vinay
vinay Sep 26, 2017

https://youtu.be/Vv-GJVTcb6Y

https://youtu.be/Vv-GJVTcb6Y

+1 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Manoj manu Oct 22, 2020

🚩🔱जय माता दी शुभ नवरात्रि 🔔🌿🙏 🌺ऊँ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके । 🌿शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते। घोर विपत्ति दूर करते और सभी प्रकार की सुख शाँति एवं समृद्धि प्रदान करते हैं मांँ दुर्गा के ये 32 नाम :-- दानव महिषासुर के वध से प्रसन्न और निर्भय हो गए -त्रिदेवों सहित देवताओं ने प्रसन्न भगवती से ऐसे किसी अमोघ उपाय की याचना की, जो सरल हो और कठिन से कठिन विपत्ति से छुड़ाने वाला हो। 'हे देवी! यदि वह उपाय गोपनीय हो तब भी कृपा कर हमें कहें। ' माँ भगवती ने अपने ही बत्तीस नामों की माला के एक अद्भुत गोपनीय रहस्यमय किंतु चमत्कारी जप का उपदेश दिया जिसके करने से घोर से घोर विपत्ति, राज्यभय या दारुण विपत्ति से ग्रस्त मनुष्य भी भयमुक्त होकर सुख शाँति एवं समृद्धि को प्राप्त करता है एवं सुखी हो जाता है। पाठ विधि :- देहशुद्धि के बाद कुश या कम्बल के आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर की तरफ मुंँह करके घी के दीपक के सामने इन नामों की 5/ 11/ 21 माला नौ दिन या प्रतिदिन करनी है और जगत माता से अपनी मनोकामना पूर्ण करने की याचना करनी है। माँ दुर्गा के 32 नाम :- ॐ दुर्गा, दुर्गतिशमनी, दुर्गाद्विनिवारिणी, दुर्ग मच्छेदनी, दुर्गसाधिनी, दुर्गनाशिनी, दुर्गतोद्धारिणी, दुर्गनिहन्त्री, दुर्गमापहा, दुर्गमज्ञानदा, दुर्गदैत्यलोकदवानला, दुर्गमा, दुर्गमालोका, दुर्गमात्मस्वरुपिणी, दुर्गमार्गप्रदा, दुर्गम विद्या, दुर्गमाश्रिता, दुर्गमज्ञान संस्थाना, दुर्गमध्यान भासिनी, दुर्गमोहा, दुर्गमगा, दुर्गमार्थस्वरुपिणी, दुर्गमासुर संहंत्रि, दुर्गमायुध धारिणी, दुर्गमांगी, दुर्गमता, दुर्गम्या, दुर्गमेश्वरी, दुर्गभीमा, दुर्गभामा,दुर्गमो, दुर्गोद्धारिणी। (video m poore nam nahi h) पोस्ट में दिये गए हैं धन्यवाद , 🌿🌺🌿माँ भगवती सभी का सदा कल्याण करें सदा मंगल प्रदान करें जय माता दी राधे राधे जी 🌺🌿🙏

+69 प्रतिक्रिया 12 कॉमेंट्स • 51 शेयर
Ravi Kumar Taneja Oct 22, 2020

🕉️🕉️🕉️​A B C आती है क्या.....?????अगर आती भी होगी तो ऐसी नहीं आती होगी .....​🕉️🕉️🕉️ ​क्योंकि ऎसी आज तक आपको किसी ने नहीं सिखाई होगी ..​🌸🌸🌸🌸🌸🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🙏A=अम्बे 👣🔯 🙏B=भवानी 👣🔯 🙏C=चामुंडा 👣🔯 🙏D=दुर्गा 👣🔯 🙏E=एकरूपी 👣🔯 🙏F=फरसाधारणी 👣🔯 🙏G=गायत्री 👣🕉️ 🙏H=हिंगलाज 👣🔯 🙏I=इंद्राणी 👣🔯 🙏J=जगदंबा 👣🔯 🙏K=काली 👣🔯 🙏L=लक्ष्मी 👣🔯 🙏M=महामाया 👣🔯 🙏N=नारायणी 👣🔯 🙏O=ॐकारणी 👣🔯 🙏P=पद्मा👣🔯 🙏Q=कात्यायनी 🔯 🙏R=रत्नप्रिया 👣🔯 🙏S=शीतला 👣🔯 🙏T=त्रिपुरासुंदरी 👣🔯 🙏U=उमा 👣🔯 🙏V=वैष्णवी 👣🔯 🙏W=वराही 👣🔯 🙏Y=यति 👣🔯 🙏Z=ज़य्वाना 👣🔯 ​ABCD पढ़ते जाओ ..जय माता दी कहते जाओ ...!!!​ ​🚩जय माता दी 🚩⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳⛳जयकारा शेरावाली का शेर पे सवार हो के आजा शेरावालिये. 💥🙏🐾🙏🐾🙏💥 Mata Rani Sabke Sankat Hare 🌷🌷🌷

+167 प्रतिक्रिया 31 कॉमेंट्स • 300 शेयर
Subhash Singh Oct 22, 2020

+52 प्रतिक्रिया 7 कॉमेंट्स • 19 शेयर
राधेय Oct 22, 2020

+9 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 1 शेयर
Madhav Goyal Oct 22, 2020

+5 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 0 शेयर

+4 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Shanti Pathak Oct 22, 2020

*जय माँ कात्यायनी* *सुप्रभात वंदन * या देवी सर्वभूतेषु मां स्मृति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।। शुभ नवरात्रि के छठे दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई 🙏🙏🌷🌷 ॥ माँ कात्यायनी ॥ नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इस देवी को नवरात्रि में छठे दिन पूजा जाता है। कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना की। कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री प्राप्त हो। मां भगवती ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। माँ कात्यायनी भक्त जनों के हितार्थ परम शक्ति के रूप मे उत्पन्न हुई और संसार में व्याप्त असुरों के भय को समाप्त किया है। माँ के नाम के संदर्भं में कथानक आता है, कि देवताओ के कल्याण हेतु यह महर्षि कात्यायन के यहाँ प्रकट हुई जिससे इनका नाम कात्यायनी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। तथा महर्षि द्वारा इन्हें पुत्री के रूप में स्वीकार करते हुए पूजा अर्चना की गई। पूर्व काल में जब महिषासुर के अत्याचार से धरा में पाप बढ़ गए और देवताओ का यज्ञ भाग छीना जाने लगा। देव समुदाय मे यह चर्चा होने लगी कि धरती के पाप कैसे नष्ट होगे और देवताओं सहित पूरे विश्व का कल्याण कैसे होगा। इस संदर्भ में गहन चिंतन करने पर देवताओं ने यह निष्कर्ष निकाला कि ईश्वरीय देवी को प्रकट किया जाए। क्योंकि वह किसी भी देवताओं से मर नहीं रहा था। अर्थात् महिषासुर को यह देवताओं से ही वरदान मिला था कि उसे कन्या अर्थात् स्त्री के सिवा और कोई न मार सके। इस वरदान के मद में चूर वह दानव राज क्रूरता पूर्वक अत्याचार को अंजाम देने लगा। जिससे देवताओं ने अपने शरीर के द्वारा परम तेजस्वनी कन्या को उत्पन्न किया। जिसका नाम कात्यायनी पड़ा। तथा देव कार्य को माता ने अपनी अद्वितीय शक्ति के द्वारा सिद्ध करते हुए उस महासुर का संहार दशमी के दिन कर दिया। दूसरा कथानक है कि कात्यायन गोत्रीय ऋषि ने तपस्या करके कन्या रत्न का वरदान माँगा जिससे उनके कुल मे माँ उत्पन्न हुई और महिषासुर जैसे दानव को मारकर संसार को अभय दिया चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलावरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानव घातिनी॥ जय माता दी 🙏🙏🙏🙏

+83 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 70 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB