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Manoj manu
Manoj manu Jul 11, 2019

🚩🌿🙏जय जय श्री राधे जी 🌺🙏 🌿🌷खुशहाल (खुश) कैसे रहें ,एक प्रयास :- जीवन में हम जो भी कार्य करते हैं वो खुशी की प्राप्ति के लिए ही करते हैं,और सदैव खुश रहना चाहते हैं परन्तु साथ ही हम ये भी सोचते हैं कि, खुश रहने के लिए कोई विशेष तरह के हालात होने चाहिये, तो आईये जानते हैं कि हम खुश कैसे रह सकते हैं :-- 🌿🌿हर पल अपने ईश्वर के निकट रहें 🌿🌿 (1) सबसे पहले तो हमें यह मानना होगा कि खुश रहना हमारी महत्वपूर्ण और बुनियादी जिम्मेदारी है, और उसको हमे पूरी भी करनी है , (2) :--खुशी हमारी मूल प्रकृति है ना कि दुखी रहना , इस प्रकृति की ही पहचान करना है, और उसका स्रोत कहीं और नहीं स्वयं हमारे भीतर ही है, (3):--चीजों के प्रति सही नजरिया अपनाना चाहिये, जो वास्तविक है उसकी पहचान करनी चाहिए, (4):-- हमें यह जानना होगा कि अपने मन में किन बातों को रखना है और किन को नहीं, (5):--- विचार प्रवाह में हमारा ध्यान सामान्यता:उस दिशा में जाता है जिसे हमारा मन महत्वपूर्ण मान लेता है, और हम स्वयं अपने मन को कष्टों का उद्गम स्थल बना लेते हैं, (6):-- अभिव्यक्त करना, यदि हम अपने जीवन में पीछे मुड़कर देखें जैसे कि बचपन में -तो हम पायेगें कि हमारे जीवन के खूबसूरत पल वे थे जब हमने खुशी को अभिव्यक्त किया था , (7):-- देने का भाव हमारा प्राकृतिक भाव है, ना कि संचय करना, इसको बढाना होगा, जो कि नि:ह स्वार्थ हो तो अति उत्तम होगा, (8):--अपने आप को जीवन कीै अहमियत का ग्यान करवाना, अपने मूल स्वरूप का आनंद लेना, जैसे कि कोई छोटा सा बालक प्राप्त करता है, (9):--जीवन की सही गुणवत्ता अधिक से अधिक शाँत और खुश रहने में है, ना कि मंहगे कपडे, अघिक सफलतायें, या कि बैंक बैलेंस में, (10):--किसी से किसी प्रकार की अपनी तुलना ना करें आप जैसे भी बहुत सुन्दर हैं अपने तन और मन से, और अपनी आर्थिक स्थिति से, (11):--जो बदला जा सके उसे बदलिये, जो बदला ना जा सके उसे स्वीकार कीजिये, और जो स्वीकारा न जा सके उससे दूर रहिये, (12):-- अपने कार्यों को खुशी प्राप्त करने के लिये ना करें , वरन उनको खुश होकर करें तो खुशी स्वयं ही मन को छू लेगी, (13):--पर्याप्ता का भाव, आत्म संतुष्टि का होना अनिवार्य है, आपके पास बहुत कुछ है, उसे पहचानना होगा, संतुष्ट होना चाहिए, (15) :--खुशी किसी वस्तु में नहीं है ,कोई साईकिल बाला भी खुश है तो कोई कार में बैठकर भी दु:खी , (16):-हमारे आस पास ऐसे बहुत से लोग होते हैं जो किसी कारण से खुश हैं, हम उनको देखकर भी खुश हो सकते हैं , (17):--अपने आस -पास के छोटे बच्चों से प्रेम पूर्वक बातें कीजिये ,उनकी भी सुनिये, मन खुश हो जाएगा, 🌿छोटी -छोटी खुशियों के पल निकले जाते रोज जहाँ, फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का रह जाता कोई अर्थ नहीं, 🌿 तो हर पल खुश रहिये, मुस्कुराते रहिये आपको देखकर दुखी इंसान भी अपने दुःख भूलकर खुश हो जायेगे, जैसा कि हमारे साथ भी होता है, 🌿 "सोच बदलो तो सितारे बदल जायेंगे, नज़र को बदलो तो नजारे बदल जायेंगे, कश्तियाँ बदलने की जरूरत नहीं, दिशाओं को बदलो तो किनारे बदल जायेंगे " तो अपने चेहरे पे छोटी सी मुस्कान ला कर प्रेम पूर्वक बोल दीजिये 🌹राधे राधे जी 🌹🙏

🚩🌿🙏जय जय श्री राधे जी 🌺🙏
🌿🌷खुशहाल (खुश) कैसे रहें ,एक प्रयास :-
जीवन में हम जो भी कार्य करते हैं वो खुशी की प्राप्ति के लिए ही करते हैं,और सदैव खुश रहना चाहते हैं परन्तु साथ ही हम ये भी सोचते हैं कि, खुश रहने के लिए कोई विशेष तरह के हालात होने चाहिये, 
तो आईये जानते हैं कि हम खुश कैसे रह सकते हैं :--
🌿🌿हर पल अपने ईश्वर के निकट रहें 🌿🌿
(1) सबसे पहले तो हमें यह मानना होगा कि खुश रहना  हमारी महत्वपूर्ण और बुनियादी जिम्मेदारी है, और उसको हमे पूरी भी करनी है ,
(2) :--खुशी हमारी मूल प्रकृति है ना कि दुखी रहना , इस प्रकृति की ही पहचान करना है, और उसका स्रोत कहीं और नहीं स्वयं हमारे भीतर ही है, 
(3):--चीजों के प्रति सही नजरिया अपनाना चाहिये, जो वास्तविक है उसकी पहचान करनी चाहिए, 
(4):-- हमें यह जानना होगा कि अपने मन में किन बातों को रखना है और किन को नहीं, 
(5):--- विचार प्रवाह में हमारा ध्यान सामान्यता:उस दिशा में जाता है जिसे हमारा मन महत्वपूर्ण मान लेता है, और हम स्वयं अपने मन को कष्टों का उद्गम स्थल बना लेते हैं, 
(6):-- अभिव्यक्त करना, यदि हम अपने जीवन में पीछे मुड़कर देखें जैसे कि बचपन में -तो हम पायेगें कि हमारे जीवन के खूबसूरत पल वे थे जब हमने खुशी को अभिव्यक्त किया था ,
(7):-- देने का भाव हमारा प्राकृतिक भाव है, ना कि संचय करना, इसको बढाना होगा, जो कि नि:ह स्वार्थ हो तो अति उत्तम होगा, 
(8):--अपने आप को जीवन कीै अहमियत का ग्यान करवाना, अपने मूल स्वरूप का आनंद लेना, जैसे कि कोई छोटा सा बालक प्राप्त करता है, 
(9):--जीवन की सही गुणवत्ता अधिक से अधिक शाँत और खुश रहने में है, ना कि मंहगे कपडे, अघिक सफलतायें, या कि बैंक बैलेंस में, 
(10):--किसी से किसी प्रकार की अपनी तुलना ना करें आप जैसे भी बहुत सुन्दर हैं अपने तन और मन से, और अपनी आर्थिक स्थिति से, 
(11):--जो बदला जा सके उसे बदलिये, जो बदला ना जा सके उसे स्वीकार कीजिये, और जो स्वीकारा न जा सके उससे दूर रहिये, 
(12):-- अपने कार्यों को खुशी प्राप्त करने के लिये ना करें , वरन उनको खुश होकर करें तो खुशी स्वयं ही मन को छू लेगी, 
(13):--पर्याप्ता का भाव, आत्म संतुष्टि का होना अनिवार्य है, आपके पास बहुत कुछ है, उसे पहचानना होगा, संतुष्ट होना चाहिए, 
(15) :--खुशी किसी वस्तु में नहीं है ,कोई साईकिल बाला भी खुश है तो कोई कार में बैठकर भी दु:खी ,
(16):-हमारे आस पास ऐसे बहुत से लोग होते हैं जो किसी कारण से खुश हैं, हम उनको देखकर भी खुश हो सकते हैं ,
(17):--अपने आस -पास के छोटे बच्चों से प्रेम पूर्वक बातें कीजिये ,उनकी भी सुनिये, मन खुश हो जाएगा, 
🌿छोटी -छोटी खुशियों के पल निकले जाते रोज जहाँ, फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का रह जाता कोई अर्थ नहीं, 🌿
 तो हर पल खुश रहिये, मुस्कुराते रहिये आपको देखकर दुखी इंसान भी अपने दुःख भूलकर खुश हो जायेगे, जैसा कि हमारे साथ भी होता है, 🌿
"सोच बदलो तो सितारे बदल जायेंगे, 
नज़र को बदलो तो नजारे बदल जायेंगे, 
कश्तियाँ बदलने की जरूरत नहीं, 
दिशाओं को बदलो तो किनारे बदल जायेंगे "
तो अपने चेहरे पे छोटी सी मुस्कान ला कर प्रेम पूर्वक बोल दीजिये 🌹राधे राधे जी 🌹🙏

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कामेंट्स

Renu Singh Jul 15, 2019
Om Namah Shivay Bhai ji Bhole Nath ki kripa dristi Aap aur Aapki family pr hamesha BNI rhe Aapka Har pal mangalmay ho Bhai ji 🙏🌹🙏🌹🙏

Sandhya Nagar Jul 15, 2019
*🌹लाडली जू🌹🙏* *🙇याद आपकी दिल 💖में लेकर🙇* *🌴हम यहाँ वहाँ फिरते रहते है🌴* *🙏जो भी मिलता हैं राहों में सबको🙏* *🙇राधे राधे कहते है*🙇 *🌹आप भी कह दो ना राधे राधे🌹*

Anita Mittal Jul 15, 2019
जय श्री कृष्णा जी कान्हा जी का आशीर्वाद व स्नेहानुराग आपके साथ बना रहे भाईजी आपका हर पल मंंगलमय व सर्वसुखप्रदायी हो जी

seema bhardwaj Jul 15, 2019
🌹🙏Radhe Radhe ji shubh ratri vandan bhai ji thakur ji àap ko hemsa khus rhke ji god bless you 🌹🙏

Aruna..sharma..(अनु) Jul 15, 2019
🙏🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🙏 ☘️ Har har Mahadev Ji ☘️ ☘️ Radhy Radhy Ji aap ky Parwar me Sadha khushiyon Ki bahar rahy aap sab par parbhu Ji ki Mehar Sadha Bani Ray Ji.. (Good night ji)🙏👌👌👌👌☘️☘️☘️☘️

MAHESH BHARGAVA Jul 15, 2019
शुभ रात्रि जी 💐जय श्री कृष्णा राधे राधे 🙏🌺आप का हर पल मंगलमय हो 💐

dheeraj patel Jul 15, 2019
🔔जय श्री राधेकृष्णा जी🔔 🌹🌹🌹🎎🎎🌹🌹🌹 🌹गुरु पूर्णिमा 🌹की हार्दिक शुभकामनाएं भाई जी🙏🌹

🔱VEERUDA🔱 Jul 15, 2019
Subah Raatri Vandan Bhai Ji Guru Purnima Ki Aap Sabhi Priwar Jan Ko Hardik Subkamnaye Ji 🌹🙏🌹

Neeru Miglani Jul 15, 2019
: ❥━━❥ कर्म करो तो फल मिलता है, आज नहीं तो कल मिलता है। जितना गहरा अधिक हो कुँआ, उतना मीठा जल मिलता है । जीवन के हर कठिन प्रश्न का, जीवन से ही हल मिलता है। ¸.•*""*•.¸ 🌹🎁🌹🎁🌹 *गुरू पूर्णिमा की अग्रिम हार्दिक शुभकामनायें *🙏🙏 🙏🌹जय गुरूदेव 🌹🙏

Neeru Raj Jul 15, 2019
Radhe radhe karishna Shubh ratri bhai ji

sumitra Jul 15, 2019
शुभ रात्रि भाई जी भोलेनाथ आपको लंबी उमर दे घर परिवार में सुख समृद्धि दे आपका आने वाला कल ढेरों खुशियां लेकर आए भाई जी🙏🌹

🔴🌲🔴MAMTA KAPOOR🔴🌲🔴 Jul 15, 2019
🌳🌻🌴🌹🙏🌹🌴🌻🌳 . *मदद करना सीखिये* . *फायदे के बगैर.* . *मिलना जुलना सीखिये* . *मतलब के बगैर.* . *जिन्दगी जीना सीखिये* . *दिखावे के बगैर.* *अंधेरा वहां नहीं है, जहां तन गरीब है !* *अंधेरा वहां है, जहां मन गरीब है..!!* *🌴🌻🙏🏻.शुभप्रभात.*🙏🌻🌴

Babita Sharma Jul 16, 2019
ॐ गुरुभ्यो नम: गुरु पूर्णिमा की अनंत शुभकामनाएं भाई 🙏जय गुरुदेव ईश्वर सदैव आपका मंगल करें।🌹🌹

Preeti jain Jul 16, 2019
ram ram ji jai veer Hanuman g ka Kripa 🚩 🙏🏻 sada aap aur aapki family pe bana rahe aap ka har pal shubh aur maglamye Ho shubh prabhat ji bhai ji Happy guru purnima ji🌿🌿🌷🌷🙏🙏🌹🌹

Archana Mishra Jul 19, 2019

*‼ज्योतिष‼* *शयन के नियम :-* 1. *सूने तथा निर्जन* घर में अकेला नहीं सोना चाहिए। *देव मन्दिर* और *श्मशान* में भी नहीं सोना चाहिए। *(मनुस्मृति)* 2. किसी सोए हुए मनुष्य को *अचानक* नहीं जगाना चाहिए। *(विष्णुस्मृति)* 3. *विद्यार्थी, नौकर औऱ द्वारपाल*, यदि ये अधिक समय से सोए हुए हों, तो *इन्हें जगा* देना चाहिए। *(चाणक्यनीति)* 4. स्वस्थ मनुष्य को आयुरक्षा हेतु *ब्रह्ममुहुर्त* में उठना चाहिए। *(देवीभागवत)* बिल्कुल *अँधेरे* कमरे में नहीं सोना चाहिए। *(पद्मपुराण)* 5. *भीगे* पैर नहीं सोना चाहिए। *सूखे पैर* सोने से लक्ष्मी (धन) की प्राप्ति होती है। *(अत्रिस्मृति)* टूटी खाट पर तथा *जूठे मुँह* सोना वर्जित है। *(महाभारत)* 6. *"नग्न होकर/निर्वस्त्र"* नहीं सोना चाहिए। *(गौतम धर्म सूत्र)* 7. पूर्व की ओर सिर करके सोने से *विद्या*, पश्चिम की ओर सिर करके सोने से *प्रबल चिन्ता*, उत्तर की ओर सिर करके सोने से *हानि व मृत्यु* तथा दक्षिण की ओर सिर करके सोने से *धन व आयु* की प्राप्ति होती है। *(आचारमय़ूख)* 8. दिन में कभी नहीं सोना चाहिए। परन्तु *ज्येष्ठ मास* में दोपहर के समय 1 मुहूर्त (48 मिनट) के लिए सोया जा सकता है। (दिन में सोने से रोग घेरते हैं तथा आयु का क्षरण होता है) 9. दिन में तथा *सूर्योदय एवं सूर्यास्त* के समय सोने वाला रोगी और दरिद्र हो जाता है। *(ब्रह्मवैवर्तपुराण)* 10. सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घण्टे) के बाद ही *शयन* करना चाहिए। 11. बायीं करवट सोना *स्वास्थ्य* के लिये हितकर है। 12. दक्षिण दिशा में *पाँव करके कभी नहीं सोना चाहिए। यम और दुष्ट देवों* का निवास रहता है। कान में हवा भरती है। *मस्तिष्क* में रक्त का संचार कम को जाता है, स्मृति- भ्रंश, मौत व असंख्य बीमारियाँ होती है। 13. हृदय पर हाथ रखकर, छत के *पाट या बीम* के नीचे और पाँव पर पाँव चढ़ाकर निद्रा न लें। 14. शय्या पर बैठकर *खाना-पीना* अशुभ है। 15. सोते सोते *पढ़ना* नहीं चाहिए। *(ऐसा करने से नेत्र ज्योति घटती है )* 16. ललाट पर *तिलक* लगाकर सोना *अशुभ* है। इसलिये सोते समय तिलक हटा दें। *इन १६ नियमों का अनुकरण करने वाला यशस्वी, निरोग और दीर्घायु हो जाता है।* नोट :- यह सन्देश जन जन तक पहुँचाने का प्रयास करें। ताकि सभी लाभान्वित हों ! 🙏🚩🇮🇳🔱🏹🐚🕉

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anita sharma Jul 18, 2019

जब नारद जी का मोह भंग करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण में तराजू में विराजे थे। एक सोने के पतरे पर तुलसी रखकर पलड़ें में रखा तब भगवान के बराबर भार बैठा!!!!!! एक बार देवर्षि नारद के मन में आया कि भगवान् के पास बहुत महल आदि है है, एक- आध हमको भी दे दें तो यहीं आराम से टिक जायें, नहीं तो इधर-उधर घूमते रहना पड़ता है। भगवान् के द्वारिका में बहुत महल थे। नारद जी ने भगवान् से कहा- भगवन ! आपके बहुत महल हैं, एक हमको दो तो हम भी आराम से रहें। आपके यहाँ खाने- पीने का इंतजाम अच्छा ही है । भगवान् ने सोचा कि यह मेरा भक्त है, विरक्त संन्यासी है। अगर यह कहीं राजसी ठाठ में रहने लगा तो थोड़े दिन में ही इसकी सारी विरक्ति भक्ति निकल जायेगी। हम अगर सीधा ना करेंगे तो यह बुरा मान जायेगा, लड़ाई झगड़ा करेगा कि इतने महल हैं और एकमहल नहीं दे रहे हैं। भगवान् ने चतुराई से काम लिया, नारद से कहा जाकर देख ले, जिस मकान में जगह खाली मिले वही तेरे नाम कर देंगे। नारद जी वहाँ चले। भगवान् की तो १६१०८ रानियाँ और प्रत्येक के ११- ११ बच्चे भी थे। यह द्वापर युग की बात है। सब जगह नारद जी घूम आये लेकिन कहीं एक कमरा भी खाली नहीं मिला, सब भरे हुए थे। आकर भगवान् से कहा वहाँ कोई जगह खाली नहीं मिली। भगवान् ने कहा फिर क्या करूँ , होता तो तेरे को दे देता। नारद जी के मन में आया कि यह तो भगवान् ने मेरे साथ धोखाधड़ी की है, नहीं तो कुछ न कुछ करके, किसी को इधर उधर शिफ्ट कराकर, खिसकाकर एक कमरा तो दे ही सकते थे। इन्होंने मेरे साथ धोखा किया है तो अब मैं भी इन्हे मजा चखाकर छोडूँगा। नारद जी रुक्मिणी जी के पास पहुँचे, रुक्मिणी जी ने नारद जी की आवभगत की, बड़े प्रेम से रखा। उन दिनों भगवान् सत्यभामा जी के यहाँ रहते थे। एक आध दिन बीता तो नारद जी ने उनको दान की कथा सुनाई, सुनाने वाले स्वयं नारद जी। दान का महत्त्व सुनाने लगे कि जिस चीज का दान करोगे वही चीज आगे तुम्हारे को मिलती है। जब नारद जी ने देखा कि यह बात रुक्मिणी जी को जम गई है तो उनसे पूछा आपको सबसे ज्यादा प्यार किससे है ? रुक्मिणी जी ने कहा यह भी कोई पूछने की बात है, भगवान् हरि से ही मेरा प्यार है। कहने लगे फिर आपकी यही इच्छा होगी कि अगले जन्म में तुम्हें वे ही मिलें। रुक्मिणी जी बोली इच्छा तो यही है। नारद जी ने कहा इच्छा है तो फिर दान करदो, नहीं तो नहीं मिलेंगे। आपकी सौतें भी बहुत है और उनमें से किसी ने पहले दान कर दिया उन्हें मिल जायेंगे। इसलिये दूसरे करें, इसके पहले आप ही कर दे। रुक्मिणी जी को बात जँच गई कि जन्म जन्म में भगवान् मिले तो दान कर देना चाहियें। रुक्मिणी से नारद जी ने संकल्प करा लिया। अब क्या था, नारद जी का काम बन गया। वहाँ से सीधे सत्यभामा जी के महल में पहुँच गये और भगवान् से कहा कि उठाओ कमण्डलु, और चलो मेरे साथ। भगवान् ने कहा कहाँ चलना है, बात क्या हुई ? नारद जी ने कहा बात कुछ नहीं, आपको मैंने दान में ले लिया है। आपने एक कोठरी भी नहीं दी तो मैं अब आपको भी बाबा बनाकर पेड़ के नीचे सुलाउँगा। सारी बात कह सुनाई। भगवान् ने कहा रुक्मिणी ने दान कर दिया है तो ठीक है। वह पटरानी है, उससे मिल तो आयें। भगवान् ने अपने सारे गहने गाँठे, रेशम के कपड़े सब खोलकर सत्यभामा जी को दे दिये और बल्कल वस्त्र पहनकर, भस्मी लगाकर और कमण्डलु लेकर वहाँ से चल दिये। उन्हें देखते ही रुक्मिणी के होश उड़ गये। पूछा हुआ क्या ? भगवान् ने कहा पता नहीं, नारद कहता है कि तूने मेरे को दान में दे दिया। रुक्मिणी ने कहा लेकिन वे कपड़े, गहने कहाँ गये, उत्तम केसर को छोड़कर यह भस्मी क्यों लगा ली ? भगवान् ने कहा जब दान दे दिया तो अब मैं उसका हो गया। इसलिये अब वे ठाठबाट नहीं चलेंगे। अब तो अपने भी बाबा जी होकर जा रहे हैं । रुक्मिणी ने कहा मैंने इसलिये थोड़े ही दिया था कि ये ले जायें। भगवान् ने कहा और काहे के लिये दिया जाता है ? इसीलिये दिया जाता है कि जिसको दो वह ले जाये । अब रुक्मिणी को होश आया कि यह तो गड़बड़ मामला हो गया। रुक्मिणी ने कहा नारद जी यह आपने मेरे से पहले नहीं कहा, अगले जन्म में तो मिलेंगे सो मिलेंगे, अब तो हाथ से ही खो रहे हैं । नारद जी ने कहा अब तो जो हो गया सो हो गया, अब मैं ले जाऊँगा। रुक्मिणी जी बहुत रोने लगी। तब तक हल्ला गुल्ला मचा तो और सब रानियाँ भी वहा इकठ्ठी हो गई। सत्यभामा, जाम्बवती सब समझदार थीं। उन्होंने कहा भगवान् एक रुक्मिणी के पति थोड़े ही हैं, इसलिये रुक्मिणी को सर्वथा दान करने का अधिकार नहीं हो सकता, हम लोगों का भी अधिकार है। नारद जी ने सोचा यह तो घपला हो गया। कहने लगे क्या भगवान् के टुकड़े कराओगे ? तब तो 16108 हिस्से होंगे। रानियों ने कहा नारद जी कुछ ढंग की बात करो। नारद जी ने विचार किया कि अपने को तो महल ही चाहिये था और यही यह दे नहीं रहे थे, अब मौका ठीक है, समझौते पर बात आ रही है। नारद जी ने कहा भगवान् का जितना वजन है, उतने का तुला दान कर देने से भी दान मान लिया जाता है । तुलादान से देह का दान माना जाता है। इसलिये भगवान् के वजन का सोना, हीरा, पन्ना दे दो। इस पर सब रानियाँ राजी हो गई। बाकी तो सब राजी हो गये लेकिन भगवान् ने सोचा कि यह फिर मोह में पड़ रहा है । इसका महल का शौक नहीं गया। भगवान् ने कहा तुलादान कर देना चाहिये, यह बात तो ठीक हे । भगवान् तराजु के एक पलड़े के अन्दर बैठ गये। दूसरे पलड़े में सारे गहने, हीरे, पन्ने रखे जाने लगे। लेकिन जो ब्रह्माण्ड को पेट में लेकर बैठा हो, उसे द्वारिका के धन से कहाँ पूरा होना है। सारा का सारा धन दूसरे पलड़े पर रख दिया लेकिन जिस पलड़े पर भगवान बैठे थे वह वैसा का वैसा नीचे लगा रहा, ऊपर नहीं हुआ । नारद जी ने कहा देख लो, तुला तो बराबर हो नहीं रहा है, अब मैं भगवान् को ले जाऊँगा । सब कहने लगे अरे कोई उपाय बताओ । नारद जी ने कहा और कोई उपाय नहीं है । अन्य सब लोगों ने भी अपने अपने हीरे पन्ने लाकर डाल दिये लेकिन उनसे क्या होना था । वे तो त्रिलोकी का भार लेकर बैठे थे। नारद जी ने सोचा अपने को अच्छा चेला मिल गया, बढ़िया काम हो गया । उधर औरते सब चीख रही थी। नारद जी प्रसन्नता के मारे इधर ऊधर टहलने लगे । भगवान् ने धीरे से रुक्मिणी को बुलाया। रुक्मिणी ने कहा कुछ तो ढंग निकालिये, आप इतना भार लेकर बैठ गये, हम लोगों का क्या हाल होगा ? भगवान् ने कहा ये सब हीरे पन्ने निकाल लो, नहीं तो बाबा जी मान नहीं रहे हैं। यह सब निकालकर तुलसी का एक पत्ता और सोने का एक छोटा सा टुकड़ा रख दो तो तुम लोगों का काम हो जायगा। रुक्मिणी ने सबसे कहा कि यह नहीं हो रहा है तो सब सामान हटाओ । सारा सामान हटा दिया गया और एक छोटे से सोने के पतरे पर तुलसी का पता रखा गया तो भगवान् के वजन के बराबर हो गया । सबने नारद जी से कहा ले जाओ तूला दान। नारद जी ने खुब हिलाडुलाकर देखा कि कहीं कोई डण्डी तो नहीं मार रहा है । नारद जी ने कहा इन्होंने फिर धोखा दिया । फिर जहाँ के तहाँ यह लेकर क्या करूँगा ? उन्होंने कहा भगवन्। यह आप अच्छा नहीं कर रहे हैं, केवल घरवालियों की बात सुनते हैं, मेरी तरफ देखो। भगवान् ने कहा तेरी तरफ क्या देखूँ ? तू सारे संसार के स्वरूप को समझ कर फिर मोह के रास्ते जाना चाह रहा है तो तेरी क्या बात सुनूँ। तब नारद जी ने समझ लिया कि भगवान् ने जो किया सो ठीक किया । नारद जी ने कहा एक बात मेरी मान लो। आपने मेरे को तरह तरह के नाच अनादि काल से नचाये और मैंने तरह तरह के खेल आपको दिखाये। कभी मनुष्य, कभी गाय इत्यादि पशु, कभी इन्द्र, वरुण आदि संसार में कोई ऐसा स्वरूप नहीं जो चैरासी के चक्कर में किसी न किसी समय में हर प्राणी ने नहीं भोग लिया। अनादि काल से यह चक्कर चल रहा है, सब तरह से आपको खेल दिखाया आप मेरे को ले जाते रहे और मैं खेल करता रहा । अगर आपको मेरा कोई खेल पसंद आगया हो तो आप राजा की जगह पर हैं और मैं ब्राह्मण हूँ तो मेरे को कुछ इनाम देना चाहिये । वह इनाम यही चाहता हूँ कि मेरे शोक मोह की भावना निवृत्त होकर मैं आपके परम धाम में पहुँच जाऊँ । और यदि कहो कि तूने जितने खेल किये सब बेकार है, तो भी आप राजा हैं । जब कोई बार बार खराब खेल करता है तो राजा हुक्म देता है कि इसे निकाल दो । इसी प्रकार यदि मेरा खेल आपको पसन्द नहीं आया है तो फिर आप कहो कि इसको कभी संसार की नृत्यशाला में नहीं लाना है । तो भी मेरी मुक्ति है । भगवान् बड़े प्रसन्न होकर तराजू से उठे और नारद जी को छाती से लगाया और कहा तेरी मुक्ति तो निश्चित है।

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gopal Krishna Jul 17, 2019

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MasterJi Jul 17, 2019

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gopal Krishna Jul 17, 2019

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जीवन में बुराई अवश्य हो सकती है मगर जीवन बुरा कदापि नहीं हो सकता। जीवन एक अवसर है श्रेष्ठ बनने का, श्रेष्ठ करने का, श्रेष्ठ पाने का। जीवन की दुर्लभता जिस दिन किसी की समझ में आ जाएगी उस दिन कोई भी व्यक्ति जीवन का दुरूपयोग नहीं कर सकता। जीवन वो फूल है जिसमें काँटे तो बहुत हैं मगर सौन्दर्य की भी कोई कमी नहीं। ये और बात है कुछ लोग काँटो को कोसते रहते हैं और कुछ सौन्दर्य का आनन्द लेते हैं। जीवन को बुरा सिर्फ उन लोगों के द्वारा कहा जाता है जिनकी नजर फूलों की बजाय काँटो पर ही लगी रहती है। जीवन का तिरस्कार वे ही लोग करते हैं जिनके लिए यह मूल्यहीन है। जीवन में सब कुछ पाया जा सकता है मगर सब कुछ देने पर भी जीवन को नहीं पाया जा सकता है। जीवन का तिरस्कार नहीं अपितु इससे प्यार करो। जीवन को बुरा कहने की अपेक्षा जीवन की बुराई मिटाने का प्रयास करो, यही समझदारी है।

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prveenkumarji Jul 20, 2019

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