गीता दिवस की शुभकामनाएं 🙏

गीता दिवस की शुभकामनाएं 🙏

प्रपन्न पारिजाताय तोत्र-वैत्रक-पाणये।
ज्ञानमुद्राय-कृष्णाय गीतामृत-दुहे नमः।।


आज की मोक्षदा एकादशी के दिन गीता जयंती के शुभावसर पर श्रीमद् भगवद्गीता के प्रचलित श्लोक:-

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक: ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत:॥
(द्वितीय अध्याय, श्लोक 23)

हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम्।
तस्मात् उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय:॥
(द्वितीय अध्याय, श्लोक 37)

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत:।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
(चतुर्थ अध्याय, श्लोक 7)
परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे-युगे॥
(चतुर्थ अध्याय, श्लोक 8)

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
(द्वितीय अध्याय, श्लोक 47)

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥
(द्वितीय अध्याय, श्लोक 62)
क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
(द्वितीय अध्याय, श्लोक 63)

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जन:।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥
(तृतीय अध्याय, श्लोक 21)

श्रद्धावान्ल्लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय:।
ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति॥
(चतुर्थ अध्याय, श्लोक 39)

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:॥
(अठारहवां अध्याय, श्लोक 66)

धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः । तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत्।।
(अध्याय 8, श्लोक 15)

या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी ।
यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः ॥
(द्वितीय अध्याय, श्लोक 61)

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते ।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ।।
(नौवां अध्याय, श्लोक 22)

हरे कृष्ण 🙏
ॐ नमः शिवाय
जय माता दी

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कामेंट्स

Captain Dec 1, 2017
जय श्री कृष्ण सुप्रभात

Neha Sharma,Haryana Dec 11, 2019

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yogeshraya Dec 10, 2019

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Amit Kumar Dec 11, 2019

आज की कहानी अवश्य पढ़े, कि किस प्रकार एक वैश्या ने अनेकों नवयुवकों का जीवन बनाया, और सभी नवयुवकों को संदेश दिया. लेकिन हा प्यारे,,,यह उन सभी तक अवश्य पहुंचना जो इन रास्ते से गुजर रहे। राबिया बसरी एक महशूर फ़क़ीर हुई है! जवानी में वह बहुत खूबसूरत थी। एक बार चोर उसे उठाकर ले गए और एक वेश्या के कोठे पर ले जाकर उसे बेच दिया। अब उसे वही कार्य करना था जो वहाँ की बाक़ी औरते करती थी। इस नए घर में पहली रात को उसके पास एक आदमी लाया गया।उसने फौरन बातचीत शुरू कर दी। आप जैसे भले आदमी को देखकर मेरा दिल बहुत खुश है " वह बोली।" आप सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ जायें , मैं थोड़ी देर परमात्मा की याद में बैठ लूँ। अगर आप चाहें तो आप भी परमात्मा की याद में बैठ जाएँ। यह सुनकर उस नवजवान की हैरानी की कोई हद न रही। वह भी राबिया के साथ ज़मीन पर बैठ गया। फिर राबिया उठी और बोली मुझे विश्वास है कि अगर मैं आपको याद दिला दूँ कि एक दिन हम सबको मरना है तो आप बुरा नहीं मानोगें। आप यह भी भली भाँति समझ लें की जो गुनाह करने की आपके मन में चाह है , वह आपको नर्क की आग में धकेल देगा। आप खुद ही फैसला कर लें कि आप यह गुनाह करके नर्क की आग आग में कूदना चाहते हैं, या इससे बचना चाहते हैं? यह सुनकर नवजवान हक्का बक्का रह गया।उसने संभलकर कहा, ऐ नेक और पाक औरत! तुमने मेरी आँखे खोल दी, जो अभी तक गुनाह के भयंकर नतीजे की और बंद थी मै वादा करता हूँ कि फिर कभी कोठे की तरफ कदम नही बढ़ाऊंगा। हर रोज नए आदमी राबिया के पास भेजे जाते।पहले दिन आये नवजवान की तरह उन सबकी जिंदगी भी पलटती गयी। उस कोठे के मालिक को बहुत हैरानी हुई की इतनी खूबसूरत और नवजवान औरत है और एक बार आया ग्राहक दोबारा उसके पास जाने के लिए नही आता। जबकि लोग ऐसी सुन्दर लड़की इए दीवाने होकर उसके इर्दगिर्द ऐसे घूमते है जैसे परवाने शमा के इर्दगिर्द। यह राज जानने के लिए उसने एक रात अपनी बीवी को ऐसी जगह छुपाकर बिठा दिया, जहां से वह राबिया के कमरे के अंदर सब कुछ देख सकती थी। वह यह जानना चाहता था की जब कोई आदमी राबिया के पास भेजा जाता है तो वह उसके साथ कैसे पेश आती है? उस रात उसने देखा कि जैसे हीं ग्राहक ने अंदर कदम रखा, राबिया उठकर खड़ी हो गई और बोली,आओ भले आदमी, आपका स्वागत है। पाप के इस घर में मुझे हमेशा याद रहता है की परमात्मा हर जगह मौजूद है। वह सब कुछ देखता है और जो चाहे कर सकता है।आपका इस बारे में क्या ख्याल है ? यह सुनकर वह आदमी हक्का बक्का रह गया और उसे कुछ समझ न आया कि क्या करे ? आखिर वह कुछ हिचकिचाते हुए बोला, हाँ पंडित और मौलवी कुछ ऐसा ही कहते हैं। राबिया कहती गई, 'यहाँ गुनाहों से घिरे इस घर में, मैं कभी नही भूलती कि ख़ुदा सब गुनाह देखता है और पूरा न्याय भी करता है। वह हर इंसान को उसके गुनाहो की सजा देता है। जो लोग यहाँ आकर गुनाह करते है, उसकी सजा पाते हैं। उन्हें अनगिनत दुःख और मुसीबत झेलनी पड़ती है। मेरे भाई, हमें मनुष्य जन्म मिला है, भजन, बंदगी करने के लिए दुनिया के दुखों से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिये, ख़ुदा से मुलाकात करने के लिए, न की जानवरों से भी बदतर बनकर उसे बर्बाद करने के लिए। पहले आये लोगों की तरह इस आदमी को भी राबिया की बातों में छुपी सच्चाई का अहसास हो गया। उसे जिंदगी में पहली बार महसूस हुआ की वह कितने घोर पाप करता रहा है और आज फिर करने जा रहा था।वह फूटफूट कर रोने लगा और राबिया के पाव पर गिरकर माफ़ी मांगने लगा। राबिया के शब्द इतने सहज, निष्कपट और दिल को छूलेने वाले थे कि उस कोठे के मालिक की पत्नी भी बाहर आकर अपने पापो का पश्चाताप करने लगी। फिर उसने कहा ऐ नेक पाक लड़की, तुम तो वास्तव में फ़क़ीर हो।हमने कितना बड़ा गुनाह तुम पर लादना चाहा। इसी वक्त इस पाप की दलदल से बहार निकल जाओ।इस घटना ने उसकी अपनी जिंदगी को भी एक नया मोड़ दे दिया और उसने पाप की कमाई हमेशा के लिए छोड़ दी। कुल मलिक के सच्चे भक्त जहां कहीं भी हों, जिस हालात में हो, वे हमेशा मनुष्य जन्म के असली उद्देश्य की ओर इशारा करते हैं और भूले भटके जीवों को नेकी की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। परमात्मा सब का भला करे। Hi

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*जय वीर बजरंग बली की*🌹🌹🙏 *शुभ प्रभात् वंदन*🌹🌹🙏 *हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है?* *हिंदू शास्त्रों में इस प्रसंग की जानकारी दी गई है कि जब लंकापति रावण को मारकर भगवान राम जी माता सीता जी को लेकर अयोध्या आए थे। तब हनुमान जी ने भी भगवान राम और माता सीता के साथ अयोध्या आने की जिद की थी। भगवान राम ने अपने प्रिय भक्त हनुमान जी को बहुत समझाया पर वह नहीं माने। क्योंकि बजरंगबली अपने जीवन को प्रभु श्रीराम की सेवा करने में बिताना चाहते थे। श्री हनुमान जी दिन रात यही प्रयास करते रहते थे। कि कैसे अपने आराध्य प्रभु श्रीराम को खुश रखा जाए। *एक बार बजरंगबली ने माता सीता को मांग में सिंदूर भरते हुए देखा। तो यह माता सीता से इसका कारण पूछा की माता आप अपने मांग में सिंदूर क्यों लगा रही हैं? माता सीता ने हनुमान जी को उत्तर दिया कि वह प्रभु श्रीराम को प्रसन्न करने के लिए सिंदूर लगाती हैं। श्री हनुमान जी को अपने आराध्य प्रभु श्रीराम को प्रसन्न करने का यह युक्ति बहुत ही अच्छी लगी। उन्होंने सिंदूर का एक बड़ा बक्सा लिया और स्वयं के ऊपर उसे उड़ेल दिया। और अपने आराध्य भगवान श्री राम के सामने पहुंच गए।* *जब भगवान श्रीराम ने अपने प्रिय भक्त हनुमान को इस स्थिति में देखा तो यह आश्चर्य में पड़ गए। और उन्होंने हनुमान से इसका कारण पूछा,तो हनुमान जी ने भगवान श्रीराम से कहा कि प्रभु मैंने आपकी प्रसन्नता के लिए ऐसा किया है। सिंदूर लगाने के कारण ही आप माता सीता से बहुत प्रसन्न रहते हैं। अब आप भी मुझ पर उतना ही प्रसन्न रहिएगा। भगवान श्रीराम को अपने भोले भाले भक्त हनुमान जी की युक्ति पर बहुत हंसी आई। और भगवान श्री राम के हृदय में अपने भक्त हनुमान जी जगह और गहरी हो गई। हमारे धर्म और पुराण बतलाते हैं, की उसी दिन से हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाया जाता है।* *महिलाओं को हनुमान जी की पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए?*......*हमारे धर्म और पुराण के अनुसार हनुमान जी सदा ब्रह्मचारी रहे थे। कुछ शास्त्रों में हनुमान जी की शादी होने का वर्णन भी मिलता है। लेकिन हनुमान जी ने यह शादी वैवाहिक सुख प्राप्त करने की इच्छा से नहीं की थी। बल्कि उन चार प्रमुख विद्याओं की प्राप्ति हेतु किया था। जिन विद्याओं का ज्ञान केवल एक विवाहित को ही दिया जा सकता था। *इस कथा के अनुसार हनुमान जी ने अपना गुरु सूर्य देवता को बनाया था। सूर्य देवता ने अपने शिष्य हनुमान जी को 5 विद्या सिखा दी। लेकिन बाकी बची 4 विद्याओं का ज्ञान सिखाने से पहले सूर्य देवता ने अपने शिष्य हनुमान जी को शादी कर लेने के लिए कहा। क्योंकि इन 4 विद्याओं का ज्ञान केवल एक विवाहित को ही दिया जा सकता था। हनुमान जी अपने गुरु सूर्य देवता की आज्ञा मानकर विवाह करने के लिए तैयार हो गए। तब समस्या उत्पन्न हुई की हनुमान जी से विवाह के लिए किस कन्या का चयन किया जाए।* *तब सूर्य देव ने अपनी परम तेजस्वी पुत्री सुवर्चला से अपने शिष्य हनुमान जी को शादी करने के लिए कहा। हनुमान जी तैयार हो गए हनुमान जी और सुवर्चला की शादी हो गई। सूर्य देवता की बेटी और हनुमान जी की पत्नी देवी सुवर्चला परम तपस्वी थी। विवाह होने के बाद ही सुवर्चला तपस्या में मग्न हो गई। और उधर हनुमान जी अपने गुरु सूर्य देवता से अपनी बाकी बची 4 विद्याओं का ज्ञान को हासिल करने में लग गए। इस प्रकार श्री हनुमान जी विवाहित होने के बाद भी उनका ब्रह्मचर्य व्रत नहीं टूटा।* *पुराणों के अनुसार श्री हनुमान जी ने प्रत्येक स्त्री को मां के समान दर्जा दिया है। यही कारण है कि किसी भी स्त्री को श्री हनुमानजी अपने सामने प्रणाम करते हुए नहीं देख सकते। बल्कि वह खुद स्त्री शक्ति को नमन करते हैं। यदि महिलाएं चाहे तो हनुमान जी की सेवा में दीपक अर्पित कर सकती हैं। हनुमान जी की स्तुति कर सकती हैं। हनुमान जी को प्रसाद अर्पित कर सकती हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार श्री हनुमानजी के 16 उपचार जिनमें मुख्य है:- स्नान,वस्त्र,चोला चढ़ाना आते हैं यह सब सेवाएं किसी महिला के द्वारा किया जाना श्री हनुमान जी स्वीकार नहीं करते। इसीलिए महिलाओं को हनुमानजी की पूजा नहीं करनी चाहिए। *कैसे बाल मारुती का नाम हनुमान रख दिया गया?*.....*श्री हनुमान जी की माता अंजनी और केसरी के पुत्र थे। कथा के अनुसार, अंजनी और केसरी को विवाह के बहुत समय बाद तक संतान की प्राप्ति नहीं हुई थी। तब दोनों पति-पत्नी ने मिलकर पवन देव की तपस्या की थी। पवन देव जी के आशीर्वाद से श्री हनुमान जी का जन्म हुआ था। हनुमान जी बचपन से ही बहुत अधिक ताकतवर नटखट और विशाल शरीर वाले थे। हनुमान जी के बचपन का नाम मारुती Maruti था। एक बार Maruti ने सूर्य देवता को फल समझकर उन्हें खाने के लिए सूर्यदेव के आगे बढ़े,और उनके पास पहुंचकर सूर्यदेव को निगलने के लिए अपना मुंह बड़ा कर लिया। इंद्रदेव ने Maruti को ऐसा करते देखा तो इंद्रदेव ने Maruti पर अपने बज्र से प्रहार कर दिया। इंद्र देव का बज्र Maruti की हनु यानी कि ठोड़ी पर लगी। इंद्र देव का बज्र नन्हे Maruti को लगते ही Maruti बेहोश हो गए। यह देख उनके पालक पिता पवनदेव को बहुत ही गुस्सा आ गया। पवन देव अपने पुत्र Maruti की हालत देखकर इतने गुस्से में आ गए कि उन्होंने सारे संसार में पवन का बहना रोक दिया। प्राण वायु के बिना सारे पृथ्वी लोक के वासी त्राहि-त्राहि करने लगे। यह सब देख कर इंद्रदेव ने पवनदेव को तुरंत मनाया। और Maruti को पहले जैसा कर दिया।  सभी देवताओं ने नन्हे Maruti को बहुत सारी शक्तियां प्रदान की। सूर्य देव के तेज अंश प्रदान करने के कारण ही श्री हनुमान जी का बुद्धि संपन्न हुआ। इंद्रदेव का बज्र Maruti के हनु पर लगा था जिसके कारण ही नन्हे Maruti का नाम हनुमान हुआ।*

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simran Dec 10, 2019

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