भगत के बस में है भगवान🙏 एक नगर में दो वृद्ध स्त्रियाँ बिल्कुल पास-पास रहा करती थीं। उन दोनों में बहुत घनिष्ठता थी। उन दोनोंं का ही संसार में कोई नहीं था इसलिए एक दूसरे का सदा साथ देतीं और अपने सुख-दुःख आपस में बाँट लेती थीं। एक स्त्री हिन्दू थी तथा दूसरी जैन धर्म को मानने वाली थी।💠 💠हिन्दू वृद्धा ने अपने घर में लड्डू गोपाल को विराजमान किया हुआ था। वह प्रतिदिन बड़े प्रेम से लड्डू गोपाल की सेवा करा करती थी। प्रतिदिन उनको स्नान कराना, धुले वस्त्र पहनाना, दूध व फल आदि भोग अर्पित करना उसका नियम था। वह स्त्री लड्डू गोपाल के भोजन का भी विशेष ध्यान रखती थी। सर्दी, गर्मी, बरसात हर मौसम का ध्यान उसको रहता था। वह जब भी कभी बाहर जाती लड्डू गोपाल के लिए कोई ना कोई खाने की वस्तु, नए वस्त्र खिलोने आदि अवश्य लाती थी। लड्डू गोपाल के प्रति उसके मन में आपार प्रेम और श्रद्धा का भाव था।💠 💠उधर जैन वृद्धा भी अपनी जैन परम्परा के अनुसार भगवान् के प्रति सेवा भाव में लगी रहती थी। उन दोनोंं स्त्रियों के मध्य परस्पर बहुत प्रेम भाव था। दोनोंं ही एक दूसरे के भक्ति भाव और धर्म की प्रति पूर्ण सम्मान की भावना रखती थी। जब किसी को कोई समस्या होती तो दूसरी उसका साथ देती, दोनोंं ही वृद्धाएँ स्वभाव से भी बहुत सरल और सज्जन थीं। भगवान की सेवा के* *अतिरिक्त उनका जो भी समय शेष होता था वह दोनोंं एक दूसरे के साथ ही व्यतीत करती थीं।💠 💠एक बार हिन्दू वृद्धा को एक माह के लिए तीर्थ यात्रा का अवसर प्राप्त हुआ उसने दूसरी स्त्री से भी साथ चलने का आग्रह किया किन्तु वृद्धावस्था के कारण अधिक ना चल पाने के कारण उस स्त्री ने अपनी विवशता प्रकट कर दी। हिन्दु वृद्धा ने कहा कोई बात नहीं मैं जहाँ भी जाऊँगी भगवान् से तुम्हारे लिए प्रार्थना करुँगी फिर वह बोली मैं तो एक माह के लिए चली जाऊँगी तब तक मेरे पीछे मेरे लड्डू गोपाल का ध्यान रखना। उस जैन वृद्धा ने सहर्ष ही उसका यह अनुरोध स्वीकार कर लिया। हिन्दू वृद्धा ने उस जैन वृद्धा को लड्डू गोपाल की सेवा के सभी नियम व आवश्यकताएँ बता दीं। उस जैन वृद्धा ने सहर्ष सब कुछ स्वीकार कर लिया।💠 💠कुछ दिन बाद वह हिन्दू वृद्धा तीर्थ यात्रा के लिए निकल गई। उसके जाने के बाद लड्डू गोपाल की सेवा का कार्य जैन वृद्धा ने अपने हाथ में लिया। वह बहुत उत्त्साहित थी कि उसको लड्डू गोपाल की सेवा का अवसर प्राप्त हुआ। उस दिन उसने बड़े प्रेम से लड्डू गोपाल की सेवा की। भोजन कराने से लेकर रात्रि में उनके शयन तक के सभी कार्य पूर्ण श्रद्धा के साथ वैसे ही पूर्ण किए जैसे उसको बताए गए थे। लड्डू गोपाल के शयन का प्रबन्ध करके वह भी अपने घर शयन के लिए चली गई।💠 💠अगले दिन प्रातः जब वह वृद्धा लड्डू गोपाल की सेवा के लिए हिन्दू स्त्री के घर पहुँची तो उसने सबसे पहले लड्डू गोपाल को स्नान कराने की तैयारी की। नियम के अनुरूप जब वह लड्डू गोपाल को स्नान कराने लगी तो उसने देखा की लड्डू गोपाल के पाँव पीछे की और मुड़े हुए हैं। उसने पहले कभी लड्डू गोपाल के पाँव नहीं देखे थे, जब भी उनको देखा वस्त्रों में ही देखा था। वह नहीं जानती थी कि लड्डू गोपाल के पाँव हैं ही ऐसे, घुटनों के बल बैठे हुए। लड्डू गोपाल के पाँव पीछे की ओर देख कर वह सोचने लगी अरे मेरे लड्डू गोपाल को यह क्या हो गया इसके तो पैर मुड़ गए है। उसने उस हिन्दू वृद्धा से सुन रखा था की लड्डू गोपाल जीवंत होते हैं। उसने मन में विचार किया कि मैं इनके पैरो की मालिश करुँगी हो सकता है इनके पाँव ठीक हो जायें। बस फिर क्या था भक्ति भाव में डूबी उस भोली भाली वृद्धा ने लड्डू गोपाल के पैरों की मालिश आरम्भ कर दी। उसके बाद वह नियम से प्रतिदिन पांच बार उनके पैरों की मालिश करने लगी। उस भोली वृद्धा की भक्ति और प्रेम देख कर ठाकुर जी का हृदय द्रवित हो उठा। भक्त वत्सल भगवान् अपनी करुणावश अपना प्रेम उस वृद्धा पर उड़ेल दिया।💠 💠एक दिन प्रातः उस जैन वृद्धा ने देखा की लड्डू गोपाल के पाँव ठीक हो गए हैं और वह सीधे खड़े हो गए हैं, यह देख कर वह बहुत प्रसन्न हुई और दूसरी स्त्री के आने की प्रतीक्षा करने लगी।💠 💠कुछ दिन पश्चात् दूसरी स्त्री वापस लौटी तो उसने घर आकर सबसे पहले अपने लड्डू गोपाल के दर्शन किये किन्तु जैसे ही वह लड्डू गोपाल के सम्मुख पहुँची तो देखा कि वह तो अपने पैरों पर सीधे खड़े हैं। यह देखकर वह अचंभित रह गई।💠 💠वह तुरन्त उस दूसरी स्त्री के पास गई और उसको सारी बात बताई और पूछा कि मेरे लड्डू गोपाल कहां गए?* 💠यह सुनकर उस जैन स्त्री ने सारी बात बता दी।💠 💠उसकी बात सुनकर वह वृद्ध स्त्री सन्न रह गई और उसको लेकर अपने घर गई। वहाँ जाकर उसने देखा तो लड्डू गोपाल मुस्करा रहे थे।💠 💠वह लड्डू गोपाल के चरणों में गिर पड़ी और बोली - हे गोपाल! आपकी लीला निराली है। मैंने इतने वर्षो तक आपकी सेवा की किन्तु आपको नहीं पहचान सकी तो वह उस जैन वृद्धा से बोली कि, तू धन्य है! तुझको नहीं मालूम कि हमारे लड्डू गोपाल के पाँव तो ऐसे ही हैं, पीछे की ओर किन्तु तेरी भक्ति और प्रेम ने तो लड्डू गोपाल के पाँव भी सीधे कर दिये।💠 💠उस दिन के बाद उन दोनोंं स्त्रियों के मध्य प्रेम भाव और अधिक बढ़ गया। दोनोंं मिलकर लड्डू गोपाल की सेवा करने लगीं। वह दोनोंं स्त्रियां जब तक जीवित रहीं तब तक लड्डू गोपाल की सेवा करती रहीं।💠 💠"जय जय श्री राधे कृष्ण जी "💠

