🌹ॐ नमो नारायण ॐ 🌹 🌞शुभ 🌻प्रभातम🌞 ☆~☆~☆ 🔱🔥💯अध्यात्म के विश्व जगत गुरु दत्त दत्तात्रे जयंती की शुभ कामना शुभ आशीष 🙌👍🚩 ☆~☆~☆ द

🌹ॐ नमो नारायण ॐ 🌹
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दत्तात्रेय जयंती भारत के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में मनाया जाने वाला एक महान हिन्दू त्योहार है। 'दत्तात्रेय' नाम ब्रह्मा, विष्णु, शंकर, यानि त्रिमूर्ति हिंदू देवताओं का संयुक्त रूप है। इस नाम को दो शब्दों में विभाजित किया जा सकता है –- दत्ता अथवा दाता (देने वाला) और अत्रे अथवा अत्रि, जो कि हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार उनके शारीरिक पिता थे। उनकी पूजा विभिन्न हिन्दू पंथों द्वारा की जाती है। दत्तात्रेय को शिव का अवतार और नाथों के आदिनाथ पंथ/समुदाय के प्रथम गुरु/शिक्षक के रूप में माना जाता है। उन्हें दयालु/रहम दिल भगवान और पूर्णतः सत्य परम शिक्षक के रूप में भी पूजा जाता है। दत्तात्रेय को परशुराम को प्रदान किए गये त्रिपुरा रहस्य, जो कि अद्वैत वेदांत का एक उपदेश है, का लेखक माना जाता है। हिंदू श्रद्धालु उनके जन्मदिन को दत्ता जयंती के रूप में मनाते हैं।
वर्तमान समय में चल रहे कल्याणकारी पुरुषोत्तम संगम युग में ही निराकार परमपिता परमात्मा भगवान शिव, प्रजापिता ब्रह्मा के माध्यम से हम मनुष्यात्माओं को, वास्तविक ईश्वरीय ज्ञान देते हैं और इसके अतिरिक्त सभी प्रमुख त्योहारों के वास्तविक महत्व का भी रहस्योद्घाटन करते हैं।
ईश्वरीय ज्ञान के अनुसार, त्रिमूर्ति, भगवान के प्रमुख 3 दिव्य कर्तव्यों का प्रतीक है – स्थापना, पालना और विनाश, अर्थात ब्रह्मा द्वारा नयी सतयुगी दुनिया की स्थापना, शंकर द्वारा पतित पुरानी कलियुगी दुनिया का विनाश और विष्णु (श्री लक्ष्मी और श्री नारायण का सम्मिलित रूप) द्वारा नयी दुनिया – स्वर्ग की पालना। किसी समय में स्वर्ग अथवा जन्नत अथवा बहिश्त कहलाए जाने वाला भारत जब नर्क या वैश्यालय अथवा दोजख बन जाता है, तब भगवान शिव को इस नर्क कहलाई जाने वाली दुनिया को फिर से पावन, स्वर्ग अथवा शिवालय बनाने के लिए श्रीमद्भागवत गीता में वर्णित अपने वायदे के अनुसार भारत भूमि पर अवतरित होना पड़ता है।
वह इस भारत भूमि पर हम मनुष्यात्माओं में गुह्यता के साथ व्याप्त 5 विकारों रूपी माया रावण से मुक्त करने के लिए दिव्य अवतरण लेते हैं। वह सच्चे गीता ज्ञान के द्वारा, हम आत्माओं को 21 जन्मों के लिए मुक्ति जीवन मुक्ति का वर्सा देते हैं। ब्रह्मा द्वारा नयी सतयुगी दुनिया की स्थापना, शंकर द्वारा पुरानी पतित दुनिया का विनाश और विष्णु के द्वारा स्वर्ग की पालना के इसी दिव्य त्रिमूर्ति कर्तव्य के यादगार में ही उनकी पूजा दत्तात्रेय के रूप में की जाती है।
उपरोक्त वर्णन के अनुसार, दत्तात्रेय योग के भगवान कहलाते हैं, वास्तव में परमपिता परमात्मा शिव ही सहज राजयोग की शिक्षा देकर हम मनुष्यात्माओं को अपने विकर्मों को विनाश करने की सहज विधि – याद की यात्रा सिखाते हैं। परमात्मा की याद से ही हमारे जन्म जन्मान्तर की विकर्म विनाश हो जाते हैं और हम पावन बनकर परमात्मा के साथ अपने और उनके घर – परमधाम में साथ जाते हैं। इस दिंन, लाखों – करोड़ों श्रद्धालु संपूर्ण सत्य ज्ञान के लिए परम शिक्षक से प्रार्थना करते हैं। अतः इससे यह बात सिद्ध होती है कि सृष्टि चक्र के किसी समय पर उन्होने हम आत्माओं को संपूर्ण ज्ञान दिया होगा जिसकी यादगार में दत्तात्रेय के भक्त यह त्योहार मनाते हैं।
दत्तात्रेय का त्रिपुरा रहस्य (अर्थात तीनो कालों के रहस्य के लेखक के रूप में महिमा होना इस बात का सूचक है कि भगवान तीनो लोकों का ज्ञाता हैं, जो वर्तमान पुरुषोत्तम संगम युग में हमें न केवल तीनो लोको का ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि आत्मा, परमात्मा, सृष्टि चक्र, कर्मों की गुह्य गति का भी ज्ञान दे रहे हैं जिसके द्वारा वे हमें माया के चक्र से मुक्त होने का रास्ता बताते हैं और आत्म अभिमानी बनाकर हमें हमारी कर्मेन्द्रियों के मालिक भी बनाते हैं, जिसके द्वारा हम दिव्य गुण (पवित्रता, शांति, प्रेम, सुख, संतुष्टता, नम्रता, धैर्यता, सरलता, मधुरता आदि से) संपन्न बन जाते हैं। यद्यपि, दत्तात्रेय जयंती, अलग समय पर मनाई जाती है, किन्तु यह जयंती सबसे महत्वपूर्ण त्योहार – शिव जयंती का ही यादगार है, जो परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण का यादगार है।
अतः अब समय आ गया है, इन त्योहारों के वास्तविक रहस्य को समझने और इन्हें इनके सत्य स्वरूप में मानने का, जिसके द्वारा, इस बहुत भारी/नाजुक समय में, जबकि विश्व में आमतौर पर और भारत में ख़ासतौर हालात बाद से बदतर होती जा रहे है। पाँचों विकार और पाँचों तत्व, दोनो ही अत्यंत विकृत हो चुके हैं। दूसरे शब्दों में यह संसार अब रहने लायक नहीं रह गया है। इसी कारण, परमात्मा शिव अपना सत्य ईश्वरीय ज्ञान पिछले 78 वर्षों से दे रहे हैं ताकि यह दुनिया फिर से स्वर्ग कहलाए। अतः, यही समय है परमात्मा को पहचानकर, उनसे सच्चा नाता जोड़कर, उनकी सर्व कल्याणकारी श्रीमत् पर चलने का और उनसे भविष्य 21 जन्मों का राज्य भाग्य प्राप्त करने का।
आप सबको इस यादगार पर्व दत्तात्रेय जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ!🔱🚩🕉🌹
🌹🌊🕉वरुण पीठ गुरु कुल ध्यान भारत ज्ञान भारत मानव आधार साइंस ऑफ़ लिविंग इन (शॉल)🔥🔱🚩🕉
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🔥🔱आवाहन🚩आखाड़ा🔥🔱
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Sudarshan Bhardwaj May 10, 2020

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Harcharan Pahwa May 9, 2020

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kamlash May 10, 2020

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🚩 *श्री गणेशाय नम:🚩* *🕉🌞गीताज्ञान🌞🕉* *जितात्मनः प्रशान्तस्य* *परमात्मा समाहितः।* *शीतोष्णसुखदुःखेषु* *तथा मानापमानयोः॥६-७॥* *👉सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख और मान-अपमान में जिसने स्वयं को जीता हुआ है, ऐसा पुरुष परमात्मा में सम्यक्‌ प्रकार से स्थित है॥7॥* 📜 *दैनिक-पंचांग* 📜 ☀ *11 - May - 2020* ☀ *पंचांग-श्रीमाधोपुर* 🔅 तिथि चतुर्थी 06:37:11 🔅 नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 28:10:32 🔅 करण : बालव 06:37:11 कौलव 18:10:10 🔅 पक्ष कृष्ण 🔅 योग साघ्य 26:40:22 🔅 वार सोमवार ☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ 🔅 सूर्योदय 05:41:03 🔅 चन्द्रोदय 23:19:59 🔅 चन्द्र राशि धनु 🔅 सूर्यास्त 19:07:11 🔅 चन्द्रास्त 09:00:00 🔅 ऋतु ग्रीष्म ☀ हिन्दू मास एवं वर्ष 🔅 शक सम्वत 1942 शार्वरी 🔅 कलि सम्वत 5122 🔅 दिन काल 13:26:08 🔅 विक्रम सम्वत 2077 🔅 मास अमांत वैशाख 🔅 मास पूर्णिमांत ज्येष्ठ ☀ शुभ और अशुभ समय ☀ शुभ समय 🔅 अभिजित 11:57:14 - 12:50:59 ☀ अशुभ समय 🔅 दुष्टमुहूर्त : 12:50:59 - 13:44:43 15:32:12 - 16:25:57 🔅 कंटक 08:22:16 - 09:16:01 🔅 यमघण्ट 11:57:14 - 12:50:59 🔅 राहु काल 07:21:49 - 09:02:35 🔅 कुलिक 15:32:12 - 16:25:57 🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 10:09:45 - 11:03:30 🔅 यमगण्ड 10:43:21 - 12:24:06 🔅 गुलिक काल 14:04:52 - 15:45:38 ☀ दिशा शूल 🔅 दिशा शूल पूर्व ☀ चन्द्रबल और ताराबल ☀ ताराबल 🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद ☀ चन्द्रबल 🔅 मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन 📜 *चौघडिया-मुहूर्त* 📜 🔅अमृत 05:41:03 - 07:21:49 🔅काल 07:21:49 - 09:02:35 🔅शुभ 09:02:35 - 10:43:21 🔅रोग 10:43:21 - 12:24:06 🔅उद्वेग 12:24:06 - 14:04:52 🔅चल 14:04:52 - 15:45:38 🔅लाभ 15:45:38 - 17:26:24 🔅अमृत 17:26:24 - 19:07:11 🔅चल 19:07:11 - 20:26:20 🔅रोग 20:26:20 - 21:45:29 🔅काल 21:45:29 - 23:04:39 🔅लाभ 23:04:39 - 24:23:48 🔅उद्वेग 24:23:48 - 25:42:57 🔅शुभ 25:42:57 - 27:02:07 🔅अमृत 27:02:07 - 28:21:16 🔅चल 28:21:16 - 29:40:26 *🕉🌞लग्न-तालिका🌞🕉* सूर्योदय का समय: 05:41:03 सूर्योदय के समय लग्न मेष चर 25°43′13″ 🔅 मेष चर शुरू: 04:18 AM समाप्त: 05:56 AM 🔅 वृषभ स्थिर शुरू: 05:56 AM समाप्त: 07:52 AM 🔅 मिथुन द्विस्वाभाव शुरू: 07:52 AM समाप्त: 10:07 AM 🔅 कर्क चर शुरू: 10:07 AM समाप्त: 12:26 PM 🔅 सिंह स्थिर शुरू: 12:26 PM समाप्त: 02:43 PM 🔅 कन्या द्विस्वाभाव शुरू: 02:43 PM समाप्त: 04:58 PM 🔅 तुला चर शुरू: 04:58 PM समाप्त: 07:17 PM 🔅 वृश्चिक स्थिर शुरू: 07:17 PM समाप्त: 09:35 PM 🔅 धनु द्विस्वाभाव शुरू: 09:35 PM समाप्त: 11:40 PM 🔅 मकर चर शुरू: 11:40 PM समाप्त: अगले दिन 01:24 AM 🔅 कुम्भ स्थिर शुरू: अगले दिन 01:24 AM समाप्त: अगले दिन 02:52 AM 🔅 मीन द्विस्वाभाव शुरू: अगले दिन 02:52 AM समाप्त: अगले दिन 04:18 AM 1⃣1⃣🌷0⃣5⃣🌷2⃣0⃣ *🕉🌞जयश्रीराम🌞🕉* *ज्योतिषशास्त्री:-सुरेन्द्र कुमार चेजारा व्याख्याता राउमावि होल्याकाबास* *निवास:-श्री सीताराम बाबा बावड़ी आश्रम के पास वार्ड नं 8 श्रीमाधोपुर ☎9461044090* 🍏🌸🍏🌸🍏🌸🍏🌸

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Lalan Singh May 9, 2020

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R.G.P.Bhardwaj May 10, 2020

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