pooja
pooja Apr 13, 2021

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कामेंट्स

Sanwar lal Apr 13, 2021
जय श्री कृष्णा जय माता दी

Manju_chuahan_ May 10, 2021

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Shashi Bhushan Singh May 10, 2021

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💗 Geeta 💓 May 10, 2021

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*मनुष्य का स्वभाव है “कमाना, संग्रह करना” फिर चाहे वो धन हो, नाते हो, संबंध हो या हो प्रसन्नता, परन्तु क्या आपने कभी सोचा है? नियति ने ये संग्रह करने की प्रकृति मनुष्य में क्यों डाली ?* *एक बीज से पौधा पनपता है, उसके भोजन से फल संग्रहित होता है क्यों? इसलिए ताकि वृक्ष उसे स्वयं खा सके? नहीं, बल्कि इसलिए ताकि वो भूखे जीवों में बाँट सके। अब आप पूछेंगे कि इसमें वृक्ष का क्या लाभ ?* *लाभ है, क्योंकि जो बांटता है वो मिटता नहीं। जो फल ये जीव खाते है वो उसके बीजों को वातावरण में बिखेर देते है जिससे जन्म लेते है नए वृक्ष, उसकी जाति, उसका गुण, उसकी मिठास अमर हो जाती है !* *इसलिए स्मरण रखियेगा अमीर होने के लिए एक-एक क्षण संग्रह करना पड़ता है।* *!!!...बुराई बड़ी मीठी है,* *उसकी चाहत कम नहीं होती* *सच्चाई बड़ी कड़वी है,* *सबको हजम नहीं होती...!!!* *जय माता दी*🙏🙏 *कुमार रौनक कश्यप*🙏🙏

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Smt Neelam Sharma May 9, 2021

*माँ* आप सभी मातृ शक्तियों को मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राण, नास्ति मातृसमा प्रिया।। *अर्थात, माता के समान कोई छाया नहीं है, माता के समान कोई सहारा नहीं है। माता के समान कोई रक्षक नहीं है और माता के समान कोई प्रिय चीज नहीं है।* 'माँ' यह वो अलौकिक शब्द है, जिसके स्मरण मात्र से ही रोम−रोम पुलकित हो उठता है, हृदय में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ता है और मनो मस्तिष्क स्मृतियों के अथाह समुद्र में डूब जाता है। 'माँ' वह अमोघ मंत्र है, जिसके उच्चारण मात्र से ही हर पीड़ा का नाश हो जाता है। 'माँ' की ममता और उसके आँचल की महिमा को शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता है, नौ महीने तक गर्भ में रखना, प्रसव पीड़ा झेलना, स्तनपान करवाना, रात−रात भर बच्चे के लिए जागना, खुद गीले में रहकर बच्चे को सूखे में रखना, मीठी−मीठी लोरियां सुनाना, ममता के आंचल में छुपाए रखना, तोतली जुबान में संवाद व अठखेलियां करना, पुलकित हो उठना, ऊंगली पकड़कर चलना सिखाना, प्यार से डांटना−फटकारना, रूठना−मनाना, दूध−दही−मक्खन का लाड़−लड़ाकर खिलाना−पिलाना, बच्चे के लिए अच्छे−अच्छे सपने बुनना, बच्चे की रक्षा के लिए बड़ी से बड़ी चुनौती का डटकर सामना करना और बड़े होने पर भी वही मासूमियत और कोमलता भरा व्यवहार.....ये सब ही तो हर 'माँ' की मूल पहचान है। इस सृष्टि के हर जीव और जन्तु की 'माँ' की यही मूल पहचान है। मां का अर्थ ही होता है पृथ्वी पर ईश्वर उपस्थिति वैसे तो मां के साथ हर दिन ही जन्नत सा महसूस होता है पर इसके लिए एक विशेष दिन बनाया गया है *मातृ दिवस* मातृ दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य मां के प्रति सम्मान और प्रेम को प्रदर्शित करना है। *आइए जानते हैं मातृ दिवस सर्वप्रथम कहां से प्रारंभ हुआ* मातृ दिवस मनाने का शुरुआत सर्वप्रथम ग्रीस देश में हुई थी, जहां देवताओं की मां को पूजने का चलन शुरु हुआ था। इसके बाद इसे त्योहार की तरह मनाया जाने लगा। हर मां अपने बच्चों के प्रति जीवन भर समर्पित होती है। मां के त्याग की गहराई को मापना भी संभव नहीं है लेकिन उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता को प्रकट करना हमारा कर्तव्य है। *भारत में मातृ दिवस मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। इस वर्ष भारत में मातृ दिवस 9 मई को मनाया जाएगा।* मैं अक्सर देखता हूं कि लोग अपनी माताजी को मातृ दिवस पर कोई ना कोई उपहार अवश्य ही भेंट करते हैं। मेरा व्यक्तिगत विचार है कि माँ को देने लायक कोई उपहार नहीं हो सकता है। फिर भी, अगर आप अपनी माँ को मातृ दिवस पर कोई उपहार देना ही चाहते हैं केवल मातृ दिवस पर ही नहीं उन्हें प्रतिदिन सम्मान देना प्रारंभ करें। उनकी इच्छाओं का सम्मान करें। हमारा प्रयास रहना चाहिए जैसे बचपन में हमारी माता हमारा केवल चेहरा देखकर हमारे मन के भाव समझ जाती थी हमें भी बड़े होकर उनके मन के भावों को समझना चाहिए। आप प्रतिदिन उन्हें प्यार से गले भी लगा लेंगे तो उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान यही होगा। अपनी सामर्थ्य के अनुसार अपनी इच्छा अनुसार जो भी आप अपनी माता जी को देना चाहें उससे वह प्रसन्न हीं होंगी।🙏🏻🙏🏻 🙏🏻🙏🏻मां🙏🏻🙏🏻

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Vinay Mishra May 8, 2021

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💗 Geeta 💓 May 10, 2021

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