Rohit Kumar
Rohit Kumar Mar 24, 2020

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Minakshi Tiwari May 10, 2020

🌻🌾🌻✨ ओम श्री साई नाथ ✨🌻🌾🌻 🌻 जब हम कोई कर्म करके फल की चिंता करते हुए, 🍀 कर्म करते हैं तो, उसके करने से पहले ही उसका फल सोच लेते हैं,,, 🌻 कर्म करने के बाद, जल्दी ही भगवान से फल की इच्छा भी रखने लगते हैं। 🍀 जब मंदिर जाते हैं तो, देवताओं से अपनी मुराद मांगने के लिए | 🌻 अपने साथ मन में एक लिस्ट भी ले जाते हैं ! 🍀 पांच रुपए का प्रसाद चढ़ाकर, पांच हजार रुपये के काम, 🌻 हो जाने का वरदान मांगते हैं,,, 🍀 यदि उस देवता से मुराद पूरी हो गई तो ठीक, 🌻 नहीं तो मंदिर या देवता बदल लेते हैं !! 🍀 इस तरह से जिस देवता के सामने इच्छा पूरी होती रहे, 🌻 उसको अपना इष्ट मान लेते हैं | 🍀 यह पूजा नहीं सौदा है !!! 🌻 देखा जाए तो हम प्रभु को पाने के लिए प्रार्थना नहीं करते, 🍀 बल्कि अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए उनको पूजते हैं ! 🌻 वैसे तो इसमें कुछ गलत नहीं हैं, 🍀 अगर हम प्रभु से नहीं मांगेंगे तो किससे मांगेंगे ? 🌻 हम यह भूल जाते हैं कि भगवान को बिना मांगे भी पता है, 🍀 कि मेरे भक्त को क्या चाहिए ? 🌻 ध्यान रहे, आसक्त होकर देवता को पूजने से, 🍀 कर्मों के फल तो मिल जाएंगे, 🌻 लेकिन देवत्व कभी नहीं मिलेगा.,,,,!!! 🌹👣🌻🙏ॐ साई राम🙏🌻👣🌹

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Rajeev Thapar May 9, 2020

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golu singh May 9, 2020

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Amit Kumar May 9, 2020

*भूमि पर पड़े भरत जी ने दौड़ कर आए, श्रीराम जी के चरणों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिए । श्रीराम जी कहते हैं- उठो भरत! पर भरत जी उठते नहीं । क्योंकि लाठी अपने आप गिर तो सकती है,लेकिन उठे कैसे ?* *बल लकड़ी में नहीं होता, उन हाथों में होता है, जिनमें लकड़ी होती है । मैं गिरा हुआ हूँ, गिरे हुओं को उठाने का सामर्थ्य तो भगवान आपके ही हाथों में है । भगवान श्रीराम ने भरतजी को जबरदस्ती उठाकर अपने हृदय से लगा लिया ।* *अब एक शिकायत इधर है,और एक उधर ।* *श्रीराम जी पूछ रहे हैं कि- भरत ! तुम भूमि पर ही क्यों पड़े रहे, चरणों में सिर क्यों नहीं रखा ?* *भरतजी के भाव देखें-* *मैं सदा ही आपके चरणों में सिर रखता रहा प्रभु, आज तो आप मेरे सिर पर अपना श्रीचरण रख दीजिए। उनपर बनी बज्र रेखा से मेरा दुर्भाग्य कट जाए...देवी अहल्या के सिर पर श्रीचरण रखकर उनको प्रेमदान दिये... केवट को आपने अपने दोनों श्रीचरण प्रदान किये,और उसकी नैया का पार लगाया...मुझ अभागे को भी कृपया अपना श्रीचरण प्रदान करें...तो मैं आपके श्रीचरणों की मकरंद पान कर सकुं।* *मैं तो आपके श्रीचरणों की धूल हूँ, धूल धूल में मिल रही है। मैं आपके श्रीचरणों में सिर रखने का क्या अधिकारी नहीं हूँ ?... राधे राधे*🙏🚩

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Jaipanday Panday May 8, 2020

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Pravin Singh May 9, 2020

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