भगत के बस में है भगवान🙏
एक नगर में दो वृद्ध स्त्रियाँ बिल्कुल पास-पास रहा करती थीं। उन दोनों में बहुत घनिष्ठता थी। उन दोनोंं का ही संसार में कोई नहीं था इसलिए एक दूसरे का सदा साथ देतीं और अपने सुख-दुःख आपस में बाँट लेती थीं। एक स्त्री हिन्दू थी तथा दूसरी जैन धर्म को मानने वाली थी।💠

💠हिन्दू वृद्धा ने अपने घर में लड्डू गोपाल को विराजमान किया हुआ था। वह प्रतिदिन बड़े प्रेम से लड्डू गोपाल की सेवा करा करती थी। प्रतिदिन उनको स्नान कराना, धुले वस्त्र पहनाना, दूध व फल आदि भोग अर्पित करना उसका नियम था। वह स्त्री लड्डू गोपाल के भोजन का भी विशेष ध्यान रखती थी। सर्दी, गर्मी, बरसात हर मौसम का ध्यान उसको रहता था। वह जब भी कभी बाहर जाती लड्डू गोपाल के लिए कोई ना कोई खाने की वस्तु, नए वस्त्र खिलोने आदि अवश्य लाती थी। लड्डू गोपाल के प्रति उसके मन में आपार प्रेम और श्रद्धा का भाव था।💠

💠उधर जैन वृद्धा भी अपनी जैन परम्परा के अनुसार भगवान् के प्रति सेवा भाव में लगी रहती थी। उन दोनोंं स्त्रियों के मध्य परस्पर बहुत प्रेम भाव था। दोनोंं ही एक दूसरे के भक्ति भाव और धर्म की प्रति पूर्ण सम्मान की भावना रखती थी। जब किसी को कोई समस्या होती तो दूसरी उसका साथ देती, दोनोंं ही वृद्धाएँ स्वभाव से भी बहुत सरल और सज्जन थीं। भगवान की सेवा के* *अतिरिक्त उनका जो भी समय शेष होता था वह दोनोंं एक दूसरे के साथ ही व्यतीत करती थीं।💠

💠एक बार हिन्दू वृद्धा को एक माह के लिए तीर्थ यात्रा का अवसर प्राप्त हुआ उसने दूसरी स्त्री से भी साथ चलने का आग्रह किया किन्तु वृद्धावस्था के कारण अधिक ना चल पाने के कारण उस स्त्री ने अपनी विवशता प्रकट कर दी। हिन्दु वृद्धा ने कहा कोई बात नहीं मैं जहाँ भी जाऊँगी भगवान् से तुम्हारे लिए प्रार्थना करुँगी फिर वह बोली मैं तो एक माह के लिए चली जाऊँगी तब तक मेरे पीछे मेरे लड्डू गोपाल का ध्यान रखना। उस जैन वृद्धा ने सहर्ष ही उसका यह अनुरोध स्वीकार कर लिया। हिन्दू वृद्धा ने उस जैन वृद्धा को लड्डू गोपाल की सेवा के सभी नियम व आवश्यकताएँ बता दीं। उस जैन वृद्धा ने सहर्ष सब कुछ स्वीकार कर लिया।💠

💠कुछ दिन बाद वह हिन्दू वृद्धा तीर्थ यात्रा के लिए निकल गई। उसके जाने के बाद लड्डू गोपाल की सेवा का कार्य जैन वृद्धा ने अपने हाथ में लिया। वह बहुत उत्त्साहित थी कि उसको लड्डू गोपाल की सेवा का अवसर प्राप्त हुआ। उस दिन उसने बड़े प्रेम से लड्डू गोपाल की सेवा की। भोजन कराने से लेकर रात्रि में उनके शयन तक के सभी कार्य पूर्ण श्रद्धा के साथ वैसे ही पूर्ण किए जैसे उसको बताए गए थे। लड्डू गोपाल के शयन का प्रबन्ध करके वह भी अपने घर शयन के लिए चली गई।💠

💠अगले दिन प्रातः जब वह वृद्धा लड्डू गोपाल की सेवा के लिए हिन्दू स्त्री के घर पहुँची तो उसने सबसे पहले लड्डू गोपाल को स्नान कराने की तैयारी की। नियम के अनुरूप जब वह लड्डू गोपाल को स्नान कराने लगी तो उसने देखा की लड्डू गोपाल के पाँव पीछे की और मुड़े हुए हैं। उसने पहले कभी लड्डू गोपाल के पाँव नहीं देखे थे, जब भी उनको देखा वस्त्रों में ही देखा था। वह नहीं जानती थी कि लड्डू गोपाल के पाँव हैं ही ऐसे, घुटनों के बल बैठे हुए।
 लड्डू गोपाल के पाँव पीछे की ओर देख कर वह सोचने लगी अरे मेरे लड्डू गोपाल को यह क्या हो गया इसके तो पैर मुड़ गए है। उसने उस हिन्दू वृद्धा से सुन रखा था की लड्डू गोपाल जीवंत होते हैं। उसने मन में विचार किया कि मैं इनके पैरो की मालिश करुँगी हो सकता है इनके पाँव ठीक हो जायें। बस फिर क्या था भक्ति भाव में डूबी उस भोली भाली वृद्धा ने लड्डू गोपाल के पैरों की मालिश आरम्भ कर दी। उसके बाद वह नियम से प्रतिदिन पांच बार उनके पैरों की मालिश करने लगी। उस भोली वृद्धा की भक्ति और प्रेम देख कर ठाकुर जी का हृदय द्रवित हो उठा। भक्त वत्सल भगवान् अपनी करुणावश अपना प्रेम उस वृद्धा पर उड़ेल दिया।💠

💠एक दिन प्रातः उस जैन वृद्धा ने देखा की लड्डू गोपाल के पाँव ठीक हो गए हैं और वह सीधे खड़े हो गए हैं, यह देख कर वह बहुत प्रसन्न हुई और दूसरी स्त्री के आने की प्रतीक्षा करने लगी।💠

💠कुछ दिन पश्चात् दूसरी स्त्री वापस लौटी तो उसने घर आकर सबसे पहले अपने लड्डू गोपाल के दर्शन किये किन्तु जैसे ही वह लड्डू गोपाल के सम्मुख पहुँची तो देखा कि वह तो अपने पैरों पर सीधे खड़े हैं। यह देखकर वह अचंभित रह गई।💠

💠वह तुरन्त उस दूसरी स्त्री के पास गई और उसको सारी बात बताई और पूछा कि मेरे लड्डू गोपाल कहां गए?*

💠यह सुनकर उस जैन स्त्री ने सारी बात बता दी।💠

💠उसकी बात सुनकर वह वृद्ध स्त्री सन्न रह गई और उसको लेकर अपने घर गई। वहाँ जाकर उसने देखा तो लड्डू गोपाल मुस्करा रहे थे।💠

💠वह लड्डू गोपाल के चरणों में गिर पड़ी और बोली - हे गोपाल! आपकी लीला निराली है। मैंने इतने वर्षो तक आपकी सेवा की किन्तु आपको नहीं पहचान सकी तो वह उस जैन वृद्धा से बोली कि, तू धन्य है! तुझको नहीं मालूम कि हमारे लड्डू गोपाल के पाँव तो ऐसे ही हैं, पीछे की ओर किन्तु तेरी भक्ति और प्रेम ने तो लड्डू गोपाल के पाँव भी सीधे कर दिये।💠

