Vivek Singh
Vivek Singh Jun 8, 2017

Kalyug~43200Y,Dwapar~864000Y,Treta~129600Y,Satyug~172800Years acording to Bhagwat.

#ज्ञानवर्षा
Kalyug~43200Y,Dwapar~864000Y,Treta~129600Y,Satyug~172800Years acording to Bhagwat.

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Aryan Phulwani Aug 5, 2020

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Aryan Phulwani Aug 4, 2020

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🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮🔮 *आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇👇* *!! किसान की घड़ी !!* ----------------------------------------------------- एक बार एक किसान की घड़ी कहीं खो गयी. वैसे तो घडी कीमती नहीं थी पर किसान उससे भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ था और किसी भी तरह उसे वापस पाना चाहता था. उसने खुद भी घडी खोजने का बहुत प्रयास किया, कभी कमरे में खोजता तो कभी बाड़े तो कभी अनाज के ढेर में ….पर तामाम कोशिशों के बाद भी घड़ी नहीं मिली. उसने निश्चय किया की वो इस काम में बच्चों की मदद लेगा और उसने आवाज लगाई , ” सुनो बच्चों , तुममे से जो कोई भी मेरी खोई घडी खोज देगा उसे मैं 100 रुपये इनाम में दूंगा.” फिर क्या था, सभी बच्चे जोर-शोर से इस काम में लग गए…वे हर जगह की ख़ाक छानने लगे, ऊपर-नीचे, बाहर, आँगन में ..हर जगह…पर घंटो बीत जाने पर भी घडी नहीं मिली. अब लगभग सभी बच्चे हार मान चुके थे और किसान को भी यही लगा की घड़ी नहीं मिलेगी, तभी एक लड़का उसके पास आया और बोला, ” काका मुझे एक मौका और दीजिये, पर इस बार मैं ये काम अकेले ही करना चाहूँगा.” किसान का क्या जा रहा था, उसे तो घडी चाहिए थी, उसने तुरंत हाँ कर दी. लड़का एक-एक कर के घर के कमरों में जाने लगा…और जब वह किसान के शयन कक्ष से निकला तो घड़ी उसके हाथ में थी. किसान घड़ी देख प्रसन्न हो गया और अचरज से पूछा,” बेटा, कहाँ थी ये घड़ी, और जहाँ हम सभी असफल हो गए तुमने इसे कैसे ढूंढ निकाला ?” लड़का बोला,” काका मैंने कुछ नहीं किया बस मैं कमरे में गया और चुप-चाप बैठ गया, और घड़ी की आवाज़ पर ध्यान केन्द्रित करने लगा, कमरे में शांति होने के कारण मुझे घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे गयी , जिससे मैंने उसकी दिशा का अंदाजा लगा लिया और आलमारी के पीछे गिरी ये घड़ी खोज निकाली.” *शिक्षा :-* *जिस तरह कमरे की शांति, घड़ी ढूढने में मददगार साबित हुई उसी प्रकार मन की शांति हमें Life की ज़रूरी चीजें समझने में मददगार होती है. हर दिन हमें अपने लिए थोडा वक़्त निकालना चाहिए, जसमे हम बिलकुल अकेले हों, जिसमे हम शांति से बैठ कर खुद से बात कर सकें और अपने भीतर की आवाज़ को सुन सकें, तभी हम Life को और अच्छे ढंग से जी पायेंगे। : 🛑🛑🛑🛑 *मैं कौन हूँ*🛑🛑🛑🛑 *एक था भिखारी ! रेल सफ़र में भीख़ माँगने के दौरान एक सूट बूट पहने सेठ जी उसे दिखे। उसने सोचा कि यह व्यक्ति बहुत अमीर लगता है, इससे भीख़ माँगने पर यह मुझे जरूर अच्छे पैसे देगा। वह उस सेठ से भीख़ माँगने लगा।* भिख़ारी को देखकर उस सेठ ने कहा, “तुम हमेशा मांगते ही हो, क्या कभी किसी को कुछ देते भी हो?” *भिख़ारी बोला, “साहब मैं तो भिख़ारी हूँ, हमेशा लोगों से मांगता ही रहता हूँ, मेरी इतनी औकात कहाँ कि किसी को कुछ दे सकूँ?”* सेठ:- जब किसी को कुछ दे नहीं सकते तो तुम्हें मांगने का भी कोई हक़ नहीं है। मैं एक व्यापारी हूँ और लेन-देन में ही विश्वास करता हूँ, अगर तुम्हारे पास मुझे कुछ देने को हो तभी मैं तुम्हे बदले में कुछ दे सकता हूँ। *तभी वह स्टेशन आ गया जहाँ पर उस सेठ को उतरना था, वह ट्रेन से उतरा और चला गया।* इधर भिख़ारी सेठ की कही गई बात के बारे में सोचने लगा। सेठ के द्वारा कही गयीं बात उस भिख़ारी के दिल में उतर गई। वह सोचने लगा कि शायद मुझे भीख में अधिक पैसा इसीलिए नहीं मिलता क्योकि मैं उसके बदले में किसी को कुछ दे नहीं पाता हूँ। लेकिन मैं तो भिखारी हूँ, किसी को कुछ देने लायक भी नहीं हूँ।लेकिन कब तक मैं लोगों को बिना कुछ दिए केवल मांगता ही रहूँगा। *बहुत सोचने के बाद भिख़ारी ने निर्णय किया कि जो भी व्यक्ति उसे भीख देगा तो उसके बदले मे वह भी उस व्यक्ति को कुछ जरूर देगा। लेकिन अब उसके दिमाग में यह प्रश्न चल रहा था कि वह खुद भिख़ारी है तो भीख के बदले में वह दूसरों को क्या दे सकता है?* इस बात को सोचते हुए दिनभर गुजरा लेकिन उसे अपने प्रश्न का कोई उत्तर नहीं मिला। *दुसरे दिन जब वह स्टेशन के पास बैठा हुआ था तभी उसकी नजर कुछ फूलों पर पड़ी जो स्टेशन के आस-पास के पौधों पर खिल रहे थे, उसने सोचा, क्यों न मैं लोगों को भीख़ के बदले कुछ फूल दे दिया करूँ। उसको अपना यह विचार अच्छा लगा और उसने वहां से कुछ फूल तोड़ लिए।* वह ट्रेन में भीख मांगने पहुंचा। जब भी कोई उसे भीख देता तो उसके बदले में वह भीख देने वाले को कुछ फूल दे देता। उन फूलों को लोग खुश होकर अपने पास रख लेते थे। अब भिख़ारी रोज फूल तोड़ता और भीख के बदले में उन फूलों को लोगों में बांट देता था। *कुछ ही दिनों में उसने महसूस किया कि अब उसे बहुत अधिक लोग भीख देने लगे हैं। वह स्टेशन के पास के सभी फूलों को तोड़ लाता था। जब तक उसके पास फूल रहते थे तब तक उसे बहुत से लोग भीख देते थे। लेकिन जब फूल बांटते बांटते ख़त्म हो जाते तो उसे भीख भी नहीं मिलती थी,अब रोज ऐसा ही चलता रहा। एक दिन जब वह भीख मांग रहा था तो उसने देखा कि वही सेठ ट्रेन में बैठे है जिसकी वजह से उसे भीख के बदले फूल देने की प्रेरणा मिली थी। *वह तुरंत उस व्यक्ति के पास पहुंच गया और भीख मांगते हुए बोला, आज मेरे पास आपको देने के लिए कुछ फूल हैं, आप मुझे भीख दीजिये बदले में मैं आपको कुछ फूल दूंगा।* सेठ ने उसे भीख के रूप में कुछ पैसे दे दिए और भिख़ारी ने कुछ फूल उसे दे दिए। उस सेठ को यह बात बहुत पसंद आयी। *सेठ:- वाह क्या बात है..? आज तुम भी मेरी तरह एक व्यापारी बन गए हो, इतना कहकर फूल लेकर वह सेठ स्टेशन पर उतर गया।* लेकिन उस सेठ द्वारा कही गई बात एक बार फिर से उस भिख़ारी के दिल में उतर गई। वह बार-बार उस सेठ के द्वारा कही गई बात के बारे में सोचने लगा और बहुत खुश होने लगा। उसकी आँखे अब चमकने लगीं, उसे लगने लगा कि अब उसके हाथ सफलता की वह चाबी लग गई है जिसके द्वारा वह अपने जीवन को बदल सकता है। *वह तुरंत ट्रेन से नीचे उतरा और उत्साहित होकर बहुत तेज आवाज में ऊपर आसमान की ओर देखकर बोला, “मैं भिखारी नहीं हूँ, मैं तो एक व्यापारी हूँ..* मैं भी उस सेठ जैसा बन सकता हूँ.. मैं भी अमीर बन सकता हूँ! *लोगों ने उसे देखा तो सोचा कि शायद यह भिख़ारी पागल हो गया है, अगले दिन से वह भिख़ारी उस स्टेशन पर फिर कभी नहीं दिखा।