Lalan Singh
Lalan Singh Feb 15, 2020

🌷🙏 जय श्री कृष्ण 🙏🌷

+34 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 20 शेयर

कामेंट्स

Vinod Agrawal Feb 15, 2020
🌷Jai Shree Ram Jai Siyaram Jai Shree Radhe Krishna🌷

राजेश अग्रवाल Feb 16, 2020
पत्थर में प्रभु है🌷पत्थर प्रभु नहीं🌷प्रभु दिल में ही है🌷कोई गुमशुदा नहीं🌷तू ही जुदा है इससे🌷यह तुझसे कभी जुदा नहीं🌷 आप सदा स्वस्थ रहें,खुश रहें,सुखी रहें🌷प्रभु से मंगल कामना के साथ राजेश भाई का सादर नमन🌷🙏

राजेश अग्रवाल Feb 16, 2020
पत्थर में प्रभु है🌷पत्थर प्रभु नहीं🌷प्रभु दिल में ही है🌷कोई गुमशुदा नहीं🌷तू ही जुदा है इससे🌷यह तुझसे कभी जुदा नहीं🌷 आप सदा स्वस्थ रहें,खुश रहें,सुखी रहें🌷प्रभु से मंगल कामना के साथ राजेश भाई का सादर नमन🌷🙏

Neha Sharma, Haryana Jan 25, 2020

+57 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 67 शेयर
Neha Sharma, Haryana Jan 25, 2020