💠उस दिन के बाद उन दोनोंं स्त्रियों के मध्य प्रेम भाव और अधिक बढ़ गया। दोनोंं मिलकर लड्डू गोपाल की सेवा करने लगीं। वह दोनोंं स्त्रियां जब तक जीवित रहीं तब तक लड्डू गोपाल की सेवा करती रहीं।💠
💠"जय जय श्री राधे कृष्ण जी "💠

+450 प्रतिक्रिया 85 कॉमेंट्स • 262 शेयर

कामेंट्स

Sanjay parashar Jan 19, 2021
Happy Tuesday 🍁🌷🍁🌷🍁🌷🍁🌷🍁🌷🍁🌷🍁🌷🍁🌷🍁🌷🍁 jai Mata di 🌹🌹 Jai Shri Krishna 💐💐 jai Hanuman ji Maharaj ki kripa Aap per Or aapke parivar per hamesha bani Rahe 🍁🎄🎄🎄🎄 jai shiree Ram 🌻🌻 Radhe Radhe 🌻🌻 good morning my lovely sister 👌👋👋

मेरे साईं (indian women) Jan 19, 2021
🙏🌹🕉️ ॐ हं हनुमते नमः जय श्री राम जय श्री हनुमान जी शुभ मंगलवार आप सब का दिन मंगलमय हो और खुशियों से भरा रहे प्रभु श्री राम और हनुमान जी की कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे 🕉️🌹🙏

RAJ RATHOD Jan 19, 2021
🙏जय बजरंग 🙏 बजरंग जी का शुभ दिन मंगलवार की सुबह का सप्रेम नमस्कार 🌹🌹बजरंग जी की कृपा से आपका हर पल शुभ हो 🌺🌺

N. K. M. Jan 19, 2021
ji sahi kaha preem vo hea jo dev ko bhee bandhan me kar leta yahi mahimaa is 4sabd ki radhaa pukaare krishnaa bhaaga chala aaye raam pukaare hanumaan pahuch jaaye per hamaari pukaar kyu naa sun paaye jai dukh bhanjan kast haran mangal karan maruti nandan shree ramdutay namaha su prabhat vandan preeti ji jai jinender ji 🌹🌹🙏🌹🌹❤

Sushil Kumar Sharma 🙏🙏🌹🌹 Jan 19, 2021
Good Morning My Sweet Sister ji 🙏🙏 Jay Shree Ram 🙏🙏🌹💐🌷🌹 Jay Veer Hanuman 🙏🙏🌹💐🌷🌷🌹🌹 Jay Bhajanvali 🙏🙏🌹🌹🌹 Ki Kripa Dristi Aap Our Aapke Priwar Per Hamesha Sada Bhni Rahe ji 🙏 Aapka Har Din Shub Mangalmay Ho ji 🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹💐🌷🥀🥀🥀🥀🥀💐🌷💐🌷💐🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹.

अर्जुन वर्मा Jan 19, 2021
!! श्री सीताराम जी एवं श्री हनुमान जी की कृपा एवं आशीर्वाद आप और आपके पूरे परिवार जनों पर सदैव बनी रहे!!🙏🌿🌿🌿🌿🌹🌹🌹🌹 !!आप स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें!!🙏😊 !! इसी मंगल कामना के साथ!!सुप्रभात वंदन जी!!🙏

shohana sing Jan 19, 2021
राम राम जी जय श्री कृष्ण जी प्रात: काल वंदन अंजनी पुत्र श्री हनुमान जी की कृपा आप और आपके परिवार पर बनी रहें आपका दिन शुभ रहें जय श्री राम जय हनुमान जय महादेव

pawanthakur🙏🙏9716955827 Jan 19, 2021
🙏🙏जय श्री राम माँ जानकी जी की 🙏🙏से सह परिवार मंगलमय हो आप सदा खुश 🙏🙏रहे 🌷🌷शुभ दोपहर वंदना जी 🌷🌷

🇮🇳🇮🇳GEETA DEVI🇮🇳🇮🇳 Jan 19, 2021
🌷🌷JAI SHREE RAM 🌷🌷 💐🙏BEAUTIFUL GOOD AFTERNOON MY SWEET SISTER JI 🙏💐 🍃🌹🙏I WISH FOR YOUR GOOD HEALTH AND SMILE🙏🌹🍃 HAVE A GREAT DAY 🍫🍫🍒🍒🤗🤗👌👌🎈🎈🎉🙏🙏🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃🏵🍃💐💐💐💐💐💐💐💐💐

ds.khede Jan 19, 2021
🙏🌹जय श्री बजररंगबली की 🙏🌹जय श्री कृष्ण ।राधे राधे जी ।भगवान आप की सभी मनोकामनाएं पूरी करे।🌹🙏 🙏🌹 शुभ दोपहर स्नेह वन्दनजी ।।🌹🙏 अद्भुत कथा । जय जिनेन्द्र जी

Poonam Aggarwal Jan 19, 2021
🚩 JAY SHREE RAM 🚩🙏🎪 राम भक्त हनुमान जी सदैव आपकी रक्षा एवं मंगल करे 👣🐾 आपका हर पल खुशियों से भरा रहे आप सभी खुश और स्वस्थ रहे शुभ दोपहर वंदन प्यारी सखी 👸☕☕👈🙋 RADHE RADHE JI 🌹 🙏 Jai jinendra 🙏🌹

madan pal 🌷🙏🏼 Jan 19, 2021
जय श्री राम जी शुभ रात्रि वंदन जी पवन सुत हनुमान जी की कृपा आप व आपके परिवार पर बनीं रहे जी 🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷🙏🏼🌷🙏🏼

Narayan Tiwari Jan 19, 2021
|| जय हनुमान🚩जय सियाराम || हे दुःख भन्जन, मारुती नंदन, सुन लो मेरी पुकार । पवनसुत विनती बारम्बार ॥🙏

लक्ष्मी नारायण ♥ एक बार भगवान नारायण लक्ष्मी जी को बोले, “लोगो में कितनी भक्ति बढ़ गयी है …. सब “नारायण नारायण” करते है!” ..तो लक्ष्मी जी बोली, “आप को पाने के लिए नहीं!:-) मेरे को पाने के लिए भक्ति बढ़ गयी है!” ..तो भगवान बोले, “लोग “लक्ष्मी लक्ष्मी” ऐसा जप थोड़े ही ना करते है!” ..तो माता लक्ष्मी बोली की , “विश्वास ना हो तो परीक्षा हो जाए!" 🙂 ..भगवान नारायण एक गाँव में ब्राम्हण का रूप लेकर गए…एक घर का दरवाजा खटखटाया…घर के यजमान ने दरवाजा खोल कर पूछा , “कहाँ के है?” तो भगवान बोले, “हम तुम्हारे नगर में भगवान का कथा कीर्तन करना चाहते है…” ..यजमान बोला, “ठीक है महाराज, जब तक कथा होगी आप मेरे घर में रहेना…” …गाँव के कुछ लोग इकठठा हो के सब तैय्यारी कर दी….पहेले दिन कुछ लोग आये…अब भगवान स्वयं कथा करते तो गर्दी बढ़ी! 2रे 3 रे दिन और भी भीड़ हो गयी….भगवान खुश हो गए..की कितनी भक्ति है लोगो में….! लक्ष्मी माता ने सोचा अब जाने जैसा है ! 🙂 ..लक्ष्मी माता ने बुढ्ढी माता का रूप लिया….और उस नगर में पहुंची…. एक महिला ताला बंद कर के कथा में जा रही थी की , माता पहुंची! बोली, “बेटी ज़रा पानी पिला दे!” तो वो महिला बोली,”माताजी , साढ़े 3 बजे है…मेरे को प्रवचन में जाना है!” ..लक्ष्मी माता बोली..”पिला दे बेटी थोडा पानी…बहोत प्यास लगी है..” तो वो महिला लोटा भर के पानी लायी….माता ने पिया और लोटा लौटाया तो सोने का हो गया था!! 🙂 ..महिला अचंबित हो गयी की लोटा दिया था तो स्टील का और वापस लिया तो सोने का! कैसे चमत्कारिक माता जी है!..अब तो वो महिला हाथा-जोड़ी करने लगे की , “माताजी आप को भूख भी लगी होगी ..खाना भी खा लीजिये..!” ये सोचे की खाना खाएगी तो थाली भी, कटोरी भी सोने की हो जाए!! माता लक्ष्मी बोली, “तुम जा बेटी, तेरा टाइम हो गया!” ..वो महिला प्रवचन में तो आई तो सही …लेकिन आस-पास की महिलाओं को सारी बात बतायी…. ..अब महिलायें वो बात सुनकर चालु सत्संग में से उठ के गयी !! दुसरे दिन से कथा में लोगो की संख्या कम हो गयी….तो भगवान ने पूछा की , “लोगो की संख्या कैसे कम हो गयी?” …. किसी ने कहा एक चमत्कारिक माताजी आई है नगर में… जिस के घर दूध पीती तो ग्लास सोने का हो जाता…. थाली में रोटी सब्जी खाती तो थाली सोने की हो जाती!… उस के कारण लोग प्रवचन में नहीं आते..” ..भगवान नारायण समझ गए की लक्ष्मी जी का आगमन हो चुका है! इतनी बात सुनते ही देखा की जो यजमान सेठ जी थे, वो भी उठ खड़े हो गए….. खिसक गए! ..पहुंचे माता लक्ष्मी जी के पास! बोले, “ माता मैं तो भगवान की कथा का आयोजन करता और लक्ष्मी जी माता आप ने मेरे घर को छोड़ दिया!” माता लक्ष्मी बोली, “तुम्हारे घर तो मैं सब से पहेले आनेवाली थी!लेकिन तुम्हारे घर में जिस कथाकार को ठहेराया है ना , वो चला जाए तो मैं अभी आऊं !” सेठ जी बोला, “बस इतनी सी बात!… अभी उन को धरम शाला में कमरा दिलवा देता हूँ!” ..जैसे ही महाराज कथा कर के घर आये तो सेठ जी बोला, “महाराज बिस्तरा बांधो!आप की व्यवस्था धरम शाला में कर दी है!!” महाराज बोले, “ अभी 2/3 दिन बचे है कथा के….. यही रहेने दो” सेठ बोला, “नहीं नहीं, जल्दी जाओ!मैं कुछ नहीं सुनने वाला!” ..इतने में लक्ष्मी जी आई , कहा की , “सेठ जी , आप थोड़ा बाहर जाओ… मैं इन से निबट लूँ!” 🙂 माता लक्ष्मी जी बोली, “प्रभु , अब तो मान गए?” 🙂 भगवान नारायण बोले, “हां लक्ष्मी तुम्हारा प्रभाव तो है, लेकिन एक बात तुम को भी मेरी माननी पड़ेगी की तुम तब आई, जब संत के रूप में मैं यहाँ आया!! संत जहां कथा करेंगे वहाँ लक्ष्मी तुम्हारा निवास जरुर होगा…!!” Apna Bana Ke Dekho ddtSposnsor2hed · तीनो लोकन से प्यारी राधा रानी हमारी राधा रानी हमारी राधा रानी हमारी

