Jai shri radhe krishna ☀️🌛☀️🌛☀️🌛☀️🌛☀️🌛 🌚🌚🌚🌚🌚🌚🌚🌚🌚🌚🌚

+737 प्रतिक्रिया 144 कॉमेंट्स • 233 शेयर

कामेंट्स

madan pal Singh 🙏🏼 Sep 29, 2020
jai shree radhe Radhe kirisana Jiiii shubh parbhat jiii aapka har pal shub magalmay hoo Jiiii 🌹🙏🏻🕉️🌹🙏🏻

Sumitra Soni Sep 29, 2020
राम राम 🙏🏻🌹🌴 बहना हनुमान जी के आशीर्वाद से आपके सभी कार्य संपन्न हो आप और आपका परिवार सदैव सुखी रहे स्वस्थ रहे आपका हर पल खुशियों भरा हो बहना🌴🙏🏻🌹

दादाजी 🌷 Sep 29, 2020
ॐ हनुमते नमः🙏🌹 शुभ मंगलवार मेरी प्यारी बहन💐

annu Sep 29, 2020
⛱⛱⛱⛱⛱⛱⛱⛱⛱⛱ " *गीता*" में लिखा है अगर आपको कोई अच्छा लगता है ... तो अच्छा वो नहीं, बल्कि अच्छे आप हो.. क्योंकि उसमे अच्छाई देखने वाली " *नज़र*" आपके पास है..... •●‼ *आपका दिन शुभ हो* ‼●• 🌿🌺💐🌺🌿 ---------------- 🌺🌺💐माता रानी आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी करें जय माता दी 💐🌺🌺 शुभ दोपहर 💐💐🌺🌺🌺 ----------------

Poonam Aggarwai Sep 29, 2020
🚩 जय श्री राम जय हनुमान 🚩🙏🎪 राम भक्त हनुमान जी सदैव आपकी रक्षा एवं मंगल करे 👣 आप सभी खुश और स्वस्थ रहे शुभ संध्या वंदन प्यारी बहना जी राधे कृष्णा जी ‼️👏🌹🌹🦋🦋📿📿

GOVIND CHOUHAN Sep 29, 2020
JAI SHREE RADHEY RADHEY KRISHNAJI 🌹 SUBH RATRI VANDAN PRNAM JII DIDI 🙏 🙏 🌷 🌷 👏 👏

Alka Devgan Sep 29, 2020
Jai Mata Di 🙏 Matarani bless you and your family aapka har pal mangalmay n shubh ho sister ji Matarani aap sabhi ko kushiyan pradhan karein di aap sabhi ko swasth n prassan rakhein shubh ratri vandan sister ji Jai Mata Di 🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Sukanya Sharan Sep 30, 2020
Ganpati Bappa ji ka Ashirwad Hamesha Aap aur Aapki family ke Saath bani rahe Aapka har pal khushiyo se bhara ho ⚘⚘⚘⚘

Babita Sharma Sep 30, 2020
सुप्रभात बहना 🙏⚘⚘ गजानन महाराज आप के सभी मनोरथ पूर्ण करें।आज का दिन शुभ फलदायक हो ऐसी मंगलकामना है 🙏🙏जय श्री गणेशाय नमः

🔴 Suresh Kumar 🔴 Sep 30, 2020
Om gan ganpataye namah Shubh prabhat vandan meri behan 🌼🌼🌼🌼 Ganpati Bappa Ji ki Kripa app par v aapke parivar par sada bani rahe 🌹🌹

Vinod Agrawal Sep 30, 2020
🙏🌹जय श्री गणेश देवा गणपति बप्पा मोरया जय श्री राधे कृष्णा 🌹🙏

annu Sep 30, 2020
💓 एक डॉक्टर के क्लिनिक में... लिखी हुई एक बेहतरीन लाइन *"दवाई में कुछ भी मजा नही है"* और *"मजे जैसी कोई दवाई नही है"* 💞 *Enjoy Life* 💞. 🌻🌹🌻Good afternoon🌻🌹🌻 👍🌹Have a Good Day 👍🌹

