अपने पिता की इस मनमोहक छवि को देखकर स्तब्ध रह गए और मस्तक झुकाकर बोले:-_ _मुझे क्षमा करें पिताजी! परन्तु अब आप अपने पूर्व स्वरूप को धारण कर लीजिए!_ _भगवान शिव मुस्कुराये और पूछा क्यों पुत्र अभी तो तुमने ही मुझे इस रूप में देखने की इच्छा प्रकट की थी, अब पुनः पूर्व स्वरूप में आने की बात क्यों? गणेशजी ने मस्तक झुकाये हुए ही कहा:-_ _*क्षमा करें पिताश्री! मेरी माता से सुंदर कोई और दिखे मैं ऐसा कदापि नहीं चाहता!*_ _शिवजी हँसे और अपने पुराने स्वरूप में लौट आए! _*🕉️🙏नमः🙏शिवाय🔱*_ _*पौराणिक ऋषि इस प्रसंग का सार स्पष्ट करते हुए कहते हैं......*_ _आज भी ऐसा ही होता है पिता रुद्र रूप में रहता है क्योंकि उसके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियों, उसके रक्षण, मान सम्मान का ख्याल रखना होताषहै तो थोड़ा कठोर रहता है..._ _और माँ सौम्य, प्यार लाड़, स्नेह उनसे बातचीत करके प्यार देकर उस कठोरता का बैलेंस बनाती है।। इसलिए सुंदर होता है *माँ का स्वरूप।।*_ _*🙏प्रेम से बोलिए❤हर-हर महादेव🔱*_ *पिता के ऊपर से भी जिम्मेदारियों का बोझ हट जाए तो वो भी बहुत सुंदर दिखता है ।*💐🥭🥭💐🙏🙏🙏🙏🙏🙋‍♀️🙋‍♀️🙋‍♀️☕

+827 प्रतिक्रिया 187 कॉमेंट्स • 1077 शेयर
Golu yadav Oct 28, 2020

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+213 प्रतिक्रिया 39 कॉमेंट्स • 347 शेयर
Mamta Chauhan Oct 28, 2020

+491 प्रतिक्रिया 119 कॉमेंट्स • 509 शेयर
Mamta Chauhan Oct 28, 2020

+197 प्रतिक्रिया 56 कॉमेंट्स • 94 शेयर
jatan kurveti Oct 28, 2020

+67 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 210 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB