Rajesh sharma
Rajesh sharma Jul 21, 2017

https://youtu.be/ZRGef0w49uc

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lndu Malhotra Jun 1, 2020

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Sunita Pawar Jun 1, 2020

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geeta nimavat Jun 1, 2020

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Mamta Sharma Jun 1, 2020

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आज का श्लोक:      श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप             अध्याय 17 :             श्रद्धा के विभाग                   श्लोक--26----27 ❁ *श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप* ❁ *सभी के लिए सनातन शिक्षाएं* *आज* *का* *श्लोक* -- 17.26-27 *अध्याय 17 : श्रृद्धा के विभाग* सद्भावे साधुभावे च सदित्येतत्प्रयुज्यते | प्रशस्ते कर्मणि तथा सच्छब्दः पार्थ युज्यते || २६ || यज्ञे तपसि दाने च स्थितिः सदिति चोच्यते | कर्म चैव तदर्थीयं सादित्येवाभिधीयते || २७ || सत्-भावे - ब्रह्म के स्वभाव के अर्थ में;साधु-भावे - भक्त के स्वभाव के अर्थ में; च - भी; सत् - सत् शब्द; इति - इस प्रकार; एतत् - यह; प्रयुज्यते - प्रयुक्त किया जाता है; प्रशस्ते - प्रामाणिक; कर्माणि - कर्मों में; तथा - भी; सत्-शब्दः - सत् शब्द;पार्थ - हे पृथापुत्र; युज्यते - प्रयुक्त किया जाता है; यज्ञे - यज्ञ में; तपसि - तपस्या में; दाने - दान में; च - भी; स्थितिः - स्थिति; सत् - ब्रह्म; इति - इस प्रकार; च - तथा; उच्यते - उच्चारण किया जाता है; कर्म - कार्य; च - भी; एव - निश्चय ही; तत् - उस; अर्थीयम् - के लिए; सत् - ब्रह्म; इति - इस प्रकार; एव - निश्चय ही; अभिधीयते - कहा जाता है । परम सत्य भक्तिमय यज्ञ का लक्ष्य है और उसे सत् शब्द से अभिहित किया जाता है । हे पृथापुत्र! ऐसे यज्ञ का सम्पन्नकर्ता भी सत् कहलाता है जिस प्रकार यज्ञ, तप तथा दान के सारे कर्म भी जो परम पुरुष को प्रसन्न करने के लिए सम्पन्न किये जाते हैं, 'सत्' हैं । तात्पर्य :प्रशस्ते कर्माणि अर्थात् 'नियत कर्तव्य' सूचित करते हैं कि वैदिक साहित्य में ऐसी कई क्रियाएँ निर्धारित हैं, जो गर्भाधान से लेकर मृत्यु तक संस्कार के रूप में हैं । ऐसे संस्कार जीव की चरम मुक्ति के लिए होते हैं । ऐसी सारी क्रियाओं के समय ॐ तत् सत् उच्चारण करने की संस्तुति की जाती है । सद्भाव तथा साधुभाव आध्यात्मिक स्थिति के सूचक हैं । कृष्णभावनामृत में कर्म करना सत् है और जो व्यक्ति कृष्णभावनामृत के कार्यों के प्रति सचेष्ट रहता है, वह साधु कहलाता है । श्रीमद्भागवत में (३.२८.२८) कहा गया है कि भक्तों की संगति से आध्यात्मिक विषय स्पष्ट हो जाता है । इसके लिए सतां प्रसङगात् शब्द व्यवहृत हुए हैं । बिना सत्संग के दिव्य ज्ञान उपलब्ध नहीं हो पाता । किसी को दीक्षित करते समय या यज्ञोपवीत कराते समय ॐ तत् सत् शब्दों का उच्चारण किया जाता है । इसी प्रकार सभी प्रकार के यज्ञ करते समय ॐ तत् सत् या ब्रह्म ही चरम लक्ष्य होता है । तदर्थीयम् शब्द ब्रह्म का प्रतिनिधित्व करने वाले किसी भी कार्य में सेवा करने का सूचक है, जिसमें भगवान् के मन्दिर में भोजन पकाना तथा सहायता करने जैसी सेवाएँ या भगवान् के यश का प्रसार करने वाला अन्य कोई भी कार्य सम्मिलत है । इस तरह ॐ तत् सत् शब्द समस्त कार्यों को पूरा करने के लिए कई प्रकार से प्रयुक्त किया जाता है । ************************************ *प्रतिदिन भगवद्गीता का एक श्लोक* प्राप्त करने हेतु, इस समूह से जुड़े । 🙏🏼 https://telegram.me/DailyBhagavadGita

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*“ऊँ नम: शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नम:।”* आप सभी को गंगा दशहरा स्नान पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। आज ही के दिन माता गंगा का धरती पर हस्त नक्षत्र में अवतरण हुआ। माता गंगा एवं भगवान भोलेनाथ जी समस्त देश एवं प्रदेश वासियों की कोरोना वैश्विक महामारी से रक्षा करें। #जय_गंगा_मैया 🙏गंगा दशहरा 1 जून 2020 (सोमवार) स्कंद पुराण में गंगा के अवतरण की चर्चा करते हुए कहा गया है कि: ज्येष्ठे मासे सिते पक्षे, दशम्यां बुधस्तयो:। व्यतीपादे गरानंदे, कन्याचंद्रे वृषे रवौ। हरते दश पापानि, तस्माद्दशहरा स्मृता।। अर्थात इस दिन ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, बुध दिन, हस्त नक्षत्र, व्यतीपाद, गर और आनंद योग, कन्या राशि में चंद्रमा और वृष राशि में सूर्य होता है इसलिए इसे गंगा दशहरा कहा जाता है। ऐसा भी कहा गया है कि इस दिन मां गंगा का व्रत, गंगा स्नान और गंगा का विधिपूर्वक पूजन करने से उपासक को तीन प्रकार के शारीरिक, चार प्रकार के वाचिक और तीन प्रकार के मानसिक- इन दस पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन गंगा में स्नान करने वाले को बैकुंठलोक की प्राप्ति होती है, ऐसा भी पुराणों में कहा गया है। अगर किन्हीं कारणों से गंगा नदी तक पहुंचना संभव न हो, तो उपासक को अपने पास में ही किसी भी नदी या तालाब में स्नान करके तिलों का अर्पण करना चाहिए। गंगा पूजन की विधि : इस दिन गंगा नदी में स्नान करके पुष्प और अर्घ्य देते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए- ओम नमो भगवत्यै, दशपापहरायै गंगायै, कृष्णायै, विष्णुरूपिण्यै, नन्दिन्यै नमोनम:।। इसके अतिरिक्त गंगा नदी से दूर रहने वाले उपासक को मां गंगा की मूर्ति का अक्षत, पुष्प, धूप आदि से विधि विधानपूर्वक पूजन करना चाहिये। इसके बाद 'ओम नमो भगवति, ऐं ह्रीं श्रीं (वाक्-काम-मायामयि) हिलि हिलि, मिलि मिलि, गंगे मां पावय पावय', इस मंत्र से पांच बार गंगा का पूजन करें। पूजन के बाद अगर संभव हो तो दस फल, दस दीपक और तिलों का दान करें। 🌹🌹🌹🌹🌿 Relationship is like honey do not compare with money.... It is not a collection of art it is selection of hearts.... ❤ 🌸🌿Good Morning🌿🌸 🌸🌸🌸ਤੂੰ ਮੇਰਾ ਪਿਤਾ ਤੂੰਹੈ ਮੇਰਾ ਮਾਤਾ !! ਤੂੰ ਮੇਰਾ ਬੰਧੁਪ ਤੂੰ ਮੇਰਾ ਭ੍ਰਾਤਾ !! ਤੂੰ ਮੇਰਾ ਰਾਖਾ ਸਭਨੀ ਥਾਈ ਤਾ ਭਉ ਕੇਹਾ ਕਾੜਾ ਜੀਉ ਪਰਮਾਤਮਾਂ ਸਾਰਿਅਾਂ ਨੂੰ ਚੜਦੀ ਕਲਾ ਵਿੱਚ ਰੱਖੇ...... 🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹 🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻ਗੰਗਾ ਗੀਤਾ ਗਾਇਤ੍ਰੀ ਹਰਿਦਵਾਰ ਸੇਵਕ ਬਾਹਰਤ ਵਯਾਸ ਬੰਗਾ

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Varsha lohar Jun 1, 2020

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manju Jun 1, 2020

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MADAN Jun 1, 2020

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