Ritesh Verma
Ritesh Verma Dec 19, 2016

अगर बजरंग बली को मानते हो तो लिखे बजरंग बली या लाइक करे।

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कामेंट्स

Ritesh Verma Dec 19, 2016
कल मंगल वॉर है आप सबी दोस्त लोग हनुमान जी महाराज के दरसन जरूरकरे।।।।

Mahesh Malhotra Sep 24, 2020

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Shuchi Singhal Sep 24, 2020

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S K Bhardwaj Sep 24, 2020

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siva siva Sep 24, 2020

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Neha Sharma Sep 24, 2020

*आइए सुनें श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र पाठ और जानें श्रीविष्णुसहस्त्रनाम स्त्रोत्र की फलश्रुति के कुछ महत्वपूर्ण श्लोकों का हिंदी अर्थ। *अर्जुन उवाच- *पद्मपत्रविशालाक्ष पद्मनाभ सुरोत्तम। *भक्तानाम अनुरक्तानां त्राता भव जनार्दन॥२३॥ *श्रीभगवानुवाच- *यो मां नामसहस्रेण स्तोतुमिच्छति पाण्डव। *सोऽहमेकेन श्लोकेन स्तुत एव न संशयः॥२४॥ स्तुत एव न संशय ॐ नम इति। *हिंदी में प्रतिपदार्थ एवं विवरण :- *अर्जुनः उवाच - अर्जुन ने कहा *पद्मपत्रविशालाक्ष - हे कमल के पत्तों जैसे विशाल नयन या आंखों वाले, *पद्मनाभ - हे नाभी में कमल वाले, *सुरोत्तम - सभी देवताओं में श्रेष्ठ *जनार्दन - जन की रक्षा करनेवाले अनुरक्तानाम् - प्यार करने वाले *भक्तानाम् - भक्तों का *त्राता - रक्षक *भव - बनिये । *भगवान् उवाच - भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा *हे पाण्डव - हे अर्जुन *यः- जो *माम् - मेरे *नामसहस्रेण - सहस्रनाम से *स्तोतुम् - स्तेोत्र या स्तुति करने की *इच्छति - इच्छा रखता है, *सः अहम् - वह विष्णु, मैं *एकेन - एक *श्लोकेन एव - श्लोक से ही *स्तुतः - स्तुत हो जाता हूँ । *न संशयः - इस बात पर कोई शंका नहीं । *विवरण..... *जब श्रीमन्महाविष्णुजी के हजार से भी अधिक नामों का विष्णुसहस्रनाम की रचना भगवान विष्णु ने वेदव्यास जी के अवतार में रहकर किया तो अर्जुन ने उसी महाविष्णु जी के उसी युग का एक और अवतार, जो उनका सखा भी था, भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि क्या आप पूरे 1000 नाम पढने पर हीं भक्तों पर प्रसन्न होंगे...?? *महाबली अर्जुन यही प्रश्न पहले श्लोक में अप्रत्यक्ष रूप से पूछा है । वह भगवान से पूछते हैं कि हे कमल के पत्ते जैसे विस्तार आंखोंवाले, अपने नाभि में कमल जैसे श्रेष्ठ फूल में भगवान ब्रह्मा जी को उत्पन्न करनेवाले, प्रलय काल में सभी जीवों की अपने उदर में रक्षा करने वाले और इसीलिये ही सभी देवताओं में सदाकाल सर्वश्रेष्ठ रहनेवाले भगवान् श्रीकृष्ण, अपने चहीते भक्तों के रक्षक बनिये, जो आप से रचित सहस्रनाम का पूरा पारायण नहीं कर सकते । *तब भगवान कहते हैं... हे पाण्डवों में श्रेष्ठ अर्जुन, जो भी मेरे सहस्रनाम का पारायण करने की इच्छा रखता हो, उस प्राणी के एक मात्र श्लोक के उच्चारण या मनन से ही समस्त सहस्रनाम का पारायण हो जाता है, और इस एक श्लोक से ही मैं सहस्रनाम से स्तुत हो जाऊंगा । इस बात पर कोई संदेह नहीं है । *भगवान अपने भक्तों के प्रति हमेशा प्रेम भाव रखते हैं । उन्हें प्यार करनेवाले भक्तों पर उनकी कृपा हमेशा ही बनी रहती है । इसीलिये उन को प्रसन्न करने के लिये भक्त को पूरा सहस्रनाम पढने, रट लगाने या जोर से पारायण करने की जरूरत भी हीं है । सिर्फ मन से किसी एक श्लोक का पारायण करेंगे तो भगवान उन पर अवश्य ही प्रसन्न होंगे । *फलश्रुति के इस श्लोक का अर्थ जानने के लिए लिंक पर क्लिक करें। 👇 *आर्ताः विषण्णाः शिथिलाश्च भीताः *घोरेषु च व्याधिषु वर्तमानाः । *सङ्कीर्त्य नारायणशब्दमात्रं *विमुक्तदुःखाः सुखिनो भवन्ति ॥ 🌼*जय जय श्री राधेकृष्णा*🌼

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ramkumarverma Sep 24, 2020

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siva siva Sep 24, 2020

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