* एक वर्ष बाद इसी स्टेशन पर दो व्यक्ति सूट बूट पहने हुए यात्रा कर रहे थे। दोनों ने एक दूसरे को देखा तो उनमे से एक ने दूसरे को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और कहा, “क्या आपने मुझे पहचाना?” सेठ:- “नहीं तो ! शायद हम लोग पहली बार मिल रहे हैं। *भिखारी:- सेठ जी.. आप याद कीजिए, हम पहली बार नहीं बल्कि तीसरी बार मिल रहे हैं।* सेठ:- मुझे याद नहीं आ रहा, वैसे हम पहले दो बार कब मिले थे? अब पहला व्यक्ति मुस्कुराया और बोला: हम पहले भी दो बार इसी ट्रेन में मिले थे, मैं वही भिख़ारी हूँ जिसको आपने पहली मुलाकात में बताया कि मुझे जीवन में क्या करना चाहिए और दूसरी मुलाकात में बताया कि मैं वास्तव में कौन हूँ। *नतीजा यह निकला कि आज मैं फूलों का एक बहुत बड़ा व्यापारी हूँ और इसी व्यापार के काम से दूसरे शहर जा रहा हूँ।* आपने मुझे पहली मुलाकात में प्रकृति का नियम बताया था... जिसके अनुसार हमें तभी कुछ मिलता है, जब हम कुछ देते हैं। लेन देन का यह नियम वास्तव में काम करता है, मैंने यह बहुत अच्छी तरह महसूस किया है, लेकिन मैं खुद को हमेशा भिख़ारी ही समझता रहा, इससे ऊपर उठकर मैंने कभी सोचा ही नहीं था और जब आपसे मेरी दूसरी मुलाकात हुई तब आपने मुझे बताया कि मैं एक व्यापारी बन चुका हूँ। अब मैं समझ चुका था कि मैं वास्तव में एक भिखारी नहीं बल्कि व्यापारी बन चुका हूँ। *भारतीय मनीषियों ने संभवतः इसीलिए स्वयं को जानने पर सबसे अधिक जोर दिया और फिर कहा -* सोऽहं शिवोहम !! समझ की ही तो बात है... *भिखारी ने स्वयं को जब तक भिखारी समझा, वह भिखारी रहा | उसने स्वयं को व्यापारी मान लिया, व्यापारी बन गया |* जिस दिन हम समझ लेंगे कि मैं कौन हूँ... *अर्थात मैं भगवान का अंश हूॅ।* फिर जानने समझने को रह ही क्या जाएगा ? 🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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Sunita Pawar Aug 6, 2020

आइए जानते हैं इस दिव्य वृक्ष पारिजात के बारे में जिसे आज माननीय प्रधानमंत्री जी ने भूमि पूजन से पहले अयोध्या की पावन भूमि पर लगाया और भगवान रामजी से क्या संबंध हैं इस वृक्ष का सुगंधित पुष्प को हरसिंगार के नाम से भी जाना जाता है बता दें कि पारिजात का पेड़ बहुत खूबसूरत होता है। पारिजात के फूल को भगवान हरि के श्रृंगार और पूजन में प्रयोग किया जाता है, इसलिए इस मनमोहक और सुगंधित पुष्प को हरसिंगार के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म में इस वृक्ष का बहुत महत्व माना जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि पारिजात को छूने मात्र से ही व्यक्ति की थकान मिट जाती है। इसमें बहुत बड़ी मात्रा में फूल लगते हैं पारिजात का वृक्ष ऊंचाई में दस से पच्चीस फीट तक का होता है। इसके इस वृक्ष की एक खास बात ये भी है कि इसमें बहुत बड़ी मात्रा में फूल लगते हैं। एक दिन में इसके कितने भी फूल तोड़े जाएं, अगले दिन इस फिर बड़ी मात्रा में फूल खिल जाते हैं। यह वृक्ष खासतौर से मध्य भारत और हिमालय की नीची तराइयों में अधिक उगता है। सिर्फ पांच प्रजातियां पाई जाती हैं ये फूल रात में ही खिलता है और सुबह होते ही इसके सारे फूल झड़ जाते हैं। इसलिए इसे रात की रानी भी कहा जाता है। हरसिंगार का फूल पश्चिम बंगाल का राजकीय पुष्प भी है। दुनिया भर में इसकी सिर्फ पांच प्रजातियां पाई जाती हैं। पूजा के लिए इस वृक्ष से फूल तोड़ना पूरी तरह से निषिद्ध कहा जाता है कि धन की देवी लक्ष्मी को पारिजात के फूल अत्यंत प्रिय हैं। पूजा-पाठ के दौरान मां लक्ष्मी को ये फूल चढ़ाने से वो प्रसन्न होती हैं। खास बात ये है कि पूजा-पाठ में पारिजात के वे ही फूल इस्तेमाल किए जाते हैं जो वृक्ष से टूटकर गिर जाते हैं। पूजा के लिए इस वृक्ष से फूल तोड़ना पूरी तरह से निषिद्ध है। ऐसा कहा या माना जाता है क‍ि 14 साल के वनवास के दौरान सीता माता हरसिंगार के फूलों से ही अपना श्रृंगार करती थीं। महाभारतकालीन पारिजात वृक्ष बाराबंकी जिले के पारिजात वृक्ष को महाभारतकालीन माना जाता है जो लगभग 45 फीट ऊंचा है। मान्यता है कि परिजात वृक्ष की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी, जिसे इन्द्र ने अपनी वाटिका में लगाया था। कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान माता कुंती ने पारिजात पुष्प से शिव पूजन करने की इच्छा जाहिर की थी। माता की इच्छा पूरी करने के लिए अर्जुन ने स्वर्ग से इस वृक्ष को लाकर यहां स्थापित कर दिया था। तभी से इस वृक्ष की पूजा अर्चना की जाती रही है। पारिजात को कल्पवृक्ष भी कहा गया है हरिवंश पुराण में पारिजात को कल्पवृक्ष भी कहा गया है। मान्यता है कि स्वर्गलोक में इसको स्पर्श करने का अधिकार सिर्फ उर्वशी नाम की अप्सरा को था। इस वृक्ष के स्पर्श मात्र से ही उर्वशी की सारी थकान मिट जाती थी। आज भी लोग मानते हैं कि इसकी छाया में बैठने से सारी थकावट दूर हो जाती है। फूलों के रस के सेवन से हृदय रोग से बचा जा सकता है पारिजात अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है। हर दिन इसके एक बीज के सेवन से बवासीर रोग ठीक हो जाता है। इसके फूल हृदय के लिए भी उत्तम माने जाते हैं। इनके फूलों के रस के सेवन से हृदय रोग से बचा जा सकता है। इतना ही नहीं पारिजात की पत्तियों को पीस कर शहद में मिलाकर खाने से सूखी खांसी भी ठीक हो जाती है। पारिजात की पत्तियों से त्वचा संबंधित रोग ठीक हो जाते हैं।🙏

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Sunita Pawar Aug 6, 2020

🤔 *आज के कई शिक्षक और छात्र भी नहीं जानते होंगे कि भारतीय भाषाओं की वर्णमाला विज्ञान से भरी हुई है।* वर्णमाला का प्रत्येक अक्षर तार्किक है और सटीक गणना के साथ क्रमिक रूप से रखा गया है। इस तरह का वैज्ञानिक दृष्टिकोण अन्य विदेशी भाषाओं की वर्णमाला में शामिल नहीं है। जैसे- *क ख ग घ ख* - पांच के इस समूह को कान्हात्वय कंठवय कहा जाता है, क्योंकि इस उच्चारण के दौरान ध्वनि गले से निकलती है। उच्चारण का प्रयास करें। *च छः ज प ल* - इन पाँचों को तालु दोष कहा जाता है, क्योंकि इस उच्चारण के दौरान जीभ तालू महसूस करेगी। उच्चारण का प्रयास करें। *ट ठ ड* -इन पांचों को मुर्धन्य मुराद्य कहा जाता है क्योंकि यह उच्चारण करते समय जीभ मुर्धन्य महसूस करेगी, उच्चारण का प्रयास करें। *त थ द ध न* - पाँच के इस समूह को दन्तव्य कहा जाता है, क्योंकि यह उच्चारण करते समय जीभ दांतों को छूती है। *प फ ब भ म* - पांच के इस समूह को ओशतावेद आष्टव्या कहा जाता है, क्योंकि दोनों होंठ इस उच्चारण के लिए मिलते हैं। दुनिया की किसी भी अन्य भाषा में ऐसा वैज्ञानिक दृष्टिकोण है ? हमें अपनी भारतीय भाषा के लिए गर्व की आवश्यकता है, लेकिन साथ ही हमें यह भी बताना चाहिए कि दुनिया को क्यों और कैसे बताएं। दूसरों को भेजें और हमारी भाषा का गौरव बढ़ाएँ... *स्वदेशी शिक्षा अभियान...*🚩

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🪔🪔🪔🪔🪔 *दीप प्रज्वलन मंत्र...* दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन:। दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते।। शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां। शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति।। *मंत्र का अर्थ :* दीपक की ज्योति ही ब्रह्मा व परमेश्वर है। पाप का नाश करने वाली दीपक की ज्योति को मेरा नमस्कार। कल्याण करने वाले शत्रु के भय को खत्म करने और घर में सुख समृद्धि का वास करने वाली ज्योति को मेरा प्रणाम। 🔥🔥🔥🔥🔥 *मंत्रोच्चारण कर दीपक जलाने के लाभ :* मंत्रोच्चारण कर दीपक जलाने के कई लाभ है जिसमें से कुछ हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं जो इस प्रकार हैं - 👉दीपक से अंधकार का नाश होता ही है, साथ ही घर में उपस्थित नकारात्मक शक्ति का भी अंत होता है 👉घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार 👉घर में रहने वाले लोगों की बुद्धि में अच्छे विचार जन्म लेते हैं 👉घर में सुख समृद्धि का वास होता है *देश के प्रधानमंत्री ने जनता से की अपील...* *आओ मिल के दीप जलाएँ...* 👉 बुधवार 👉 5 अगस्त 2020 👉 संध्याकालीन 7बजे 👉 आओ मिल के दीप जलाएँ... 🌹🌷🚩 जय श्री राम जय हनुमान🌹🌷🚩 जय हिंद जय भारत वंदे मातरम🌹🌷🚩🌹 मैं दीप अवश्य जलाऊँगा एक दीप आशा का एक विश्वास का एक ज्ञान का एक प्रकाश का एक तम में उजाले का एक भूखे के निवाले का , एक बेसहारे के सहारे का एक डूबते के किनारे का | एक जन-जन की वाणी का , एक मानव की नादानी का | स्नेह मानवता का लाऊँगा, हाँ ! मैं दीया अवश्य जलाऊँगा| 🌹🌷🚩 जय श्री राम जय हनुमान🌹🌷🚩 जय हिंद जय भारत वंदे मातरम्🌹🌷🚩🌹 दीप जलाकर दें सखे,राष्ट्र भक्ति संदेश। जीवन का उजियार ये,जीवन का उपदेश।। 🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔 👉सामान्य दूरी बनाए रखें.... ************************************************* *जानिए क्‍यों खास है पांच अगस्‍त को अयोध्‍या में शिलान्‍यास* 🌾🍁🏯👏👏👏👏👏🏯🍁🌾 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 *अयोध्‍या में भगवान श्रीराम मंदिर के शिलान्यास की तिथि निश्चित हो चुकी है। यह स्वर्णिम दिवस है भाद्रपद कृष्ण द्वितीया संवत 2077, तदनुसार पांच अगस्त सन 2020। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों द्वारा यह ऐतिहासिक शिलान्यास मध्यान्ह 12:15 बजे अभिजित मुहूर्त में होगा। *लेकिन पूरे देश के मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि पांच अगस्‍त को ही मुहूर्त क्‍यों हो रहा है। इसके पीछे क्‍या कारण है और यदि इस दिन मुहूर्त होता है तो देश को इसका क्‍या लाभ मिलने वाला है ? *इसका विश्‍लेषण किया है। जानिए पांच अगस्‍त को शिलान्‍यास क्‍यों खास है और इसका क्‍या लाभ मिलने जा रहा है। ज्‍योतिषीय दृष्‍टिकोण से यह मुहूर्त बहुत ही शुभ है। -चर संज्ञक लग्न तुला है जो पर्यटन की दृष्‍टि से अति उत्‍तम है। -दशम भाव में बुधादित्य योग बन रहा है जो प्रशासनिक एवं इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। -इस दिन चतुर्थ भाव में स्वराशि के शनि हैं जो पंचमहापुरुष योग बना रहे हैं। यह पुरातात्त्विक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्धता प्रदान करने वाला है। -इस दिन तृतीय भाव में धनु राशि में स्वराशि के गुरु एवं केतु हैं जो विश्व में आध्यात्मिक क्षेत्र में परम प्रसिद्धि योग बना रहे हैं। -बुधवार को शतभिषा नक्षत्र रहेगा जो मित्र एवं मानस योग निर्मित कर रहा है। -इस दिन अभिजित मुहुर्त है जिसे ज्‍योतिष में मौजूद समस्‍त मुहूर्तों में सर्वश्रेष्‍ठ मुहूर्त माना जाता है। -इस दिन मुहूर्त के समय सभी ग्रह स्वराशि या मित्र राशि में दृश्यमान रहेंगे। *ऐसे शुभ एवं उत्तम योगों में रखी गई नींव (शिलान्यास) हजारों वर्षों तक भारतीय संस्कृति एवं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को विश्व में जीवित रखेंगी। *ऐसा शुभ मुहूर्त केवल श्रीराम मंदिर के लिए ही शुभ नहीं है बल्कि जन सामान्य लोगों के लिए भी गृह निर्माण, गृह प्रवेश एवं अन्य शुभ कार्यों के लिए अति उत्तम मुहुर्त है। 'राम राज्य बैठे त्रिलोका। हर्षित भयऊ गयऊ सब सोका।' *रामचरितमानस की इस चौपाई की प्रामाणिकता के आधार पर जब भी भगवान राम से संबंधित जो भी अनुष्ठान एवं निर्माण आरंभ होता है तो राष्ट्र की प्रगति, समृद्धि एवं विकास को गति मिलती है। वैसे भी ऐसे शुभ योग में मन्दिर निर्माण होने से देश की प्रगति से विश्व में यशोगान के योग बन रहे हैं। भारत विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम होगा। 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ *जय श्री सियाराम*🙏🚩🚩 🍃🎋🍃🎋🕉️🎋🍃🎋🍃 🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾 *अयोध्या मे किसका मंदिर बन रहा है ?* क्या भगवान राम का ? नही, क्यूँकि वे अजन्मा हैं, शाश्वत हैं, परमात्म स्वरूप हैं, ब्रह्म हैं, सारा जगत ही उनका मंदिर है, वे सब जगह विराजमान हैं, चन्द्र तारों में सूर्य में पृथ्वी जल आकाश अंतरिक्ष मनुष्य पशु प्राणियों फूल पत्तियों और जगत के कण कण में हैं, सम्पूर्ण अयोध्या और वहाँ के अन्य मंदिरों में तो वे हैं हीं, इसलिए उन्हें मंदिर की जरूरत नही है। क्या राजा रामचन्द्र जी का ? नही राजा राम चन्द्र जी का नहीं क्यूँकि पृथ्वी पर कई राजा आये और गए, बड़े बड़े सम्राट आये और गए, सब अपने आलीशान आलीशान महलों किलों इमारतों को यहीं छोड़के चले गए जिनके कुछ अवशेष अभी भी खंडहरों के रूप में मौजूद हैं या फिर जमीनों के अंदर दफन हैं। अब उन पर सरकारों का कब्जा है और वे पुरातात्विक महत्व की वस्तुएं हैं। क्या भाजपा के जय श्री राम का ? नही क्यूँकि इस मंदिर के लिए पिछले 500 सालों से अब तक लाखों लोगों ने लड़ाइयां लड़ी हैं और अपनी जानें गंवाई है, आज भी विश्वभर में करोड़ों करोड़ों गैर राजनीतिक हिंदू भी इस मंदिर को बनाने के लिए अपना अपना योगदान दे रहे हैं। और इसका बन जाने का पूर्ण हृदय से इंतजार कर रहे हैं जिसका सपना वो कई वर्षों से देखते आ रहे हैं। तो फिर ये मंदिर बन किसका रहा है ? यह मंदिर बन रहा है हिंदू अस्मिता का जिसे सैकड़ो वर्षों से रौंदा जा रहा था, हिंदू आत्म सम्मान का जिसे लगातार ठेस पहुंचाई जा रही थी, उदार हिंदुओं की गरिमा और गौरव का जिसे आतताइयों ने बेरहमी से कुचला था कभी। *यह मंदिर हिंदू पुनर्जागरण का प्रतीक है, हिंदू पुनरुत्थान की उद्घोषणा है।* हिंदू आत्म विश्वास के पुनः उठ खड़े होने का सूचक है । प्राचीन अस्त हिंदू सभ्यता के उदय होने का शंखनाद है । लाखों हिंदू -सिक्ख -जैन - बौद्ध बलिदानियों के लिए श्रद्धांजलि है ये मंदिर। ये मंदिर उन परमपिता परमेश्वर श्री राम का मंदिर है जो प्रत्येक हिंदू के हृदय में इस श्रद्धा विश्वास के रूप में विधमान थे कि एक दिन उनका भी दिन आएगा और वे पुनः अपनी खोई हुई शक्ति दर्प और स्वाभिमान को वापस प्राप्त कर लेंगे। सभी श्री राम भक्त हिंदुओं से अपील है कि वे भूमि पूजन के दिन अपने अपने घरों में रामायण का पाठ करें, धूप अगरबत्ती व दिए जलाएं, शंखनाद करें, घंटियाँ बजाएं, कीर्तन भजन करें ढोलक मृदंग चिमटा खड़ताल डमरू इत्यादि जो कुछ भी जिसके पास हो वह बजाएं। पूरी दुनियां को संदेश जाना चाहिए कि हिंदू जाग गए हैं, हिंदुओं के एक नए युग का श्री गणेश हुआ है भारत में। *राम राज बैठे त्रैलोका,* *हर्षित भये गए सब शोका* *बयरु न कर काहू सम कोई,* *राम प्रताप विषमता खोई।* *जय जय श्री सीताराम* 🚩🙏🚩🙏🚩🙏🚩 "!!अत्यंत ज्ञानवर्धक!!" 🌾🍁🏯👏👏👏👏👏🏯🍁🌾 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 तुलसी दास जी ने जब राम चरित मानस की रचना की,तब उनसे किसी ने पूंछा कि बाबा! आप ने इसका नाम रामायण क्यों नहीं रखा? क्योकि इसका नाम रामायण ही है.बस आगे पीछे नाम लगा देते है, वाल्मीकि रामायण,आध्यात्मिक रामायण.आपने राम चरित मानस ही क्यों नाम रखा? बाबा ने कहा - क्योकि रामायण और राम चरित मानस में एक बहुत बड़ा अंतर है.रामायण का अर्थ है राम का मंदिर, राम का घर,जब हम मंदिर जाते है तो एक समय पर जाना होता है, मंदिर जाने के लिए नहाना पडता है,जब मंदिर जाते है तो खाली हाथ नहीं जाते कुछ फूल,फल साथ लेकर जाना होता है.मंदिर जाने कि शर्त होती है,मंदिर साफ सुथरा होकर जाया जाता है. और मानस अर्थात सरोवर, सरोवर में ऐसी कोई शर्त नहीं होती,समय की पाबंधी नहीं होती,जाती का भेद नहीं होता कि केवल हिंदू ही सरोवर में स्नान कर सकता है,कोई भी हो ,कैसा भी हो? और व्यक्ति जब मैला होता है, गन्दा होता है तभी सरोवर में स्नान करने जाता है.माँ की गोद में कभी भी कैसे भी बैठा जा सकता है. रामचरितमानस की चौपाइयों में ऐसी क्षमता है कि इन चौपाइयों के जप से ही मनुष्य बड़े-से-बड़े संकट में भी मुक्त हो जाता है। इन मंत्रो का जीवन में प्रयोग अवश्य करे प्रभु श्रीराम आप के जीवन को सुखमय बना देगे। 1. *रक्षा के लिए* मामभिरक्षक रघुकुल नायक | घृत वर चाप रुचिर कर सायक || 2. *विपत्ति दूर करने के लिए* राजिव नयन धरे धनु सायक | भक्त विपत्ति भंजन सुखदायक || 3. *सहायता के लिए* मोरे हित हरि सम नहि कोऊ | एहि अवसर सहाय सोई होऊ || 4. *सब काम बनाने के लिए* वंदौ बाल रुप सोई रामू | सब सिधि सुलभ जपत जोहि नामू || 5. *वश मे करने के लिए* सुमिर पवन सुत पावन नामू | अपने वश कर राखे राम || 6. *संकट से बचने के लिए* दीन दयालु विरद संभारी | हरहु नाथ मम संकट भारी || 7. *विघ्न विनाश के लिए* सकल विघ्न व्यापहि नहि तेही | राम सुकृपा बिलोकहि जेहि || 8. *रोग विनाश के लिए* राम कृपा नाशहि सव रोगा | जो यहि भाँति बनहि संयोगा || 9. *ज्वार ताप दूर करने के लिए* दैहिक दैविक भोतिक तापा | राम राज्य नहि काहुहि व्यापा || 10. *दुःख नाश के लिए* राम भक्ति मणि उस बस जाके | दुःख लवलेस न सपनेहु ताके || 11. *खोई चीज पाने के लिए* गई बहोरि गरीब नेवाजू | सरल सबल साहिब रघुराजू || 12. *अनुराग बढाने के लिए* सीता राम चरण रत मोरे | अनुदिन बढे अनुग्रह तोरे || 13. *घर मे सुख लाने के लिए* जै सकाम नर सुनहि जे गावहि | सुख सम्पत्ति नाना विधि पावहिं || 14. *सुधार करने के लिए* मोहि सुधारहि सोई सब भाँती | जासु कृपा नहि कृपा अघाती || 15. *विद्या पाने के लिए* गुरू गृह पढन गए रघुराई | अल्प काल विधा सब आई || 16. *सरस्वती निवास के लिए* जेहि पर कृपा करहि जन जानी | कवि उर अजिर नचावहि बानी || 17. *निर्मल बुद्धि के लिए* ताके युग पदं कमल मनाऊँ | जासु कृपा निर्मल मति पाऊँ || 18. *मोह नाश के लिए* होय विवेक मोह भ्रम भागा | तब रघुनाथ चरण अनुरागा || 19. *प्रेम बढाने के लिए* सब नर करहिं परस्पर प्रीती | चलत स्वधर्म कीरत श्रुति रीती || 20. *प्रीति बढाने के लिए* बैर न कर काह सन कोई | जासन बैर प्रीति कर सोई || 21. *सुख प्रप्ति के लिए* अनुजन संयुत भोजन करही | देखि सकल जननी सुख भरहीं || 22. *भाई का प्रेम पाने के लिए* सेवाहि सानुकूल सब भाई | राम चरण रति अति अधिकाई || 23. *बैर दूर करने के लिए* बैर न कर काहू सन कोई | राम प्रताप विषमता खोई || 24. *मेल कराने के लिए* गरल सुधा रिपु करही मिलाई | गोपद सिंधु अनल सितलाई || 25. *शत्रु नाश के लिए* जाके सुमिरन ते रिपु नासा | नाम शत्रुघ्न वेद प्रकाशा || 26. *रोजगार पाने के लिए* विश्व भरण पोषण करि जोई | ताकर नाम भरत अस होई || 27. *इच्छा पूरी करने के लिए* राम सदा सेवक रूचि राखी | वेद पुराण साधु सुर साखी || 28. *पाप विनाश के लिए* पापी जाकर नाम सुमिरहीं | अति अपार भव भवसागर तरहीं || 29. *अल्प मृत्यु न होने के लिए* अल्प मृत्यु नहि कबजिहूँ पीरा | सब सुन्दर सब निरूज शरीरा || 30. *दरिद्रता दूर के लिए* नहि दरिद्र कोऊ दुःखी न दीना | नहि कोऊ अबुध न लक्षण हीना || 31. *प्रभु दर्शन पाने के लिए* अतिशय प्रीति देख रघुवीरा | प्रकटे ह्रदय हरण भव पीरा || 32. *शोक दूर करने के लिए* नयन बन्त रघुपतहिं बिलोकी | आए जन्म फल होहिं विशोकी || 33. *क्षमा माँगने के लिए* अनुचित बहुत कहहूँ अज्ञाता | क्षमहुँ क्षमा मन्दिर दोऊ भ्राता || इसलिए जो शुद्ध हो चुके है वे रामायण में चले जाए और जो शुद्ध होना चाहते है वे राम चरित मानस में आ जाए.राम कथा जीवन के दोष मिटाती है *"रामचरित मानस एहिनामा, सुनत श्रवन पाइअ विश्रामा"* राम चरित मानस तुलसीदास जी ने जब किताब पर ये शब्द लिखे तो आड़े (horizontal) में रामचरितमानस ऐसा नहीं लिखा, खड़े में लिखा (vertical) रामचरित मानस। किसी ने गोस्वामी जी से पूंछा आपने खड़े में क्यों लिखा तो गोस्वामी जी कहते है रामचरित मानस राम दर्शन की ,राम मिलन की सीढी है ,जिस प्रकार हम घर में कलर कराते है तो एक लकड़ी की सीढी लगाते है, जिसे हमारे यहाँ नसेनी कहते है,जिसमे डंडे लगे होते है,गोस्वामी जी कहते है रामचरित मानस भी राम मिलन की सीढी है जिसके प्रथम डंडे पर पैर रखते ही श्रीराम चन्द्र जी के दर्शन होने लगते है,अर्थात यदि कोई बाल काण्ड ही पढ़ ले, तो उसे राम जी का दर्शन हो जायेगा। *सत्य है शिव है सुन्दर है* 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩☀!! श्री हरि: शरणम् !! ☀ 🍃🎋🍃🎋🕉️🎋🍃🎋🍃 🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾🙏🏾

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