Yashwant Kunwar Rajput wo Sep 30, 2020
श्री गणेशाय नमः 🌹🙏🌹 शुभ मंगलमय हो आप का हर पल प्यारी बहना जी 🙏🌹🙏 हरे कृष्णा 🙏 राधे राधे 🙏💐🌹

Sonu Pathak Sep 30, 2020
🙏🌿🌹ऊँ गं गणपतये नमः श्री गणेशाय नमः 🌹🌿🙏 🙏🌹जय माता रानी दी विघ्नहर्ता की कृपा दृष्टी आप व आपके परिवार पर सदैव बनी रहै आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो 🕉️🙏🕉️ नमस्कार शुभ संध्या प्यारी बहना जी 🌻🌿🌹🌿🌻

🔱🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕🔱 Sep 30, 2020
🚩💐🐚जय श्री गणेश 🐚💐🚩 💝🙏शुभ संध्या वंदन दीदी🙏💝 🌹वक्रतुण्ड महाकाय सुर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्ये षुसर्वदा🥀 🎭आप और आपके पूरे परिवार पर श्री गणेश जी की आशिर्वाद हमेशा बनी रहे जी 🥀 🎭आपका संध्या शुभ और मंगलमय हो🌹

🔴 Suresh Kumar 🔴 Oct 1, 2020
Om namah bhagwate vasudeway namah 🏵️🏵️ Shubh prabhat vandan meri behan 🌼🌼🌼🌼

Neha Sharma, Haryana Oct 1, 2020
🙏*ऊँ नमो भगवते श्री वासुदेवाये नमः*🙏 🌷🙏*शुभ बृहस्पतिवार*🙏🌷 🙏🌷*ईश्वर की असीम कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे जी। आपका हर पल शुभ व मंगलमय हो बहनाजी*🌷🙏 🌷🙏*जय - जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌷

Kamla Rawat Oct 1, 2020
Radhe Radhe ji 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

jatan kurveti Oct 24, 2020

+24 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 59 शेयर
Jai Mata Di Oct 24, 2020

+87 प्रतिक्रिया 22 कॉमेंट्स • 28 शेयर

आज का श्लोक:      श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप             अध्याय 02 :                     गीता का सार                            श्लोक--12 ❁ *श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप* ❁ *सभी के लिए सनातन शिक्षाएं* *आज* *का* *श्लोक* -- 02.12 *अध्याय 02 : गीता का सार* नत्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः | न चैव नभविष्यामः सर्वे वयमतः परम् || १२ || न – नहीं; तु– लेकिन; एव– निश्चय ही; अहम्– मैं; जातु– किसी काल में; न– नहीं; आसम्– था; न– नहीं; त्वम्– तुम; न– नहीं; इमे– ये सब; जन-अधिपाः– राजागण; न– कभी नहीं; च– भी; एव– निश्चय ही; न– नहीं; भविष्यामः– रहेंगे; सर्वे वयम् – हम सब; अतः परम्– इससे आगे | ऐसा कभी नहीं हुआ कि मैं न रहा होऊँ या तुम न रहे हो अथवा ये समस्त राजा न रहे हों; और न ऐसा है कि भविष्य में हम लोग नहीं रहेंगे | तात्पर्यः वेदों में, कठोपनिषद् में तथाश्र्वेताश्र्वतरउपनिषद् में भी कहा गया है कि जो श्रीभगवान् असंख्य जीवों के कर्म तथा कर्मफल के अनुसार उनकी अपनी-अपनी परिस्थितियों में पालक हैं, वही भगवान् अंश रूप में हर जीव के हृदय में वास कर रहे हैं | केवल साधु पुरुष, जो एक ही ईश्र्वर को भीतर-बाहर देख सकते हैं, पूर्ण और शाश्र्वत शान्ति प्राप्त कर पाते हैं | नित्यो नित्यानां चेतनश्र्चेतनानाम् एको बहूनां यो विदधाति कामान् | तमात्मस्थं येऽनुपश्यन्ति धीरास्तेषां शान्तिः शाश्र्वती नेतरेषाम् || (कठोपनिषद् २.२.१३) जो वैदिक ज्ञान अर्जुन को प्रदान किया गया वही विश्र्व के उन पुरुषों को प्रदान किया जाता है जो विद्वान होने का दावा तो करते हैं किन्तु जिनकी ज्ञानराशि न्यून है | भगवान् यह स्पष्ट कहते हैं कि वे स्वयं, अर्जुन तथा युद्धभूमि में एकत्र सारे राजा शाश्र्वत प्राणी हैं और इन जीवों की बद्ध तथा मुक्त अवस्थाओं में भगवान् ही एकमात्र उनके पालक हैं | भगवान् परम पुरुष हैं तथा भगवान् का चिर संगी अर्जुन एवं वहाँ पर एकत्र सारे राजागण शाश्र्वत पुरुष हैं | ऐसा नहीं है कि ये भूतकाल में प्राणियों के रूप अलग-अलग उपस्थित नहीं थे और ऐसा भी नहीं है कि वे शाश्र्वत पुरुष बने नहीं रहेंगे | उनका अस्तित्व भूतकाल में था और भविष्य में भी निर्बोध रूप से बना रहेगा | अतः किसी के लिए शोक करने की कोई बात नहीं है | ये मायावादी सिद्धान्त कि मुक्ति के बाद आत्मा माया के आवरण से पृथक् होकर निराकार ब्रह्म में लीन हो जायेगा और अपना अस्तित्व खो देगा यहाँ परम अधिकारी भगवान् कृष्ण द्वारा पुष्ट नहीं हो पाता | न ही इस सिद्धान्त का समर्थन हो पाता है कि बद्ध अवस्था में ही हम अस्तित्व का चिन्तन करते हैं | यहाँ पर कृष्ण स्पष्टतः कहते हैं कि भगवान् तथा अन्यों का अस्तित्व भविष्य में भी अक्षुण्ण रहेगा जिसकी पुष्टि उपनिषदों द्वारा भी होती हैं | कृष्ण का यह कथन प्रमाणिक है क्योंकि कृष्ण मायावश्य नहीं हैं | यदि अस्तित्व तथ्य न होता तो फिर कृष्ण इतना बल क्यों देते और वह भी भविष्य के लिए! मायावादी यह तर्क कर सकते हैं कि कृष्ण द्वारा कथित अस्तित्व अध्यात्मिक न होकर भौतिक है | यदि हम इस तर्क को, कि अस्तित्व भौतिक होता है, स्वीकार कर भी लें तो फिर कोई कृष्ण के अस्तित्व को किस प्रकार पहचानेगा? कृष्ण भूतकाल में भी अपने अस्तित्व की पुष्टि करते हैं और भविष्य में भी अपने अस्तित्व की पुष्टि करते हैं | उन्होंने अपने अस्तित्व की पुष्टि कई प्रकार से की है और निराकार ब्रह्म उनके अधीन घोषित किया जा चुका है | कृष्ण सदा सर्वदा अपना अस्तित्व बनाये रहे हैं; यदि उन्हें सामान्य चेतना वाले सामान्य व्यक्ति के रूप में माना जाता है तो प्रमाणिक शास्त्र के रूप में उनकी भगवद्गीता की कोई महत्ता नहीं होगी | एक सामान्य व्यक्ति मनुष्यों के चार अवगुणों के कारण श्रवण करने योग्य शिक्षा देने में असमर्थ रहता है | गीता ऐसे साहित्य से ऊपर है | कोई भी संसारी ग्रंथ गीता की तुलना नहीं कर सकता | श्रीकृष्ण को सामान्य व्यक्ति मान लेने पर गीता की सारी महत्ता जाती रहती है | मायावादियों का तर्क है कि इस श्लोक में वर्णित द्वैत लौकिक है और शरीर के लिए प्रयुक्त हुआ है | किन्तु इसके पहले वाले श्लोक में ऐसी देहात्मबुद्धि की निन्दा की गई है | एक बार जोवों की देहात्मबुद्धि की निन्दा करने के बाद यह कैसे सम्भव है कि कृष्ण पुनः शरीर पर उसी वक्तव्य को दुहराते? अतः यह अस्तित्व अध्यात्मिक आधार पर स्थापित है और इसकी पुष्टि रामानुजाचार्य तथा अन्य आचार्यों ने भी की है | गीता में कई स्थलों पर इसका उल्लेख है कि यह अध्यात्मिक अस्तित्व केवल भगवद्भक्तों द्वारा ज्ञेय है | जो लोग भगवान् कृष्ण का विरोध करते हैं उनकी इस महान साहित्य तक पहुँच नहीं हो पाती | अभक्तों द्वारा गीता के उपदेशों को समझने का प्रयास मधुमक्खी द्वारा मधुपात्र चाटने के सदृश है | पात्र को खोले बिना मधु को नहीं चखा जा सकता | इसी प्रकार भगवद्गीता के रहस्यवाद को केवल भक्त ही समझ सकते हैं, अन्य कोई नहीं, जैसा कि इसके चतुर्थ अध्याय में कहा गया है | न ही गीता का स्पर्श ऐसे लोग कर पाते हैं जो भगवान् के अस्तित्व का ही विरोध करते हैं | अतः मयावादियों द्वारा गीता की व्याख्या मानो समग्र सत्य का सरासर भ्रामक निरूपण है | भगवान् चैतन्य ने मायावादियों द्वारा की गई गीता की व्याख्याओं को पढने का निषेध किया है और चेतावनी दी है कि जो कोई ऐसे मायावादी दर्शन को ग्रहण करता है वह गीता के वास्तविक रहस्य को समझ पाने में असमर्थ रहता है | यदि अस्तित्व का अभिप्राय अनुभवगम्य ब्रह्माण्ड से है तो भगवान् द्वारा उपदेश देने की कोई आवश्यकता नहीं थी | आत्मा तथा परमात्मा का द्वैत शाश्र्वत तथ्य है और इसकी पुष्टि वेदों द्वारा होती है जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है | ************************************ *प्रतिदिन भगवद्गीता का एक श्लोक* प्राप्त करने हेतु, इस समूह से जुड़े । 🙏🏼 https://telegram.me/DailyBhagavadGita

+17 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 24 शेयर

+10 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 11 शेयर
jamuna das jee Oct 24, 2020

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 8 शेयर
Krishna Mishra Oct 24, 2020

+14 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 12 शेयर
ramesh chand sharma Oct 24, 2020

.🙏कंजूस🙏 एक नगर के बहुत बड़े सेठ का आज देंहात हो गया, उसका एक बेटा था, जो सोचने लगा, कौन आयेंगा मेरे पिताजी की मिट्टी में, जीवन भर तो इन्होनें कोई पुण्य, कोई दान धर्म नही किया बस पैंसे के पीछे भागते रहें, सब लोग कहते है ये तो कंजूसों के भी कंजूस थे, फिर कौन इनकी अंतिम यात्रा में शामिल होगा,, खैर जैसा तैसा कर, रिश्तेदार, कुछ मित्र मिट्टी में शामिल हुये, पर वहाँ भी वही बात, सब एक दूसरे से कहने लगे बड़ा ही कंजूस शख्स था, कभी किसी की मदद नही की, हर वक्त बस पैंसा, पैंसा, यहाँ तक की घरवालों, रिश्तेदारों, तक को भी पैंसे का एक_एक हिसाब ले लेता था, कभी कालोनी के किसी भी कार्यकम्र में एक रूपयें नही दिया, हर वक्त बस ताने दियें, खुद से कर लिया करो, आज देखों दो चार लोग, बस इनकी मिट्टी पर आये हैं, बहुत देर मिट्टी रोकने के बाद कंजूस सेठ के बेटे को किसी ने कहा, अब कोई नही आयेंगा, इन्हें कोई पसंद नही करता था, एक नम्बर के कंजूस थे, कौन आयेगा इनकी मिट्टी पर, अब श्मशान ले जाने की तैयारी करो, बेटे ने हामी भर दी, शरीर को लोग उठाने लगें, पर एकाएक उनकी नजर सामने आती भीड़ पर पड़ी, कोई अंधा, कोई लगड़ा, हजारो की संख्या में महिलाए, बुजर्ग बच्चें, सामने नजर आने लगें, और उस कंजूस सेठ के शरीर के पास आकर फूट_फूट कर रोने लगे, ये कहकर मालिक अब हमारा क्या होगा, आप ही तो हमारे माई_बाप थे, कैसें होगा अब, सारे बच्चों ने उस कंजूस सेठ का पैर पकड़ लिया और बिलख_बिलख कर रोने लगे,,, सेठ के बेटे से रहा नही गया, उसने पूछ बैठा कौन है आप सब और क्यूं रो रहें हैं, पास ही खड़े कंजूस सेठ के मुनीम ने कहा, ये है तुम्हारे पिता की कमाई, कंजूसीयत, ये लोग देख रहें हो,, कोई अंधा कोई अपहिज, लड़कीयाँ, महिलाए, बच्चें तुम्हारे पिता ने ये कमाया है सारी उम्र,,, तुम जिसें कंजूस कहते हो ये रिश्तेदार, पड़ोसी मित्र जिसे महाकंजूस कहता हैं,,, इन झुग्गी झोपड़ी वालो से पूछो, की बताएंगे, ये कितने दानी थे, कितने वृध्दाआश्रम, कितने स्कूल, कितनी लड़कियों की शादी, कितनो को भोजन कितनो को नया जीवन आपके इस कंजूस बाप ने दिया हैं, ये वो भीड़ है जो दिल से आयी हैं,, आपके रिश्तेदार पडोसी जैसे नही, जो रस्म पूरी करने के लिए आये हैं, फिर उसके बेटे ने पूछा पिताजी ने मुजे ये सब क्यू नही बताया, क्यूं हमें एक_एक पैंसे के लिए तरसतें रहे, क्यू, कालोनी के किसी भी कार्यकम्र में एक भी मदद नही की मुनीम ने कहा, तुम्हारे पिताजी चाहते थे, तुम पैंसों की कीमत समझों, अपनी खुद की कमाई से सारा बोझ उठाओ, तभी तुम्हें लगें की हाँ पैसा कहा खर्च करना है और क्यूं, फिर मुनीम ने कहा, ये कालोनी वाले ये मित्र, ये रिश्तेदार, कभी स्वीमिंग पूल के लिए, कभी शराब, शबाब के लिए, कभी अपना नाम ऊंचा करने के लिए, कभी मंदिरों में अपना नाम लिखवाने के लिए, चंदा मांगते थे, पूछों इन सब से कभी वो आयें इनके पास की सेठ किसी गरीब, बच्ची की शादी, पढाई, भोजन अंधा की ऑख, अपहिजों की साईकिल, किसी गरीब की छत, इनके लिए कभी नही आये, ये तो आये बस खुद को दूसरो से ऊंचा दिखाने के लिए, मौज मस्ती में पैसा उड़ाने के लिए,,, आज ये भीड़ है ना वो दिल से रो रही हैं, क्यूकि उन्होने वो इंसान खोया हैं, जो कई बार खुद भूखे रहकर, इन गरीबों को खाना खिलाया है, ना जाने कितनी सारी बेटियों की शादी करवाई, कितने बच्चों का भविष्य बनाया, पर हाँ तुम्हारे कालोनी वालो की किसी भी फालतू फरमाईश में साथ नही दिया,,, गर तुम समझते हो ये कंजूस हैं,,, तो सच हैं,,, इन्होने कभी किसी गरीब को छोटा महसूस नही होने दिया, उनकी इज्जत रखी, ये कंजूसीयत ही हैं,,,, आज हजारों ऑखें रो रही हैं, इन चंद लोगो से तुम समझ रहें हो तुम्हारे पिता कंजूस है तो तुम अभागें हो,,,, बेटे ने तुरंत अपने पिता के पैर पकड़ लिए,, और पहली बार दिल से रो कर कहने लगा, बाबूजी आप सच में बहुत कंजूस थे, आपने अपने सारे नेक काम कभी किसी से नही बाँटे आप बहुत कंजूस थे 😓🙏 किसी महान आदमी ने कहा हैं, नेकी कर और दरिया में डाल ....... नेक काम ऐसा होना चाहीये की एक हाथ से करें, तो दूसरे को पता ना चलें ..... Radhe Radhe ji 🌹🌹🙏🌹🌹

+21 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 7 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB