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.... Apr 12, 2021

जय माता दी।🙏🙏🏻सभी भाई बहनों को शुभ रात्रि 🙏🙏🏻

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कामेंट्स

sanjay Sharma Apr 15, 2021
जय श्री राम जय श्री राधे कृष्णा जय श्री सीताराम जय श्री हरि विष्णु ओम् नमः भगवते वासुदेवाय नमः जय माता दी या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम शुभ दोपहरी जी मेरी बहन आप सदा खुश रहिए मां चंद्रघंटा का विशेष आशीर्वाद सदैव आपके साथ रहें

Harpal bhanot Apr 15, 2021
jai Shree radhe Krishna ji 🌷🌷🌷 Beautiful good Night ji my Sweet Sister

Ravi Kumar Taneja Apr 15, 2021
🕉या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।🙏 🙏🌷🙏जय मांअम्बे जय जय जगदम्बे 🙏🌷🙏 🚩🚩‘या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नसस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:‘🚩🚩 🌷🌷आप सभी को माँ दुर्गा जी का तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघंटा पूजन की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌷🌷 माँ चंद्रघंटा की कृपा से सभी के जीवन में उत्साह, उर्जा, सुख ,समृद्धि ,शांति , स्वlस्थ का आगमन हो माता जी का शुभ आशीष सदा बना रहे 🙏🐾🙏 🌹🌹जय माता दी 🌹🌹 माता चंद्रघंटाजी की कृपा से आपका जीवन मंगल मय हो देवी माँ की कृपा से आप स्वस्थ रहें सम्रद्ध रहें भक्ति भाव से भरे रहें!!!🕉🙏🐾🙏🐾🙏🕉

DR A.K.Choudhary 7888825900 Apr 16, 2021
Jai Mata rani ki happy GOOD MORNING ji my dear sister very nice post bhut sunder Dr Seema bhain Namaste 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

brijmohan kaseara Apr 16, 2021
जय माता दी 🙏🙏माँ की कृपा बनी रहे जी सादर नमस्कार दीदी जी 🙏🙏जय श्री महाकाल जी 🙏

kamlesh Goyal🌹🙏🙏🌹 Apr 16, 2021
Jay Mata Di bahan Radhe Radhe Jay Shri Krishna ji Thakur ji ki kripa Mata Rani Ka Aashirwad Sada aapko aur aapke Parivar per banaa Rahe aap Sada khush rahe Jay Shri Krishna Jay Shri Radhe Shubh dopahar Vandan Meri Pyari bahan Radhe Radhe

Amit Thakur Apr 16, 2021
Good Afternoon Didi Aap Hmesha Khushi Rho Ji Aap Ki Har Manokamna Puri Kare Mata Rani Ji God Bless You and your family

sanjay Sharma Apr 16, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जय श्री सीताराम जय माता दी या देवी सर्वभूतेषु शांति रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम शुभ दोपहरी जी मेरी बहन आप सदा खुश रहिए और जीवन में सदैव कामयाबी हासिल करते रहे मां कुष्मांडा आपके परिवार पर अपना आशीर्वाद सदैव बनाए रखना

🙋🅰NJALI😊ⓂISH®🅰🙏 Apr 16, 2021
🌺ॐ कूष्माण्डायै नम:।।'🌺 *जय माता दी*🌸 आदरणीय प्यारी दीदी जी शुभ रात्रि वंदन 🙏🌸☆या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।🙏👁मांँ👁👣 कुष्मांडा देवी एवम माता श्री महालक्ष्मी जी की अनंत कृपा आप और आपके संपूर्ण परिवार पर सदा बनी रहैं 🙌मांँ आपकी झोली धन-धान्य सुख समृद्धि से सदा परिपूर्ण रखे🌸🙏 जय माता दी 🌸🚩🌺🎋🌻🌷🌾🍁🍃!! हरि ओम नमो नारायण !!🌷🙏हर हर महादेव☘️🌿🍃🍊🍊🍎🍎🍇🍇

brijmohan kaseara Apr 16, 2021
जय माता दी ।।सुन्दर प्रस्तुति के लिए धन्यवाद आदरणीय डा दीदी जी सादर नमस्कार जी जय श्री महाकाल जी ।।खुब खुशियां व उन्नति करो ।हम प्रभू से यही कामना करता हूँ 🙏🙏शुभ रात्री 🙏🙏

.... Apr 17, 2021
@harpalbhanot24 गुड आफ्टरनून भैयाजी।जय हो स्कंदमाता की।जय हनुमानजी।जय श्री शनिदेवजी।🌹🙏🏻आप और आपके परिवार को नवरात्रि पर्व के पांचवे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं जी।माता रानी आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करे जी।🌹🙏🏻

.... Apr 17, 2021
@pradeepjaiswal गुड आफ्टरनून भैयाजी जय हो स्कंदमाता की।जय हनुमानजी।जय श्री शनिदेवजी।🌹🙏🏻आप और आपके परिवार को नवरात्रि पर्व के पांचवे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं जी।माता रानी आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करे जी।🌹🙏🏻

Vinay Mishra Apr 17, 2021
जय स्कंदमाता जय बजरंगबली जय सनी देव जी आप के सारे मनोरथ पूर्ण करे आप का हर पल शुभ व मंगलमय हो जय श्री राम शुभ दोपहर जी 🥀 ॐ 🙏

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Vinay Mishra May 8, 2021

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Amrit Chouhan May 8, 2021

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💖💓💗*हरिहर स्वरूप का क्या है रहस्य *💗💓💖 वेद में कहा गया है कि परमात्मा माया के द्वारा अनेक रूप वाला दिखाई देता है और सृष्टि-स्थिति और प्रलय की लीला के लिए ‘ब्रह्मा, विष्णु और शिव’~ इन तीन रूपों में प्रकाशित होता है। भगवान के ‘हरिहर अवतार’ में भगवान विष्णु और शिव का संयुक्त रूप देखने को मिलता है। ‘हरिहर’ शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है। भगवान हरि (विष्णु) और हर अर्थात् महादेव। *हरि~हर स्वरूप का रहस्य* एक बार ब्रह्माजी और विष्णुजी ने देवाधिदेव महादेव जी की स्तुति की जो ‘शार्वस्तव’ के नाम से जानी जाती है। देवाधिदेव महादेव ने प्रसन्न होकर ब्रह्माजी और विष्णुजी से वर मांगने को कहा। ब्रह्माजी ने वरदान मांगा कि आप मेरे पुत्र हों। महादेव ने कहा~ ‘मैं आपकी इच्छा तब पूर्ण करुंगा, जब आपको सृष्टि-रचना में सफलता नहीं मिलेगी और आपको क्रोध हो जाएगा; तब मैं उसी क्रोध से उत्पन्न होऊंगा। तब मैं प्राणरूप ग्यारहवां रुद्र कहलाऊंगा ।’ भगवान विष्णु ने अपने लिए वरदान में केवल भक्ति मांगी । इससे देवाधिदेव महादेवजी अत्यन्त प्रसन्न हुए। महादेवजी ने अपना आधा शरीर उन्हें माना। तभी से वे ‘हरिहर’ रूप में पूजे जाते हैं । *शंख पद्म पराहस्तौ, त्रिशूल डमरु स्तथा।* *विश्वेश्वरम् वासुदेवाय हरिहर: नमोऽस्तुते।।* *भगवान हरि~हर का स्वरूप~~~* भगवान हरिहर के दाहिने भाग में रुद्र के चिह्न हैं और वाम भाग में विष्णु के। वह दाहिने हाथ में शूल तथा ऋष्टि धारण करते हैं और बायें हाथ में गदा और चक्र। दाहिनी तरफ गौरी और वाम भाग में लक्ष्मी विराजती हैं। *भगवान हरि~हर की एकता~~~* पुराणों में यह कहा गया है कि महादेव और विष्णु एक-दूसरे की अन्तरात्मा हैं और निरन्तर एक-दूसरे की पूजा, स्तुति व उपासना में संलग्न रहते हैं~ *'शिवस्य हृदये विष्णु: विष्णोश्च हृदये शिव:।'* अर्थात्~ भगवान शंकर के हृदय में विष्णु का और भगवान विष्णु के हृदय में शंकर का बहुत अधिक स्नेह है। जैसे~ महादेव श्रीहरि के अनन्य भक्त परम वैष्णव हैं। अत: उनके लिए कहा जाता है~ *’वैष्णवानां यथा शम्भु:’* अर्थात्~ वैष्णवों में अग्रणी शंकरजी। देवाधिदेव महादेव ने श्रीहरि के चरणों से निकली गंगा को अपने जटाजूट में बांध लिया और ‘गंगाधर’ कहलाए। शिव श्वेत वर्ण के (कर्पूर गौर) और विष्णु श्याम वर्ण के (मेघवर्णं) हो गए। वैष्णवों का तिलक (ऊर्ध्वपुण्ड्र) त्रिशूल का रूप है और शैवों का तिलक (त्रिपुण्ड) धनुष का रूप है। अत: महादेव व विष्णु में भेद नहीं मानना चाहिए। हरि और हर~ दोनों की प्रकृति (वास्तविक तत्त्व) एक ही है। ‘शिव सहस्त्रनाम’ में भगवान शिव के ‘चतुर्बाहु’, ‘हरि’, ‘विष्णु’ आदि नाम मिलते हैं। ’विष्णु सहस्त्रनाम’ का पाठ करने पर भगवान विष्णु के ‘शर्व’, ‘शिव’ व ‘स्थाणु’ आदि नामों का उल्लेख है जो महादेव के नाम हैं। इसीलिए अग्निपुराण में स्वयं भगवान ने कहा है~ ‘हम दोनों में निश्चय ही कोई भेद नहीं है, भेद देखने वाले नरकगामी होते हैं।’ पुराणों में भगवान हरि और हर की एकता दर्शाने वाले अनेक उदाहरण है। यहां पाठकों को समझाने के लिए कुछ ही का वर्णन किया जा रहा है~ हिरण्यकशिपु दैत्य का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह रूप धारण किया और जब वे आवेश में अति उग्र हो गए तो उन्हें देवाधिदेव महादेव ने ही ‘शरभावतार’ लेकर शान्त किया। एक बार भक्त नरसीजी को महादेव जी ने दर्शन दिए और उनसे वरदान मांगने को कहा। तब नरसीजी ने कहा कि 'जो चीज आपको सबसे अधिक प्रिय लगती है, वही दीजिए।' देवाधिदेव महादेव ने कहा~ 'मेरे को श्रीकृष्ण सबसे अधिक प्रिय लगते हैं, अत: मैं तुम्हें उनके ही पास ले चलता हूँ।' ऐसा कहकर भगवान शंकर उनको गोलोक ले गए। शिव महिम्न~ स्तोत्र की रचना करने वाले गंधर्व पुष्पदंतजी के अनुसार~ भगवान विष्णु प्रतिदिन ‘शिव सहस्त्रनाम स्तोत्र’ का पाठ करते हुए सहस्त्र कमल-पुष्प से देवाधिदेव महादेव की पूजा करते थे। एक दिन महादेवजी ने परीक्षा करने के लिए एक कमल छिपा दिया। इस पर भगवान विष्णु ने अपना नेत्रकमल ही शंकरजी को अर्पित कर दिया। फिर क्या था ! भक्ति का उत्कृष्ट स्वरूप चक्र के रूप में परिणत हो गया जो भगवान विष्णु के हस्तकमल में रह कर जगत की रक्षा के लिए सदा सावधान है। रामचरितमानस के लंका काण्ड में तो विष्णुरूप भगवान श्रीराम ने शंकरजी से अपनी अभिन्नता बताते हुए स्पष्ट कह दिया है~~~ *सिव द्रोही मम दास कहावा।* *सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा।।* *संकर प्रिय मम द्रोही सिव द्रोही मम दास।* *ते नर करहिं कलप भरि घोर नरक महुँ बास।।* ब्रह्मवैवर्तपुराण में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं महादेवजी के प्रति अपने श्रद्धा-भाव को व्यक्त करते हुए कहते हैं~ ’देव ! मेरा आपसे बढ़कर कोई प्रिय नहीं है। आप मुझे अपनी आत्मा से भी अधिक प्यारे हैं।’ *भगवान हरि~हर के मिलन की कथा~~~* एक बार वैकुण्ठ में श्रीहरि ने स्वप्न में महादेवरजी को देखा तो निद्रा भंग होने पर वे लक्ष्मी सहित गरुड़ पर सवार होकर कैलाश की ओर चल दिए। इसी प्रकार कैलाश पर महादेवजी ने स्वप्न में श्रीहरि को देखा तो निद्रा भंग होने पर वे भी पार्वती सहित नन्दी पर सवार वैकुण्ठ की तरफ चल दिए। मार्ग में ही श्रीहरि और महादेवजी की भेंट हो गई। दोनों हर्षपूर्वक गले मिले। फिर श्रीहरि महादेवजी से वैकुण्ठ चलने का आग्रह करने लगे और महादेवजी श्रीविष्णुजी से कैलाश चलने का आग्रह करने लगे। बहुत देर तक दोनों एक-दूसरे से यह प्रेमानुरोध करते रहे। इतने में देवर्षि नारद वीणा बजाते, हरिगुण गाते वहां पधारे। तब पार्वतीजी ने नारदजी से इस समस्या का हल निकालने के लिए कहा। नारदजी ने हाथ जोड़कर कहा~ ‘मैं इसका क्या हल निकाल सकता हूँ। मुझे तो हरि और हर एक ही लगते हैं; जो वैकुण्ठ है वही कैलाश है।’ अंत में तय यह हुआ कि पार्वतीजी जो कह दें वही ठीक है। पार्वतीजी ने थोड़ी देर विचार करके कहा~ ‘हे नाथ ! हे नारायण ! आपके अलौकिक प्रेम को देखकर तो मुझे यही लगता है कि जो कैलास है, वही वैकुण्ठ है और जो वैकुण्ठ है वही कैलास है। इनमें केवल नाम में ही भेद है। आपकी भार्याएं भी एक हैं, दो नहीं। जो मैं हूँ वही श्रीलक्ष्मी हैं और जो श्रीलक्ष्मी हैं वहीं मैं हूँ। अब मेरी प्रार्थना है कि आप लोग दोनों ही अपने-अपने लोक को पधारिए। श्रीविष्णु यह समझें कि हम शिवरूप से वैकुण्ठ जा रहे हैं और महेश्वर यह मानें कि हम विष्णुरूप से कैलास गमन कर रहे हैं। पार्वतीजी के वचनों को सुनकर दोनों देव हर्षित होकर अपने-अपने धामों को लौट गए। *माधवोमाधवावीशौ सर्वसिद्धिविधायिनौ।* *वन्दे परस्परात्मानौ परस्परनुतिप्रियौ।।* अर्थात्~ हम सब सिद्धियों को देने वाले, एक-दूसरे की आत्मा रूप, एक दूसरे को नमन करने वाले, सर्वसमर्थ माधव (विष्णु) और उमाधव (शिव) को साष्टांग नमन करते हैं। 💗💖💞𓆩༢࿔ྀુजय माता दी𓊗༢࿔ྀુ𓆪💞💖💓 💖´ *•.¸♥¸.•**कुमार रौनक कश्यप**•.¸♥¸.•*´💖

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Harpal bhanot May 10, 2021

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Jai Mata Di May 10, 2021

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Jai Mata Di May 10, 2021

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