🌷 *संसार जड़-चेतन गुण-दोषमय* 🌷 🌅च्वांगत्सु एक मरघट से निकलता था । सांझ का वक्त था अँधेरा हो रहा था और उसका एक खोपड़ी से पैर लग गया , तो वह वही बैठ गया । उसके शिष्य भी साथ में थे , वे भी चौककर खड़े हो गये कि वह क्या कर रहा है । उसने उस खोपड़ी को सिर से लगाया और बहुत क्षमा मांगी, कि क्षमा करिये, माफ करिये, नाराज मत होइये थोड़ी देर तो शिष्य बर्दाश्त करते रहे । फिर उन्होंने कहा : आप पागल हो गए है या क्या बात है ? इस खोपड़ी से क्षमा मांगते है ? च्वांगत्सु ने कहा ; जरा सोचो अगर ये आदमी जिन्दा होता तो आज अपनी मुसीबत हो गयी होती । और यह कोई छोटा - मोटा आदमी नही , मैं तुमसे कह दूं , क्योकि यह बड़े लोगो का मरघट है । यहा सिर्फ राजा - महाराजा इस मरघट में दफनाये जाते है , आज अपनी गर्दन कट गई होती । यह तो संयोग की बात कहो कि यह मर चुका है । मगर क्षमा मांग लेना उचित है , बड़े लोग इनका क्या भरोसा , कही नाराज हो जाए , भूत - प्रेत हो नाराज हो जाए , कुछ उपद्रव खड़ा करे ! और वह उस खोपड़ी को अपने घर ले आया और उसको सदा अपने पास रखने लगा । लोग जब भी आते तो चौककर पूछते कि यह खोपड़ी किस लिए ? तो वह कहता कि यह खोपड़ी इस बात की याद दिलाने के लिए है कि एक दिन अपनी भी खोपड़ी इसी तरह पड़ी होगी कही मरघट में , लोगो की लाते लगेगी, कोई क्षमा भी नही मांगेगा । जिस दिन से इस खोपड़ी को ले आया हूं , उस दिन से अब कोई मुझे मार भी जाता है , तो मैं इसकी तरफ देखता हूं और मुस्कुराता हूं और मैं भी कहता हूं : यह देखो , यह अभी से लोग मारने लगे । अभी तो हम मरे भी नही और लोग मारने लगे । मगर यह तो होना ही है , आज नही कल होगा । सत्तर साल की जिंदगी है और उसके बाद अनंत काल तक यह खोपड़ी कहां पड़ी रहेगी ! तुम से पहले बहुत लोग हुए है , कहां है अब ? तुमसे कम अकड़ वाले न थे वे । तुम्हारे जैसी ही अकड़ थी -- तुम्हारी अकड़ भी ऐसे ही खो जायेगी। यह संसार सूली है , यहा हर आदमी अपनी फांसी की प्रतीक्षा कर रहा है और जल्दी ही तुम्हारा नाम पूकारा जाएगा । यहां मृत्यु के अतिरिक्त और कुछ घटता ही नही । यहां रोज मौत घटती है । यहां मौत ही एक वास्तविक घटना है , बाकी सब घटनाओं का कोई मूल्य नही है , क्योकि मौत सारी घटनाओं को पोंछ जाती है । आखिर में मौत की ही लकीर बचती है बाकी सब मिट जाता है । 💖¸.•*""*•.¸ *जय श्री राधे ¸.•*""*•.¸ 💖 *श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव* 🌸💐👏🏼♥💚💖*

🌷 *संसार जड़-चेतन गुण-दोषमय* 🌷

🌅च्वांगत्सु एक मरघट से निकलता था । सांझ का वक्त था अँधेरा हो रहा था और उसका एक खोपड़ी से पैर लग गया , तो वह वही बैठ गया ।
उसके शिष्य भी साथ में थे , वे भी चौककर खड़े हो गये कि वह क्या कर रहा है ।
उसने उस खोपड़ी को सिर से लगाया और बहुत क्षमा मांगी, कि क्षमा करिये, माफ करिये, नाराज मत होइये थोड़ी देर तो शिष्य बर्दाश्त करते रहे ।
फिर उन्होंने कहा : आप पागल हो गए है या क्या बात है ? इस खोपड़ी से क्षमा मांगते है ?
च्वांगत्सु ने कहा ; जरा सोचो अगर ये आदमी जिन्दा होता तो आज अपनी मुसीबत हो गयी होती । और यह कोई छोटा - मोटा आदमी नही , मैं तुमसे कह दूं , क्योकि यह बड़े लोगो का मरघट है ।
यहा सिर्फ राजा - महाराजा इस मरघट में दफनाये जाते है , आज अपनी गर्दन कट गई होती । यह तो संयोग की बात कहो कि यह मर चुका है ।
मगर क्षमा मांग लेना उचित है , बड़े लोग इनका क्या भरोसा , कही नाराज हो जाए , भूत - प्रेत हो नाराज हो जाए , कुछ उपद्रव खड़ा करे !
और वह उस खोपड़ी को अपने घर ले आया और उसको सदा अपने पास रखने लगा ।
लोग जब भी आते तो चौककर पूछते कि यह खोपड़ी किस लिए ? तो वह कहता कि यह खोपड़ी इस बात की याद दिलाने के लिए है कि एक दिन अपनी भी खोपड़ी इसी तरह पड़ी होगी कही मरघट में , लोगो की लाते लगेगी, कोई क्षमा भी नही मांगेगा ।

जिस दिन से इस खोपड़ी को ले आया हूं , उस दिन से अब कोई मुझे मार भी जाता है , तो मैं इसकी तरफ देखता हूं और मुस्कुराता हूं और मैं भी कहता हूं : यह देखो , यह अभी से लोग मारने लगे ।
अभी तो हम मरे भी नही और लोग मारने लगे । मगर यह तो होना ही है , आज नही कल होगा । सत्तर साल की जिंदगी है और उसके बाद अनंत काल तक यह खोपड़ी कहां पड़ी रहेगी !
तुम से पहले बहुत लोग हुए है , कहां है अब ? तुमसे कम अकड़ वाले न थे वे । तुम्हारे जैसी  ही अकड़ थी -- तुम्हारी अकड़ भी ऐसे ही खो जायेगी।

यह संसार सूली है , यहा हर आदमी अपनी फांसी की प्रतीक्षा कर रहा है और जल्दी ही तुम्हारा नाम पूकारा जाएगा ।
यहां मृत्यु के अतिरिक्त और कुछ घटता ही नही । यहां रोज मौत घटती है । यहां मौत ही एक वास्तविक घटना है , बाकी सब घटनाओं का कोई मूल्य नही है , क्योकि मौत सारी घटनाओं को पोंछ जाती है ।
आखिर में मौत की ही लकीर बचती है बाकी सब मिट जाता है ।
💖¸.•*""*•.¸ *जय श्री राधे ¸.•*""*•.¸ 💖

*श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव* 
🌸💐👏🏼♥💚💖*

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कामेंट्स

Ansouya Jan 21, 2021
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌷 शुभ रात्रि प्यारी बहना जी 🌷🙏🌷🙏 हरि जी और माता लक्ष्मी जी कृपा बनाये रखे बहना जी 🙏 आप सदा स्वस्थ और खुश रहें जी 🙏 राधे राधे बहना जी 🙏🌹

yogesh jani Jan 21, 2021
शुभ रात्री जयश्री कृष्ण

शामराव ठोंबरे पाटील Jan 21, 2021
जय श्री गुरुदेव दत्त जय श्री स्वामी समर्थ जय श्री गजानन महाराज जय श्री साई नाथ महाराज 👑 नमस्कार शुभ रात्री वंदन जय माता की जय हो भोलेनाथ नमस्कार 🙏 दिदी आपको 👏 जय श्री लक्ष्मी नारायण 🙏

Charu Sharma Jan 21, 2021
jai Shree Krishna ji 🙏🌹 shubh Ratri vandan dear sister ji 🌹🙏🌹🙏🌹

🙋ANJALI 😊MISHRA🙏 Jan 21, 2021
🌹जय श्री राधे कृष्णा🌹राधे राधे मेरी बहना जी शुभ रात्रि वंदन💫💐🙏आपका आने वाला हर पल शुभ हो मंगलमय हो👌👌 ठाकुर जी आपको सदा सुखी रखें, आप और आपका परिवार हमेशा स्वस्थ रहें 🙌 बहुत-बहुत शुभकामनाएं आपको 💐🌹🌹जय माता दी 🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏 🌠🌠🌠🌠🌠🌠🌠

somesh Jan 21, 2021
good story and good picture radhe krishna, God bless you and your family, good night and sweet dreams. radhe radhe

Singh N Jan 21, 2021
अति सुन्दर

Mukesh kumar Kapoor Jan 21, 2021
Ati Sunder Post hai Aapki Seemaji👌🏖👌Dhai Akher Prem Ka Padhe so Pandit hoye🙏💓🙏Radhe Radhe 😊💓😊

BALRAM KARISHNA Jan 22, 2021
Jai Shri Radhe Radhe Karishna ji Good Morning ji very Nice Post ji

Kailash Chandra vyas Jan 22, 2021
हँआ, आया सो जायेगा, राजा. रँक फकीर।so do so do something good . jskni

Mahavir Jan 22, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जी

Ravi Kumar Taneja Jan 22, 2021
जय श्री राधे कृष्णा🦚🦢🙏🌹🙏🌹🙏🦢🦚

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RAJ RATHOD Feb 26, 2021

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vineeta tripathi Feb 26, 2021

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. ☀️...अपना काम स्वयं करिए...☀️ ____________________________________ एक बुद्धिमान लवा पक्षी का परिवार किसान के खेतों में रहता था। उनका घोंसला बहुत आरामदेह था। परिवार में सभी सदस्यों में अथाह प्रेम था एक सुबह अपने बच्चों के लिए भोजन की तलाश में जाने से पहले बच्चों की मां ने कहा- देखो बच्चों किसान बहुत जल्दी अपनी फसल काट कर आएगा। ऐसी स्थिति में हमें अपना नया घर खोजना पड़ेगा। तो तुम सब अपने कान और आंखें खुली रखना और जब मैं शाम को लौटकर आऊं तो मुझे बताना कि तुमने क्या देखा और क्या सुना? शाम को जब लवा अपने घर लौटी तो उसने अपने परिवार को परेशान हाल में पाया। उसके बच्चे कहने लगे- हमें जल्दी ही यह स्थान छोड़ देना चाहिए। किसान अपने पुत्रों के साथ अपने खेत की जांच करने आया था। वह अपने पुत्रों से कह रहा था। फसल तैयार है, हमें कल अपने सभी पड़ोसियों को बुलाकर फसल काट लेनी चाहिए। लवा ने अपने बच्चों की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं, फिर बोली- अरे कोई खतरा नही। कल भी होशियार रहना। किसान जो कुछ करे या कहे, वह मुझे शाम को बताना। दूसरे दिन शाम को जब लवा वापस लौटी तो उसने अपने बच्चों को बहुत भयभीत पाया। मां को देखते ही वे चिल्लाए- किसान दुबारा यहां आया था। कह रहा था, यह फसल जल्दी ही काटी जानी चाहिए। अगर हमारे पड़ोसी हमारी सहायता नहीं करते तो हम अपने रिश्तेदारों को बुलाएंगे। जाओ, अपने चाचा और चचेरे भाइयों आदि से कहो कि कल आकर फसल काटने में हमारी सहायता करें। लवा मुस्कराई बोली- प्यारे बच्चों चिन्ता मत करो। किसान के रिश्तेदारों के पास तो उनकी अपनी ही फसल काटने के लिए पड़ी है। वे भला यहां फसल काटने क्यों आएंगे। अगले दिन लवा फिर बाहर चली गई। जब वह शाम को लौटी तो बच्चे उसे देखते ही चिल्लाए- ओह मां यह किसान आज कह रहा था कि यदि उसके रिश्तेदार और पड़ोसी फसल काटने नहीं आते तो वह खुद अपनी फसल काटेगा। तो अब तो यहां रहने का कोई लाभ नहीं है। तब तो हमें शीघ्र ही यहां से चलना चाहिए। लवा बोली- यह मैं इसलिए कह रही हूं कि जब कोई किसी कार्य के लिए किसी अन्य पर निर्भर करता है तो वह कार्य कभी पूरा नहीं होता। परंतु वही व्यक्ति जब उस कार्य को स्वयं करने की ठान लेता है तो संसार की कोई भी शक्ति उसे उस कार्य को करने से नहीं रोक सकती। तो यही वह समय है,जब हमें अपना घर बदल लेना चाहिए। शिक्षा- यदि अपना काम स्वयं करने की आदत खुद में विकसित कर लें,तो हर क्षेत्र में सफलता की उम्मीद रहेगी.

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. ☀️'सकारात्मक रहे सकारात्मक जियें'☀️ ('किसान और बैल ) _____________________________________ एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया। वह बैल घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका था अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ। किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा और फिर ,अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया। सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया. अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था। जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एक सीढी ऊपर चढ़ आता जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह बैल कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया । ध्यान रखें...आपके जीवन में भी बहुत तरह से मिट्टी फेंकी जायेगी बहुत तरह की गंदगी आप पर गिरेगी जैसे कि,आपको आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही आपकी आलोचना करेगा.कोई आपकी सफलता से ईर्ष्या के कारण आपको बेकार में ही भला बुरा कहेगा कोई आपसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो आपके आदर्शों के विरुद्ध होंगे. ऐसे में आपको हतोत्साहित हो कर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हर तरह की गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख ले कर उसे सीढ़ी बनाकर बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है। सकारात्मक रहे सकारात्मक जियें..👌 इस संसार में सबसे बड़ी सम्पत्ति बुद्धि,सबसे अच्छा हथियार धैर्य,सबसे अच्छी सुरक्षा विश्वास सबसे बढ़िया दवा हँसी है,और आश्चर्य की बात कि ये सब निशुल्क हैं

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Sarita sharma Feb 26, 2021

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