+520 प्रतिक्रिया 126 कॉमेंट्स • 496 शेयर

👍🌹 राम राम दोस्तों 🌹👍 *दूसरा पहलू* ००००००००००००० एक समय संत प्रात: काल भ्रमण हेतू समुद्र के किनारे गए! समुद्र के किनारे उन्होने एक पुरुष को देखा जो एक स्त्री की गोद में सर रख कर सोया हुआ था । पास में शराब की खाली बोतल पड़ी हुई थी। संत बहुत दु:खी हुए! उन्होने ये विचार किया की ये मनुष्य कितना बेकार हैं! जो प्रात:काल शराब सेवन कर के स्त्री की गोदी में सर रख कर प्रेमालाप कर रहा हैं! थोड़ी देर बाद समुद्र से बचाओ, बचाओ की आवाज आई, संत नें देखा की एक मनुष्य समुद्र में डूब रहा हैं! मगर स्वयं को तैरना नहीं आने के कारण वो संत देखने के सिवाय कुछ नहीं कर सकते थे! स्त्री की गोद में सिर रख कर सोया हुआ व्यक्ति उठा और डूबने वाले को बचाने हेतू पानी में कूद गया! थोड़ी देर में उसने डूबने वाले को बचा लिया और किनारे ले आया! संत विचार में पड़ गए की इस व्यक्ति को बुरा कहें या भला! वो उसके पास गए और बोले भाई तूं कौन हैं और यहां क्या कर रहा हैं? उस व्यक्ति ने उत्तर दिया की में एक मछुआरा हूं और मछली मारनें का काम करता हूं.आज कई दिनों से समुद्र से मछली पकड़ कर प्रात: जल्दी यहां लौटा हूं। मेरी मां मुझे लेने के लिए आई थी और साथ में(घर में कोई दूसरा बर्तन नहीं होने पर)इस दारू की बोतल में पानी ले आई. कई दिनो की यात्रा से में थका हुआ था और भोर के सुहावने वातावरण में ये पानी पी कर थकान कम करने हेतू मां की गोदी में सिर रख कर ऐसे ही सो गया. संत की आंखों में आंसु आ गए की मैं कैसा मनुष्य हूं जो देखा उसके बारे में गलत विचार किया । जिसकी वास्तविकता अलग थी! दोस्तों............ *इसीलिए कहते हैं कानों सुना और आँखों देखा भी झूठ हो सकता है क्योंकि कई बार हम जो देखते हैं वो सच नहीं होता। उसका एक दूसरा पहलू भी हो सकता है,किसी के प्रति कोई निर्णय लेने से पहले सौ बार सोचो.* 👍🌹 जय श्री कृष्णा 🌹👍

+358 प्रतिक्रिया 93 कॉमेंट्स • 374 शेयर

ओम नमः श्री लक्ष्मीनारायण 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏 *भक्त की दरिद्रता* ***************************** जगत−जननी पार्वती ने एक भूखे भक्त को श्मशान में चिता के अंगारों पर रोटी सेंकते देखा तो उनका कलेजा मुँह को आ गया। वह दौड़ी−दौड़ी ओघड़दानी शंकर के पास गयीं और कहने लगीं−”भगवन्! मुझे ऐसा लगता है कि आपका कठोर हृदय अपने अनन्य भक्तों की दुर्दशा देखकर भी नहीं पसीजता। कम−से−कम उनके लिए भोजन की उचित व्यवस्था तो कर ही देनी चाहिए। देखते नहीं वह बेचारा भर्तृहरि अपनी कई दिन की भूख मृतक को पिण्ड के दिये गये आटे की रोटियाँ बनाकर शान्त कर रहा है।” महादेव ने हँसते हुए कहा- “शुभे! ऐसे भक्तों के लिए मेरा द्वार सदैव खुला रहता है। पर वह आना ही कहाँ चाहते हैं यदि कोई वस्तु दी भी जाये तो उसे स्वीकार नहीं करते। कष्ट उठाते रहते हैं फिर ऐसी स्थिति में तुम्हीं बताओ मैं क्या करूं?” माँ भवानी अचरज से बोलीं- “तो क्या आपके भक्तों को उदरपूर्ति के लिए भोजन को आवश्यकता भी अनुभव नहीं होती?” श्री शिव जी ने कहा- “परीक्षा लेने की तो तुम्हारी पुरानी आदत है यदि विश्वास न हो तो तुम स्वयं ही जाकर क्यों न पूछ लो। परन्तु परीक्षा में सावधानी रखने की आवश्यकता है।” भगवान शंकर के आदेश की देर थी कि माँ पार्वती भिखारिन का छद्मवेश बनाकर भर्तृहरि के पास पहुँचीं और बोली- ”बेटा! मैं पिछले कई दिन से भूखी हूँ। क्या मुझे भी कुछ खाने को देगा?” “अवश्य" भर्तृहरि ने केवल चार रोटियाँ सेंकी थीं उनमें से दो बुढ़िया माता के हाथ पर रख दीं। शेष दो रोटियों को खाने के लिए आसन लगा कर खाने का उपक्रम करने लगे। भिखारिन ने दीन भाव से निवेदन किया- "बेटा! इन दो रोटियों से कैसे काम चलेगा? मैं अपने परिवार में अकेली नहीं हूँ एक बुड्ढा पति भी है उसे भी कई दिन से खाने को नहीं मिला है।” भर्तृहरि ने वे दोनों रोटियाँ भी भिखारिन के हाथ पर रख दीं। उन्हें बड़ा सन्तोष था कि इस भोजन से मुझसे भी अधिक भूखे प्राणियों का निर्वाह हो सकेगा। उन्होंने कमण्डल उठाकर पानी पिया। सन्तोष की साँस ली और वहाँ से उठकर जाने लगे। तभी आवाज सुनाई दी- "वत्स! तुम कहाँ जा रहे हो?" भर्तृहरि ने पीछे मुड़ कर देखा। माता पार्वती दर्शन देने के लिए पधारी हैं। माता बोलीं- "मैं तुम्हारी साधना से बहुत प्रसन्न हूँ। तुम्हें जो वरदान माँगना हो माँगो।" प्रणाम करते हुए भर्तृहरि ने कहा- "अभी तो अपनी और अपने पति की क्षुधा शाँत करने हेतु मुझसे रोटियाँ माँगकर ले गई थीं। जो स्वयं दूसरों के सम्मुख हाथ फैला कर अपना पेट भरता है वह क्या दे सकेगा। ऐसे भिखारी से मैं क्या माँगू।" पार्वती जी ने अपना असली स्वरूप दिखाया और कहा- "मैं सर्वशक्ति मान हूँ। तुम्हारी पर दुःख कातरता से बहुत प्रसन्न हूँ जो चाहो सो वर माँगो।" भर्तृहरि ने श्रद्धा पूर्वक जगदम्बा के चरणों में शिर झुकाया और कहा- "यदि आप प्रसन्न हैं तो यह वर दें कि जो कुछ मुझे मिले उसे दीन−दुखियों के लिए लगाता रहे और अभावग्रस्त स्थिति में बिना मन को विचलित किये शान्त पूर्वक रह सकूँ।" पार्वती जी 'एवमस्तु' कहकर भगवान् शिव के पास लौट गई। त्रिकालदर्शी शम्भु यह सब देख रहे थे उन्होंने मुसकराते हुए कहा- "भद्रे, मेरे भक्त इसलिए दरिद्र नहीं रहते कि उन्हें कुछ मिलता नहीं है। परंतु भक्ति के साथ जुड़ी उदारता उनसे "अधिकाधिक दान" कराती रहती हैं और वे खाली हाथ रहकर भी विपुल सम्पत्तिवानों से अधिक सन्तुष्ट बने रहते है।" हर-हर महादेव..!! >>>>>>>>>>>>>>>>>>> 11 >>>>>>>>>>>> प्रभु कृपा की महत्ता आज इस माया से भरे संसार में सत्कर्म करने की इच्छा किसी की नहीं होती है । सब अपनी वासनाओं / इन्द्रियों को पुष्ट करने में लगे रहते हैं । प्रभु कृपा होने पर ही जीव की सत्कर्म करने की इच्छा जागृत होती है । अतः प्रभु कृपा प्राप्त करने के लिए धर्म के मौलिक सिद्धांतो का अनुकरण करते हुए ब्रह्म को धारण करिये l >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> II जय श्रीहरिः II शरणागति क्या है ? शरणागति के 4 प्रकार है --- 1. जिह्वा से भगवान के नाम का जप- भगवान् के स्वरुप का चिंतन करते हुए उनके परम पावन नाम का नित्य निरंतर निष्काम भाव से परम श्रद्धापूर्वक जप करना तथा हर समय भगवान् की स्मृति रखना। 2. भगवान् की आज्ञाओं का पालन करना- श्रीमद्भगवद्गीता जैसे भगवान् के श्रीमुख के वचन, भगवत्प्राप्त महापुरुषों के वचन तथा महापुरुषों के आचरण के अनुसार कार्य करना। 3. सर्वस्व प्रभु के समर्पण कर देना-वास्तव मे तो सब कुछ है ही भगवान् का,क्योंकि न तो हम जन्म के समय कुछ साथ लाये और न जाते समय कुछ ले ही जायेंगे। भ्रम से जो अपनापन बना रखा है,उसे उठा देना है। 4 .भगवान् के प्रत्येक विधान मे परम प्रसन्न रहना-मनचाहा करते-करते तो बहुत-से जन्म व्यतीत कर दिए,अब तो ऐसा नही होना चाहिए।अब तो वही हो जो भगवान् चाहते है। भक्त भगवान् के विधानमात्र मे परम प्रसन्न रहता है फिर चाहे वह विधान मन,इंद्रिय और शरीर के प्रतिकूल हो या अनुकूल।I II ॐ नमो नारायणायः ी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, " जीवन का सत्य आत्मिक कल्याण है ना की भौतिक सुख !" ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, "सत्य वचन में प्रीति करले,सत्य वचन प्रभु वास। सत्य के साथ प्रभु चलते हैं, सत्य चले प्रभु साथ।। " ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, किसी भी गौशाला में जाकर गौ सेवा करे और गोरक्षा की आवाज को समाज में बुलंद करे !गौ माता के जीवन को किसी भी धर्म विशेष के लोगो से इतना खतरा नहीं है जितना काले अंग्रेजो से है जो गौ मांस का निर्यात बढ़ाने के लिए कसाई घरों को अंशदान ( सब्सिडी ) देती है ! इस प्रकार गौवंश समाप्त करने और खेतों से जैविक खाद को गायब कर यूरिआ को बढ़ावा देने का प्रयास सफल हो रहा है ! गौ माता को बचाये और देवताओं का आशीर्वाद एवं कृपा प्राप्त करे ! साथ ही अपने प्रारब्ध ( भाग्य ) में पुण्य संचित करे ! यह एक ऐसा पुण्य है जिससे इहलोक में देवताओ से सुख समृद्धि मिलती है एवं परलोक में स्वर्ग ! 🙏👏🌹🌲🌿🌹 इस घोर कलियुग में वही परिवार सुख पायेगा ! गौमाता को पहली रोटी देकर हरिनाम गुण गायेगा !! दया प्रेम सब जीवों पर करके सेवाभाव अपनायेगा ! गुरूजनों की आज्ञा मान माता पिता के चरण दबायेगा !! गीता रामायण भागवत के द्वारा सोये मन को जगाता हूँ ! भूखों को भोजन पानी देकर पशु पंक्षियों को चुगाता हूँ !! ईष्या,क्रोध ,आलस्य,वैमनष्यता ,बुराई का त्याग करे ! सेवा,प्रेम,करूणा,ममता,दया,क्षमा को अपनाये !! 🙏जय गौमाता जय गोपाल जय गुरूदेव🙏 निवेदन = यदि आप यह सोचते है की देवलोक गौशाला के लेखों को पढ़कर विचारों में " परिपक्वत्ता एवं सुन्दर प्रवृतियों " का आगमन होता है तो हमारे लेखो को दूसरे ग्रुप्स में पोस्ट्स / शेयर करे जिससे दूसरे वंचित रह रहे लोग भी पढ़ सके ! आपको बहुत ही पुण्य प्राप्त होगा ! *संकलित*

+432 प्रतिक्रिया 103 कॉमेंट्स • 338 शेयर

*मौत का भय* दो उल्लू एक वृक्ष पर आ कर बैठे थे। एक ने अपने मुंह में सांप को दबोच रखा था। दूसरा उल्लू एक चूहा पकड़ लाया था। दोनों वृक्ष पर पास—पास बैठे थे —सांप ने चूहे को देखा तो वह यह भूल ही गया कि वह उल्लू के मुंह में है और मौत के करीब है, चूहे को देख कर उसके मुंह में लार बहने लगी। चूहे ने जैसे ही सांप को देखा वह कांपने लगा, जबकि दोनों ही मौत के मुंह मे बैठे हैं। दोनों उल्लू बड़े हैरान हुए। एक उल्लू ने दूसरे उल्लू से पूछा कि भाई, इसका कुछ राज समझे? दूसरे ने कहा, बिल्कुल समझ में आया। पहली बात तो यह है कि जीभ की इच्छा इतनी प्रबल है कि सामने मृत्यु खड़ी हो तो भी दिखाई नहीं पड़ती। दूसरी बात यह समझ में आयी कि भय मौत से भी बड़ा भय है। मौत सामने खड़ी है, उससे यह भयभीत नहीं है चूहा; लेकिन भय से भयभीत है कि कहीं सांप हमला न कर दे। *शिक्षा:-* हम भी मौत से भयभीत नहीं हैं, भय से ज्यादा भयभीत हैं। ऐसे ही जिह्वा का स्वाद इतना प्रगाढ़ है कि मौत चौबीस घंटे खड़ी है, फिर भी हमें दिखाई नहीं पड़ती है और हम अंधे होकर कुछ भी डकारते रहते हैं। *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*shree ganesha namah ji🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹

+582 प्रतिक्रिया 122 कॉमेंट्स • 666 शेयर
Braj Kishor Dwivedi Feb 26, 2021

+18 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 308 शेयर

+54 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 240 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB