Mahesh Malhotra
Mahesh Malhotra Mar 26, 2020

Suvichar Good Afternoon

Suvichar
Good Afternoon

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Mamta Chauhan Mar 26, 2020
Jai mata di shubh dophar vabdan bhai ji 🌷🙏🙏

vineeta.tripathi.. Mar 26, 2020
जय माता दी गुड आफ्टरनून भाई जी

🌹राजकुमार राठोड 🌹 Mar 26, 2020
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। हे मां! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं।

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vishal chawla Apr 3, 2020

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Suresh Pandey Apr 3, 2020

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Narayan Tiwari Apr 3, 2020

शक्तिशाली-शक्तिपीठ माँ कालिका धाम,पावागढ़ (गुजरात)🚩 """""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""““"""""""“"""" पावागढ़ माता का मंदिर मां के शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि पावागढ़ में मां के दाएं पैर का अंगूठा गिरा था, इस कारण इस जगह का नाम पावागढ़ हुआ। मां के इस धाम में माता की चुनरी का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। कहा जाता है जिसे भी यहां की चुनरी या मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है, वह बहुत ही भाग्यशाली होता है! यह मंदिर बड़ोदरा से करीब 50 कि.मी.की दूरी पर स्थित है!यह गुजरात के पंचमहल जिले में स्थित है।शक्ति के उपासकों के लिए माता का यह मंदिर अत्यंत सिद्ध स्थान है। इस मंदिर में मां काली की दक्षिणमुखी प्रतिमा विराजमान है जिनकी पूजा तंत्र-मंत्र से होती है। माता के इस मंदिर को शत्रुंजय मंदिर भी कहा जाता है। मान्यता है कि माता की इस भव्य मूर्ति की स्थापना स्वयं विश्वामित्र मुनि ने की थी। चूंकि काली माता की मूर्ति दक्षिणमुखी है, ऐसे में इसकी साधना-अराधना का विशेष महत्व है। यहां पर शत्रु, रोग आदि पर विजय पाने की कामना लिए हजारों-हजार भक्त पहुंचते हैं। देश के विभिन्न शक्तिपीठों की तरह यहां पर भी माता को अन्य प्रसाद सामग्री के साथ लाल रंग की चुनरी चढ़ाई जाती है। जिसे भक्तगण माता से मिले आशीर्वाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं..!! विश्वामित्र ने की थी काली की तपस्या:-🚩 पावागढ़ की पहाड़ी का संबंध गुरु विश्वामित्र से भी रहा है। मान्यता है कि गुरु विश्वामित्र ने यहां माता काली की तपस्या की थी और उन्होंने ही मूर्ति को स्थापित किया था। यहां बहने वाली नदी का नाम भी उन्हीं के नाम पर विश्वामित्री पड़ा। माता के दरबार में पैदल पहुंचने वाले भक्तों को तकरीबन 250 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। हालांकि माता के दर्शन को पहुंचने के लिए रोपवे की सुविधा भी है। पावागढ़ धाम की कहानी:-🚩 पावागढ़ के नाम के पीछे भी एक कहानी प्रचलित है। जिसके अनुसार कहा जाता है कि पावागढ़ पर्वत पर चढ़ाई करना किसी के लिए भी संभव नहीं था। मंदिर के चारों तरफ घने जंगल और खाइयां थी। इन गहरी खाइयों से मंदिर के घिरे होने के कारण हवा का वेग भी चारों ओर से था। यही कारण है की इस शक्तिपीठ का नाम पावागढ़ पड़ा। पावागढ़ का अर्थ- ऐसी जगह कहा गया जहां हमेशा पवन यानी हवा का वास हो,यहाँ हर मनोकामना पूरी होती है..!! 🙏 || ऊँ क्रीं कालिकायै नम: ||🙏 🚩|| जय मांई की ||🚩

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Rajkumar Agarwal Apr 3, 2020

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Rajkumar Agarwal Apr 3, 2020

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Amit sharma Apr 3, 2020

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