क्या हैं उषा पान, क्यों हैं आयुर्वेद में अमृत समान?

क्या हैं उषा पान, क्यों हैं आयुर्वेद में अमृत समान।

शरीर के लिए विषतुल्य हानिप्रद गंदगी को शरीर से बाहर निकाल फेंकने के लिए उषा पान जैसा अमोघ अस्त्र भारतीय परम्परा की ही देन हैं, जो भारतीय महाऋषियों के शरीर विषयक सूक्षम एवं विषद अध्ययन की खूबसूरत अभिव्यक्ति हैं। आइये जाने इसके लाभ।

“काकचण्डीश्वर कल्पतन्त्र” नामक आयुर्वेदीय ग्रन्थ में रात के पहले प्रहर में पानी पीना विषतुल्य बताया गया हैं। मध्य रात्रि में पिया गया पानी “दूध” के सामान लाभप्रद बताया गया हैं। प्रात : काल (सूर्योदय से पहले) पिया गया जल माँ के दूध के समान लाभप्रद कहा गया हैं।

बर्तन का महत्व

उल्लेखनीय हैं के लोहे के बर्तन में रखा हुआ दूध और ताम्बे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीने वाले को कभी यकृत (लिवर) और रक्त (ब्लड) सम्बन्धी रोग नहीं होते। और उसका रक्त हमेशा शुद्ध बना रहता हैं।

उषा पान के लिए पिया जाने वाला जल ताम्बे के बर्तन में रात भर रखा जाए, तो उस से और भी स्वस्थ्य लाभ प्राप्त हो सकेंगे। जल से भरा ताम्बे का बर्तन सीधे भूमि के संपर्क में नहीं रखना चाहिए, अपितु इसको लकड़ी के टुकड़े पर रखना चाहिए। और पानी हमेशा नीचे उकडू (घुटनो के बल – उत्कर आसान) बैठ कर पीना चाहिए।

ऐसे लोग जिन्हे यूरिक एसिड बढे होने की शिकायत हैं, उनके लिए तो सुबह उषा पान करना किसी रामबाण औषिधि से कम नहीं।

क्या हैं उषा पान

प्रात : काल रात्रि के अंतिम प्रहार में पिया जाने वाल जल दूध इत्यादि को आयुर्वेद एवं भारतीय धर्म शास्त्रो में उषा पान शब्द से संबोधित किया गया हैं। सुप्रसिद्ध आयुर्वेदीय ग्रन्थ ‘योग रत्नाकर’ सूर्य उदय होने के निकट समय में जो मनुष्य आठ प्रसर (प्रसृत) मात्रा में जल पीता हैं, वह रोग और बुढ़ापे से मुक्त होकर सौ वर्ष से भी अधिक जीवित रहता हैं।

उषा पान कब करना चाहिए

प्रात : काल बिस्तर से उठ कर बिना मुख प्रक्षालन (कुल्ला इत्यादि) किये हुए ही पानी पीना चाहिए। कुल्ला करने के बाद पिए जाने वाले पानी से सम्पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता। ध्यान रहे पानी मल मूत्र त्याग के भी पहले पीना हैं।

उषा पान के फायदे।

सवेरे ताम्बे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीने से अर्श (बवासीर), शोथ(सोजिश), ग्रहणी, ज्वर, उदर(पेट के) रोग, जरा(बुढ़ापा), कोष्ठगत रोग, मेद रोग (मोटापा), मूत्राघात, रक्त पित (शरीर के किसी भी मार्ग में होने वाला रक्त स्त्राव), त्वचा के रोग, कान नाक गले सिर एवं नेत्र रोग, कमर दर्द तथा अन्यान्य वायु, पित्त, रक्त और कफ, मासिक धर्म, कैंसर, आंखों की बीमारी, डायरियां, पेशाब संबन्‍धित बीमारी, किड़नी, टीबी, गठिया, सिरदर्द आदि से सम्बंधित अनेक व्याधियां धीरे धीरे समाप्त हो जाती हैं।

जल की नैसर्गिक शक्ति।

जल में एक नैसर्गिक विद्दुत होती हैं, जो रोगो का विनाश करने में समर्थ होती हैं। इसलिए जल के विविध प्रयोगो से शरीर के सूक्षम अति सूक्षम, ज्ञान तंतुओ के चक्र पर अनूठा प्रभाव पड़ता हैं, जिस से शरीर के मूल भाग मस्तिष्क की शक्ति एवं क्रियाशीलता में चमत्कारिक बढ़ोतरी होती हैं।

एक कहावत हैं।

प्रात : काल खाट से उठकर, पिए तुरतहि पानी।
उस घर वैद्द कबहुँ नहीं आये, बात घाघ ने जानी।।

उषा पान किन्हे नहीं करना चाहिए।

विविध कफ – वातज व्याधियों, हिचकी, आमाशय व्रण(अल्सर), अफारा(आध्मान), न्यूमोनिया इत्यादि से पीड़ित लोगो को उषा पान नहीं करना चाहिए।

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Shyam Yadav May 12, 2021

*आपका रसोईघर या सिरदर्द.?* *आमतौर पर रसोईघर में छोटी छोटी समस्याएं आती रहती हैं जो ग्रहणियों के लिए सर दर्द बन जाती हैं।* *दिये गये टिप्स आपका काम आसान कर देंगे जिससे आपका काम सुविधाजनक हो जायेगा।* (1). यदि पहले कि पकी हुई सब्जियां या गुंधा आटा फ्रिज में रखा हुआ हो, तो उतना ही निकालें जितना जरूरत है, क्यूंकि बार बार बाहर निकलने और फिर फ्रिज में वापिस रखने से खाद् सामग्री जल्दी खराब हो जाती है। (2). नमकदानी में नमक अक्सर जम जाता है। सील से बचाने के लिए उसमे तीन-चार चावल के दाने डाल दें। (3). फ्रिज में सभी खाद् सामग्रियों को ढककर रखें। (4). फ्रीजर में से बर्फ की ट्रे झटके के साथ अथवा किसी पैनी वस्तु से न निकालें। ट्रे के नीचे ग्लिसरीन मल दें तो आसानी से निकल जायेगी। (5). दूध को एक उबाल दे कर ही प्रयोग करें ज्यादा उबाले देने से उसके पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं। (6). दूध से आटा गूंध कर परांठे बनाएँ, अधिक खस्ता और स्वादिष्ट बनेगे। (7). रोटी बनाने से दस मिनट पहले आटा बाहर निकल लें इस से आटा खींचेगा नही और रोटियां आराम से बनेगी। (8). प्याज काटने से पहले चाक़ू की नोक पे एक कच्चा आलू छिल कर लगा लें। आँखों में आंसू नही आयेंगे। (9). मीठे बिस्कूट का कुरकुरापन बरकरार रखने के लिए कंटेनर में एक चमच चीनी डाल दें, और उसके ऊपर बिस्कुट रखें। लंबे समय तक बिस्कुट कुरकुरे रहेंगे, यहाँ तक कि बरसातों में भी खराब नही होंगे। (10). रसोई में अगर चाकू पर जंग लग जाये तो उसे प्याज में घोंप के रखें। 10-15 मिनट बाद निकाल लें। फिर धोए। चाकू साफ़ हो जायेगा। (11). फ्रिजर में पोलिथिन बिछा कर बर्फ की ट्रे रखें। ट्रे निकलने में परेशानी नही होगी। (12). यदि आपके हाथ में किसी भी मसाले के दाग लगे हों तो कच्चा आलू काटकर रगड़िये, धब्बे दूर हो जायेंगे। (13). यदि आलू में रखे रखे झुर्रियाँ पड़ गयी हों तो उन्हें नमक डालकर उबालें। आलू का बासीपन चला जायेगा। (14). चावल जब पकने पे आ जाये तो उसमे कुछ बूंदे निम्बू का रस निचोड़ दें। चावल महकदार व खिला खिला बनेगा। (15). सेंडविच काटने के लिए जिस चाकू का इस्तेमाल करें, उसे हल्का सा गर्म कर लें, इससे सेंडविच काटने में आसानी होगी। (16). बेलन को फ्रिज में ठंडा करके रोटी बेलने से आटा नहीं चिपकता। (17). बादाम काजू के डिब्बों में 2-3 लौंग डालकर रखें, कीड़ा नही लगेगा। *निवेदन* इस पोस्ट को शेयर करे और आगे बढ़ाए ताकि सम्पूर्ण भारत में गृहणी जागरूकता हो सके।