जय श्री शनिदेव की शुभ प्रभात् वंदन : जोतिष की दृष्टि से कुछ कार्य जो परेसान करते है बाथरूम नहाने या अन्य क्रियाओं के बाद बाथरूम को गंदा छोड़ देने की आदत या फिर बाथरूम में गंदे कपड़े फैलाने की आदत जन्मकुंडली में चंद्रमा की स्थिति को कमजोर बनाती है। इस आदत की वजह से कॅरियर में नुकसान उठाना पड़ सकता है पैर जमीन पर घसीटकर चलना चलते वक्त पैर जमीन पर घसीटना बुरी आदत मानी जाती है। जिन लोगों में ये आदत होती है उनके भाग्य पर इसका असर पड़ता है। माना जाता है कि जिस तरह पैर घसीटकर चलने में धूल साथ आती है उसी तरह भाग्य पर भी धूल जम जाती है। ये आदत जिंदगी पर राहु के बुरे प्रभाव को दर्शाती है। टेबल पर गंदे बर्तन छोड़ना कई लोगों में खाना खाने के बाद अपने बर्तन गंदे ही टेबल पर छोड़ने की आदत होती है। ऐसे लोग दूसरों का इंतजार करते हैं कि वो उनके बर्तन उठाकर साफ करें। ये आदत बताती है कि व्यक्ति मेहनत करने से भागता है और भविष्य में सफलता पाने के लिए कोशिश भी नहीं करता। खाना खाने के बाद जगह को साफ करना और अपने बर्तन वहां से हटाना शनि और चंद्र दोष को दूर करता है। चेहरा और हाथ गंदे रखना पूरा दिन बाहर बिताने के बाद जब आप वापस घर पहुंचते हैं तो सबसे पहले अपने हाथ-पैर और चेहरा साफ करना चाहिए। यह सिर्फ साफ-सफाई के लिए नहीं होता बल्कि इससे आपके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा भी खत्म हो जाती है... पूजाघर की सफाई घर की वो जगह जहां भगवान स्थापित हों या फिर जहां भी आप पूजा करते हों उसे हर दिन साफ करना बहुत जरूरी है। ये वो स्थान होता है जहां से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। भगवान की मूर्ति को गंदी जगह पर रखने से जन्मकुंडली में ग्रहों पर प्रभाव पड़ता है जिसकी वजह से आर्थिक, शैक्षणिक और पारिवारिक जीवन पर बुरा असर पड़ता है। रात में देरी से सोना प्राचीन भारतीय सभ्यता में कहा जाता था कि रात को जब चंद्रमा अपनी पूरी चमक पर हो तब नींद लेनी चाहिए। चंद्रमा की रोशनी हमारे शरीर और मस्तिष्क को शांति प्रदान करती है। इस दौरान सोने से जिंदगी की कई परेशानियों का हल मिलता है अतिथियों को ठंडा पानी देना जब कोई आपके घर में आता है तो वो अपने साथ अपनी ऊर्जा भी साथ लाता है जो घर में आने के बाद आपकी ऊर्जा से टकराती है। घर में आए मेहमान को अगर आप ठंडा पानी देते हैं तो पानी की ठंडक उसकी ऊर्जा को शांत करता जूते-चप्पलों को फैलाना घर में जूते-चप्पलों को इधर उधर फैलाने की आदत दुश्मनों की संख्या में इजाफा करती है। शास्त्रों के मुताबिक अपने जूते-चप्पलों को फैलाना सामाजिक रूप से खुद को कमजोर करना माना जाता है। अस्त-व्यस्त रसोईघर अगर किसी का रसोईघर गंदा और अस्त-व्यस्त है तो इससे कुंडली में मंगल का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जिनकी कुंडली में मंगलदोष है वो अपना रसोईघर हमेशा साफ रखें और माता अन्नपूर्णा की पूजा के लिए अलग स्थान जरूर बनाएं। रोज पेड़ों को पानी देना प्रतिदिन पेड़ों को पानी देना एक अच्छी आदत मानी गई है। जो लोग रोजाना पेड़ों को पानी देते हैं उनके परिवार और प्यार संबंधी रिश्तों में कभी भी कोई दिक्कत नहीं आती। पेड़ों को पानी देने की आदत की वजह से कुंडली में चंद्र, सूर्य, शुक्र और बुध का असुंतलित व्यवहार समाप्त होता है। बिस्तर गंदा रखना बिस्तर पर बिछी चादर को वक्त-वक्त पर बदलना और उसकी जगह नई साफ चादर बिछाना एक अच्छी आदत मानी गई है लेकिन अगर कोई कई दिनों तक एक ही