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Vaastu . ..बिमारिया क्यों होती हैं ,क्या बिमारिओ का कारण वास्तु दोष भी हो सकता है ?? सम्पूर्ण ब्रह्मांड ही वास्तु है, जो पंचतत्व —अग्नि ,जल .वायु .आकाश ,पृथ्वी से मिलकर बना होता है। इन तत्वों का सन्तुलन ही वास्तु हैं और असंतुलन ही वास्तु दोष होता हैं ।🙏 हमारा शरीर भी इन्हीं पंच तत्वो से मिलकर बना होता हैं अगर हमारे शरीर मे इन तत्वो का सन्तुलन बना होगा तो हम पूर्ण रूप से स्वस्थ होंगे और इन तत्वो के असंतुलन से ,जिस भी तत्व की कमी या अधिकता होगी उस तत्व से सम्बन्धित समस्याएं व बीमारिया हमें होने लगेगी । यह जाने लेना आवश्यक है की कौन सा तत्व हमारे शरीर के किस भाग से सम्बन्धित है । 1...शौच किया हुआ मल पृथ्वी तत्व का होता हैं । 2.....मूत्र मल जल तत्व का होता है l 3.....कार्बन daioxide व अन्य विशाक्त वायु मल वायु तत्व का होता हैं । 4.....स्नान के बाद शरीर से जो दूषित गर्मी बाहर निकलती हैं ,यह अग्नि तत्व का मल होता हैं । 5 ....जब पूजा पाट करते हैं तो आकाश तत्व का मल मतलब negative thinking मन से बाहर निकल जाति हैं । यदि सभी तत्वो के मल सही तरीके से बाहर नहीं निकले तो शरीर विशाक्त व दूषित हो जाता है जिससे शरीर मे अनेक प्रकार की बिमारिया उत्पन्न होने लगती हैं । पंच तत्वो की कमी या अधिकता से होने वाली बिमरिया ........... 1....पृथ्वी तत्व .. यदि पृथ्वी तत्व का मल ठीक से बाहर न निकले तो कब्ज , गैस ,भूख न लगना,ङकारे लेना, मोटापा ,बबासिर ,रक्त दोष .चार्म रोग ,सुस्ती ,जोड़ो का दर्द ,सर दर्द .भारी पन,नेत्र ज्योति का कम होना ,मधु मेह ,हाई ब्लड प्रेशर , बालो के रोग ,धातु रोग ,स्वपन रोग ,नपुंसकता. इत्यादि रोग हो सकते है । 2. .जल तत्व . .यदि जल तत्व का मल सही प्रकार से बाहर न निकले तो मुत्रशाय व किङनी से सम्बन्धित रोग हो सकते है । 3. अग्नि तत्व .. यदि अग्नि तत्व का मल सही तरीके से बाहर नहीं निकले तो शरीर मे जलन,पसीने मे बदबू ,शरीर मे भारी पन, रोग प्रतिरोधक शक्ति का कम होना ,त्वचा रोग ,इन्द्रियो के दोष ,भूख का न लगना,खून की कमी ,बल की कमी आदि रोग हो सकते है 4..वायु तत्व ... यदि वायु तत्व का मल बाहर नहीं निकल पाता है तो इससे सांस का रोग ,अस्थमा ,ह्रिदया रोग ,रक्त विकार ,चार्म रोग ,किडनी के रोग,स्मरण शक्ति की कमी ,आलसी ,जोड़ो मे दर्द , आदि रोग हो सकते है । 5...आकाश तत्व ... .यदि आकाश तत्व का मल बाहर नहीं निकल पाता है तो वह मन मे ही रह जाता है तो Negative thinking, तनाव ,चिंता ,चिङचिङापन,डिप्रेशन ,हाई ब्लड प्रेसर ,क्रोध ,असंतोष ,स्मरण शक्ति की कमी आदि रोग हो सकते है ।

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