Ravindra Rana
Ravindra Rana May 23, 2020

🙏जीवन की सहजता खोने न दें 🙏 एक बार एक छोटा सा पारिवारिक कार्यक्रम चल रहा था। उसमें बहुत लोग उपस्थित थे। उस कार्यक्रम में बहुत ही बढ़िया बासमती चावल का पुलाव बन रहा था, सभी का मन पुलाव में लगा हुआ था। खाने में देर हो रही थी,भूख भी खूब लग रही थी। आखिर खाने में पुलाव परोसा गया, खाना शुरू ही होने वाला था कि रसोईयें ने आकर कहा कि पुलाव सम्हल कर खाईयेगा क्योंकि शायद उसमें एकाद कंकड़ रह गया है वह किसी के भी मुंह में आ सकता हैं। मैंने बहुत से कंकड़ निकाल दिए हैं, फिर भी एकाद रह गया होगा तो दांत के नीचे आ सकता हैं। यह सुनकर सभी लोग बहुत सम्हल कर खाना खाने लगे सभी को लग रहा था कि कंकड़ उसी के मुंह में आयेगा। यह सोचकर खाने का सारा मजा किरकिरा हो गया। और पुलाव खाने की जो प्रबल इच्छा थी वह भी थम गई। सब लोग बिना कुछ बोले, बिना किसी हंसी मजाक के भोजन करने लगे। जब सबने खाना खा लिया तब उन्होंने रसोईयें को बुलाया और पूछा कि तुमने ऐसा क्यों कहा था। जबकि कंकड़ तो भोजन में था ही नहीं हमें किसी को भी नही लगा , तब रसोईये ने कहा कि मैंने अच्छी तरह से चावल बिने थे, लेकिन चावल में कंकड़ ज्यादा थे इसलिए मुझे लगा एकाद रह गया होगा। यह सुनकर सब एक दूसरे की तरफ देखने लगे। खाने के बाद किसी को कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था सब निराश हो गए थे क्योंकि सभी का ध्यान कंकड़ में था खाने का स्वाद कोई भी नही ले पा रहा था इसलिए सब निराश हो गए। यही परिस्थिति हमारी आज की हैं। एक वायरस को लेकर हम हमारी आजादी खो बैठे हैं। हर वस्तु,व्यक्ति,प्राणि पर शंका कर रहे हैं। आज तक जो लोग हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे हैं, जैसे दूध वाला, फल वाला,सब्जीवाला, पेपर वाला इन लोगों पर से भी हमारा विश्वास उठ गया है। और हम हमारा आज का सुहाना दिन खो बैठे हैं। और शारीरिक रूप से भी थकान महसूस कर रहे हैं। यह सब, कुछ हद, तक हमारी सोच पर भी निर्भर हैं। इसलिए इससे बहार निकलना है तो वाइरस को नहीं अपने आप को मजबूत करिए। अपने विचारों को सकारात्मक दिशा दीजिये । ईश्वर की कृपा से सब कुछ जल्दी ही अच्छा हो जाएगा। अच्छे दिनों के लिए अच्छी शुरुआत कीजिये और अपने आप को मजबूत व सकारात्मक बनाइये, हमारी जिन्दगी कितनी बेहतर हो जाएगी। 🙏जय श्री राधे कृष्णा🙏

🙏जीवन की सहजता खोने न दें 🙏

एक बार एक छोटा सा पारिवारिक कार्यक्रम चल रहा था। उसमें बहुत लोग उपस्थित थे। उस कार्यक्रम में बहुत ही बढ़िया बासमती चावल का पुलाव बन रहा था, सभी का मन पुलाव में लगा हुआ था। खाने में देर हो रही थी,भूख भी खूब लग रही थी। आखिर खाने में पुलाव परोसा गया, खाना शुरू ही होने वाला था कि रसोईयें ने आकर कहा कि पुलाव सम्हल कर खाईयेगा क्योंकि शायद उसमें एकाद कंकड़ रह गया है वह किसी के भी मुंह में आ सकता हैं। मैंने बहुत से कंकड़ निकाल दिए हैं, फिर भी एकाद रह गया होगा तो दांत के नीचे आ सकता हैं। यह सुनकर सभी लोग बहुत सम्हल कर खाना खाने लगे सभी को लग रहा था कि कंकड़ उसी के मुंह में आयेगा। यह सोचकर खाने का सारा मजा किरकिरा हो गया। और पुलाव खाने की जो प्रबल इच्छा थी वह भी थम गई। सब लोग बिना कुछ बोले, बिना किसी हंसी मजाक के भोजन करने लगे। जब सबने खाना खा लिया तब उन्होंने रसोईयें को बुलाया और पूछा कि तुमने ऐसा क्यों कहा था। जबकि कंकड़ तो भोजन में था ही नहीं हमें किसी को भी नही लगा , तब रसोईये ने कहा कि मैंने अच्छी तरह से चावल बिने थे, लेकिन चावल में कंकड़ ज्यादा थे इसलिए मुझे लगा एकाद रह गया होगा। यह सुनकर सब एक दूसरे की तरफ देखने लगे। खाने के बाद किसी को कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था सब निराश हो गए थे क्योंकि सभी का ध्यान कंकड़ में था खाने का स्वाद कोई भी नही ले पा रहा था इसलिए सब निराश हो गए। यही परिस्थिति हमारी आज की हैं। एक वायरस को लेकर हम हमारी आजादी खो बैठे हैं। हर वस्तु,व्यक्ति,प्राणि पर शंका कर रहे हैं। आज तक जो लोग हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे हैं, जैसे दूध वाला, फल वाला,सब्जीवाला, पेपर वाला इन लोगों पर से भी हमारा विश्वास उठ गया है। और हम हमारा आज का सुहाना दिन खो बैठे हैं। और शारीरिक रूप से भी थकान महसूस कर रहे हैं। यह सब, कुछ हद, तक हमारी सोच पर भी निर्भर हैं। इसलिए इससे बहार निकलना है तो वाइरस को नहीं अपने आप को मजबूत करिए। अपने विचारों को सकारात्मक दिशा दीजिये । ईश्वर की कृपा से सब कुछ जल्दी ही अच्छा हो जाएगा। अच्छे दिनों के लिए अच्छी शुरुआत कीजिये और अपने आप को मजबूत व सकारात्मक बनाइये, हमारी जिन्दगी कितनी बेहतर हो जाएगी।
🙏जय श्री राधे कृष्णा🙏

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Naresh Jain May 10, 2020

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ǟռʝʊ ʝօֆɦɨ May 10, 2020

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jayanti May 11, 2020

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