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*तिल का तेल ... पृथ्वी का अमृत* 🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹 यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा और यही सर्वोत्तम पदार्थ बाजार में उपलब्ध नहीं है. और ना ही आने वाली पीढ़ियों को इसके गुण पता हैं. 🔹 क्योंकि नई पीढ़ी तो टी वी के इश्तिहार देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है. और तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं लेना बंद कर देंगे. 🔹तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है. प्रयोग करके देखें.... 🔹आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा... 🔹लेकिन... अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. यह होती है तेल की ताकत, इस तेल की मालिश करने से हड्डियों को पार करता हुआ, हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है. 🔹 तिल के तेल के अन्दर फास्फोरस होता है जो कि हड्डियों की मजबूती का अहम भूमिका अदा करता है. 🔹तिल का तेल ऐसी वस्तु है जो अगर कोई भी भारतीय चाहे तो थोड़ी सी मेहनत के बाद आसानी से प्राप्त कर सकता है. तब उसे किसी भी कंपनी का तेल खरीदने की आवश्यकता ही नही होगी. 🔷तैल शब्द की व्युत्पत्ति तिल शब्द से ही हुई है। जो तिल से निकलता वह है तैल। अर्थात तेल का असली अर्थ ही है "तिल का तेल". 🔹तिल के तेल का सबसे बड़ा गुण यह है की यह शरीर के लिए आयुषधि का काम करता है.. चाहे आपको कोई भी रोग हो यह उससे लड़ने की क्षमता शरीर में विकसित करना आरंभ कर देता है. यह गुण इस पृथ्वी के अन्य किसी खाद्य पदार्थ में नहीं पाया जाता. 🔹सौ ग्राम सफेद तिल 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्राप्त होता हैं। बादाम की अपेक्षा तिल में छः गुना से भी अधिक कैल्शियम है। काले और लाल तिल में लौह तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तअल्पता के इलाज़ में कारगर साबित होती है। 🔷तिल में उपस्थित लेसिथिन नामक रसायन कोलेस्ट्रोल के बहाव को रक्त नलिकाओं में बनाए रखने में मददगार होता है। तिल के तेल में प्राकृतिक रूप में उपस्थित सिस्मोल एक ऐसा एंटी-ऑक्सीडेंट है जो इसे ऊँचे तापमान पर भी बहुत जल्दी खराब नहीं होने देता। आयुर्वेद चरक संहित में इसे पकाने के लिए सबसे अच्छा तेल माना गया है। 🔷तिल में विटामिन सी छोड़कर वे सभी आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। तिल विटामिन बी और आवश्यक फैटी एसिड्स से भरपूर है। इसमें मीथोनाइन और ट्रायप्टोफन नामक दो बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होते हैं जो चना, मूँगफली, राजमा, चौला और सोयाबीन जैसे अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहीं होते। 🔹ट्रायोप्टोफन को शांति प्रदान करने वाला तत्व भी कहा जाता है जो गहरी नींद लाने में सक्षम है। यही त्वचा और बालों को भी स्वस्थ रखता है। मीथोनाइन लीवर को दुरुस्त रखता है और कॉलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखता है। 🔷तिल स्वास्थ्यवर्द्धक वसा का बड़ा स्त्रोत है जो चयापचय को बढ़ाता है। यह कब्ज भी नहीं होने देता। तिल में उपस्थित पौष्टिक तत्व,जैसे-कैल्शियम और आयरन त्वचा को कांतिमय बनाए रखते हैं। 🔷तिल में न्यूनतम सैचुरेटेड फैट होते हैं इसलिए इससे बने खाद्य पदार्थ उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है। सीधा अर्थ यह है की यदि आप नियमित रूप से स्वयं द्वारा निकलवाए हुए शुद्ध तिल के तेल का सेवन करते हैं तो आप के बीमार होने की संभावना ही ना के बराबर रह जाएगी. 🔹 जब शरीर बीमार ही नही होगा तो उपचार की भी आवश्यकता नही होगी. यही तो आयुर्वेद है.. आयुर्वेद का मूल सीधांत यही है की उचित आहार विहार से ही शरीर को स्वस्थ रखिए ताकि शरीर को आयुषधि की आवश्यकता ही ना पड़े. 🔹एक बात का ध्यान अवश्य रखिएगा की बाजार में कुछ लोग तिल के तेल के नाम पर अन्य कोई तेल बेच रहे हैं.. जिसकी पहचान करना मुश्किल होगा. ऐसे में अपने सामने निकाले हुए तेल का ही भरोसा करें. यह काम थोड़ा सा मुश्किल ज़रूर है किंतु पहली बार की मेहनत के प्रयास स्वरूप यह शुद्ध तेल आपकी पहुँच में हो जाएगा. जब चाहें जाएँ और तेल निकलवा कर ले आएँ. 🔷तिल में मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड (mono-unsaturated fatty acid) होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग, दिल का दौरा और धमनीकलाकाठिन्य (atherosclerosis) के संभावना को कम करता है। कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है- तिल में सेसमीन (sesamin) नाम का एन्टीऑक्सिडेंट (antioxidant) होता है जो कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ है और उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है। 🔹 यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है। तनाव को कम करता है- 🔹इसमें नियासिन (niacin) नाम का विटामिन होता है जो तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है। हृदय के मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है- 🔹तिल में ज़रूरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, जिन्क, और सेलेनियम होता है जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है। 🔹शिशु के हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है- तिल में डायटरी प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकसित होने में और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है। 🔹उदाहरणस्वरूप 100ग्राम तिल में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है। गर्भवती महिला और भ्रूण (foetus) को स्वस्थ रखने में मदद करता है- 🔹तिल में फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिला और भ्रूण के विकास और स्वस्थ रखने में मदद करता है। 🔹शिशुओं के लिए तेल मालिश के रूप में काम करता है- 🔹अध्ययन के अनुसार तिल के तेल से शिशुओं को मालिश करने पर उनकी मांसपेशियाँ सख्त होती है साथ ही उनका अच्छा विकास होता है। 🔹 आयुर्वेद के अनुसार इस तेल से मालिश करने पर शिशु आराम से सोते हैं। अस्थि-सुषिरता (osteoporosis) से लड़ने में मदद करता है- 🔹तिल में जिन्क और कैल्सियम होता है जो अस्थि-सुषिरता से संभावना को कम करने में मदद करता है। 🔹मधुमेह के दवाईयों को प्रभावकारी बनाता है- 🔹डिपार्टमेंट ऑफ बायोथेक्सनॉलॉजी विनायक मिशन यूनवर्सिटी, तमिलनाडु (Department of Biothechnology at the Vinayaka Missions University, Tamil Nadu) के अध्ययन के अनुसार यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इसका एन्टी ग्लिसेमिक प्रभाव रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को 36% कम करने में मदद करता है जब यह मधुमेह विरोधी दवा ग्लिबेक्लेमाइड (glibenclamide) से मिलकर काम करता है। इसलिए टाइप-2 मधुमेह (type 2 diabetic) रोगी के लिए यह मददगार साबित होता है। 🔹दूध के तुलना में तिल में तीन गुना कैल्शियम रहता है। इसमें कैल्शियम, विटामिन बी और ई, आयरन और ज़िंक, प्रोटीन की भरपूर मात्रा रहती है और कोलेस्टरोल बिल्कुल नहीं रहता है। 🔹तिल का तेल ऐसा तेल है, जो सालों तक खराब नहीं होता है, यहाँ तक कि गर्मी के दिनों में भी वैसा की वैसा ही रहता है. तिल का तेल कोई साधारण तेल नहीं है। इसकी मालिश से शरीर काफी आराम मिलता है। यहां तक कि लकवा जैसे रोगों तक को ठीक करने की क्षमता रखता है। 🔹इससे अगर महिलाएं अपने स्तन के नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें, तो स्तन पुष्ट होते हैं। सर्दी के मौसम में इस तेल से शरीर की मालिश करें, तो ठंड का एहसास नहीं होता। 🔹 इससे चेहरे की मालिश भी कर सकते हैं। चेहरे की सुंदरता एवं कोमलता बनाये रखेगा। यह सूखी त्वचा के लिए उपयोगी है। 🔹तिल का तेल- तिल विटामिन ए व ई से भरपूर होता है। इस कारण इसका तेल भी इतना ही महत्व रखता है। इसे हल्का गरम कर त्वचा पर मालिश करने से निखार आता है। अगर बालों में लगाते हैं, तो बालों में निखार आता है, लंबे होते हैं। 🔹जोड़ों का दर्द हो, तो तिल के तेल में थोड़ी सी सोंठ पावडर, एक चुटकी हींग पावडर डाल कर गर्म कर मालिश करें। तिल का तेल खाने में भी उतना ही पौष्टिक है विशेषकर पुरुषों के लिए।इससे मर्दानगी की ताकत मिलती है! 🔹हमारे धर्म में भी तिल के बिना कोई कार्य सिद्ध नहीं होता है, जन्म, मरण, परण, यज्ञ, जप, तप, पित्र, पूजन आदि में तिल और तिल का तेल के बिना संभव नहीं है अतः इस पृथ्वी के अमृत को अपनावे और जीवन निरोग बनावे । स्वस्थ भारत समृद्ध भारत निर्माण हेतु ये मेरा पहला कदम है मेरा धेय सम्पूर्ण भारत में शुद्ध तेलों को हर घर में पहुचाना है जिस से हर भारतीय स्वस्थ और निरोगी रहे *पूर्व आर्मी कमांडो श्री लिलाधर लमोरिया* जयहिन्द वंदेमातरम जय श्री राम जय बजरंग बली*तिल का तेल ... पृथ्वी का अमृत* यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा और यही सर्वोत्तम पदार्थ बाजार में उपलब्ध नहीं है. और ना ही आने वाली पीढ़ियों को इसके गुण पता हैं. 