चादर पर सोता हो और कभी भी नींद से जागने के बाद अपना बिस्तर ठीक ना करता हो तो उसे अपनी जिंदगी में अचानक आने वाली मुश्किलों का सामना करना पड़ता तेज आवाज में बोलना जो लोग अपनी असली आवाज में बोलने की जगह तेज आवाज में बात करते हैं, यह उनकी कुंडली में शनि के गलत प्रभाव की ओर इशारा करता है। ऐसे लोगों से शनि नाराज हो जाते हैं। जिंदगी भर आप जो रिश्ते निभाते आए हैं उनपर भी इसका असर पड़ता है। गंदे पैर कुछ लोग साफ-सफाई पर कम ही ध्यान देते हैं खासकर पैरों की सफाई को, लेकिन यह आदत बहुत खराब मानी जाती है। पैर शरीर का वो खास अंग होता है जो शरीर का सारा भार उठाता है... बड़ों का अनादर करना बड़े बुजुर्ग घर के सबसे मजबूत स्तंभ माने जाते हैं, इनकी मौजूदगी ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। बुजुर्गों का अनादर करने से घर में वैभव की कमी होती है। ऐसा करना व्यक्ति के कॅरियर, उसकी सामाजिक छवि और यहां तक कि पूरे परिवार को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाती है। थूकते जो लोग घर, दफ्तर या प्राकृतिक जगहों पर थूकते हैं वो वास्तव में अपनी सफलता, सामाजिक आदर और वैभव को थूक देते हैं। ये आदत देवी लक्ष्मी का अपमान मानी जाती है। ड्रग्स और शराब की आदत मदिरापान और ड्रग्स के सेवन की आदत राहु के नकारात्मक प्रभाव का कारण बनती है जो कि तनाव और माइग्रेन की वजह बनती है। ऐसे लोग भले ही कितनी भी कड़ी मेहनत कर लें लेकिन उस मेहनत से मिलने वाली खुशी इन्हें कभी-कभी ही मिल पाती है। l: जानिए गणेश जी का असली मस्तक कटने के बाद कहां गया 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ भगवान गणेश गजमुख, गजानन के नाम से जाने जाते हैं, क्योंकि उनका मुख गज यानी हाथी का है। भगवान गणेश का यह स्वरूप विलक्षण और बड़ा ही मंगलकारी है। आपने भी श्रीगणेश के गजानन बनने से जुड़े पौराणिक प्रसंग सुने-पढ़े होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं या विचार किया है कि गणेश का मस्तक कटने के बाद उसके स्थान पर गजमुख तो लगा, लेकिन उनका असली मस्तक कहां गया? जानिए, उन प्रसंगों में ही उजागर यह रोचक बात – श्री गणेश के जन्म के सम्बन्ध में दो पौराणिक मान्यता है। प्रथम मान्यता के अनुसार जब माता पार्वती ने श्रीगणेश को जन्म दिया, तब इन्द्र, चन्द्र सहित सारे देवी-देवता उनके दर्शन की इच्छा से उपस्थित हुए। इसी दौरान शनिदेव भी वहां आए, जो श्रापित थे कि उनकी क्रूर दृष्टि जहां भी पड़ेगी, वहां हानि होगी। इसलिए जैसे ही शनि देव की दृष्टि गणेश पर पड़ी और दृष्टिपात होते ही श्रीगणेश का मस्तक अलग होकर चन्द्रमण्डल में चला गया। इसी तरह दूसरे प्रसंग के मुताबिक माता पार्वती ने अपने तन के मैल से श्रीगणेश का स्वरूप तैयार किया और स्नान होने तक गणेश को द्वार पर पहरा देकर किसी को भी अंदर प्रवेश से रोकने का आदेश दिया। इसी दौरान वहां आए भगवान शंकर को जब श्रीगणेश ने अंदर जाने से रोका, तो अनजाने में भगवान शंकर ने श्रीगणेश का मस्तक काट दिया, जो चन्द्र लोक में चला गया। बाद में भगवान शंकर ने रुष्ट पार्वती को मनाने के लिए कटे मस्तक के स्थान पर गजमुख या हाथी का मस्तक जोड़ा। ऐसी मान्यता है कि श्रीगणेश का असल मस्तक चन्द्रमण्डल में है, इसी आस्था से भी धर्म परंपराओं में संकट चतुर्थी तिथि पर चन्द्रदर्शन व अर्घ्य देकर श्रीगणेश की उपासना व भक्ति द्वारा संकटनाश व मंगल कामना की जाती है। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️

+164 प्रतिक्रिया 24 कॉमेंट्स • 140 शेयर
Neha Sharma, Haryana Jan 27, 2020

*ओम् नमः शिवाय*🥀🥀🙏 *शुभ प्रभात् वंदन*🥀🥀🙏 भगवान शिव ने मातापार्वती को बताए थे जीवन के ये पांच रहस्य भगवान शिव ने देवी पार्वती को समय-समय पर कई ज्ञान की बातें बताई हैं। जिनमें मनुष्य के सामाजिक जीवन से लेकर पारिवारिक और वैवाहिक जीवन की बातें शामिल हैं। भगवान शिव ने देवी पार्वती को 5 ऐसी बातें बताई थीं जो हर मनुष्य के लिए उपयोगी हैं, जिन्हें जानकर उनका पालन हर किसी को करना ही चाहिए- 1. क्या है सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ा पाप देवी पार्वती के पूछने पर भगवान शिव ने उन्हें मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा धर्म और अधर्म मानी जाने वाली बात के बारे में बताया है। भगवान शंकर कहते है- श्लोक- नास्ति सत्यात् परो नानृतात् पातकं परम्।। अर्थात- मनुष्य के लिए सबसे बड़ा धर्म है सत्य बोलना या सत्य का साथ देना और सबसे बड़ा अधर्म है असत्य बोलना या उसका साथ देना। इसलिए हर किसी को अपने मन, अपनी बातें और अपने कामों से हमेशा उन्हीं को शामिल करना चाहिए, जिनमें सच्चाई हो, क्योंकि इससे बड़ा कोई धर्म है ही नहीं। असत्य कहना या किसी भी तरह से झूठ का साथ देना मनुष्य की बर्बादी का कारण बन सकता है। 2. काम करने के साथ इस एक और बात का रखें ध्यान श्लोक- आत्मसाक्षी भवेन्नित्यमात्मनुस्तु शुभाशुभे। अर्थात- मनुष्य को अपने हर काम का साक्षी यानी गवाह खुद ही बनना चाहिए, चाहे फिर वह अच्छा काम करे या बुरा। उसे कभी भी ये नहीं सोचना चाहिए कि उसके कर्मों को कोई नहीं देख रहा है। कई लोगों के मन में गलत काम करते समय यही भाव मन में होता है कि उन्हें कोई नहीं देख रहा और इसी वजह से वे बिना किसी भी डर के पाप कर्म करते जाते हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और ही होती है। मनुष्य अपने सभी कर्मों का साक्षी खुद ही होता है। अगर मनुष्य हमेशा यह एक भाव मन में रखेगा तो वह कोई भी पाप कर्म करने से खुद ही खुद को रोक लेगा। 3. कभी न करें ये तीन काम करने की इच्छा श्लोक-मनसा कर्मणा वाचा न च काड्क्षेत पातकम्। अर्थात- आगे भगवान शिव कहते है कि- किसी भी मनुष्य को मन, वाणी और कर्मों से पाप करने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। क्योंकि मनुष्य जैसा काम करता है, उसे वैसा फल भोगना ही पड़ता है। यानि मनुष्य को अपने मन में ऐसी कोई बात नहीं आने देना चाहिए, जो धर्म-ग्रंथों के अनुसार पाप मानी जाए। न अपने मुंह से कोई ऐसी बात निकालनी चाहिए और न ही ऐसा कोई काम करना चाहिए, जिससे दूसरों को कोई परेशानी या दुख पहुंचे। पाप कर्म करने से मनुष्य को न सिर्फ जीवित होते हुए इसके परिणाम भोगना पड़ते हैं बल्कि मारने के बाद नरक में भी यातनाएं झेलना पड़ती हैं। 4. सफल होने के लिए ध्यान रखें ये एक बात संसार में हर मनुष्य को किसी न किसी मनुष्य, वस्तु या परिस्थित से आसक्ति यानि लगाव होता ही है। लगाव और मोह का ऐसा जाल होता है, जिससे छूट पाना बहुत ही मुश्किल होता है। इससे छुटकारा पाए बिना मनुष्य की सफलता मुमकिन नहीं होती, इसलिए भगवान शिव ने इससे बचने का एक उपाय बताया है। श्लोक-दोषदर्शी भवेत्तत्र यत्र स्नेहः प्रवर्तते। अनिष्टेनान्वितं पश्चेद् यथा क्षिप्रं विरज्यते।। अर्थात- भगवान शिव कहते हैं कि- मनुष्य को जिस भी व्यक्ति या परिस्थित से लगाव हो रहा हो, जो कि उसकी सफलता में रुकावट बन रही हो, मनुष्य को उसमें दोष ढूंढ़ना शुरू कर देना चाहिए। सोचना चाहिए कि यह कुछ पल का लगाव हमारी सफलता का बाधक बन रहा है। ऐसा करने से धीरे-धीरे मनुष्य लगाव और मोह के जाल से छूट जाएगा और अपने सभी कामों में सफलता पाने लगेगा। 5. यह एक बात समझ लेंगे तो नहीं करना पड़ेगा दुखों का सामना श्लोक-नास्ति तृष्णासमं दुःखं नास्ति त्यागसमं सुखम्। सर्वान् कामान् परित्यज्य ब्रह्मभूयाय कल्पते।। अर्थात- आगे भगवान शिव मनुष्यो को एक चेतावनी देते हुए कहते हैं कि- मनुष्य की तृष्णा यानि इच्छाओं से बड़ा कोई दुःख नहीं होता और इन्हें छोड़ देने से बड़ा कोई सुख नहीं है। मनुष्य का अपने मन पर वश नहीं होता। हर किसी के मन में कई अनावश्यक इच्छाएं होती हैं और यही इच्छाएं मनुष्य के दुःखों का कारण बनती हैं। जरुरी है कि मनुष्य अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं में अंतर समझे और फिर अनावश्यक इच्छाओं का त्याग करके शांत मन से जीवन बिताएं। *🌻कान दर्द से राहत पाने के लिए घरेलू उपाय* *🌻लहसुन की 10-12 कलियों को छीलकर रख लें। इन कलियों को अच्छी तरह पीस या कूट लें। पीसते या कूटते समय इसमें 10-12 बूंद पानी मिला लें। अब इसे किसी कपड़े या महीन छन्नी से छान या निचोड़ लें। दर्द बाली कान में उस रस के 2 बून्द रस कान में डालने से दर्द से राहत मिलता है ।* *🌻लहसुन की कलियों को 2 चम्‍मच तिल के तेल में तब तक गरम करें जब तक कि वह काला ना हो जाए। फिर इसे तेल की 2-3 बूंदे कानों में टपका लें।* *🌻जैतून के पत्तों के रस को गर्म करके बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।* *🌻तुलसी के पत्तों का रस गुनगुना कर दो-दो बूंद सुबह-शाम डालने से कान के दर्द में राहत मिलती है।* *🌻प्याज का रस निकाल लें,अब रुई के फाये या किसी वूलेन कपडे के टुकडे को इस रस में डुबायें अब इसे कान के ऊपर निचोड़ दें ,इससे कान में उत्पन्न सूजन,दर्द ,लालिमा एवं संक्रमण को कम करने में मदद मिलती है।* *🌻कान में दर्द हो रहा है तो अदरक का रस निकालकर दो बूंद कान में टपका देने से भी दर्द और सूजन में काफी आराम मिलता है।*

+447 प्रतिक्रिया 46 कॉमेंट्स • 230 शेयर

https://youtu.be/xGuGUAYUY3o

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
white beauty Jan 26, 2020

+8 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 27 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB