Aakash Kumar
Aakash Kumar Mar 31, 2020

🙏🌹🙏Jai Jai Shri Ram Ram Ji Ki Sharan Mein Rahane Walon Ko Ho Kisi virus Ka Asar Nahin Hota Hi Hamari Prathna hai Shri Ram Ji Se Hamare sampurn desh vasiyon ki Raksha Karen Jai Jai Shri Ram Ji 🙏🌹🙏

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Ammbika May 9, 2020

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Minakshi Tiwari May 9, 2020

*समझिये कैसे आज का दु:ख कल का सौभाग्य बनता है....* *हर परिस्थिति में आनन्द में रहने की आदत बनायें* महाराज दशरथ को जब संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी, तब वो बड़े दुःखी रहते थे...पर ऐसे समय में उनको एक ही बात से होंसला मिलता था जो कभी उन्हें आशाहीन नहीं होने देता था... *मजे की बात ये कि इस होंसले की वजह किसी ऋषि-मुनि या देवता का वरदान नहीं बल्कि श्रवण के पिता का श्राप था....!* दशरथ जब-जब दुःखी होते थे तो उन्हें श्रवण के पिता का दिया श्राप याद आ जाता था... (कालिदासजी ने रघुवंशम में इसका वर्णन किया है) श्रवण के पिता ने ये श्राप दिया था कि *''जैसे मैं पुत्र वियोग में तड़प-तड़प के मर रहा हूँ, वैसे ही तू भी तड़प-तड़प कर मरेगा.....'!'* *दशरथ को पता था कि ये श्राप अवश्य फलीभूत होगा और इसका मतलब है कि मुझे इस जन्म में तो जरूर पुत्र प्राप्त होगा.... (तभी तो उसके शोक में मैं तड़प के मरूँगा ?)* *यानि यह श्राप दशरथ के लिए संतान प्राप्ति का सौभाग्य लेकर आया....!!* ऐसी ही एक घटना सुग्रीव के साथ भी हुई....! सुग्रीव जब सीताजी की खोज में वानर वीरों को पृथ्वी की अलग - अलग दिशाओं में भेज रहे थे.... तो उसके साथ-साथ उन्हें ये भी बता रहे थे कि किस दिशा में तुम्हें क्या मिलेगा और किस दिशा में तुम्हें जाना चाहिए या नहीं जाना चाहिये....! प्रभु श्रीराम सुग्रीव का ये भगौलिक ज्ञान देखकर हतप्रभ थे...! उन्होंने सुग्रीव से पूछा कि सुग्रीव तुमको ये सब कैसे पता...? तो सुग्रीव ने उनसे कहा कि... *''मैं बाली के भय से जब मारा-मारा फिर रहा था, तब पूरी पृथ्वी पर कहीं शरण न मिली... और इस चक्कर में मैंने पूरी पृथ्वी छान मारी और इसी दौरान मुझे सारे भूगोल का ज्ञान हो गया....!!''* *सोचिये, अगर सुग्रीव पर ये संकट न आया होता तो उन्हें भूगोल का ज्ञान नहीं होता और माता जानकी को खोजना कितना कठिन हो जाता...!!* इसीलिए किसी ने बड़ा सुंदर कहा है :- *"अनुकूलता भोजन है, प्रतिकूलता विटामिन है और चुनौतियाँ वरदान है और जो उनके अनुसार व्यवहार करें.... वही पुरुषार्थी है....!!!"* *ईश्वर की तरफ से मिलने वाला हर एक पुष्प अगर वरदान है.......तो हर एक काँटा भी वरदान ही समझो....!!!* *मतलब.....अगर आज मिले सुख से आप खुश हो...तो कभी अगर कोई दुख, विपदा, अड़चन आ जाये.....तो घबराना नहीं....! क्या पता वो अगले किसी सुख की तैयारी हो....!!* *सदैव सकारात्मक रहें..!!!* बस इस आफतकाल में धैर्य और संयम के साथ लाॅकडाउन का पालन इमानदारी से करें । यदि जिम्मेदारी निर्वहन हेतु बाहर जाने की विवशता हो तो पूरी सतर्कता बरतें ।

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sahil grover May 10, 2020

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🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞 ⛅ दिनांक 09 मई 2020 ⛅ दिन - शनिवार  ⛅ विक्रम संवत - 2077 (गुजरात - 2076) ⛅ शक संवत - 1942 ⛅ अयन - उत्तरायण ⛅ ऋतु - ग्रीष्म ⛅ मास - ज्येष्ठ (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार वैशाख) ⛅ पक्ष - कृष्ण  ⛅ तिथि - द्वितीया सुबह 10:15 तक तत्पश्चात तृतीया ⛅ नक्षत्र - अनुराधा सुबह 06:33 तक तत्पश्चात मूल ⛅ योग - परिघ सुबह 09:35 तक तत्पश्चातम शिव ⛅ राहुकाल - सुबह 09:08 से सुबह 10:46 तक  ⛅ सूर्योदय - 06:04 ⛅ सूर्यास्त - 19:05  ⛅ दिशाशूल - पूर्व दिशा में 💥 विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) 💥 ब्रह्म पुराण' के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- 'मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।' (ब्रह्म पुराण') 💥 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय।' का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण') 💥 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है।(पद्म पुराण) 🌷 विघ्नों और मुसीबते दूर करने के लिए 🌷 👉 10 मई 2020 रविवार को संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय रात्रि 10:26) 🙏🏻 शिव पुराण में आता हैं कि  हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी ( पूनम के बाद की ) के दिन सुबह में गणपतिजी का पूजन करें और रात को चन्द्रमा में गणपतिजी की भावना करके अर्घ्य दें और ये मंत्र बोलें : 🌷 ॐ गं गणपते नमः। 🌷 ॐ सोमाय नमः। ‪🌷 चतुर्थी‬ तिथि विशेष 🌷 🙏🏻 चतुर्थी तिथि के स्वामी ‪भगवान गणेश‬जी हैं। 📆 हिन्दू कैलेण्डर में प्रत्येक मास में दो चतुर्थी होती हैं।  🙏🏻 पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्ट चतुर्थी कहते हैं।अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं। 🙏🏻 शिवपुराण के अनुसार “महागणपतेः पूजा चतुर्थ्यां कृष्णपक्षके। पक्षपापक्षयकरी पक्षभोगफलप्रदा ॥ ➡ “ अर्थात प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को की हुई महागणपति की पूजा एक पक्ष के पापों का नाश करनेवाली और एक पक्षतक उत्तम भोगरूपी फल देनेवाली होती है। 🌷 कोई कष्ट हो तो 🌷 🙏🏻 हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या। ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं कि, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पुर्णिमा के बाद की चतुर्थी ) आती है। उस दिन सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याएं आ रही हैं वो नष्ट हों। 👉🏻 छः मंत्र इस प्रकार हैं – 🌷 ॐ सुमुखाय नम: : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर भी सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे। 🌷 ॐ दुर्मुखाय नम: : मतलब भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृत्ति वाला सताता है तो… भैरव देख दुष्ट घबराये। 🌷 ॐ मोदाय नम: : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले। उनका सुमिरन करने वाले भी प्रसन्न हो जायें। 🌷 ॐ प्रमोदाय नम: : प्रमोदाय; दूसरों को भी आनंदित करते हैं। भक्त भी प्रमोदी होता है और अभक्त प्रमादी होता है, आलसी। आलसी आदमी को लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है। और  जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है। 🌷 ॐ अविघ्नाय नम: 🌷 ॐ विघ्नकरत्र्येय नम:  🌐http://www.vkjpandey.in 🙏🏻🌷🌸🌼💐☘🌹🌻🌺🙏🏻

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