जानिए नवरात्रि के बारे में और इन से जुड़े विधि विधान :-

जानिए नवरात्रि के बारे में और इन से जुड़े विधि विधान :-

जानिए नवरात्रि के बारे में और इन से जुड़े विधि विधान..

नवरात्री के नौ दिनों तक देवी माँ के एक स्वरुप की पूजा की जाती है। जो इस प्रकार है :-

21 सिंतबर , 2017( वीरवार ) – प्रतिपदा तिथि – घटस्थापना , श्री शैलपुत्री पूजा

22 सिंतबर , 2017 ( शुक्रवार ) – द्वितीया तिथि – श्री ब्रह्मचारिणी पूजा

23 सिंतबर , 2017 ( शनिवार ) – तृतीय तिथि – श्री चंद्रघंटा पूजा

24 सिंतबर, 2017 ( रविवार ) – चतुर्थी तिथि – श्री कुष्मांडा पूजा

25 सिंतबर , 2017 ( सोमवार ) – पंचमी तिथि – श्री स्कन्दमाता पूजा

26 सिंतबर , 2017 ( मंगलवार ) – षष्ठी तिथि – श्री कात्यायनि पूजा

27 सिंतबर , 2017 ( बुधवार ) – सप्तमी तिथि – श्री कालरात्रि पूजा



28 सिंतबर , 2017 ( वीरवार ) – अष्टमी तिथि – श्री महागौरी पूजा , महा अष्टमी पूजा , सरस्वती पूजा

29 सिंतबर, 2017 ( शुक्रवार ) – नवमी तिथि – नवमी पूजा , आयुध पूजा , नवमी होम

30 सिंतबर, 2017 ( शनिवार ) – दशमी तिथि – दुर्गा विसर्जन , विजया दशमी , दशहरा

घट स्थापना –

नवरात्री में घट स्थापना का बहुत महत्त्व है। नवरात्री की शुरुआत घट स्थापना से की जाती है।कलश को सुख समृद्धि , ऐश्वर्य देने वाला तथा मंगलकारी माना जाता है। कलश के मुख में भगवान विष्णु गले में रूद्र , मूल में ब्रह्मा तथा मध्य में देवी शक्ति का निवास माना जाता है। नवरात्री के समय ब्रह्माण्ड में उपस्थित शक्तियों का घट में आह्वान करके उसे कार्यरत किया जाता है।
इससे घर की सभी विपदा दायक तरंगें नष्ट हो जाती है तथा घर में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।

घट स्थापना की सामग्री

जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र।

— जौ बोने के लिए शुद्ध साफ़ की हुई मिटटी जिसमे कंकर आदि ना हो।

— पात्र में बोने के लिए जौ ( गेहूं भी ले सकते है )

– घट स्थापना के लिए मिट्टी का कलश या फिर तांबे का कलश भी लें सकते है



— कलश में भरने के लिए शुद्ध जल

— गंगाजल

— रोली , मौली

— पूजा में काम आने वाली साबुत सुपारी

— कलश में रखने के लिए सिक्का ( किसी भी प्रकार का कुछ लोग चांदी या सोने का सिक्का भी रखते है )

— आम के पत्ते

— कलश ढकने के लिए ढक्कन ( मिट्टी का या तांबे का )

— ढक्कन में रखने के लिए साबुत चावल

— नारियल

— लाल कपडा

— फूल माला

— फल तथा मिठाई

— दीपक , धूप , अगरबत्ती

घट स्थापना की विधि –

सबसे पहले जौ बोने के लिए एक ऐसा पात्र लें जिसमे कलश रखने के बाद भी आस पास जगह रहे। यह पात्र मिट्टी की थाली जैसा कुछ हो तो श्रेष्ठ होता है। इस पात्र में जौ उगाने के लिए मिट्टी की एक परत बिछा दें। मिट्टी शुद्ध होनी चाहिए । पात्र के बीच में कलश रखने की जगह छोड़कर बीज डाल दें। फिर एक परत मिटटी की बिछा दें। एक बार फिर जौ डालें। फिर से मिट्टी की परत बिछाएं। अब इस पर जल का छिड़काव करें।

कलश तैयार करें। कलश पर स्वस्तिक बनायें। कलश के गले में मौली बांधें। अब कलश को थोड़े गंगा जल और शुद्ध जल से पूरा भर दें।

कलश में साबुत सुपारी , फूल डालें। कलश में सिक्का डालें। अब कलश में पत्ते डालें। कुछ पत्ते थोड़े बाहर दिखाई दें इस प्रकार लगाएँ। चारों तरफ पत्ते लगाकर ढ़क्कन लगा दें। इस ढ़क्कन में अक्षत यानि साबुत चावल भर दें।

नारियल तैयार करें। नारियल को लाल कपड़े में लपेट कर मौली बांध दें। इस नारियल को कलश पर रखें। नारियल का मुँह आपकी तरफ होना चाहिए। यदि नारियल का मुँह ऊपर की तरफ हो तो उसे रोग बढ़ाने वाला माना जाता है। नीचे की तरफ हो तो शत्रु बढ़ाने वाला मानते है , पूर्व की और हो तो धन को नष्ट करने वाला मानते है। नारियल का मुंह वह होता है जहाँ से वह पेड़ से जुड़ा होता है ।अब यह कलश जौ उगाने के लिए तैयार किये गये पात्र के बीच में रख दे |

देवी माँ की चौकी की स्थापना और पूजा विधि –

लकड़ी की एक चौकी को गंगाजल और शुद्ध जल से धोकर पवित्र करें।

साफ कपड़े से पोंछ कर उस पर लाल कपड़ा बिछा दें।

इसे कलश के दांयी तरफ रखें।

चौकी पर माँ दुर्गा की मूर्ती अथवा फ्रेम युक्त फोटो रखें।

माँ को चुनरी ओढ़ाएँ और फूल माला चढ़ाये |

धूप , दीपक आदि जलाएँ।

नौ दिन तक जलने वाली माता की अखंड ज्योत जलाएँ। न हो सके तो आप सिर्फ पूजा के समय ही दीपक जला सकते है |

देवी मां को तिलक लगाए ।

माँ दुर्गा को वस्त्र, चंदन, सुहाग के सामान यानि हलदी, कुमकुम, सिंदूर, अष्टगंध आदि अर्पित करें ,काजल लगाएँ ।

मंगलसूत्र, हरी चूडियां , फूल माला , इत्र , फल , मिठाई आदि अर्पित करें।

श्रद्धानुसार दुर्गा सप्तशती के पाठ , देवी माँ के स्रोत ,दुर्गा चालीसा का पाठ, सहस्रनाम आदि का पाठ करें।




फिर अग्यारी तैयार कीजिये
अब एक मिटटी का पात्र और लीजिये उसमे आप गोबर के उपले को जलाकर अग्यारी जलाये घर में जितने सदस्य है उन सदस्यो के हिसाब से लॉन्ग के जोडे बनाये लॉन्ग के जोड़े बनाने के लिए आप बताशो में लॉन्ग लगाएं यानिकि एक बताशे में दो लॉन्ग ये एक जोड़ा माना जाता है और जो लॉन्ग के जोड़े बनाये है फिर उसमे कपूर और सामग्री चढ़ाये और अग्यारी प्रज्वलित करे |

देवी माँ की आरती करें।

पूजन के उपरांत वेदी पर बोए अनाज पर जल छिड़कें।

रोजाना देवी माँ का पूजन करें तथा जौ वाले पात्र में जल का हल्का छिड़काव करें। जल बहुत अधिक या कम ना छिड़के । जल इतना हो कि जौ अंकुरित हो सके। ये अंकुरित जौ शुभ माने जाते है। । यदि इनमे से किसी अंकुर का रंग सफ़ेद हो तो उसे बहुत अच्छा माना जाता है।

नवरात्री के व्रत की विधि –

नवरात्रि के दिनों में बहुत से लोग आठ दिनों के लिए व्रत रखते हैं (पड़वा से अष्टमी), और केवल फलाहार पर ही आठों दिन रहते हैं. फलाहार का अर्थ है, फल एवं और कुछ अन्य विशिष्ट सब्जियों से बने हुए खाने. फलाहार में सेंधा नमक का इस्तेमाल होता है. नवरात्रि के नौवें दिन भगवान राम के जन्म की रस्म और पूजा (रामनवमी) के बाद ही उपवास खोला जाता है. जो लोग आठ दिनों तक व्रत नहीं रखते, वे पहले और आख़िरी दिन उपवास रख लेते हैं (यानी कि पड़वा और अष्टमी को).व्रत रखने वालो को जमीन पर सोना चाहिए |


नवरात्री के व्रत में अन्न नही खiनi चाहिए |

सिंघाडे के आटे की लप्सी ,सूखे मेवे , कुटु के आटे की पूरी , समां के चावल की खीर, आलू ,आलू का हलवा भी लें सकते है ,दूध ,दही ,घीया ,इन सब चीजो का फलाहार करना चाहिए और सेंधा नमक तथा काली मिर्च का प्रयोग करना चाहिए |दोपहर को आप चाहे तो फल भी लें सकते है |

नवरात्री में कन्या पूजन –

महा अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है। कुछ लोग अष्टमी के दिन और कुछ नवमी के दिन कन्या पूजन करते है। परिवार की रीति के अनुसार किसी भी दिन कन्या पूजन किया जा सकता है। तीन साल से नौ साल तक आयु की कन्याओं को तथा साथ ही एक लांगुरिया (छोटा लड़का ) को खीर , पूरी , हलवा , चने की सब्जी आदि खिलाये जाते है। कन्याओं को तिलक करके , हाथ में मौली बांधकर,गिफ्ट दक्षिणा आदि देकर आशीर्वाद लिया जाता है , फिर उन्हें विदा किया जाता है।

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कामेंट्स

amir singh thakur Sep 21, 2017
कलश पर नारियल का मुंह अपनी तरफ होना चाहिए मगर सभी चित्रों में नारियल खड़ा दिखाते हैं यानी नारियल का मुंह नीचे या ऊपर की तरफ होता है ।ऐसा क्यों?

Hirdesh Sharma Mar 27, 2020

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा कैसे करें नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा-आराधना की जाती है। इनकी उपासना से सिद्धियों में निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु-यश में वृद्धि होती है। देवी कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। कूष्मांडा का अर्थ है कुम्हड़े। मां को बलियों में कुम्हड़े की बलि सबसे ज्यादा प्रिय है। इसलिए इन्हें कूष्मांडा देवी कहा जाता है। ऐसा है मां का स्वरुप: कूष्मांडा देवी की आठ भुजाएं हैं, जिनमें कमंडल, धनुष-बाण, कमल पुष्प, शंख, चक्र, गदा और सभी सिद्धियों को देने वाली जपमाला है। मां के पास इन सभी चीजों के अलावा हाथ में अमृत कलश भी है। इनका वाहन सिंह है और इनकी भक्ति से आयु, यश और आरोग्य की वृद्धि होती है। ऐसे करें पूजा माता कूष्मांडा के दिव्य रूप को मालपुए का भोग लगाकर किसी भी दुर्गा मंदिर में ब्राह्मणों को इसका प्रसाद देना चाहिए। इससे माता की कृपा स्वरूप उनके भक्तों को ज्ञान की प्राप्ति होती है, बुद्धि और कौशल का विकास होता है। देवी को लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चूड़ी भी अर्पित करना चाहिए। मां कूष्मांडा पूजन विधि नवरात्र में इस दिन भी रोज की भांति सबसे पहले कलश की पूजा कर माता कूष्मांडा को नमन करें। इस दिन पूजा में बैठने के लिए हरे रंग के आसन का प्रयोग करना बेहतर होता है। मां कूष्मांडा को इस निवेदन के साथ जल पुष्प अर्पित करें कि, उनके आशीर्वाद से आपका और आपके स्वजनों का स्वास्थ्य अच्छा रहे। अगर आपके घर में कोई लंबे समय से बीमार है तो इस दिन मां से खास निवेदन कर उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करनी चाहिए। देवी को पूरे मन से फूल, धूप, गंध, भोग चढ़ाएं। मां कूष्मांडा को विविध प्रकार के फलों का भोग अपनी क्षमतानुसार लगाएं। पूजा के बाद अपने से बड़ों को प्रणाम कर प्रसाद वितरित करें। देवी योग-ध्यान की देवी भी हैं। देवी का यह स्वरूप अन्नपूर्णा का भी है। उदराग्नि को शांत करती हैं। इसलिए, देवी का मानसिक जाप करें। देवी कवच को पांच बार पढ़ना चाहिए।

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Vikas Pachauri Mar 27, 2020

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Mahesh Malhotra Mar 27, 2020

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Seema Varshney Mar 28, 2020

नवरात्री के चतुर्थ दिवस आदि शक्ति माँ दुर्गा के @@@@@ *कूष्मांडा स्वरूप*@@@@@ की उपासना विधि एवं समृद्धि पाने के उपाय सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च। दधानाहस्तपद्याभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तु में॥ माँ श्री दुर्गा का चतुर्थ रूप कूष्मांडा हैं। अपनी मन्द हंसी से अपने उदर से अण्ड अर्थात ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारंण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से जाना जाता है। संस्कृत भाषा में कूष्माण्ड कूम्हडे को कहा जाता है, कूम्हडे की बलि इन्हें प्रिय है, इस कारण से भी इन्हें कूष्माण्डा के नाम से जाना जाता है। जब सृष्टि नहीं थी और चारों ओर अंधकार ही अंधकार था तब इन्होंने ईषत हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी। यह सृष्टि की आदिस्वरूपा हैं और आदिशक्ति भी। इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है। सूर्यलोक में निवास करने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। कुष्मांडा देवी के शरीर की चमक भी सूर्य के समान ही है कोई और देवी देवता इनके तेज और प्रभाव की बराबरी नहीं कर सकतें। माता कुष्मांडा तेज की देवी है इन्ही के तेज और प्रभाव से दसों दिशाओं को प्रकाश मिलता है। कहते हैं की सारे ब्रह्माण्ड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में जो तेज है वो देवी कुष्मांडा की देन है। श्री कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं। इनकी आराधना से मनुष्य त्रिविध ताप से मुक्त होता है। माँ कुष्माण्डा सदैव अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि रखती है। इनकी पूजा आराधना से हृदय को शांति एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं। इस दिन भक्त का मन ‘अनाहत’ चक्र में स्थित होता है, अतः इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और शांत मन से कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा करनी चाहिए। संस्कृत भाषा में कूष्माण्ड कूम्हडे को कहा जाता है, कूम्हडे की बलि इन्हें प्रिय है, इस कारण भी इन्हें कूष्माण्डा के नाम से जाना जाता है। माँ कुष्मांडा पूजा विधि 〰🌼〰🌼〰🌼〰 जो साधक कुण्डलिनी जागृत करने की इच्छा से देवी अराधना में समर्पित हैं उन्हें दुर्गा पूजा के चौथे दिन माता कूष्माण्डा की सभी प्रकार से विधिवत पूजा अर्चना करनी चाहिए फिर मन को ‘अनाहत’ में स्थापित करने हेतु मां का आशीर्वाद लेना चाहिए और साधना में बैठना चाहिए। इस प्रकार जो साधक प्रयास करते हैं उन्हें भगवती कूष्माण्डा सफलता प्रदान करती हैं जिससे व्यक्ति सभी प्रकार के भय से मुक्त हो जाता है और मां का अनुग्रह प्राप्त करता है। अतः इस दिन पवित्र मन से माँ के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजन करना चाहिए। माँ कूष्माण्डा देवी की पूजा से भक्त के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं। माँ की भक्ति से आयु, यश, बल और स्वास्थ्य की वृध्दि होती है। इनकी आठ भुजायें हैं इसीलिए इन्हें अष्टभुजा कहा जाता है। इनके सात हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिध्दियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। कूष्माण्डा देवी अल्पसेवा और अल्पभक्ति से ही प्रसन्न हो जाती हैं। यदि साधक सच्चे मन से इनका शरणागत बन जाये तो उसे अत्यन्त सुगमता से परम पद की प्राप्ति हो जाती है। देवी कुष्मांडा का वाहन सिंह है। दुर्गा पूजा के चौथे दिन देवी कूष्माण्डा की पूजा का विधान उसी प्रकार है जिस प्रकार देवी ब्रह्मचारिणी और चन्द्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन भी आप सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित देवी देवता की पूजा करें फिर माता के परिवार में शामिल देवी देवता की पूजा करें जो देवी की प्रतिमा के दोनों तरफ विरजामन हैं. इनकी पूजा के पश्चात देवी कूष्माण्डा की पूजा करे: पूजा की विधि शुरू करने से पहले हाथों में फूल लेकर देवी को प्रणाम कर इस मंत्र का ध्यान करें सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे।। माँ कुष्मांडा शप्तशती मंत्र 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। माँ कूष्मांडा का उपासना मंत्र 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 कुत्सित: कूष्मा कूष्मा-त्रिविधतापयुत: संसार:, स अण्डे मांसपेश्यामुदररूपायां यस्या: सा कूष्मांडा माँ कुष्मांडा ध्यान मन्त्र 〰🌼〰🌼〰🌼〰 वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥ भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्। कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥ पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्। मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥ प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्। कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ माँ कुष्मांडा स्तोत्र पाठ 〰🌼〰🌼〰🌼〰 दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्। जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥ जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्। चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥ त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहिदुःख शोक निवारिणीम्। परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाभ्यहम्॥ माँ कुष्मांडा कवच 〰🌼〰🌼〰 हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्। हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम्॥ कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा,पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम। दिगिव्दिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजं सर्वदावतु॥ 4. कूष्मांडा : ब्रह्मांड को उत्पन्न करने की शक्ति प्राप्त करने के बाद उन्हें कूष्मांड कहा जाने लगा। उदर से अंड तक वह अपने भीतर ब्रह्मांड को समेटे हुए है, इसीलिए कूष्मां डा कहलाती है। माँ कुष्मांडा पौरिणीक कथा 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 दुर्गा सप्तशती के कवच में वर्णन है की कुत्सित: कूष्मा कूष्मा-त्रिविधतापयुत: संसार:, स अण्डे मांसपेश्यामुदररूपायां यस्या: सा कूष्मांडा। वह देवी जिनके उदर में त्रिविध तापयुक्त संसार स्थित है वह कूष्माण्डा हैं। देवी कूष्माण्डा इस चराचार जगत की अधिष्ठात्री हैं। जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी उस समय अंधकार का साम्राज्य था। देवी कुष्मांडा जिनका मुखमंड सैकड़ों सूर्य की प्रभा से प्रदिप्त है उस समय प्रकट हुई उनके मुख पर बिखरी मुस्कुराहट से सृष्टि की पलकें झपकनी शुरू हो गयी और जिस प्रकार फूल में अण्ड का जन्म होता है उसी प्रकार कुसुम अर्थात फूल के समान मां की हंसी से सृष्टि में ब्रह्मण्ड का जन्म हुआ। इस देवी का निवास सूर्यमण्डल के मध्य में है और यह सूर्य मंडल को अपने संकेत से नियंत्रित रखती हैं। देवी कूष्मांडा अष्टभुजा से युक्त हैं अत: इन्हें देवी अष्टभुजा के नाम से भी जाना जाता है। देवी अपने इन हाथों में क्रमश: कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत से भरा कलश, चक्र तथा गदा है। देवी के आठवें हाथ में बिजरंके (कमल फूल का बीज) का माला है है, यह माला भक्तों को सभी प्रकार की ऋद्धि सिद्धि देने वाला है। देवी अपने प्रिय वाहन सिंह पर सवार हैं। जो भक्त श्रद्धा पूर्वक इस देवी की उपासना दुर्गा पूजा के चौथे दिन करता है उसके सभी प्रकार के कष्ट रोग, शोक का अंत होता है और आयु एवं यश की प्राप्ति होती है। माँ कुष्मांडा उपासना का साथ धन अर्जित करने का मंत्र 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 मंत्र (१) 👉 ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालेय प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम : मंत्र (२)👉 दुर्गे स्मृता हरसिभीतिमशेष जन्तो : स्वस्थ्याई : स्मृता मति मतीव शुभाम ददासि लक्ष्मी प्राप्ति के आसन उपाय 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 उपाय (१)👉 पान में गुलाब की सात पंखुड़ियां रखें और पान को देवी जी को चढ़ा दें l आप को धन की प्राप्ति होगी उपाय (२)👉 गुलाब की फूल में कपूर का टुकड़ा रखें l शाम के समय फूल में एक कपूर जला दें और फूल देवी को चढ़ा दें l इससे आपको अचानक धन मिल सकता है उपाय (३)👉 चौदह मुखी रुद्राक्ष सोने में जड़वा कर किसी पत्र में लाल फूल बिछाकर उस पर रखें दूध, दही, घी ,मधु ,और गंगाजल से स्नान कराएँ l धूप दीप से पूजा करके धारण करें | उपाय (४)👉 इमली के पेड़ की डाल काट कर घर में रखें या धन रखने की स्थान पर रखें तो धन की वृद्धि होगी | उपाय (५)👉 एक नारियल और उसके साथ एक लाल फूल ,एक पीला ,एक नीला फूल और सफ़ेद फूल माँ को चढ़ाएं …नवमी के दिन ये फूल नदी में बहा दें |और नारियल को लाल कपडे में लपेट कर तिजोरी में रखें माँ प्राराब्ध काटेगी अखण्ड लक्ष्मी की प्राप्ति होगी। माँ कुष्मांडा जी की आरती 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 ॐ जय माँ कुष्मांडाचौथ जब नवरात्र हो, कुष्मांडा को ध्याते। जिसने रचा ब्रह्माण्ड यह, पूजन है करवाते।। ॐ जय माँ कुष्मांडा आद्यशक्ति कहते जिन्हें, अष्टभुजी है रूप। इस शक्ति के तेज से, कही छाँव कही धुप।। ॐ जय माँ कुष्मांडा कुम्हड़े की बलि करती है, तांत्रिक से स्वीकार। पेठे से भी रजति, सात्विक करे विचार।। ॐ जय माँ कुष्मांडा क्रोधित जब हो जाए, यह उल्टा करे व्यवहार। उसको रखती दूर माँ, देती दुःख अपार।। ॐ जय माँ कुष्मांडा सूर्य चंद्र की रौशनी, यह जग में फैलाये। शरणागत में आया, माँ तू ही राह दिखाये।। ॐ जय माँ कुष्मांडा। माँ दुर्गा की आरती 〰🌼〰🌼〰 जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय… मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय… कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै । रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय… केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी । सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय… कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय… शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय… चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे । मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय… ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी । आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय… चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू । बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय… तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय… भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी । >मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय… कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय… श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे । कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥

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Hirdesh Sharma Mar 27, 2020

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🌹🌹जय माता दी🌹🌹 🍂🏵🍂🏵🍂🏵🍂🏵🍂🏵 सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे। 💐🥀💐🥀💐🥀💐🥀💐 माँ कुष्मांडा जी का आशीर्वाद आप और आपके परिवार सदैव पर बना रहे 🌺🍁🌺🍁🌺🍁🌺🍁🌺 नन्हे नन्हे पाँव मेरे पूजा ऊचा पर्वत तेरा, देख कही मैं गिर न जाऊ हाथ पकड़ ले मेरा, माँ फिर ससे पवन का तू रूप बना के, मुझे अपने द्वारे तू ले चल उड़ा के 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 घर से तो निकला था आज अकेला, मिला मुझे राहो में दुनिया का मेला, भीड़ में सब के सब है तेरे दीवाने मुझको तेरी धुन है ये कोई न जाने, सब के मन में माता तेरे दर्शन की अभिलाषा है, तू सबकी जीवन आशा है जय तेरी माँ जय तेरी माँ, नन्हे नन्हे पाँव मेरे पूजा ऊचा पर्वत तेरा, 🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀 मेरी लगन की मैया है यही कहानी भूख लगी है मुझको न पिया पानी, धुप बनी है छाओ तेरे राहो में,थके न मेरे पाँव माँ तेरी राहो में, सब के मन में माता तेरे दर्शन की अभिलाषा है, तू सबकी जीवन आशा है जय तेरी माँ जय तेरी माँ, नन्हे नन्हे पाँव मेरे पूजा ऊचा पर्वत तेरा, 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 नाम तेरा ले ले के मैं बढता आया, रुके बिना पर्वत पे मैं चडता आया, आ पौंचा हु मैया मैं भवन में तेरे मिले दूर न होना नैनो से मेरे, सब के मन में माता तेरे दर्शन की अभिलाषा है, तू सबकी जीवन आशा है जय तेरी माँ जय तेरी माँ, नन्हे नन्हे पाँव मेरे पूजा ऊचा पर्वत तेरा, 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🌹🌹जय माता दी🌹🌹 📿🌷🌼🍁💮📿🌷🌼🍁💮📿🌷🌼🍁💮📿🌷🌼🍁💮📿🌷

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Radha Sharma Mar 27, 2020

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kaluram Godara Mar 27, 2020

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