Sudesh Bakshi
Sudesh Bakshi Oct 30, 2017

जै श्री हरि

जै श्री हरि

--------------------------देव उठावनी एकादशी पर विशेष ----------------------------
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एक राजा के राज्य में सभी लोग एकादशी का व्रत रखते थे I प्रजा,नौकर चाकरों से लेकर पशु पक्षियों तक को एकादशी के दिन अन्न नहीं दिया जाता था I
एक बार उस राज्य में कोई व्यक्ति दूसरे राज्य से आया तथा उसने राजा से नौकरी मांगी, राजा ने कहा कि नौकरी तो मिलेगी परन्तु तुम्हे एकादशी के दिन व्रत करना होगा,उस व्यक्ति के हामी भरने पर राजा ने उसे नौकरी पर रख लिया I
एकादशी के दिन उसको फलाहार दिया गया, वह बोला इससे मेरा पेट नहीं भरेगा,राजा ने उसे शर्त की याद दिलवाई पर वह नहीं माना तो बहुत प्रार्थना करने पर राजा ने उसको अन्न दे दिया I आटा , दाल चावल आदि दे दिए, नित्य की भाँति वह नदी किनारे गया और भोजन पकाने लगा , भोजन पकाने के उपरांत उसने प्रभु को पुकारा कि भोजन तैयार है और चतुर्भुजी, पीताम्बरधारी ईश्वर के प्रगट होने पर दोनों भोजन करने लगे I उसके बाद भगवान् अन्तर्ध्यान हो गए और वह काम पर लग गया I
15 दिन बाद फिर एकादशी आयी तो वह राजा से बोला कि मुझे पहले से अधिक भोजन चाहिए I उस दिन तो मैं भूखा ही रह गया था ,राजा ने कारण पूछा तो वह बोला कि भगवान् भी हमारे साथ भोजन करते है इसलिए दो लोगो में भोजन कम पड़ता है I
यह सुनकर राजा को आश्चर्य हुआ I वह बोलै कि मैं मान ही नहीं सकता कि भगवान् तुम्हारे साथ भोजन गृह्ण करते है क्यूकि मैं इतना पूजा- पाठ करता हूँ,व्रत उपवास करता हूँ तब मुझे तो उनके दर्शन आजतक भी नहीं हुए, राजा के ऐसे वचन सुनकर वह सेवक बोला कि अगर आपको मेरी बात पर विश्वास नहीं है तो आप चलकर देख लीजिये I उस भक्त ने नित्य की भांति भोजन बनाया और भगवान् को पुकाने लगा ,राजा पेड़ के पीछे से चुपके से सब देख रहा था, प्रभु यह सब जानते थे इसलिए प्रकट नहीं हुए, भक्त जब प्रभु को पुकारते हुए निराश हो गया तो बोला अगर आप नहीं आएंगे तो मैं नदी में डूबकर अपने प्राण त्याग दूंगा, भक्त के ऐसे वचनो को सुनकर भगवान् प्रकट हो गए और उसके साथ भोजन ग्रहण किया Iभोजन के उपरान्त प्रभु ने उस भक्त को अपने साथ विमान में बैठाया और अपने साथ अपने धाम ले गए I
इससे राजा को ज्ञान की प्राप्ति हुई और समझ आयी कि सिर्फ व्रत करने अथवा अन्न त्याग से नहीं बल्कि शुद्ध हृदय से प्रभु सुमिरन से ही प्रभु प्रसन्न होते है I इसके उपरान्त वह शुद्ध हृदय से व्रत,उपवास और अन्य कार्य करने लगा और जीवन काल में प्रजा की सेवा कर अंत में स्वर्ग को प्राप्त हुआ I
इस कथा के माध्यम से मेरी करबद्ध प्रार्थना है कि प्रभु भक्ति एवं व्रत उपवास आदि धार्मिक कार्य शुद्ध मन से करे ---आप सभी वैष्णव भक्तो को "सुदेश बक्शी एवं समस्त परिवार" की ओर से देव उठावनी एकादशी एवं तुलसी मैया के शुभ विवाह की अग्रिम मगल कामनाये-एवं बाबा श्याम के जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाये बधाई

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कामेंट्स

Team mymandir Aug 19, 2018

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सौजन्य: ईशा योग सेंटर, सद्गुरु जी।

Pranam Belpatra Water +794 प्रतिक्रिया 66 कॉमेंट्स • 1376 शेयर
ShreeSomnath Aug 18, 2018

Pranam Fruits Belpatra +886 प्रतिक्रिया 46 कॉमेंट्स • 298 शेयर

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🔔 *!!!जय माता दी जी!!!* 🔔
*माँ चिंतपुरणी जी के प्राकृतिक पिण्डी स्वरूप के आज *18-08-2018..PM..(FULL HD)*
*के संध्याःकाल श्रृंगार के आलौकिक दर्शन*
*माँ भगवती आप की सभी मनोकामना पूर्ण करे*
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹...

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Gopal Krishan Aug 18, 2018

भगवत गीता सार

यह बड़े ही शोक की बात है कि हम लोग बड़ा भारी पाप करने का निश्चय कर बैठते हैं तथा राज्य और सुख के लोभ से अपने स्वजनों का नाश करने को तैयार हैं।
हे अर्जुन विषम परिस्थितियों में कायरता को प्राप्त करना, श्रेष्ठ मनुष्यों के आचरण के विपरीत...

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Santosh Hariharan Aug 18, 2018

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Udit Sagar Aug 18, 2018

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