Shanti Pathak
Shanti Pathak Mar 26, 2020

🌹🌹जय माता दी 🌹🌹 🌹🌹जय मां ब्रह्मचारिणी 🌹🌹 🌹🌹सुप्रभात वंदन जी,शुभ वृहस्पतिवार 🌹🌹 नवरात्र के दूसरे दिन इस विधि से करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा मां ब्रह्मचारिणी इनको ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है. कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के कारण भी इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है. इस विधी से करें मां ब्रह्मचारिणी की उपासना कलश स्थापना के साथ ही 25 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरु हो गई है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है. नवरात्र के पहले दिन जहां मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है वहीं दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है. इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी. इस कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं. मां ब्रह्मचारिणी इनको ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है. कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के कारण भी इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है. विद्यार्थियों के लिए और तपस्वियों के लिए इनकी पूजा बहुत ही शुभ फलदायी होती है. जिनका स्वाधिष्ठान चक्र कमजोर हो उनके लिए भी मां ब्रह्मचारिणी की उपासना अत्यंत अनुकूल होती है. क्या है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि? - मां ब्रह्मचारिणी की उपासना के समय पीले अथवा सफेद वस्त्र धारण करें. - मां को सफेद वस्तुएं अर्पित करें, जैसे- मिसरी, शक्कर या पंचामृत. - ज्ञान और वैराग्य का कोई भी मंत्र जपा जा सकता है. - वैसे मां ब्रह्मचारिणी के लिए "ॐ ऐं नमः" का जाप करें. - जलीय आहार और फलाहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए. स्वाधिष्ठान चक्र के कमजोर होने पर क्या होता है? - व्यक्ति के अंदर अविश्वास रहता है. - ऐसे लोगों को हमेशा बुरा होने का भय होता है. - ऐसे लोग कभी कभी काफी क्रूर होते हैं. - साथ ही कभी कभी बहुत कामुक होते हैं. स्वाधिष्ठान चक्र को मजबूत करने के लिए क्या करें? - रात्रि को सफेद वस्त्र धारण करें. - सफेद आसन पर बैठें तो उत्तम होगा. - इसके बाद देवी को सफेद फूल अर्पित करें. - पहले अपने गुरु का स्मरण करें. - इसके बाद आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाएं. - ध्यान के बाद देवी या अपने गुरु से स्वाधिष्ठान चक्र को मजबूत करने की प्रार्थना करें.

🌹🌹जय माता दी 🌹🌹
🌹🌹जय मां ब्रह्मचारिणी 🌹🌹
🌹🌹सुप्रभात वंदन जी,शुभ वृहस्पतिवार 🌹🌹



नवरात्र के दूसरे दिन इस विधि से करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

मां ब्रह्मचारिणी इनको ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है. कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के कारण भी इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है.

इस विधी से करें मां ब्रह्मचारिणी की उपासना

कलश स्थापना के साथ ही 25 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरु हो गई है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है. नवरात्र के पहले दिन जहां मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है वहीं दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है. इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी. इस कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं.

मां ब्रह्मचारिणी इनको ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है. कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के कारण भी इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है. विद्यार्थियों के लिए और तपस्वियों के लिए इनकी पूजा बहुत ही शुभ फलदायी होती है. जिनका स्वाधिष्ठान चक्र कमजोर हो उनके लिए भी मां ब्रह्मचारिणी की उपासना अत्यंत अनुकूल होती है.

क्या है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि?

- मां ब्रह्मचारिणी की उपासना के समय पीले अथवा सफेद वस्त्र धारण करें.

- मां को सफेद वस्तुएं अर्पित करें, जैसे- मिसरी, शक्कर या पंचामृत.

- ज्ञान और वैराग्य का कोई भी मंत्र जपा जा सकता है.

- वैसे मां ब्रह्मचारिणी के लिए "ॐ ऐं नमः" का जाप करें.

- जलीय आहार और फलाहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए.


स्वाधिष्ठान चक्र के कमजोर होने पर क्या होता है?

- व्यक्ति के अंदर अविश्वास रहता है.

- ऐसे लोगों को हमेशा बुरा होने का भय होता है.

- ऐसे लोग कभी कभी काफी क्रूर होते हैं.

- साथ ही कभी कभी बहुत कामुक होते हैं.

स्वाधिष्ठान चक्र को मजबूत करने के लिए क्या करें?

- रात्रि को सफेद वस्त्र धारण करें.

- सफेद आसन पर बैठें तो उत्तम होगा.

- इसके बाद देवी को सफेद फूल अर्पित करें.

- पहले अपने गुरु का स्मरण करें.

- इसके बाद आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाएं.

- ध्यान के बाद देवी या अपने गुरु से स्वाधिष्ठान चक्र को मजबूत करने की प्रार्थना करें.

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कामेंट्स

Neha Sharma, Haryana Mar 26, 2020
🕉️ जय माता दी 🚩🥀🙏 शुभ गुरुवार जी 🙏🥀 माता रानी 👣 की असीम कृपा ✋ आप और आपके परिवार 👨‍👩‍👧‍👦 पर सदैव बनी रहे जी 🙏🥀 आप सभी भाई-बहनों 🎎 का हर पल शुभ व मंगलमय 🔯 हो जी 🙏🥀🙋

🌼कृष्णा🌼 Mar 26, 2020
🏵️🚩🌺जय श्री माता की बहन, सादर प्रणाम करता हूँ बहना जी,श्रीमाता की कृपा आप पर सदा सर्वदा बनी रहे बहना जी,जुग जुग जियो बहन🌺🚩🏵️🙏🙏🙏🌹

Shanti Pathak Mar 26, 2020
@कृष्णाकृष्णाजगमगहुआरेअँगना 🌹🙏🏼जय माता दी ,जय मां ब्रह्मचारिणी🙏🏼सादर प्रणाम भाई। मां ब्रह्मचारिणी का आशीर्वाद सदा आप पर बना रहे भाई ।मातारानी आपको सदैव सुखी रखें, स्वस्थ रखेंऔर दीर्घायु प्रदान करें भाई 🙏🏼शुभ प्रभात वंदन भाई 🌹🌹🙏🏼🙏🏼🌹🌹

Shanti Pathak Mar 26, 2020
@सर्वकान्तशुक्लाकानपुर 🌹🙏🌹जय माता दी ,जय मां ब्रहमचारिणी।🙏शुभ प्रभात वंदन जी।मातारानी की कृपा से आप एवं आपके परिवार का हर पल शुभ एवं मंगलमय हो। आपको सपरिवार चैत्रनवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं जी ।🌹🙏🌹

Shanti Pathak Mar 26, 2020
@सवामीबिपनसवरूप 🌹🙏🌹जय माता दी ,जय मां ब्रहमचारिणी।🙏शुभ प्रभात वंदन स्वामी जी।🙏🏼मातारानी की कृपा से आप एवं आपके परिवार का हर पल शुभ एवं मंगलमय हो। 🙏🏼आपको सपरिवार चैत्रनवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं स्वामी जी ।🌹🙏🌹

Dr.ratan Singh Mar 26, 2020
🌹🌿 ॐ विष्णु देवाय नमः🌿🌹 🚩👣जय माता दी वंदन दीदी👣🚩 🎎आप और आपके पूरे परिवार पर मां ब्रह्मचारिणी देवी श्री व हरि विष्णु जी और साईं बाबा की कृपा दृष्टि सदा बनी रहे जी🙏 🎭आपका गुरुवार नवरात्रि का दूसरा दिन शुभ शांतिमयऔर मंगलमय व्यतीत हो जी 🙏 🍑🌲🌺ॐ साईं राम🌺🌲🍑

Roshan Kumar Mar 26, 2020
जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय

Shanti Pathak Mar 26, 2020
@drratansingh 🌹🙏🌹जय माता दी ,जय मां ब्रह्मचारिणी।🙏शुभ दोपहर वंदन भाई जी।मातारानी की कृपा से आप एवं आपके परिवार का हर पल शुभ एवं मंगलमय हो। मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी आपकी हर मनोकामना पूरी करें और सभी कार्य सिद्ध करें भाई जी 🌹🙏🌹

Shanti Pathak Mar 26, 2020
@roshan.kumar.gurjar 🌹🙏🌹जय माता दी ,जय मां ब्रह्मचारिणी।🙏शुभ दोपहर वंदन जी।मातारानी की कृपा से आप एवं आपके परिवार का हर पल शुभ एवं मंगलमय हो। मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी आपकी हर मनोकामना पूरी करें और सभी कार्य सिद्ध करें जी 🌹🙏🌹

शुभप्रभात🙏🏻🙏🏻 #माँ_दुर्गा की नौ शक्तियों का।। दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है।। दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ।। ब्रह्म का अर्थ है, तपस्या, तप का आचरण करने वाली भगवती। जिस कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया, इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमण्डल रहता है। अपने पूर्व जन्म में ये राजा हिमालय के घर पुत्री रुप में उत्पन्न हुई थी। भगवान शंकर को पति रुप में प्राप्त करने के लिए इन्होने घोर तपस्या की थी। माँ दुर्गा का यह दूसरा स्वरुप भक्तों और सिद्धों को अनन्त फ़ल देने वाला कहा गया है। #माँ_ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।। 🚩🔱जय माता ब्रह्मचारणी🔱🚩

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🎎🌲🌹शुभ नवरात्रि🌹🌲🎎 ❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️ 🙏🌋नवरात्रि का दूसरा दिन🌋🙏 ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️ 🚩👣🐯जय माँ ब्रह्मचारिणी🐯👣🚩 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 🚩🐚🌹ॐ विष्णु देवाय नमः 🌹🐚🚩 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🔔🌿🌷शुभ गुरुवार🌷🌿🔔 ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️ 🏖🍁🌻सुप्रभात🌻🍁🏖 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 👣 या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। 🐯 नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। 🎭मङ्गलमयी सुबह की शुरुआत माता रानी के चरण कमलों के दर्शनों के साथ🎭 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣 2.🦁 ब्रह्मचारिणी देवी 🌹दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। 💐देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ।। 🐯 माँ दुर्गा का दूसरा स्वरुप ब्रह्मचारिणी है | यहाँ ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाला | 🎎माता का स्वरूप :- माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप शांत और ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है | उनके बाएं हाथ में कमंडल और दायें हाथ में जप की माला रहती है | माता शक्ति के दुसरे स्वरुप की पूजा करने से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। माँ ब्रह्चारिणी के स्वरुप का वर्णन इस श्लोक में देखने को मिलता है | 🚩 मंत्र: ऊँ देवी ब्रह्मचारीय नमः चार देवी ब्रह्मचारिण्यै नम:।। ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा का महत्त्व माँ दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप अनन्त फल देने वाला है। इनकी सच्चे मन से भक्ति करने से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। 🌷दुर्गा पूजा के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन स्वाधिष्ठान चक्र में होता है। इस चक्र में अवस्थित मन वाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्त्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता है। माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय प्राप्त होती है। 🎎 ध्यान :- वन्दे वांछित लाभय चन्द्रार्घकृत शेखरम्। जपला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभम ण्ड गौरवर्ण स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्रम्। धवल परिधाना ब्रह्मरूप पुष्पलंकार भूषिताम् ब्रह्म परम वंदना पल्लवराधरण कांत कपोला पीन। पयोधराम् कमनीया लावण्य स्मरिलन निम्ननाभि नितम्बनीम् कम 🎭स्तोत्र पाठ :- तपश्चारिणी त्वहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधर्मचारिणी प्रणमाम्यम् ब्रह्म शंकरप्रिया त्वहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी। शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणम्यहम् ब्रह्म 🦁 कवच :- त्रिपुरा में ह्रदय पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी। अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्ध च कपोलो ातु पंचदशी कण्ठे पातु मध्यदेशे पातु महेश्वरी ठे षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पाद्यो। अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी। 🚩👣🌹जय माता दी🌹👣🚩 🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯

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jatan kurveti Mar 26, 2020

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R.G.P.Bhardwaj Mar 26, 2020

नवरात्रि द्वितीय दिवस माँ दुर्गा के दूसरे स्वरूप श्री ब्रह्मचारिणी जी की उपासना विधि एवं फल 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ माँ दुर्गा का द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी हैं। यहां ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी है। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। अतः ये तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हैं। नवरात्रि के द्वितीय दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। जो दोनो कर-कमलो मे अक्षमाला एवं कमंडल धारण करती है। वे सर्वश्रेष्ठ माँ भगवती ब्रह्मचारिणी मुझसे पर अति प्रसन्न हों। माँ ब्रह्मचारिणी सदैव अपने भक्तो पर कृपादृष्टि रखती है एवं सम्पूर्ण कष्ट दूर करके अभीष्ट कामनाओ की पूर्ति करती है। देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों एवं सिद्धों को अमोघ फल देने वाला है. देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है. माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है, तथा जीवन की अनेक समस्याओं एवं परेशानियों का नाश होता है। देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप पूर्ण ज्योर्तिमय है। मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से द्वितीय शक्ति देवी ब्रह्मचारिणी का है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली अर्थात तप का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी. यह देवी शांत और निमग्न होकर तप में लीन हैं. मुख पर कठोर तपस्या के कारण अद्भुत तेज और कांति का ऐसा अनूठा संगम है जो तीनों लोको को उजागर कर रहा है। देवी ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में अक्ष माला है और बायें हाथ में कमण्डल होता है. देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप हैं अर्थात तपस्या का मूर्तिमान रूप हैं. इस देवी के कई अन्य नाम हैं जैसे तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा। इस दिन साधक का मन ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में स्थित होता है। इस चक्र में अवस्थित साधक मां ब्रह्मचारिणी जी की कृपा और भक्ति को प्राप्त करता है। माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि 〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️ सर्वप्रथम आपने जिन देवी-देवताओ एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमत्रित किया है उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें व देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारीभेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करें। इनकी पूजा के पश्चात मॉ ब्रह्मचारिणी की पूजा करें। देवी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करें “दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा” इसके पश्चात् देवी को पंचामृत स्नान करायें और फिर भांति भांति से फूल, अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें देवी को अरूहूल का फूल (लाल रंग का एकविशेष फूल) व कमल काफी पसंद है उनकी माला पहनायें. प्रसाद और आचमन के पश्चात् पान सुपारी भेंट कर प्रदक्षिणा करें और घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें. अंत में क्षमा प्रार्थना करें “आवाहनं न जानामि न जानामि वसर्जनं। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरी।। माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। माँ ब्रह्मचारिणी ध्यान 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्। जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥ गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम। धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥ परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन। पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ ब्रह्मचारिणी स्तोत्र पाठ 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥ शंकरप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी। शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणीप्रणमाम्यहम्॥ मां ब्रह्मचारिणी कवच 〰️〰️🌼🌼🌼〰️〰️ त्रिपुरा में हृदयं पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी। अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥ पंचदशी कण्ठे पातुमध्यदेशे पातुमहेश्वरी॥ षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो। अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी। नवरात्री में दुर्गा सप्तशती पाठ किया जाता हैं माँ ब्रह्मचारिणी कथा 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री हैं। इन्होंने देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया। जिसके फलस्वरूप यह देवी भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्नी बनी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया। कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा -हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं। जो व्यक्ति अध्यात्म और आत्मिक आनंद की कामना रखते हैं उन्हें इस देवी की पूजा से सहज यह सब प्राप्त होता है. देवी का दूसरा स्वरूप योग साधक को साधना के केन्द्र के उस सूक्ष्मतम अंश से साक्षात्कार करा देता है जिसके पश्चात व्यक्ति की ऐन्द्रियां अपने नियंत्रण में रहती है और साधक मोक्ष का भागी बनता है। माँ ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा की पंचोपचार सहित पूजा करके जो साधक स्वाधिष्ठान चक्र में मन को स्थापित करता है उसकी साधना सफल हो जाती है और व्यक्ति की कुण्डलनी शक्ति जागृत हो जाती है। जो व्यक्ति भक्ति भाव एवं श्रद्धादुर्गा पूजा के दूसरे दिन मॉ ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें सुख, आरोग्य की प्राप्ति होती है और प्रसन्न रहता है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता है। शिक्षा में सफलता हेतु उपाय 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ यदि विद्यार्थी को शिक्षा में परेशानी आ रही हो, स्मरण शक्ति कमजोर हो, पाठ याद नहीं होते हो तो यह उपाय करके देंखे। गुरुवार के दिन 5 पीले पेड़े अपने ऊपर से 7 बार उसार कर और 7 बार ॐ ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं। मंत्र का जाप करके गाय को खिला दें। अपने अध्ययन कक्ष में पीले कपड़े में 9 हल्दी की गांठ ॐ ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं। मंत्र का जाप करते हुए बांध कर पोटली बना दें और अपने कक्ष में रख दें। शिक्षा में सफलता मिलेगी। आरती माँ ब्रह्माचारिणी जी की 〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️ जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो। ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा। जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए। उसकी विरति रहे ठिकाने। जो ​तेरी महिमा को जाने। रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना। ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी। माँ दुर्गा की आरती 〰️〰️🌼〰️🌼〰️〰️ जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय… मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय… कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै । रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय… केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी । सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय… कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय… शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय… चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय… ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी । आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय… चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू । बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय… तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय… भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी । >मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय… कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय… श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय… 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

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Sanjeev Jain Mar 26, 2020

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