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Gopal Jalan
Gopal Jalan Jun 11, 2019

Jai Shri Krishna

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Gopal Jalan Jun 16, 2019

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sandeep patel Jun 15, 2019

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Parm Krishna Jun 15, 2019

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Payal yduvanshi Jun 15, 2019

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sushma Jun 14, 2019

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Gopal Jalan Jun 14, 2019

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Amit Kumar Jun 16, 2019

सोचता हूँ सत्ता के केंद्र को अपनी उचित जगह पर पहुँचा दिया जाए| इसे अब तक कुछ काबिल(गुरु टाइप) लोग अपनी ज़रूरत की पूर्ति या समस्या के निदान के अनुसार निर्धारित करते थे| अब इसे कोई भी आम व्यक्ति भी अपनी ज़रूरत की पूर्ति या समस्या के निदान के अनुसार किसी भी आम जगह पर निर्धारित कर और जब चाहेगा तो बदल भी सकेगा सकेगा| सत्ता का केंद्र सदैव केवल सबसे कमजोर, दीन-हीन, मूर्ख या दुष्ट की ज़रूरत की पूर्ति या समस्या के निदान के पास ही रहता है, जिनके काम या काम का नाम लेकर कुछ धूर्त, मक्कार, निकम्मे, कामचोर लोग किन्ही कथित काबिल(गुरु टाइप) लोगों की मदद से किसी खास नाम, काम, व्यक्ति या व्यवस्था मे होना दिखाकर अपना काम निकलते रहते हैं| सबसे कमजोर, दीन-हीन, मूर्ख या दुष्ट की ज़रूरत की पूर्ति या समस्या के निदान का नाम लिए बिना ना तो किसी को कभी सत्ता मिल सकती है और ना ही बनी रह सकती है| सत्ता का केंद्र सदैव और सर्वत्र किसी भी सबसे कमजोर, दीन-हीन, मूर्ख या दुष्ट द्वारा या इनके काम का नाम लेकर किसी के भी द्वारा निश्चित रूप से निर्धारित और परिवर्तित किया जा सकता था, अगर नही किया गया तो उसका कारण केवल इतना था की कथित काबिल(गुरु) द्वारा अपनी ज़रूरत, समस्या, समझ या योग्यता के अनुसार किसी व्यक्ति विशेष को ही पद विशेष के लिए उपयुक्त होना चयनित किया जाता है चाहे वह उसके लिए उपयुक्त हो या ना हो| उक्त कथित काबिल(गुरु टाइप) लोगों द्वारा अपने निर्धारण को सर्वश्रेष्ठ प्रमाणित करने के लिए ना जाते कितनों का अंगूठा या गला कटवा दिया जाता रहा है| यह काम अनादि काल से होता रहा है, अभी भी अनवरत रूप से जारी है अब इसे और अधिक नही होने दिया जा सकता| जिस काम को किसी व्यवस्था(तरीके) पर सवार होकर कोई भी कुत्ता, कमीना, कमजोर, दीन-हीन, मूर्ख या दुष्ट द्वारा भी निश्चित रूप से निर्धारित और परिवर्तित किया जा सकता हो उसके लिए किसी खास व्यक्ति या तरीके का परिणाम विहीन अनुसरण जानबूझकर खुद ही अपना अंगूठा, गला काटने(समय, ताक़त, योग्यता, छमता, जानकारी या चाहत को नष्ट करने) की तरह ही है| किसी भी श्रेष्ठ व्यक्ति को भंगी द्वारा भी भंगी बनाए जाने का सबसे आसान तरीका केवल उसके द्वारा प्रदर्शित और संकल्पित कामों और उमके परिणामों को सार्वजनिक किया जाना ही है, ससुरा खुद ही अपना चोला छोड़ के भाग जाएगा क्यूंकी सारे लोगों को केवल कमजोर, दीन-हीन, मूर्ख या दुष्ट लोगों के काम या काम का नाम लेकर ही महत्व प्राप्त होता है जिसके परिणाम के प्रदर्शन मात्र से ही इनका महत्व स्वतः विलुप्त हो जाएगा| मेरी बात जिसकी समझ मे ना आए या कोई कमी या सुधार बता सके केवल वही कमेंट करे| सादर,

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