राधे राधे जी🙏🙏🌹🌹🌹

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sudarshan Gupta Jun 4, 2018
Jai Shri radhe sayam ki jai 🙏🌿🙏🌿🙏🌿🙏🌿🙏

Rakesh dubey Jun 4, 2018
राधे राधे जी 🍁🍁🍁 सुप्रभात जी आपका🌾🌾 शुभ दिन मंगलमय हो 🌲

Sourav Mukharjee Jun 2, 2020

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manju Jun 2, 2020

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Neena Bajaj Jun 2, 2020

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Nirmal Nirmal Jun 2, 2020

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Sidhartha Shukla Jun 2, 2020

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sunder wati Jun 2, 2020

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*🌷निर्जला एकादशी व्रत कथा🌷* 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 👉"ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी" को निर्जला एकादशी कहतें है। "निर्जला" का अर्थ होता है। जल के बिना रहना। व्रती को बिना जल पिये व्रत को पूरा करना पड़ेगा। निर्जला एकादशी व्रत को परम पुण्यदायी और सफलता देने वाली मानी जाती है। शास्त्रों और धर्मग्रंथों में इस व्रत से मिलने वाले फलों का वर्णन है। जिन्हें जानकर सालभर व्रत-उपवास न करने वाला मनुष्य भी इस् व्रत करने को तैयार हो जाता है🙏 👉व्रत लाभ:- व्रत को करने से साल की सभी एकादशियों के व्रत का फल प्राप्त होता है🙏 इस व्रत के प्रभाव् से सभी पापों का नाश हो जाता है। मृत्यु के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती है। मनुष्य वैकुण्ठ लोक जाता है। चारों पुरुषार्थ यानी धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को प्राप्त करता है। 👉व्रत भंग दोष :- शास्त्रों के मुताबिक अगर निर्जला एकादशी करने वाला व्रती,व्रत रखने पर भी भोजन में अन्न खाये तो उसे चांडाल दोष लगता है... वह मनुष्य मृत्यु के बाद नरक में जाता है🙏 🌷निर्जला एकादशी व्रत कथा 🌷 महाभारत के समय की बात है, भीमसेन ने व्यासजी से कहा कि,हे महर्षि! मुझे कोई ऐसा व्रत बताइए जो वर्ष में केवल एक बार ही करना पड़े...जिससे मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो जाये ...नरक में जाने के नाम से मुझें भय लगता है🙏 व्यासजी ने कहा की हे पुत्र! यदि तुम स्वर्ग प्राप्ति की मनोकामना रखते हो...तो प्रति मास की दोनों एक‍ा‍दशियों को अन्न मत खाया करो🙏 व्यासजी ने भीमसेन से कहा की हे पुत्र! बड़े-बड़े ऋषियों ने बहुत शास्त्र आदि बनाये हैं। जिनसे थोड़े परिश्रम से ही स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है। इसी प्रकार शास्त्रों में दोनों पक्षों की एका‍दशी का व्रत मुक्ति के लिए रखा जाता है। 👉व्रत विधि:- वृषभ और मिथुन की संक्रां‍‍ति के बीच "ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की"जो एकादशी आती है। उसका नाम "निर्जला" है। व्यासजी ने भीमसेन से कहा की हे पुत्र! तुम "निर्जला एकादशी" का व्रत करो। इस व्रत करने से पूर्व श्रीहरि से प्रार्थना करो कि हे प्रभु! आज मैं निर्जला व्रत कर् रहा हूँ। दूसरे दिन भोजन करूँगा। मैं इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करूँगा। अत: हे प्रभु मेरे सारें पाप हर लो। इस व्रत में स्नान और आचमन के सिवा जल वर्जित है। आचमन में छ: मासे से अधिक जल नहीं होना चाहिए अन्यथा वह मद्यपान के समान् हो जाता है। व्रत के दिन भोजन नहीं करना चाहिए,क्योंकि भोजन करने से व्रत नष्ट हो जाता है। सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक जल ग्रहण न करे। द्वादशी को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करके। सुपात्र ब्राह्मणों को अन्न,वस्त्र,गौ,जल से भरे कलस आदि जो भी यथासंभव हो दान में दें। और सत्पात्र ब्राह्मणों को भोजन कराये। तब ही व्रत तोड़े। भगवान विष्णु के मूल मन्त्र, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। का उच्चारण मन ही मन करतें रहें। इस प्रकार व्यासजी की आज्ञानुसार भीमसेन ने इस व्रत को किया। इसलिए निर्जला एकादशी को "भीमसेनी या पांडव एकादशी" भी कहते हैं। जो मनुष्य भक्तिपूर्वक इस कथा को पढ़ते या सुनते हैं, उन्हें निश्चय ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है। 🌷| ओम नमो नारायणाय |🌷

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