श्री राम
श्री राम Sep 29, 2017

अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक दशहरा आप सभी के लिए मंगलमय हो।

अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक दशहरा आप सभी के लिए मंगलमय हो।
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अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक दशहरा आप सभी के लिए मंगलमय हो।

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Rajkumar Agarwal Jan 25, 2020

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Jyoti Pandey Jan 25, 2020

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Ajay Kumar Jan 25, 2020

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sanjay Jan 24, 2020

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C.L.Kumavat Jan 23, 2020

भक्ति और भावनाओं के लहराते सागर में डूबने को तैयार हो जाएं । 🌺🌹🌻🌼🌷 जब भी भक्त पर संकट आता है तब हनुमानजी दूर से नहीं बचाते बल्कि पास आकर छुड़ाते हैं। एक सुपंथ नाम का धर्मात्मा राजा था, एक बार अयोध्या में संत सम्मेलन होने जा रहा था तो संत सम्मेलन में संतो के दर्शन करने सुपंथ भी जा रहे थे, रास्ते में नारदजी मिल गये, प्रणाम किया, बोले कहाँ जा रहे हो ? कहा संत सम्मेलन में संतो के दर्शन करने जा रहा हूँ, नारदजी बोले जाकर सभी संतो को प्रणाम करना लेकिन वहाँ ब्रह्मऋषि विश्वामित्र होंगे उन्हें प्रणाम मत करना। ऐसा नारदजी ने भड़काया। हनुमानजी की महिमा और भगवान् के नाम का प्रभाव भी शायद नारदजी प्रकट करना चाहते होंगे, सुपंथ बोले-- जैसी आपकी आज्ञा, सुपंथ गये सभी को प्रणाम किया लेकिन विश्वामित्रजी को नहीं किया। विश्वामित्रजी बोले इसका यह साहस कि भरी सभा में मुझे प्रणाम नहीं किया, वैसे भूल हो जाये तो कोई बात नही, जान-बूझकर न किया जाये तो वह व्यक्ति अलग से दिखाई दे जाता है। विश्वामित्रजी को क्रोध आ गया और दौड़कर भगवान् के पास पहुँच गये कि राघव तुम्हारे राज्य में इतना बड़ा अन्याय, गुरूओं और सन्तों का इतना बड़ा अपमान? भगवान बोले गुरूदेव क्या हुआ? बोले, उस राजा ने मुझे प्रणाम नहीं किया उसको दण्ड मिलना चाहिये, भगवान् ने कहा ऐसी बात है तो कल मृत्युदण्ड घोषित किया जाता है। जब सुपंथ को पता चला कि मृत्युदण्ड घोषित हो गया है और वह भी रामजी ने प्रतिज्ञा की है कि मैं गुरुदेव के चरणों की सौगंध खाकर कहता हूँ, कि कल सूर्यास्त तक उसके प्राणों का अंत हो जायेगा, इधर लक्ष्मणजी ने बड़े रोष में प्रभु को देखा और पूछा प्रभु क्या बात है? भगवान बोले-- आज एक अपराध हो रहा है, कैसे बोले कैवल्य देश के राजा सुपंथ ने गुरुदेव का अपमान किया है। और मैंने प्रतिज्ञा की है कि कल उसका वध करूँगा। लक्ष्मणजी ने कहा-- महराज ! कल आपका कभी नहीं आता, आपने सुग्रीव को भी बोला था कल मैं इसका वध करूँगा, लगता है कि दाल में कुछ काला होने वाला है, बोले नहीं, यह मेरी प्रतिज्ञा है, उथर सुपंथ रोने लगा तो नारदजी प्रकट हो गये, बोले क्या हुआ। बोले भगवान् ने हमारे वध की प्रतिज्ञा की है, अच्छा-अच्छा भगवान् के हाथ से वध होगा यह तो सौभाग्य की बात है, मृत्यु तो अवश्यंभावी होती है, मृत्यु को तो टाला नहीं जा सकता, सुपंथ बोले-- कमाल है आपने ही तो भड़काया था, आप ही अब कह रहे हैं, नारदजी ने कहा-- एक रास्ता मैं तुमको बता सकता हूँ, भगवान् के बीच में तो मैं नही आऊँगा, क्या रास्ता है? बोले तुम अंजनी माँ के पास जाकर रोओ। केवल अंजना माँ हनुमानजी के द्वारा तुम्हारी रक्षा करा सकती है, इतना बड़ा संकट है और दूसरा कोई बचा नहीं पायेगा, सुपंथ माता अंजनी जी के घर पहुँचे और अंजनी माँ के घर पछाड़ खाकर हा-हा करके रोये माँ तो माँ हैं, बोली क्या बात है ? बेटे क्यों रो रहे हो ? माँ रक्षा करो, माँ रक्षा करों, किससे रक्षा करनी है ? बोले-- मेरी रक्षा करो, माँ बोली मैं प्रतिज्ञा करती हूँ कि तुझे कोई नही मार सकता, मैं तेरी रक्षा करूँगी, बता तो सही। सुपंथ ने पूरी घटना बताई लेकिन माँ तो प्रतिज्ञा कर चुकी थी, बोली अच्छा कोई बात नहीं तुम अन्दर विश्राम करो, हनुमानजी आयें, माँ को प्रणाम किया, माँ को थोड़ा चिन्तातुर देखा तो पूछा माँ क्या बात है? माँ ने कहा मैं एक प्रतिज्ञा कर चुकी हूँ शरणागत की रक्षा की, और तुमको उसकी रक्षा करनी है, हनुमानजी ने कहा माँ कैसी बात करती हो? आपका आदेश हो गया तो रक्षा उसकी अपने आप हो जायेगी। माता बोली पहले प्रतिज्ञा करो बोले मैं भगवान श्रीरामजी के चरणों की सौगंध खाकर कहता हूँ, कि जो आपकी शरण में आया है उसकी रक्षा होगी, माँ ने उस राजा को बुला लिया, बोली यह है पूछा कौन मारनेवाला है? बोले भगवान् रामजी ने प्रतिज्ञा की है, हनुमानजी ने कहा-- हे राजा ! तूने तो मुझे ही संकट में फँसा दिया, संसार तो कहता था कि संकट से हनुमान छुड़ायें, आज तूने हनुमान को ही संकट में डाल दिया। खैर, मैं माँ से प्रतिज्ञा कर चुका हूँ, देखो जैसा मैं कहूँगा वैसा ही करना घबराना नहीं, उधर भगवान् ने धनुष-बाण उठाये और चले मारने के लिये, हनुमानजी दूसरे रास्ते से जाने लगे तो भगवान् हनुमानजी से बोले-- कहाँ जा रहे हो, तो हनुमानजी ने कहा-- प्रभु आप कहाँ जा रहे हो, बोले मैं अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने जा रहा हूँ, हनुमानजी ने कहा मैं भी अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने जा रहा हूँ। भगवान् ने कहा-- तुम्हारी क्या प्रतिज्ञा है, हनुमानजी ने कहा पहले आप बताइये, आपने क्या प्रतिज्ञा की है ? भगवान् ने अपनी प्रतिज्ञा बतायी हनुमानजी ने भी कहा कि मैं उसी की रक्षा करने के लिये जा रहा हूँ, भगवान् ने कहा मैंने अपने गुरुदेव के चरणों की सौगंध खाई है कि मैं उसका वध करूँगा, हनुमानजी ने कहा-- मैंने अपने भगवान के चरणों की सौगंध खाई है कि मैं उसकी रक्षा करूँगा। यह लीला लक्ष्मणजी देख रहे हैं और मुस्कुरा रहे थे, यह क्या लीला हो रही हैं? जैसे ही भगवान् का आगमन देखा तो सुपंथ रोने लगा-- हनुमानजी ने कहा रोइये मत, मेरे पीछे खड़े हो जाओ, संकट के समय हनुमानजी आते हैं, भगवान् ने अभिमंत्रित बाण छोड़ा, हनुमानजी दोनों हाथ उठाकर "श्रीराम जय राम जय जय राम" हनुमानजी भगवान् के नाम का कीर्तन करें और बाण विफल होकर वापस लौट जाये। जब सारे बाण निष्फल हो गयें तो भगवान् ने ब्रह्मास्त्र निकाला, जैसे ही ब्रह्मास्त्र छोड़ा सीधा हनुमानजी की छाती में लगा लेकिन परिणाम क्या हुआ? प्रभु मूर्छित होकर गिर पड़े, बाण लगा हनुमानजी को और मूर्छित हुये भगवान् , अब तो बड़ी घबराहट हो गयी हनुमानजी दौड़े, मेरे प्रभु मूर्छित हो गये, क्यों मूर्छित हो गये क्योंकि "जासु हृदय अगार बसहिं राम सर चाप धर" हनुमानजी के हृदय में भगवान् बैठे हैं तो बाण तो भगवान् को ही न लगेगा। बाकी सब घबड़ा गये यह क्या हो गया। हनुमानजी ने चरणों में प्रणाम किया और सुपंथ को बिल्कुल अपनी गोद में ले आये हनुमानजी ने उसको भगवान् के चरणों में बिठा दिया, प्रभु तो मूर्छित हैं, हनुमानजी बहुत रो-रोकर कीर्तन कर रहे थे कि प्रभु की मूर्च्छा दूर हो जाये भगवान् श्रीरामचन्द्र जी की मूर्च्छा धीरे-धीरे दूर होती चली गयी और प्यार में, स्नेह में चूँकि भगवान् को अनुभव हो गया था कि बाण मेरे हनुमान के हृदय में लगा तो उसे चोट लगी होगी, इसलिये भगवान् इस पीड़ा के कारण मूर्च्छित हो गये। जब हनुमानजी कीर्तन करने लगे तो रामजी हनुमानजी के सिर पर हाथ फिराने लगे, धीरे से हनुमानजी पीछे सरक गये और भगवान् का हाथ सुपंथ के सिर पर दे दिया, दोनो हाथों से भगवान् हनुमानजी का सिर समझकर सुपंथ का सिर सहलाने लगे, प्रभु ने जैसे नेत्र खोले तो देखा सुपंथ भगवान् के चरणों में था, मुस्करा दिये भगवान् बोले-- हनुमान ! तुम जिसको बचाना चाहोगे उसको कौन मार सकता है? हनुमानजी तो अजर-अमर हैं, चारो युगों में हैं सम्पूर्ण संकट जहाँ छूट जाते हैं शोक, मोह, भय वह है भगवान् के नाम का स्मरण, रामजी के साथ में हनुमानजी रहते हैं, अगर संकट से न छूटे तो हनुमानजी छुड़ा देंगे। 🌺🌸बोलो बजरंगबली हनुमान जी महाराज की जय हो 🌸🌺

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p.sunil. Jan 25, 2020

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Rajkumar Agarwal Jan 25, 2020

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Rajkumar Agarwal Jan 25, 2020

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