SHYAMLAL MOTWANI
SHYAMLAL MOTWANI Jan 21, 2021

SATNAM SAKHI SAKHI SHIVOM JAI SHRI KRISHNA JAI JAI HARE RAM CHAOW

SATNAM SAKHI SAKHI SHIVOM JAI SHRI KRISHNA JAI JAI HARE RAM CHAOW
SATNAM SAKHI SAKHI SHIVOM JAI SHRI KRISHNA JAI JAI HARE RAM CHAOW
SATNAM SAKHI SAKHI SHIVOM JAI SHRI KRISHNA JAI JAI HARE RAM CHAOW
SATNAM SAKHI SAKHI SHIVOM JAI SHRI KRISHNA JAI JAI HARE RAM CHAOW

+15 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 22 शेयर

कामेंट्स

Neetu Feb 26, 2021

+84 प्रतिक्रिया 24 कॉमेंट्स • 14 शेयर

नीयत में होगी खोट तो भगवान करेंगे चोटः 🔹🔹🔸🔹🔹🔸🔹🔹🔸🔹🔹🔸🔹🔹 कुछ धनी किसानों ने मिलकर खेती के लिए एक कुँआ बनवाया. सबकी अपनी-अपनी बारी बंधी थी. कुंआ एक निर्धन किसान के खेतों के पास था लेकिन उसे पानी नहीं मिलता था.धनी किसानों ने खेतों में बीज बोकर सिंचाई शुरू कर दी. निर्धन किसान बीज भी नहीं बो पा रहा था. उसने धनवानों की बड़ी आरजू मिन्नत की लेकिन एक न सुनी गई.निर्धन बरसात से पहले खेत में बीज भी न बो पाया तो भूखा मर जाएगा. यह सोचकर अमीर किसानों ने उस पर दया की और बीज बोने के लिए एक रात तीन घंटे की सिंचाई का मौका दे दिया.उसे एक रात के लिए ही मौका मिला था. वह रात बेकार न जाए यह सोचकर एक किसान ने मजबूत बैलों का एक जोड़ा भी दे दिया ताकिवह पर्याप्त पानी निकाल ले निर्धन तो जैसे इस मौके की तलाश में था. उसने सोचा इन लोगों ने उसे बहुत सताया है. आज तीन घंटे में ही इतना पानी निकाल लूंगा कि कुछ बचेगा ही नहीं.इसी नीयत से उसने बैलों को जोता पानी निकालने लगा. गाधी पर बैठा और बैलों को चलाकर पानी निकालने लगा. पानी निकालने का नियम है कि बीच-बीच में हौज और नाली की जांच कर लेनी चाहिए कि पानी खेतों तक जा रहा है या नहीं.लेकिन उसके मन में तो खोट था. उसने सोचा हौज और नाली सब दुरुस्त ही होंगी. बैलों को छोड़कर गया तो वे खड़े हो जाएंगे. उसे तो कुँआ खाली करना था. ताबडतोड़ बैलों परडंडे बरसाता रहा.डंडे के चोट से बैल भागते रहे और पानी निकलता रहा. तीन घंटे बाद दूसरा किसान पहुंच गया जिसकी पानी निकालने की बारी थी. उसने बैल खोल लिए और अपने खेत देखने चला.वहां पहुंचकर वह छाती पीटकर रोने लगा. खेतों में तो एक बूंद पानी नहीं पहुंचा था. उसने हौज और नाली की तो चिंता ही नहींकी थी. सारा पानी उसके खेत में जाने की बजाय कुँए के पास एक गड़ढ़े में जमा होता रहा. अंधेरे में वह किसान खुद उस गडढ़े में गिर गया. पीछे-पीछे आते बैल भी उसके ऊपर गिर पड़े. वह चिल्लाया तो दूसरा किसान भागकर आया और उसे किसी तरह निकाला.दूसरे किसान ने कहा- परोपकार के बदले नीयत खराब रखने की यही सजा होती है. तुम कुँआ खाली करना चाहते थे. यह पानी तो रिसकर वापस कुँए में चला जाएगा लेकिन तुम्हें अब कोई फिर कभी न अपने बैल देगा, न ही कुँआ.तृष्णा यही है. मानव देह बड़ी मुश्किल सेमिलता है. इंद्रियां रूपी बैल मिले हैं हमें अपना जीवन सत्कर्मों से सींचने के लिए लेकिन तृष्णा में फंसा मन सारी बेईमानी पर उतर आता है. परोपकार को भी नहीं समझता ईश्वर से क्या छुपा. वह कर्मों का फल देते हैं लेकिन फल देने से पहले परीक्षा की भी परंपरा है. उपकार के बदले अपकार नहीं बल्कि ऋणी होना चाहिए तभी प्रभु आपको इतना क्षमतावान बनाएंगे कि आप किसीपर उपकार का सुख ले सकें.जो कहते हैं कि लाख जतन से भी प्रभु कृपालु नहीं हो रहे, उन्हें विचारना चाहिए कि कहीं उनके कर्मों में कोई ऐसा दोष तो नहीं जिसकी वह किसान की तरह अनदेखी कर रहे हैं और भक्ति स्वीकर नहीं हो रही। 🔹🔹🔸🔹🔹🔸🔹🔹🔸🔹🔹🔸🔹🔹

+2 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 19 शेयर
mona Feb 26, 2021

+63 प्रतिक्रिया 12 कॉमेंट्स • 117 शेयर

+80 प्रतिक्रिया 11 कॉमेंट्स • 22 शेयर

+33 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 23 शेयर

+53 प्रतिक्रिया 9 कॉमेंट्स • 11 शेयर
🥀🥀 Feb 25, 2021

भोजन के प्रकार भीष्म पितामह ने अर्जुन को 4 प्रकार से भोजन न करने के लिए बताया था ... पहला भोजन .... जिस भोजन की थाली को कोई लांघ कर गया हो वह भोजन की थाली नाले में पड़े कीचड़ के समान होती है ...! दूसरा भोजन .... जिस भोजन की थाली में ठोकर लग गई,पाव लग गया वह भोजन की थाली भिष्टा के समान होता है ....! तीसरे प्रकार का भोजन .... जिस भोजन की थाली में बाल पड़ा हो, केश पड़ा हो वह दरिद्रता के समान होता है .... चौथे नंबर का भोजन .... अगर पति और पत्नी एक ही थाली में भोजन कर रहे हो तो वह मदिरा के तुल्य होता है ..... और सुनो अर्जुन अगर पत्नी,पति के भोजन करने के बाद थाली में भोजन करती है उसी थाली में भोजन करती है या पति का बचा हुआ खाती है तो उसे चारों धाम के पुण्य का फल प्राप्त होता है .. अगर दो भाई एक थाली में भोजन कर रहे हो तो वह अमृतपान कहलाता है चारों धाम के प्रसाद के तुल्य वह भोजन हो जाता है .... और सुनो अर्जुन ..... बेटी अगर कुमारी हो और अपने पिता के साथ भोजन करती है एक ही थाली में तो उस पिता की कभी अकाल मृत्यु नहीं होती .... क्योंकि बेटी पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती है ! इसीलिए बेटी जब तक कुमारी रहे तो अपने पिता के साथ बैठकर भोजन करें ! क्योंकि वह अपने पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती हैं ...! संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है ... "सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोए ... पर संस्कार नहीं दिए तो वे जीवन भर रोएंगे ..🙏🙏

+27 प्रतिक्रिया 8 कॉमेंट्स • 67 शेयर

+23 प्रतिक्रिया 7 कॉमेंट्स • 5 शेयर
Ramesh Soni.33 Feb 25, 2021

+185 प्रतिक्रिया 77 कॉमेंट्स • 18 शेयर

+3 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 2 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB