Mahadev Waghmare
Mahadev Waghmare May 16, 2019

राधे राधे... 📽🎼🎼🎼आज मेरा सवाल आप से है* "क्या वोह युग बीत गया कि,जब जज्बातों की कद्र होती थी,लोग सृहदय हुआ करते थे,और जहां धरती से गगन मिलता है वहाँ तक साथ निबाहने की बात हुआ करती थी....???" आज *मजरूह सुल्तानपुरी* साहब का लिखा बेमिसाल नग्मा आपके लिये हाजिर करता हूँ..... जन्नतनशीं *प्रदीप कुमार और मीनाकुमारी* पर फिल्माया गया *मजरूह* साहब का ये बेजोड़ नग्मा सन् 1962 में रिलीज हुई फिल्म *आरती* का है,जिसे आवाज दी थी हरदिल अजीज *मोहम्मद रफी* साहब ने एवं स्वर कोकिला *लता मंगेशकर* जी ने। संगीतकार थे *रोशन* जी। भावातिरेक से परिपूर्ण यह गीत, जो दिल मे एहसास और हमदर्दी का जज्बा रखते हैं,उनके दिल को एकबारगी जरुर झकझोरेगा।🙏🏼🙏🏼 लीजिये सुनिये -

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Shanti Pathak May 25, 2019

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Shanti Pathak May 25, 2019

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Vandana Singh May 25, 2019

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shuchi singhal May 25, 2019

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Parikshit Rastogi May 25, 2019

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Mita Vadiwala May 25, 2019

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Hari Ajmer May 25, 2019

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Ashok Jangid May 25, 2019

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