*""!!.शिवमेवम् सकलम् जगत , शिव संकल्प सूक्त हिंदी भावार्थ सहित.!!""* 🌾🍁🏯👏👏🛕👏👏🏯🍁🌾 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 शिव संकल्पसूक्त हमारे मन में शुभ व पवित्र विचारों की स्थापना हेतु आवाहन करता है। मन हमारी इंद्रियों का स्वामी है।एक तरफ हमारीं इन्द्रियाँ जहाँ भौतिक विषयवस्तु की तथ्यसूचना प्राप्त करने का कार्य करती हैं, वहीं हमारा मन इन इंद्रियों में ज्ञानरुपी प्रकाश बनकर इन तथ्यों का विश्लेषण कर व उनको निर्देश प्रदान कर हमारे विचारों के रुप में हमें यथोचित कर्म करने हेतु उत्प्रेरित करता है । इस प्रकार हमारा मन जितना शुभसंकल्प युक्त है, हमारा जीवन व इसका अभीष्ट कर्म उतना ही शुभ, सुंदर, पवित्र व कल्याणमय होता है। पाठकों की सुविधा हेतु मैंने रुद्राष्टाध्यायी शिवसंकल्प सूक्त के इन छः अद्भुत संस्कृत श्लोकों व इनके हिंदी में अर्थ यहाँ प्रस्तुत किया है- 🕉️ ||| शिवसंकल्प सूक्त ||| 🕉️ यज्जाग्रतो दूरमुदैति दैवं तदु सुप्तस्य तथैवैति । दूरंगमं ज्योतिषां ज्योतिरेकं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥१॥ वह दिव्य ज्योतिमय शक्ति (मन) जो हमारे जागने की अवस्था में बहुत दूर तक चला जाता है, और हमारी निद्रावस्था में हमारे पास आकर आत्मा में विलीन हो जाता है,वह प्रकाशमान श्रोत जो हमारी इंद्रियों को प्रकाशित करता है, मेरा वह मन शुभसंकल्प युक्त ( सुंदर व पवित्र विचारों से युक्त) हो। येन कर्माण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः । यदपूर्वं यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥२॥ जिस मन की सहायता से ज्ञानीजन(ऋषिमुनि इत्यादि)कर्मयोग की साधना में लीन यज्ञ,जप,तप करते हैं,वह(मन) जो सभी जनों के शरीर में विलक्षण रुप से स्थित है, मेरा वह मन शुभसंकल्प युक्त ( सुंदर व पवित्र विचारों से युक्त) हो। यत् प्रज्ञानमुत चेतो धृतिश्च यज्ज्योतिरन्तरमृतं प्रजासु । यस्मान्न ऋते किञ्चन कर्म क्रियते तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥३॥ जो मन ज्ञान, चित्त , व धैर्य स्वरूप , अविनाशी आत्मा से सुक्त इन समस्त प्राणियों के भीतर ज्योति सवरुप विद्यमान है, वह मेरा मन शुभसंकल्प युक्त ( सुंदर व पवित्र विचारों से युक्त) हो। येनेदं भूतं भुवनं भविष्यत्परिगृहीतममृतेन सर्वम् । येन यज्ञस्तायते सप्तहोता तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥४॥ जिस शाश्वत मन द्वारा भूत,भविष्य व वर्तमान काल की सारी वस्तुयें सब ओर से ज्ञात होती हैं,और जिस मन के द्वारा सप्तहोत्रिय यज्ञ(सात ब्राह्मणों द्वारा किया जाने वाला यज्ञ) किया जाता है, मेरा वह मन शुभसंकल्प युक्त ( सुंदर व पवित्र विचारों से युक्त) हो। यस्मिन्नृचः साम यजूंषि यस्मिन् प्रतिष्ठिता रथनाभाविवाराः । यस्मिंश्चित्तं सर्वमोतं प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥५॥ जिस मन में ऋग्वेद की ऋचाये व सामवेद व यजुर्वेद के मंत्र उसी प्रकार स्थापित हैं, जैसे रथ के पहिये की धुरी से तीलियाँ जुड़ी होती हैं, जिसमें सभी प्राणियों का ज्ञान कपड़े के तंतुओं की तरह बुना होता है, मेरा वह मन शुभसंकल्प युक्त ( सुंदर व पवित्र विचारों से युक्त) हो। सुषारथिरश्वानिव यन्मनुष्यान् नेनीयतेऽभीशुभिर्वाजिन इव । हृत्प्रतिष्ठं यदजिरं जविष्ठं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥६॥ जो मन हर मनुष्य को इंद्रियों का लगाम द्वारा उसी प्रकार घुमाता है, तिस प्रकार एक कुशल सारथी लगाम द्वारा रथ के वेगवान अश्वों को नियंत्रित करता व उन्हें दौड़ाता है, आयुरहित(अजर)तथा अति वेगवान व प्रणियों के हृदय में स्थित मेरा वह मन शुभसंकल्प युक्त ( सुंदर व पवित्र विचारों से युक्त) हो। तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु। 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 ☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ 🍃🎋🍃🎋🕉️🎋🍃🎋🍃 🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾

*""!!.शिवमेवम् सकलम् जगत , शिव संकल्प सूक्त हिंदी भावार्थ सहित.!!""*
🌾🍁🏯👏👏🛕👏👏🏯🍁🌾
  🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩

शिव संकल्पसूक्त हमारे मन में शुभ व पवित्र विचारों की स्थापना हेतु आवाहन करता है। मन हमारी इंद्रियों का स्वामी है।एक तरफ हमारीं इन्द्रियाँ जहाँ भौतिक विषयवस्तु की तथ्यसूचना प्राप्त करने का कार्य करती हैं, वहीं हमारा मन इन इंद्रियों में ज्ञानरुपी प्रकाश बनकर इन तथ्यों का विश्लेषण कर व उनको निर्देश प्रदान कर हमारे विचारों के रुप में  हमें यथोचित कर्म करने हेतु उत्प्रेरित करता है । इस प्रकार हमारा मन जितना शुभसंकल्प युक्त है, हमारा जीवन व इसका अभीष्ट कर्म उतना ही शुभ, सुंदर, पवित्र व कल्याणमय होता है।

पाठकों की सुविधा हेतु मैंने रुद्राष्टाध्यायी शिवसंकल्प सूक्त के इन छः अद्भुत संस्कृत श्लोकों व इनके हिंदी में अर्थ यहाँ प्रस्तुत किया है-

    🕉️ |||  शिवसंकल्प सूक्त ||| 🕉️

यज्जाग्रतो दूरमुदैति दैवं तदु सुप्तस्य तथैवैति ।
दूरंगमं ज्योतिषां ज्योतिरेकं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु ॥१॥

वह दिव्य ज्योतिमय शक्ति (मन) जो हमारे जागने की अवस्था में बहुत दूर तक चला जाता है, और हमारी निद्रावस्था में हमारे पास आकर आत्मा में विलीन हो जाता है,वह प्रकाशमान श्रोत जो हमारी इंद्रियों को प्रकाशित करता है, मेरा वह मन शुभसंकल्प युक्त ( सुंदर व पवित्र विचारों से युक्त) हो।

येन कर्माण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः ।
यदपूर्वं यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु  ॥२॥

जिस मन की सहायता से ज्ञानीजन(ऋषिमुनि इत्यादि)कर्मयोग की साधना में लीन यज्ञ,जप,तप करते हैं,वह(मन) जो  सभी जनों के शरीर में विलक्षण रुप से स्थित है, मेरा वह मन शुभसंकल्प युक्त ( सुंदर व पवित्र विचारों से युक्त) हो।

यत् प्रज्ञानमुत चेतो धृतिश्च यज्ज्योतिरन्तरमृतं प्रजासु ।
यस्मान्न ऋते किञ्चन कर्म क्रियते तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु  ॥३॥

जो मन ज्ञान, चित्त , व धैर्य स्वरूप , अविनाशी आत्मा से सुक्त इन समस्त प्राणियों के भीतर ज्योति सवरुप विद्यमान है, वह मेरा मन शुभसंकल्प युक्त ( सुंदर व पवित्र विचारों से युक्त) हो।

येनेदं भूतं भुवनं भविष्यत्परिगृहीतममृतेन सर्वम् ।
येन यज्ञस्तायते सप्तहोता तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु  ॥४॥

जिस शाश्वत मन द्वारा भूत,भविष्य व वर्तमान काल की सारी वस्तुयें सब ओर से ज्ञात होती हैं,और जिस मन के द्वारा सप्तहोत्रिय यज्ञ(सात ब्राह्मणों द्वारा किया जाने वाला यज्ञ) किया जाता है, मेरा वह मन शुभसंकल्प युक्त ( सुंदर व पवित्र विचारों से युक्त) हो।

यस्मिन्नृचः साम यजूंषि यस्मिन् प्रतिष्ठिता रथनाभाविवाराः ।
यस्मिंश्चित्तं सर्वमोतं प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु  ॥५॥

जिस मन में ऋग्वेद की ऋचाये व सामवेद व यजुर्वेद के मंत्र उसी प्रकार स्थापित हैं, जैसे रथ के पहिये की धुरी से तीलियाँ जुड़ी होती हैं, जिसमें सभी प्राणियों का ज्ञान कपड़े के तंतुओं की तरह बुना होता है, मेरा वह मन शुभसंकल्प युक्त ( सुंदर व पवित्र विचारों से युक्त) हो।

सुषारथिरश्वानिव यन्मनुष्यान् नेनीयतेऽभीशुभिर्वाजिन इव ।
हृत्प्रतिष्ठं यदजिरं जविष्ठं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु  ॥६॥

जो मन हर मनुष्य को इंद्रियों का लगाम द्वारा उसी प्रकार घुमाता है, तिस प्रकार एक कुशल सारथी लगाम द्वारा रथ के वेगवान अश्वों को नियंत्रित करता व उन्हें दौड़ाता है, आयुरहित(अजर)तथा अति वेगवान व प्रणियों के हृदय में स्थित  मेरा वह मन शुभसंकल्प युक्त ( सुंदर व पवित्र विचारों से युक्त) हो।

तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु। 
  🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩
☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀
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कामेंट्स

🌹bk preeti 🌹 Mar 3, 2021
*​🌹शुभ प्रभात 🌹​* ​☕आपका दिन शुभ हो☕​ ​💐🦜😊सदा मुस्कुराते रहो 😊🦜💐​🌹🌹🌹✍️🙏🙏 *☕"चाय" हो या "चाह"* *"रंग" एकदम "पक्का" होना चाहिए..* *"फिक्र" हो या "ज़िक्र"* *"रिश्तों" में "अपनापन" होना चाहिए..* *जीवन में 'हीरा' परखने वाले से...* *"पीड़ा" परखने वाला ज्यादा महत्वपूर्ण होता है ।* *◆●स्वयं विचार करें​●◆*श्री गणेशाय नमः 🙏 रिद्धि सिद्धि के दाता गणपति बप्पा का कृपा सदा आप और आप के परिवार पे बना रहे आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय हो शुभ प्रभात वंदन जी जय जिनेंद्र 🙏🍵🍵✍️✍️🙏🙏🌹🙋‍♀️✍️

Sagar ji🙏 Mar 3, 2021
जय श्री गणेश जी🙏सुप्रभात वंदन जी🙏🌻

Renu Singh Mar 3, 2021
🙏 Jai Shree Ganesh Ji 🙏🌹 Shubh Prabhat Vandan Bhai Ji Ganpati Bappa Aapki Har Manokamna Puri Karein Aapka Din Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹

🌹 champalal🌹🌹M🌹 Kadela🌹 Mar 3, 2021
Om Gan Ganpatey Namho JII Riddhi Siddhi ke Shyam Shri Ganesh Ji ka Ashirwad Aap aur Aapke pariwar pr hamesha bana Rahe Jii Aapka Din shubh Avam mangalkari Rahe Jii shubh prabhat Jii

hindusthani mohan sen Mar 3, 2021
🚩जय श्री गणेशाय नमः🚩 सुबह की धूप कुछ यादों के साथ आती है; खिलते फूलों से मीठी खुशबु आती है; हर सुबह आपको नये रास्ते दिखाती है; सूरज की किरणें आपके जीवन को रंगीन बनाती हैं। 🌹सुप्रभात!🌹

Arvind Sharma Mar 3, 2021
जय श्री राम🐕‍🦺🚩🌊🌊🌊🌊🌊 🍃🍃रामायण से यदि कुछ बाते भी सीखी जाए, तो मानव जीवन सफल माना जा जाता है🍃 ☆आपका दिन सुखद एवं मंगलमय हो☆ 💥जय मंगल नाथ 💥

Shanti Pathak Mar 3, 2021
🌷🙏ओम् गं गणपतये नमः 🙏शुभ प्रभात वंदन जी🌷आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय हो 🌷ऋद्धि सिद्धि के स्वामी श्री गणेश जी की असीम कृपा आप एवं आपके परिवार पर सदैव बनी रहे 🌷गणपति बप्पा आपकी हर मनोकामना पूरी करें जी🌷🙏🌷

Pinu Dhiman Jai Shiva 🙏 Mar 3, 2021
जय श्री गणेश जी सुप्रभात नमस्कार भाई जी 🙏🌹🙏गणपति जी की कृपा और आशीर्वाद से आपके सारे मनोरथ सिद्ध हो आप की सभी मनोकामनाएं पूरी हो आप हमेशा खुश रहो स्वस्थ रहो सुखी रहो भाई जी 🙏🙌🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹

Brajesh Sharma Mar 3, 2021
जय श्री गणेश जी... गणपति बप्पा मोरिया हर हर महादेव.... ॐ नमः शिवाय जय जय श्री राधे..जय श्री राधे कृष्णा

RAJ RATHOD Mar 3, 2021
🙏जय श्री गणेश 🙏 शुभ बुधवार... शुभ संध्या वंदन 🌷🌷 आपका हर पल शुभ शुभ हो... 💞💞🌻🌻

Raj Apr 20, 2021

झारखंड के रामगढ़ में एक मंदिर ऐसा भी है जहां भगवान शंकर के शिवलिंग पर जलाभिषेक कोई और नहीं स्वयं मां गंगा करती हैं. मंदिर की खासियत यह है कि यहां जलाभिषेक साल के बारह महीने और चौबीस घंटे होता है. यह पूजा सदियों से चली आ रही है. माना जाता है कि इस जगह का उल्‍लेख पुराणों में भी मिलता है. भक्तों की आस्‍था है कि यहां पर मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है l झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित इस प्राचीन शिव मंदिर को लोग टूटी झरना के नाम से जानते है. मंदिर का इतिहास 1925 से जुड़ा हुआ है और माना जात है कि तब अंग्रेज इस इलाके से रेलवे लाइन बिछाने का काम कर रहे थे. पानी के लिए खुदाई के दौरान उन्हें जमीन के अन्दर कुछ गुम्बदनुमा चीज दिखाई पड़ा. अंग्रेजों ने इस बात को जानने के लिए पूरी खुदाई करवाई और अंत में ये मंदिर पूरी तरह से नजर आया.शिव भगवान की पूजा होती है l मंदिर के अन्दर भगवान भोले का शिव लिंग मिला और उसके ठीक ऊपर मां गंगा की सफेद रंग की प्रतिमा मिली. प्रतिमा के नाभी से आपरूपी जल निकलता रहता है जो उनके दोनों हाथों की हथेली से गुजरते हुए शिव लिंग पर गिरता है. मंदिर के अन्दर गंगा की प्रतिमा से स्वंय पानी निकलना अपने आप में एक कौतुहल का विषय बना हैl मां गंगा की जल धारा का रहस्‍य... सवाल यह है कि आखिर यह पानी अपने आप कहा से आ रहा है. ये बात अभी तक रहस्य बनी हुई है. कहा जाता है कि भगवान शंकर के शिव लिंग पर जलाभिषेक कोई और नहीं स्वयं मां गंगा करती हैं. यहां लगाए गए दो हैंडपंप भी रहस्यों से घिरे हुए हैं. यहां लोगों को पानी के लिए हैंडपंप चलाने की जरूरत नहीं पड़ती है बल्कि इसमें से अपने-आप हमेशा पानी नीचे गिरता रहता है. वहीं मंदिर के पास से ही एक नदी गुजरती है जो सूखी हुई है लेकिन भीषण गर्मी में भी इन हैंडपंप से पानी लगातार निकलता रहता हैl दर्शन के लिए बड़ी संख्‍या में आते हैं श्रद्धालु लोग दूर-दूर से यहां पूजा करने आते हैं और साल भर मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. श्रद्धालुओं का मानना हैं कि टूटी झरना मंदिर में जो कोई भक्त भगवान के इस अदभुत रूप के दर्शन कर लेता है उसकी मुराद पूरी हो जाती है. भक्त शिवलिंग पर गिरने वाले जल को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं और इसे अपने घर ले जाकर रख लेते हैं. इसे ग्रहण करने के साथ ही मन शांत हो जाता है और दुखों से लड़ने की ताकत मिल जाती है l ॐ नमः शिवाय🚩 साभार

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