Mamta Chauhan
Mamta Chauhan May 4, 2021

Shubh Ratri Vandan Jai Shri Ram Jai Hanuman Ji 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌿🌿

Shubh Ratri Vandan Jai Shri Ram Jai Hanuman Ji 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌷🌿🌿🌿🌿🌿🌿

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कामेंट्स

Rajpal singh May 4, 2021
Jai shree Ram Ram ji good night ji 🙏🙏🙏🙏🙏

madan pal 🌷🙏🏼 May 4, 2021
जय श्री राम जी शूभ रात्रि वंदन जी पवन सुत हनुमान जी की कृपा आप व आपके परिवार पर बनीं रहे जी 🙏🏼🙏🏼🙏🏼👌🏼👌🏼👌🏼👌🏼🌹🌹🌹🌹🌹🌷🌷🌷

dhruv wadhwani May 5, 2021
ओम गणेश देवाय नमः ओम गणेश देवाय नमः ओम गणेश देवाय नमः ओम गणेश देवाय नमः ओम गणेश देवाय नमः ओम गणेश देवाय नमः ओम गणेश देवाय नमः ओम गणेशाय नमः ओम गणेश देवाय नमः

dhruv wadhwani May 5, 2021
जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम जय श्रीराम

RAJ RATHOD May 5, 2021
🌹🌹 सुप्रभात वंदन जी 🙏🙏🌺💐🌿🌹 🌹🌹 भगवान श्री गणेश जी की कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे 🙏🙏🌺💐🌿🌹💐💐🌺🌿🌿🌹💐🌹🌹 🌹🌹 आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो 🌹🌹

EXICOM May 5, 2021
🌹🙏🌹 ऊँ 🌹🙏🌹 🌹🙏🌹शाँतिं🌹🙏🌹 🌹🙏🌹दीदी🌹🙏🌹 🌹🙏🌹 जी 🌹🙏🌹

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Archana Singh May 15, 2021

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Mamta Chauhan May 15, 2021

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Shanti pathak May 15, 2021

*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन* एक गाँव में एक ब्राह्मण रहता था, .. उसके पास एक सुन्दर सा बगीचा था, वो बड़ी मेहनत करता और बगीचे को हरा भरा और साफ़ सुथरा बनाये रखता, उसमे खूब सुन्दर फूल और फल के वृक्ष थे, .. उसको अपने बगीचे से बड़ा प्यार था.. कुछ दिनों से एक गाय उसके बगीचे में घुस जाती और पूरा बगीचा तहस नहस कर देती,… कई बार उसने गाय को भगाया, … लेकिन फिर वो गाय नज़र बचा कर बगीचे में आ ही जाती, … एक दिन वो ब्राह्मण कुछ देर के लिए बगीचे से हटा तो उसी बीच वो गाय बगीचे में घुस गयी, .. इसी बीच ब्राह्मण भी वापस आ गया.. बस उसने आव न देखा ताव, एक डंडा उठा कर गाय पर पिल पड़ा.. “बहुत परेशान किया है तुमने !! ” .. “आज मजा चखाउंगा “.. और क्रोध के आवेश में दनादन वो उस गाय को पीटने लगा… उसने गाय को इतना मारा की वो गाय वही गिर पड़ी, और मर गयी… अब तो उस ब्राह्मण के हाथ पैर फूल गए… सारा गुस्सा हिरन हो गया.. “उफ्फ्फ !! ये क्या हो गया ” … मैंने “गौ हत्या” कर दी… उसने तुरन्त उस गाय को बगीचे के एक कोने में छुपा दिया, .. उस पर घास फूस और पत्तियां डाल दी… अब वो बैठ कर सोचने लगा, … ये कैसे हो गया, … फिर उसने सोचा, .. की ये हत्या उसने नहीं बल्कि उसके हाथों ने की है… और हाथों के अधिष्ठाता तो इंद्र देवता है, … तो फिर गौ हत्या का पाप तो इंद्र देव को लगेगा, … मैंने तो कुछ किया ही नही… इंद्र देव ये सब देख सुन रहे थे, उनको बड़ा क्रोध आया, … वो उसी समय एक राहगीर का भेस बना कर वहां पहुचे, … ब्राह्मण को देख कर प्रणाम किया,… कहने लगे … “बड़ा सुन्दर बगीचा है, किसका है ?”.. वो ब्राह्मण बोला की मेरा है, … इंद्र – इसमें तो बड़े अच्छे फूल लगे है … ब्राह्मण – हाँ ये सब मैंने खुद अपने हाथों से लगाए है.. इंद्र- कितना साफ़ और सुसज्जित बगीचा है, ये सारे पेड़ आपने ही लगाए है?? ब्राह्मण – हाँ हाँ, ये सब पेड़ , पौधे फूल पत्ते सब मैंने लगाए है … अब इंद्र देव उस बगीचे में एक एक पेड़ और पौधे के पास जाते, और ब्राह्मण से उसकी जानकारी लेते,.. ब्राह्मण हर बार कहता की ये सब पेड़ पौधे मैंने अपने हाथों से लगाए हैं,… चलते चलते इंद्र उधर पहुचे जहाँ गाय मरी पड़ी थी, …. ब्राह्मण ने बहुत कोशिश की की वो उधर न जाए, लेकिन इंद्र न माने, … इंद्र ने वहां पहुच के एक लकड़ी से उस घास फूस के ढेर को कुरेद दिया, और उसके नीचे मरी हुई गाय दिखने लगी। .. अब इंद्र ने पुछा ये मरी हुई गाय यहाँ कैसे ?? क्या तुमने गौ हत्या की ?? ब्राह्मण घबरा गया, नहीं नही !! मैंने नही ये हत्या इंद्र देव ने की है, … इंद्र- वो कैसे ?? ब्राह्मण – मैंने लाठी से गाय को भगाने के लिए मारा तो वो मर गयी, चूँकि हाथों के देवता इंद्र है, इसलिए इसकी हत्या की जिम्मेदारी इंद्र की है… अब इंद्र अपने वास्तविक रूप में आ गए , क्रोध से बोले ” धूर्त ब्राह्मण !! इस बगीचे में जो कुछ तुमने हाथों से लगाया, उसका श्रेय तुम खुद ले रहे हो, .. और जो तुमने “गौ -हत्या” की वो मेरे माथे मढ़ रहे हो…. ये गौ हत्या तुमने ही की है, और इसका पाप भी तुम्ही को भोगना है” …

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🌳🦚आज की कहानी🦚🌳 💐💐मैले कपड़े💐💐 एक दिन की बात है एक मास्टरजी अपने एक अनुयायी के साथ प्रातः काल सैर कर रहे थे कि अचानक ही एक व्यक्ति उनके पास आया और उन्हें भला-बुरा कहने लगा। उसने पहले मास्टर के लिए बहुत से अपशब्द कहे , पर बावजूद इसके मास्टर मुस्कुराते हुए चलते रहे। मास्टर को ऐसा करता देख वह व्यक्ति और भी क्रोधित हो गया और उनके पूर्वजों तक को अपमानित करने लगा। पर इसके बावजूद मास्टर मुस्कुराते हुए आगे बढ़ते रहे। मास्टर पर अपनी बातों का कोई असर ना होते हुए देख अंततः वह व्यक्ति निराश हो गया और उनके रास्ते से हट गया। उस व्यक्ति के जाते ही अनुयायी ने आश्चर्य से पुछा ,” मास्टरजी आपने भला उस दुष्ट की बातों का जवाब क्यों नहीं दिया, और तो और आप मुस्कुराते रहे, क्या आपको उसकी बातों से कोई कष्ट नहीं पहुंचा ?” मास्टरजी कुछ नहीं बोले और उसे अपने पीछे आने का इशारा किया। कुछ देर चलने के बाद वे मास्टरजी के कक्ष तक पहुँच गए। मास्टरजी बोले , ” तुम यहीं रुको मैं अंदर से अभी आया। “ मास्टरजी कुछ देर बाद एक मैले कपड़े को लेकर बाहर आये और उसे अनुयायी को थमाते हुए बोले , ” लो अपने कपड़े उतारकर इन्हे धारण कर लो ?” कपड़ों से अजीब सी दुर्गन्ध आ रही थी और अनुयायी ने उन्हें हाथ में लेते ही दूर फेंक दिया। मास्टरजी बोले , ” क्या हुआ तुम इन मैले कपड़ों को नहीं ग्रहण कर सकते ना ? ठीक इसी तरह मैं भी उस व्यक्ति द्वारा फेंके हुए अपशब्दों को नहीं ग्रहण कर सकता। इतना याद रखो कि यदि तुम किसी के बिना मतलब भला-बुरा कहने पर स्वयं भी क्रोधित हो जाते हो तो इसका अर्थ है कि तुम अपने साफ़-सुथरे वस्त्रों की जगह उसके फेंके फटे-पुराने मैले कपड़ों को धारण कर रहे हो! सदैव प्रसन्न रहिये!! जो प्राप्त है-पर्याप्त है!! 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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Renu Singh May 15, 2021

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ANITA THAKUR May 15, 2021

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