🔹 क्योंकि नई पीढ़ी तो टी वी के इश्तिहार देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है. और तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं लेना बंद कर देंगे. 🔹तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है. प्रयोग करके देखें.... 🔹आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा... 🔹लेकिन... अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. यह होती है तेल की ताकत, इस तेल की मालिश करने से हड्डियों को पार करता हुआ, हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है. 🔹 तिल के तेल के अन्दर फास्फोरस होता है जो कि हड्डियों की मजबूती का अहम भूमिका अदा करता है. 🔹तिल का तेल ऐसी वस्तु है जो अगर कोई भी भारतीय चाहे तो थोड़ी सी मेहनत के बाद आसानी से प्राप्त कर सकता है. तब उसे किसी भी कंपनी का तेल खरीदने की आवश्यकता ही नही होगी. 🔷तैल शब्द की व्युत्पत्ति तिल शब्द से ही हुई है। जो तिल से निकलता वह है तैल। अर्थात तेल का असली अर्थ ही है "तिल का तेल". 🔹तिल के तेल का सबसे बड़ा गुण यह है की यह शरीर के लिए आयुषधि का काम करता है.. चाहे आपको कोई भी रोग हो यह उससे लड़ने की क्षमता शरीर में विकसित करना आरंभ कर देता है. यह गुण इस पृथ्वी के अन्य किसी खाद्य पदार्थ में नहीं पाया जाता. 🔹सौ ग्राम सफेद तिल 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्राप्त होता हैं। बादाम की अपेक्षा तिल में छः गुना से भी अधिक कैल्शियम है। काले और लाल तिल में लौह तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तअल्पता के इलाज़ में कारगर साबित होती है। 🔷तिल में उपस्थित लेसिथिन नामक रसायन कोलेस्ट्रोल के बहाव को रक्त नलिकाओं में बनाए रखने में मददगार होता है। तिल के तेल में प्राकृतिक रूप में उपस्थित सिस्मोल एक ऐसा एंटी-ऑक्सीडेंट है जो इसे ऊँचे तापमान पर भी बहुत जल्दी खराब नहीं होने देता। आयुर्वेद चरक संहित में इसे पकाने के लिए सबसे अच्छा तेल माना गया है। 🔷तिल में विटामिन सी छोड़कर वे सभी आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। तिल विटामिन बी और आवश्यक फैटी एसिड्स से भरपूर है। इसमें मीथोनाइन और ट्रायप्टोफन नामक दो बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होते हैं जो चना, मूँगफली, राजमा, चौला और सोयाबीन जैसे अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहीं होते। 🔹ट्रायोप्टोफन को शांति प्रदान करने वाला तत्व भी कहा जाता है जो गहरी नींद लाने में सक्षम है। यही त्वचा और बालों को भी स्वस्थ रखता है। मीथोनाइन लीवर को दुरुस्त रखता है और कॉलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखता है। 🔷तिल स्वास्थ्यवर्द्धक वसा का बड़ा स्त्रोत है जो चयापचय को बढ़ाता है। यह कब्ज भी नहीं होने देता। तिल में उपस्थित पौष्टिक तत्व,जैसे-कैल्शियम और आयरन त्वचा को कांतिमय बनाए रखते हैं। 🔷तिल में न्यूनतम सैचुरेटेड फैट होते हैं इसलिए इससे बने खाद्य पदार्थ उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है। सीधा अर्थ यह है की यदि आप नियमित रूप से स्वयं द्वारा निकलवाए हुए शुद्ध तिल के तेल का सेवन करते हैं तो आप के बीमार होने की संभावना ही ना के बराबर रह जाएगी. 🔹 जब शरीर बीमार ही नही होगा तो उपचार की भी आवश्यकता नही होगी. यही तो आयुर्वेद है.. आयुर्वेद का मूल सीधांत यही है की उचित आहार विहार से ही शरीर को स्वस्थ रखिए ताकि शरीर को आयुषधि की आवश्यकता ही ना पड़े. 🔹एक बात का ध्यान अवश्य रखिएगा की बाजार में कुछ लोग तिल के तेल के नाम पर अन्य कोई तेल बेच रहे हैं.. जिसकी पहचान करना मुश्किल होगा. ऐसे में अपने सामने निकाले हुए तेल का ही भरोसा करें. यह काम थोड़ा सा मुश्किल ज़रूर है किंतु पहली बार की मेहनत के प्रयास स्वरूप यह शुद्ध तेल आपकी पहुँच में हो जाएगा. जब चाहें जाएँ और तेल निकलवा कर ले आएँ. 🔷तिल में मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड (mono-unsaturated fatty acid) होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग, दिल का दौरा और धमनीकलाकाठिन्य (atherosclerosis) के संभावना को कम करता है। कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है- तिल में सेसमीन (sesamin) नाम का एन्टीऑक्सिडेंट (antioxidant) होता है जो कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ है और उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है। 🔹 यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है। तनाव को कम करता है- 🔹इसमें नियासिन (niacin) नाम का विटामिन होता है जो तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है। हृदय के मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है- 🔹तिल में ज़रूरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, जिन्क, और सेलेनियम होता है जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है। 🔹शिशु के हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है- तिल में डायटरी प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकसित होने में और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है। 🔹उदाहरणस्वरूप 100ग्राम तिल में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है। गर्भवती महिला और भ्रूण (foetus) को स्वस्थ रखने में मदद करता है- 🔹तिल में फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिला और भ्रूण के विकास और स्वस्थ रखने में मदद करता है। 🔹शिशुओं के लिए तेल मालिश के रूप में काम करता है- 🔹अध्ययन के अनुसार तिल के तेल से शिशुओं को मालिश करने पर उनकी मांसपेशियाँ सख्त होती है साथ ही उनका अच्छा विकास होता है। 🔹 आयुर्वेद के अनुसार इस तेल से मालिश करने पर शिशु आराम से सोते हैं। अस्थि-सुषिरता (osteoporosis) से लड़ने में मदद करता है- 🔹तिल में जिन्क और कैल्सियम होता है जो अस्थि-सुषिरता से संभावना को कम करने में मदद करता है। 🔹मधुमेह के दवाईयों को प्रभावकारी बनाता है- 🔹डिपार्टमेंट ऑफ बायोथेक्सनॉलॉजी विनायक मिशन यूनवर्सिटी, तमिलनाडु (Department of Biothechnology at the Vinayaka Missions University, Tamil Nadu) के अध्ययन के अनुसार यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इसका एन्टी ग्लिसेमिक प्रभाव रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को 36% कम करने में मदद करता है जब यह मधुमेह विरोधी दवा ग्लिबेक्लेमाइड (glibenclamide) से मिलकर काम करता है। इसलिए टाइप-2 मधुमेह (type 2 diabetic) रोगी के लिए यह मददगार साबित होता है। 🔹दूध के तुलना में तिल में तीन गुना कैल्शियम रहता है। इसमें कैल्शियम, विटामिन बी और ई, आयरन और ज़िंक, प्रोटीन की भरपूर मात्रा रहती है और कोलेस्टरोल बिल्कुल नहीं रहता है। 🔹तिल का तेल ऐसा तेल है, जो सालों तक खराब नहीं होता है, यहाँ तक कि गर्मी के दिनों में भी वैसा की वैसा ही रहता है. तिल का तेल कोई साधारण तेल नहीं है। इसकी मालिश से शरीर काफी आराम मिलता है। यहां तक कि लकवा जैसे रोगों तक को ठीक करने की क्षमता रखता है। 🔹इससे अगर महिलाएं अपने स्तन के नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें, तो स्तन पुष्ट होते हैं। सर्दी के मौसम में इस तेल से शरीर की मालिश करें, तो ठंड का एहसास नहीं होता। 🔹 इससे चेहरे की मालिश भी कर सकते हैं। चेहरे की सुंदरता एवं कोमलता बनाये रखेगा। यह सूखी त्वचा के लिए उपयोगी है। 🔹तिल का तेल- तिल विटामिन ए व ई से भरपूर होता है। इस कारण इसका तेल भी इतना ही महत्व रखता है। इसे हल्का गरम कर त्वचा पर मालिश करने से निखार आता है। अगर बालों में लगाते हैं, तो बालों में निखार आता है, लंबे होते हैं। 🔹जोड़ों का दर्द हो, तो तिल के तेल में थोड़ी सी सोंठ पावडर, एक चुटकी हींग पावडर डाल कर गर्म कर मालिश करें। तिल का तेल खाने में भी उतना ही पौष्टिक है विशेषकर पुरुषों के लिए।इससे मर्दानगी की ताकत मिलती है! 🔹हमारे धर्म में भी तिल के बिना कोई कार्य सिद्ध नहीं होता है, जन्म, मरण, परण, यज्ञ, जप, तप, पित्र, पूजन आदि में तिल और तिल का तेल के बिना संभव नहीं है अतः इस पृथ्वी के अमृत को अपनावे और जीवन निरोग बनावे । स्वस्थ भारत समृद्ध भारत निर्माण हेतु ये मेरा पहला कदम है मेरा धेय सम्पूर्ण भारत में शुद्ध तेलों को हर घर में पहुचाना है जिस से हर भारतीय स्वस्थ और निरोगी रहे *पूर्व आर्मी कमांडो श्री लिलाधर लमोरिया* जयहिन्द वंदेमातरम जय श्री राम जय बजरंग बली

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Shyam Yadav May 14, 2021

🥗 *स्वास्थ्य संजीवनी*🥗 *धनिये का जूस लीवर और किडनी करेगा साफ रहेंगीं बीमारियाँ दूर!* हमारी किडनी का काम है ब्लड को शुद्ध करना और शरीर के बेकार और विषैले पदार्थों को बाहर निकालना। पैन्क्रीयाज आंतो में कुछ पाचक एंजाइम का स्राव करके पाचन क्रिया में अहम भूमिका अदा करता है। इसके अलावा यह इन्सुलिन नामक एक हार्मोन भी स्रावित करता है जोकि शरीर के ग्लूकोस लेवल को नियंत्रित करने का काम करता है जिससे डायबिटीज नहीं होती है। कुछ ऐसी प्राकृतिक चीजें हैं जो हमारे शरीर के अंगो को साफ़ करके इन्हें ठीक ढंग से रखती हैं। उनमे से ही एक है धनिया या धनिये का जूस जोकि लिवर, किडनी और पैन्क्रीयाज को अच्छे से साफ़ करके इन्हें स्वस्थ रखता है। धनिया के और भी फायदे हैं जैसे लिवर से फैट को बाहर निकालना और शरीर के शुगर लेवल को नियंत्रित करना। इसके अलावा धनिया किडनी में स्टोन को बनने से रोकता है। इसमें वो सारे औषधीय गुण मौजूद हैं जो शरीर को डीटोक्सीफाई करने के लिए जरुरी होते हैं। धनिया की चटनी भी स्वस्थ लाभों से भरी होती है आज हम आपको इस धनिये के सही इस्तेमाल के बारे में बतायेगे जिससे, आपके लिवर, किडनी और पैन्क्रीयाज ठीक से काम कर सकें। 1. *धनिये का पानी* धनिये को अपने डाइट में इस्तेमाल करना कोई मुश्किल काम नहीं है। आप सबसे पहले पानी में धनिये के पत्ते को डालकर उसे कम से कम 15 मिनट तक उबालें और फिर उसे एक साफ़ बोतल में छानकर रख लें। इसके बाद इस पानी को आप रोज कुछ दिनों तक पियें फिर आप देखेंगे कि आपके हेल्थ में किस तरह से सुधार हो रहा है। 2. *नींबू धनिये का जूस* एक बर्तन में नींबू को दो हिस्सों में काटकर निचोड़ें। उसमें मसला हुआ धनिया और पानी मिला लें। अच्छी तरह से मिक्स करें। आपका हेल्दी जूस तैयार है। इस जूस को खाली पेट लगातार 5 दिन तक लें। हरा धनिया पाचन शक्ति तो बढ़ाता ही है साथ ही शरीर में प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। यह खून की अशुद्धियों को दूर करता है। नींबू उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है। इस जूस को 5 दिन तक लगातार खाली पेट लेने से आप अपना वजन भी कम कर सकते हैं। इस तरह से आप अपने घर में ही इन प्राकृतिक चीजों के इस्तेमाल से अपने शरीर के अंगो को साफ़ रख सकते हैं जिससे कि वो सुचारू रूप से अपना काम कर सकें और आप स्वस्थ रह सकें।

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Shyam Yadav May 12, 2021

*●आम एक चमत्कारी फल भी और औषधि भी..●* चूंकि आम का सीजन शुरू हो चूका है और इस सीजन में स्वास्थ्य लाभ भी लेना जरुरी है। आज हम आपको आम के उपयोग बता रहे है इसे जरूर लिख के रखे। (1). सूखी खांसी - पके आम को गर्म राख में भूनकर खाने से सुखी खासी ख़त्म हो जाती है। यह प्रयोग को खांसी ठीक होने तक कर सकते है इसका कोई नुकसान नहीं है। (2). भूंख ना लगना - आम के रस में 2 ग्राम सेंधा नमक तथा थोड़ी सी चीनी मिलाकर पिने से भूख बढती है। (3). खून की कमी - 1 गिलास देसी गाय का दूध और एक कप आम का रस मिक्स करके उसमे एक चम्मच शहद मिलाकर नियमित रूप से सुबह शाम पीने से खून बढ़ता है। (4). दात और मसूड़ों के लिए आम की गुठली की गिरी पीसकर मंजन बनाके रख दीजिये और इससे मंजन कीजिये दांत और मसूड़ों के रोग दूर हो जाएंगे। (5). गर्मी में अगर नाक से खून बहता हो तो आम की गुठली की गिरी का एक बून्द रस नाक में टपकाए आराम मिलेगा। (6). आग से जलने पर आम के पत्तो को जलाकर राख बना लीजिए और जले हुए स्थान पर राख को लगा दे इससे जला हुआ अंग ठीक हो जाता है। (7). हाथ पैरो की जलन के लिए आम के फूलों को रगड़ने से जलन दूर हो जाती है। (8). अगर पाचन कमजोर है तो 100ml मीठे आम के रस में 2 ग्राम सोंठ मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से पाचनशक्ति बढती है। याद रहे की रेशेदार आम कब्ज नाशक होते है और सेहत के लिए लाभदायक भी होते है। (9). आम के 8 10 ताजे पत्ते रोजाना चबाकर खाने से शुगर कंट्रोल में रहता है। (10). आम के अंदर की छाल का रस दिन में 40ml सुबह शाम पिने से बवासीर, रक्तप्रदर और खुनी दस्त में लाभ मिलता है। रस रोजाना ताजा होना चाहिए।

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Shyam Yadav May 12, 2021

*पित्त का कार्य* *पित्त एक प्रकार का पतला द्रव्य है यह गर्म है।* *आम से मिले हुए पित्त का रंग नीला तथा आम से अलग पित्त का रंग पीला होता है।* *यह दस्तावर, हल्का, चिकना और ती होता है। पाक के समय इसका स्वाद खट्टा हो जाता है.!* *पित्त के प्रकार व कार्य-* *वायु की ही भाँति पित्त भी नाम, स्थान और क्रियाओं के भेदानुसार 5 प्रकार का होता है..* *(1) पाचक पित्त* *(2) रंजक पित्त* *(3) साधक पित्त* *(4) आलोचक पित्त और* *(5) भ्राजक पित्त* *(1) पाचक पित्त-* *यह आमाशय और पक्वाशय में रहकर (ये पाचक पित्त के रहने का स्थान है) छह प्रकार के आहारों को पचाता है और शेषाग्नि के बल को बढ़ाता है तथा रस, मूत्र, मल इत्यादि को अलग अलग करता है। मुख्यता से वहीं स्थित हुआ यानी आमाशय और पक्वाशय में रहकर ही अपनी शक्ति से शरीर के शेष यकृत, त्वचा, नेत्र आदि स्थानों और समस्त देह (शरीर) का पोषण करता है।* *इसी पित्त को "जठराग्नि" अथवा "पाचाग्नि" के नाम से भी जाना जाता है। यह अग्नि काँच के पात्र में रखे दीपक के सदृश हैं। यही अनेक प्रकार के खाये गये व्यंजनों को पचाती है। बड़े शरीर वाले जीवों में यह अग्नि जौ के प्रमाण, छोटे शरीर वालों में तिल के प्रमाण तथा छोटे कीट - पतंगों में बाल / केश (हेयर) के बराबर होती है।* *(2) रंजक पित्त-* *इसके रहने का स्थान यकृत व तिल्ली (लीवर व स्प्लीन) है।* *इसका काम रस का रक्त यानी (खन) बनाना है ।* *(3) साधक पित्त-* *इसके रहने का स्थान ह्रदय है। बुद्धि, धृति यानी मेधा और स्मरणशक्ति बढ़ाना इसका कार्य है।* *सुश्रुत संहिता में लिखा है कि इसका साधक नाम अग्नि संज्ञा है। यह वांछित मनोरध का साधन करने वाली हैं ।* *(4) आलोचक पित्त-* *इसके रहने का स्थान दोनों नेत्र हैं।* *हरा पित्त का कार्य-* *रूप ग्रहण करना है। इसी के कारण ये प्राणियों को दिखाई देता है।* *(5) भाजक पित्त-* *यह पित्त सारे शरीर और चमड़ी (Skin) में रहता है।* *यह पित्त कान्ति करता है तथा लेप, तेल की मालिश और स्नान आदि को पचाता है, अर्थात् सुखाता हैं ।* *पित्त कोप के लक्षण* *आग से जलने के समान जलन सी होना,* *ऐसा प्रतीत होना, मानो धक धक आग जल रही है, धुआँ सा निकलता अनुभव होना, खट्टी डकारें आना, अन्तदहि होना, अत्यन्त गर्मी लगना, अत्यन्त पसीना आना, शरीर में दुर्गन्ध आना, अंगों व अवयवों में फटना, चमड़ी जलना, लाल लाल चकत्ते होना, लाल लाल फोड़े होना, बगल में कखलाई होना, मुख में कड़वापन, अधिक प्यास लगना, आँखों के सामने अंधेरा छाना, हरे अथवा हल्दी के रंग का चमड़ी हो जाना, मल-मूत्र तथा नेत्र हरे या पीले हो जाना, दस्त (शौच) का पतला होना, अनाप शनाप बकना इत्यादि पित्त कोप के लक्षण हैं।* *पित्त कोप के कारण* *हरित संहिता के अनुसार-* *बहुत गर्म व रूखे, चटपटे और खट्टे पदार्थों का सेवन, दाह में मदिरा का सेवन, गर्मी में, क्रोध में अथवा पसीनों में सम्भोग करना। ये पित्त प्रकोप के कारण हैं।* *कुलथी, अरहर का यूष, मूली, सहजना, कचूर सरसों, राई का शाक खाना, वर्षा ऋतु में रात्रि जागरण, युद्ध व परिश्रम करना इन कारणों से शरद् ऋतु में पित्त कुपित होता है।“* *सश्रत संहिता के अनुसार-* *भय, शोक, क्रोध, परिश्रम, उपवास, जले हए पदार्थ, मैथुन, दौड़ना, चटपटे, खट्टे और नमकीन पदार्थ, गर्म, हल्के और दाहकारक पदार्थ, तिल, तेल, कुलथी, सरसों, अलसी, हरी तरकारी, गोह, मछली, बकरी, भेड़ का माँस, खट्टा दही, छाछ, दही का तोड़, कांजी, प्रत्येक प्रकार की शराब, खट्टे फल तथा धूप आदि से पित्त का कोप होता है।* *पित्त क्षय के लक्षण-* *जिस प्रकार (पहले आपने पढ़ा)* *वायु की कमी या अधिकता होती है, उसी प्रकार पित्त की भी कमी या अधिकता होती है।* *पित्त जब कम हो जाता है तब अग्नि मन्द, शरीर की गर्मी कम हो जाती है तथा शरीर की रौनक मारी जाती है।* *पित्त वृद्धि के लक्षण-* *जब पित्त बढ़ जाता है, तो शरीर पीला हो जाता है, सन्ताप होता है, ठण्डी चीजों की, यानी सर्दी की चाहत होती है। नींद कम आती है, बेहोशी होती है, बल होती है, इन्द्रियाँ दुर्बल हो जाती हैं, मूत्र पीला होता है तथा नेत्र भी पीले होते हैं।* *पित्त कोप का समय-* *गर्मी का समय, शरद् ऋतु, मध्याह्न काल, अद्धरात्रि तथा भोजन पचते समय पित्त विशेषकर कुपित होता है।* *युवावस्था में पित्त का जोर रहता है।* *पित्त शान्ति के उपाय..* *मधुर, कड़वे, कसैले व शीतल द्रव्यों, पित्तनाशक स्नेह (घी-तेल), जुलाब, प्रलेपन, अभ्यंग और अवगाहन से, मात्रा व काल का विचार करके पित्त की चिकित्सा करनी चाहिए।* *पित्त की जितनी चिकित्सा है, उनमें "विरेचन" (जुलाब) सर्वोपरि है; क्योंकि विरेचन औषधि आमाशय में घुसकर विकारकर्ता पित्त के मूल को पूर्णरूपेण छेदन कर देती है, यह महर्षि चरक का मत है।* *उपरोक्त चिकित्सा के अतिरिक्त नीचे लिखे आहार - विहार भी पित्त शान्ति हेतु अच्छे हैं!* *मुनक्का, केला, आँवला, अनार, परवल, छुहारा, ककड़ी, खीरा, करेला!* *कुम्हड़ा, ताड़ के फल, पुराने चावल, गेहूँ, मिश्री, चीनी, घी, दूध, मक्खन, अरहर!* *जौ, चना, मूग, धान की खील, मसूर, कुटकी, निशोभ, पित्त - पापड़ा, त्रिफला, शतावरी, चन्दन, सुन्दर बाग, केले और कमल के पत्तों की संज, सफेद चन्दन का लेप, मित्र - मिलन, मीठी बातें, मनोहर गाना, नृत्य, शीतल - मन्द पवन, फव्वारे, चाँदनी और छिड़काव आदि!* *शीतल आहार - विहार - पित्त विकार वालों के लिए पथ्य है!* *पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति के लक्षण* 1. शारीरिक गठन - नाजुक शिथिल शरीर होता है इन्हें गर्मी सहन नहीं होती । 2. वर्ण - पीला 3. त्वचा - त्वचा पीली एवं नर्म होती है फुंसियों और तिलों से भरी हुर्इ, अंग शिथिल; हथेलियाँ, होठ, जीभ, कान आदि लाल रहते हैं। 4. केश - बालों का छोटी उम्र में सफेद होना व झड़ना, रोम बहुत कम होना । 5. नाखून - नाखून लाल 6. आंखें - लाल 7. जीभ - लाल 8. आवाज - स्पष्ट, श्रेष्ठ वक्ता। 9. मुंह - कण्ठ सूखता है । 10. स्वाद - मुंह का स्वाद कड़वा रहना, कभी-कभी खट्टा होना, मुंह व जीभ में छाले होना। 11. भूख - भूख अधिक लगती है, बहुत सा भोजन करने वाला होता है, पाचन शक्ति अच्छी होती है । 12. प्यास - प्यास अधिक लगती है । 13. मल - मल का अधिक पतला व पीला होना, जलनयुक्त होना, दस्त की प्रवृत्ति। 14. मूत्र - मूत्र कभी गहरा पीला होना, कभी लाल होना, मूत्र में जलन होना। 15. पसीना - पसीना बहुत कम आना, गर्म और दुर्गन्धयुक्त पसीना। 16. नींद - निद्रानाश । 17. स्वप्न - अग्नि, सोना, बिजली, तारा, सूर्य, चन्द्रमा आदि चमकीले पदार्थ देखना। 18. चाल - साधारण किन्तु लक्ष्य की ओर अग्रसर चाल वाला होता है। 19. पसन्द - गर्मी बुरी लगती है और अत्यधिक सताती है, गर्म प्रकृति वाली चीजें पसंद नहीं आती, धूप और आग पसंद नहीं, शीतल वस्तुयें यथा-ठंडा जल, बर्फ, ठण्डे जल से स्नान, फूलमाला आदि प्रिय लगते हैं, कसैले, चरपरे और मीठे पदार्थ प्रिय लगते हैं । 20. नाड़ी की गति - कूदती हुर्इ (मेढ़क या कौआ की चाल वाली), उत्तेजित व भारी नाड़ी होना। *कफ को संतुलित रखने हेतु:-* गुड़ ,शहद, गौमूत्र, त्रिफला। *वात को संतुलित रखने हेतु:-* शुद्ध तेल , गौमूत्र, त्रिफला। *पित को संतुलित रखने हेतु:-* देशी गाय का घी, गौमूत्र, त्रिफला।

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Shyam Yadav May 12, 2021

*प्रतिगामी स्खलन* *Retrograde Ejaculation* प्रतिगामी स्खलन वीर्य के प्रवेश के दौरान मूत्रमार्ग से बाहर जाने के बजाय मूत्राशय में प्रवेश को संदर्भित करता है। प्रतिगामी स्खलन तब होता है जब वीर्य, ​​जो कि ज्यादातर मामलों में, मूत्रमार्ग के माध्यम से स्खलित होता है, मूत्राशय में पुनर्निर्देशित होता है। आम तौर पर, स्खलन से पहले मूत्राशय के संकुचन का कारण वीर्य को मूत्रमार्ग के माध्यम से बाहर निकलने के लिए मजबूर करना पड़ता है, कम से कम प्रतिरोध का मार्ग। *प्रतिगामी स्खलन के कारण:* *कारक जो प्रतिगामी स्खलन के विकास के उच्च जोखिम में डाल सकते हैं वे हैं:* * मधुमेह * मल्टीपल स्केलेरोसिस * पार्किंसंस रोग * रीढ़ की हड्डी में चोट * प्रोस्टेट या मूत्राशय से जुड़ी सर्जरी * बढ़े हुए प्रोस्टेट, उच्च रक्तचाप या अवसाद के इलाज के लिए ली गई कुछ दवाएं। *प्रतिगामी स्खलन के लक्षण:* *प्रतिगामी स्खलन के लक्षण में शामिल हैं:* बहुत कम चरम स्थिति का ओर्गास्म जिसमें आप अपने शिश्न के बाहर बहुत कम या कोई वीर्य स्खलन करते हैं (शुष्क ओर्गास्म) क्योंकि मूत्र जो संभोग के बाद दूधिया होता है क्योंकि इसमें वीर्य होता है। गर्भवती होने में असमर्थता (पुरुष बांझपन) *दवाओं के दुष्प्रभाव* *दवाएं जो प्रतिगामी स्खलन का कारण बन सकती हैं उनमें उपचार के लिए दवाएं शामिल हैं:* प्रोस्टेट इज़ाफ़ा तमसुलोसिन (फ्लोमैक्स) या टेराज़ोसिन (कार्डुरा) *डिप्रेशन* विशेष रूप से सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीपटेक इनहिबिटर्स (SSRIs) जैसे फ्लुओक्सेटीन (प्रोज़ैक), सेराट्रलाइन (ज़ोलॉफ्ट) और कई अन्य। प्रतिगमन स्खलन तब होता है जब वीर्य सहवास के दौरान शिश्न के माध्यम से उभरने के बजाय मूत्राशय में प्रवेश करता है। यद्यपि आप अभी भी यौन चरमोत्कर्ष तक पहुँचते हैं, आप बहुत कम या कोई वीर्य स्खलन कर सकते हैं। इसे कभी-कभी शुष्क संभोग कहा जाता है। प्रतिगामी स्खलन हानिकारक नहीं है, लेकिन यह पुरुष बांझपन का कारण बन सकता है। *जोखिम कारक:* यदि आपको प्रतिगामी स्खलन का खतरा बढ़ गया हो तो: या आपको मधुमेह या मल्टीपल स्केलेरोसिस है, या आपको प्रोस्टेट या मूत्राशय की सर्जरी हुई है, या आप उच्च रक्तचाप या मनोदशा विकार के लिए कुछ दवाएं लेते हैं, या आपको रीढ़ की हड्डी में चोट लगी थी, *जटिलतायें:* प्रतिगामी स्खलन हानिकारक नहीं है। हालांकि, संभावित जटिलताओं में शामिल हैं: गर्भवती होने में असमर्थता (पुरुष बांझपन) अनुपस्थित स्खलन के बारे में चिंताओं के कारण कम सुखदायक संभोग सुख, कई पुरुष प्रोस्टेट (टीयूआरपी) के ट्रांसयूरेथ्रल रिसेनशन के बाद प्रतिगामी स्खलन का अनुभव करते हैं, एक प्रक्रिया जो बढ़े हुए प्रोस्टेट के लक्षणों को कम करती है। प्रतिगामी स्खलन के साथ, वीर्य शिश्न से आगे निकलने के बजाय मूत्राशय में पीछे की ओर बहता है। आमतौर पर, स्खलन के दौरान वीर्य को बाहर रखने के लिए आंतरिक मांसपेशियां मूत्राशय को खोलती हैं। लेकिन कुछ सर्जरी के दौरान, TURP की तरह, ये मांसपेशियां, या तंत्रिकाएं जो उन्हें नियंत्रित करती हैं, क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। वीर्य पेशाब के माध्यम से शरीर छोड़ता है। हालांकि, गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे जोड़ों के लिए एक समस्या हो सकती है। कुछ पुरुष पाते हैं कि पूर्ण मूत्राशय के साथ स्खलन वीर्य को लिंग के माध्यम से बाहर निकलने में मदद करता है, क्योंकि पूर्ण मूत्राशय खुलने को बंद रखने में मदद करता है। आंशिक प्रतिगामी स्खलन होना संभव है, जिसमें कुछ वीर्य मूत्राशय में बह जाता है और कुछ लिंग के माध्यम से शरीर छोड़ देता है। *⚜ इंजेक्शन:* ड्रग्स आमतौर पर मदद नहीं करते हैं जब प्रतिगामी स्खलन पुरुष शारीरिक रचना के स्थायी शारीरिक परिवर्तनों के कारण सर्जरी से संबंधित होता है। इसके अलावा, कुछ दवाएं वास्तव में प्रतिगामी स्खलन में योगदान कर सकती हैं, जैसे कि अल्फा ब्लॉकर्स और मूड विकारों के लिए दवाएं। कामोन्माद में बदलाव शारीरिक और भावनात्मक संतुष्टि में कमी से जुड़े होते हैं, जिससे दंपति को तनाव हो सकता है। एक बच्चे को गर्भ धारण करने की इच्छा रखने वाले जोड़ों के लिए प्रतिगमन स्खलन एक चुनौतीपूर्ण समस्या है। उचित सलाह उचित डॉक्टर से लें।

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Shyam Yadav May 12, 2021

*हेपेटाइटिस का इलाज (पीलिया)* हैपेटाईटिस वास्तव में लीवर की संक्रमण से पैदा हुई खराबी है जिसे हम पीलिया के नाम से जानते हैं। अलग अलग प्रकार के वायरस या रोगाणुओं से पैदा पीलिया को आधुनिक चिकित्सकों ने पहचान करके अलग अलग नाम देने का काम किया है, पर विश्वास रखें की इलाज किसी भी प्रकार के पीलिया या हैपेटाईटिस का उनके (एलोपैथी) के लिये सम्भव नहीं। भारतीय पारम्पारिक चिकित्सा में इसके अनेक सरल पर पक्के इलाज हैं। हैपेटाइटिस-ए, बी, सी, आदि जो भी हो वे सब निश्चित रूप से ठीक हो सकते हैं। -- गुम्मा नामक (द्रोण पुष्पी) पौधे को पहचानते हों तो उसका एक चम्मच चूर्ण मिट्टी के बर्तन में 100 मि.ली. पानी डालकर भिगो दें। प्रात: मसलकर व छानकर रोगी को पिलाएं तथा प्रात: भिगोकर रात को पिला दें। 5-7 दिन में रोगी ठीक हो जाएगा। -- थोड़ा शहद और चने के दाने जितना कपूर मिलाकर देने से प्रभाव अधिक होगा। चूने का पानी 2-2 चम्मच दिन में 3 बार रोगी को पिलाएं यही पानी 10-15 दिन तक देते रहें। अन्य दवाओं के साथ भी इस प्रयोग को कर सकते हैं। -- पीली हरड़ का चूर्ण एक चम्मच तथा शहद या पुराना गुड़ (रसायनों से रहित) दिन में 2-3 बार दें। असाध्य पीलिया पर भी काम करेगा। 6 मास में एक बार 7 दिन तक इसका प्रयोग करते रहें, उल्टा-सीधा न खाएं (चाय, कॉफी, जंक फूड़) तो अम्ल पित्ता (हाईपर ऐसिडिटी, खट्टा पानी आना, बदहजमी) पूरी तरह सदा के लिए ठीक हो जाएगी। --श्योनाक (टाटबडंगा, अरलू, तलवार फली की छाल) 150-200 ग्राम चूर्ण, 200-250 मि.ली. पानी में मिट्टी के पात्र में भिगोकर रोज प्रात: दोपहर, सांय 3 बार में पिला दें। रोज नया चूर्ण भिगोएं। थोड़ा मीठा देसी खाण्ड या मिश्री मिलाकर देना अधिक लाभदायक होगा। (2 काले चने के बराबर) शुध्द कपूर पानी से निगलकर 30 मिनट बाद श्योनाक का पानी छानकर पीने से 1 या अधिक से अधिक 3 या 4 दिन में असाध्य पीलिया या ‘हैपेटाईटिस-बी’ तक ठीक हो जाता है। -- मूली के हरे पत्ते पीलिया में लाभदायक होते है। यही नहीं मूली के रस में भी इतनी ताकत होती है कि यह खून और लीवर से अत्यधिक बिलिरूबीन को निकाल सके। पीलिया या हेपेटाइटिस में रोगी को दिन में 2 से 3 गिलास मूली का रस जरुर पीना चाहिये। या फिर इसके पत्ते पीसकर उनका रस निकालकर व छानकर पीएं। -- टमाटर का रस पीलिया में बेहद लाभदायक होता है। इसके रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीयें। -- नीम में कई प्रकार के वायरल विरोधी घटक पाए जाते हैं, इसकी पत्तयों के साथ में शहद मिलाकर सुबह सुबह पियें।

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Madan Kaushik May 14, 2021

***अपना पोस्ट*** **नक्षत्रवाणी** *༺⊰०║|। ॐ ।|║०⊱༻*  गजाननं भूतगनादि सेवितम, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम। उमासुतं शोकविनाशकारकम, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम।। श्रीमते रघुवीराय सेतूल्लङ्घितसिन्धवे। जितराक्षसराजाय रणधीराय मङ्गलम्।। - भुजगतल्पगतं घनसुन्दरं गरुडवाहनमम्बुजलोचनम् । नलिनचक्रगदाकरमव्ययं भजत रे मनुजाः कमलापतिम् ।।  क्यों भटके मन बावरा, दर-दर ठोकर खाये...! शरण श्याम की ले ले प्यारे, जनम सफल हो जाये...!! 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मित्रों...! सबसे पहले तो नित्यप्रति आपकी प्रिय पोस्ट "नक्षत्रवाणी" की पोस्टिंग में होने वाले विलंब के लिए आप सभी से हृदयपूर्वक क्षमा प्रार्थना सहित...🙏🙏 आप सभी परम प्रिय धर्मपारायण, ज्योतिषविद्या प्रेमी विद्वतजनों को आचार्य/पं.मदन तुलसीराम जी कौशिक मुंबई (सिरसा-हरियाणा वाले) की ओर से सादर-सप्रेम 🌸 जय गणेश 🌸 जय अंबे 🌸 *जय श्री कृष्ण*🌷मंगल प्रभात🌷इसी के साथ आप सभी सनातनी, धर्म-उत्सवप्रेमी, राम-कृष्ण-हरि-शिवभक्त, शक्ति उपासक, मातृपितृ भक्त व राष्ट्रप्रेमियों को आज पवित्र **वैशाख शुक्ल पक्ष/सुदी तृतीया की, अक्षय तृतीया/आखा तीज (भगवान श्री परशुराम जयंती) महोत्सव की, संक्रान्ति महापर्व (सूर्य की वृष संक्रान्ति उत्सव) एवं छत्रपति श्री शम्भाजी महाराज जयन्ती** की भी बहुत-बहुत हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं...!!!** ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ आइये...! अब चलें आपके प्रिय पोस्ट 'नक्षत्रवाणी' के अंतर्गत आज कुछ विशेष महत्वपूर्ण जानकारी, दृकपंचांग, चन्द्र राशिफल' एवं 'आरोग्य मंत्र'पुओ की ज्ञानयात्रा पर...🙏 ```༺⊰🕉⊱༻ ``` *༺⊰०║|। ॐ ।|║०⊱༻* ☘️🌸!! ॐ श्री गणेशाय नमः!! 🌸☘️ ****************************** 𴀽𴀊🕉श्री हरिहरौविजयतेतराम्🕉 🇬🇧 *आंग्ल मतानुसार* :- आज दिनांक **१४ मई सन-२०२१/14 मई-2021 ईस्वी** शुक्रवार/Thurssday* *🇮🇳 राष्ट्रीय सौर वैशाख, दिनांक २४* *चैत्र (मधुमास)* प्रस्तुत है ««« *आज का दृकपंचांग* 👉 ध्यान दें **यहाँ दिये गए तिथि, नक्षत्र, योग व करण आदि के समय इनके समाप्ति काल हैं और सूर्योदयास्त व चंद्रोदय का गणना स्थल मुंबई हैं।** कलियुगाब्द......5122 (५१२२) विक्रम संवत्.....२०७८/2078 (आंनद नाम) शक संवत्......१९४३/1943 मास....वैशाख (सं./हिंदी)/बैसाख (मारवाड़ी/पं.) पक्ष........शुक्ल/चानण/सुदी/उतरतो बैशाख **तिथी...(०३/03) तृतीया/तीज** *दूसरे दिन प्रातः 05.38 पर्यंत पश्चात चतुर्थी* दुसरे दिन प्रातः 07.59 पर्यंत पश्चात चतुर्थी **वार/दिन....भृगुवासर/शुक्रवार/Friday** **नक्षत्र........मृगशीर्ष🌠** *दुसरे दिन प्रातः 08.39 पर्यंत पश्चात आर्द्रा योग..............सुकर्मा संध्या 01.47 पर्यंत पश्चात धृति करण............तैतिल संध्या 06.51 पर्यंत पश्चात गर सूर्योदय.......प्रातः 06.04.00 पर सूर्यास्त........सांय 07.06.00 पर चंद्रोदय........प्रातः 07.45.00 पर रवि(अयन-दृक)......उत्तरायण रवि(अयन-वैदिक)...उत्तरायण **ऋतु (दृक).....ग्रीष्म** **ऋतु वैदिक)...वसंत** **सूर्य राशि.......वृषभ** **चन्द्र राशि......वृषभ (सांय 07.14 बजे तक पश्चात मिथुन)** **गुरु राशी.......कुंभ (पूर्व में उदय, मार्गी)** 🚦 *दिशाशूल :-* पश्चिम दिशा: यदि बहुत ही आवश्यक हो तो घी/काजू या जौ का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें। ☸ शुभ अंक......5 🔯 शुभ रंग......श्वेत/गुलाबी/आसमानी नीला ⚜️ *अभिजीत मुहूर्त :-* मध्याह्न 12.09 से 13.01 तक। 👁‍🗨 **राहुकाल (अशुभ) :-* पूर्वान्ह 10.57 से 12.35 तक । 👁‍🗨 *गुलिक काल (अशुभ) :-* प्रातः 07.42 से 09.20 तक । ************************** 🌞 *उदय लग्न मुहूर्त -* *मेष* 04:11:14 05:52:19 *वृषभ* 05:52:19 07:50:45 *मिथुन* 07:50:45 10:04:26 *कर्क* 10:04:26 12:20:36 *सिंह* 12:20:36 14:32:25 *कन्या* 14:32:25 16:43:05 *तुला* 16:43:05 18:57:42 *वृश्चिक* 18:57:42 21:13:53 *धनु* 21:13:53 23:19:31 *मकर* 23:19:31 25:06:39 *कुम्भ* 25:06:39 26:40:12 *मीन* 26:40:12 28:11:14 ✡ *चौघडिया :-* प्रात: 07.27 से 09.06 तक लाभ प्रात: 09.06 से 10.44 तक अमृत दोप. 12.22 से 02.00 तक शुभ सायं 05.16 से 06.54 तक चंचल रात्रि 09.38 से 11.00 तक लाभ । *****""""""******"""*******"""******** आज के विशेष योगायोग/युति संयोग, वेध, ग्रहचार (ग्रहचाल), व्रत/पर्व/प्रकटोत्सव, जयंती/जन्मोत्सव व मोक्ष दिवस/स्मृतिदिवस/पुण्यतिथि आदि 🙏👇:- 👉 **आज वैशाख शुक्ल पक्ष/सुदी शुक्रवासर/शुक्रवार/Friiday को हिंदु नववर्ष/विक्रमी संवत् का 32वाँ/ बत्तीसवां दिन👉 बैशाख सुदी तृतीया/तीज दूसरे दिन प्रातः 05.38 पर्यंत पश्चात चतुर्थी शुरू, तृतीया तिथि वृद्धि, अक्षय तृतीया/आखातीज (देशाचारे), सूर्य की वृष संक्रान्ति 23:25 पर (विशेष पुण्यकाल 17:01 से सूर्योदय तक, सामान्य पुण्यकाल दोपहर बाद से (गो - अन्न - जल - तिल दान , गोदावरी स्नान विधान), कल्पादि, त्रेतायुगादि, संकल्पादि में प्रयोजनीय ग्रीष्म ऋतु प्रारम्भ, गंगोत्री - यमुनोत्री - बद्रीनाथ - केदारनाथ यात्रा (कोरोना काल में नहीं होगी यात्रा), जैन वर्षी तप पारण, शव्वाल मुस्लिम माह प्रारम्भ, श्री मातंगी जयन्ती (बैशाख शुक्ल तृतीया अनुसार कल शुक्रवार को श्रेष्ठ), भगवान श्री परशुराम जयन्ती (प्रदोष काल व्यापिनी तृतीया में, एकाध पंचांग में अक्षय तृतीया को कल मानकर 15 मई को भी), स्नान कुम्भ महापर्व (हरिद्वार), ईदुल फितर (मीठी ईद, मुस्लिम, चन्द्रदर्शन पर निर्भर), छत्रपति श्री शम्भाजी महाराज जयन्ती व डॉ. श्री रघुवीर स्मृति दिवस।** ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ 🙏📿*आज का आराधना मंत्र🙏:- **🕉 ॐ द्रां द्रीं द्रॏं सः शुक्राय नमः।।🎪🚩** **🕉 ॐ लक्ष्मी नारायणाभ्यां नमः ॥ 📿 *आज का उपासना मंत्र :- ॥ ॐ कुमुदवासिन्यै नम: ॥ *********************** ⚜ 👉🙏☸*आज की महत्वूर्ण तिथि विशेष :*🚩 **वैशाख शुक्ल पक्ष/सुदी तृतीया/तीज, अक्षय तृतीया/आखातीज (देशाचारे), सूर्य की वृषभ संक्रान्ति महापर्व। मदनरत्न के अनुसार :* “अस्यां तिथौ क्षयमुर्पति हुतं न दत्तं। तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया। उद्दिष्य दैवतपितृन्क्रियते मनुष्यैः। तत् च अक्षयं भवति भारत सर्वमेव॥ अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है । इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है । वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है। भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि की युगादि तिथियों में गणना होती है, सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ है । भगवान विष्णु ने नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था । ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव भी इसी दिन हुआ था । इस दिन श्री बद्रीनाथ जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है और श्री लक्ष्मी नारायण के दर्शन किए जाते हैं। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनारायण के कपाट भी इसी तिथि से ही पुनः खुलते हैं। वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी जी मन्दिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं, अन्यथा वे पूरे वर्ष वस्त्रों से ढके रहते हैं। इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था और द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ था। ऐसी मान्यता है कि इस दिन से प्रारम्भ किए गए कार्य अथवा इस दिन को किए गए दान का कभी भी क्षय नहीं होता। इस दिन से शादी-ब्याह करने की शुरुआत हो जाती है। बड़े-बुजुर्ग अपने पुत्र-पुत्रियों के लगन का मांगलिक कार्य आरंभ कर देते हैं। अनेक स्थानों पर छोटे बच्चे भी पूरी रीति-रिवाज के साथ अपने गुड्‌डा-गुड़िया का विवाह रचाते हैं। इस प्रकार गाँवों में बच्चे सामाजिक कार्य व्यवहारों को स्वयं सीखते व आत्मसात करते हैं। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में उल्लेख है कि वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को रेणुका के गर्भ से भगवान विष्णु ने परशुराम रूप में जन्म लिया। कोंकण और चिप्लून के परशुराम मंदिरों में इस तिथि को परशुराम जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। दक्षिण भारत में परशुराम जयंती को विशेष महत्व दिया जाता है। परशुराम जयंती होने के कारण इस तिथि में भगवान परशुराम के आविर्भाव की कथा भी सुनी जाती है। इस दिन परशुराम जी की पूजा करके उन्हें अर्घ्य देने का बड़ा माहात्म्य माना गया है। सौभाग्यवती स्त्रियाँ और क्वारी कन्याएँ इस दिन गौरी-पूजा करके मिठाई, फल और भीगे हुए चने बाँटती हैं, गौरी-पार्वती की पूजा करके धातु या मिट्टी के कलश में जल, फल, फूल, तिल, अन्न आदि लेकर दान करती हैं। मान्यता है कि इसी दिन जन्म से ब्राह्मण और कर्म से क्षत्रिय भृगुवंशी परशुराम का जन्म हुआ था। एक कथा के अनुसार परशुराम की माता और विश्वामित्र की माता के पूजन के बाद प्रसाद देते समय ऋषि ने प्रसाद बदल कर दे दिया था। जिसके प्रभाव से परशुराम ब्राह्मण होते हुए भी क्षत्रिय स्वभाव के थे और क्षत्रिय पुत्र होने के बाद भी विश्वामित्र ब्रह्मर्षि कहलाए। उल्लेख है कि सीता स्वयंवर के समय परशुराम जी अपना धनुष बाण श्री राम को समर्पित कर संन्यासी का जीवन बिताने अन्यत्र चले गए। अपने साथ एक फरसा रखते थे तभी उनका नाम परशुराम पड़ा। 🙏 💥 **विशेष ध्यातव्य👉 तीज/तीज को परवल/कलंबी बैंगन का सेवन शत्रु वृद्धिकारक व बुद्धिनाशक होने से पूर्णतः वर्जित है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)।* साभार: 🌞 *~हिन्दू पंचांग ~* 🌞।** 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 👉 **🏡वास्तु टिप्स🏢🏡 1) गृहवास्तु विज्ञान के अनुसार प्रवेश/मुख्य द्वार के सामने दूसरे कमरे का द्वार हो तो शुभ होता है। 2) गृहवास्तु के अनुसार यथासंभव शयनकक्ष में दर्पण न लगाएँ। इससे घर के सदस्यों के विचारों में मतभेद और कलह की स्थिति उत्पन्न होती रहती है।** 3) यदि आपके घर से अगर अकारण ही बरकत जा रही है या आपको नेगेटिव एनर्जी दिख रही है या परिवार में निरंतर कलह रहता है, तो कपूर और फिटकरी को पीस के गौझारण (गौमूत्र) जो बहुत ही आसानी से मिल जाता है (अन्यथा पतंजलि आदि का ले लें), इससे घर मे पोछा लगाने वाले क्लीनर या पानी मे मिला लें और रोज़ सुबह-शाम घर मे पोछा लगाये और गंगाजल का पूजा-आरती के बाद छिड़काव भी करें फिर चमत्कारिक परिवर्तन देखें। 4) **घर की मुख्य सीढ़ियाँ सदैव दक्षिण या पश्चिम की ओर होनी चाहिए। ईशान में कभी भी होनी चाहिए। विशेष परस्थिति में वायव्य तथा आग्नेय कोण में बना सकते हैं। *****""""""******"""*******"""******** 📢 *संस्कृत सुभाषितानि -* यदि पुत्रः कुपुत्रः स्यात् व्यर्थो हि धनसञ्चयः । यदि पुत्रः सुपुत्रः स्यात् व्यर्थो हि धनसञ्चयः ॥ अर्थात :- यदि पुत्र कुपुत्र हो तो धनसंचय व्यर्थ है; और यदि पुत्र सुपुत्र हो, तो भी धनसंचय व्यर्थ है । **💊💉आरोग्य मंत्र🌿🍃** *दाढ़ी के सफेद बालों का घरेलू उपचार -* *2. एलोवेरा जेल -* एलोवेरा जेल स्वास्थ्य लाभों का एक बड़ा हिस्सा है और बालों को समय से पहले भूरे रंग होने से रोकने में भी मदद करता है। यदि आप एलोवेरा का रस पीते हैं तो यह अच्छी तरह से काम करता है। यह बालों को सफेद होने से रोकने में प्रभावी ढंग से काम करता है। *****""""""******"""*******"""******** ⚜*🐑🐂🦔 आज का संभावित चन्द्र राशिफल🦂🐊🐟:- 👉 किंतु पहले सबसे एक करबद्ध निवेदन🙏 मित्रों सर्वप्रथम तो कुछ तकनीकी कारणों से आपको आपकी प्रिय पोस्ट नक्षत्रवानी विलंब से मिल पाती है इसके लिए मैं आप सभी से क्षमा प्रार्थी हूँ। तत्पश्चात मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि आपकी इस परमप्रिय ज्ञानवर्धक 'अपना पोस्ट' *नक्षत्रवाणी* को आप जितना हो सकता हो उतना लाइक-शेयर तथा फॉरवर्ड तो करें ही, आलस्य त्याग कर कृपया इसपर अपनी बुद्धि व विवेक के अनुसार अपने सही-सही कमैंट्स भी अवश्य करें। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप मुझे निराश नहीं करेंगे और अपने फीडबैक से व लाइक/सराहना करके भी अवश्य ही मेरा उत्साहवर्धन करेंगे। नक्षत्रवाणी के संदर्भ में आप सभी के बहुमूल्य सुझाव भी सदैव सादर आमंत्रित हैं।धन्यवाद...!!! **ख़ुशख़बर।। सबसे बड़ी ख़ुशख़बर।।**👇 Free। फ्री।। 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ले, लो, आ)* रोजगार में वृद्धि होगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। शत्रु सक्रिय रहेंगे। गर्व-अहंकार को दूर करें। राजनीतिक व्यक्तियों से लाभकारी योग बनेंगे। मनोबल बढ़ने से तनाव कम होगा। साझेदारी में नवीन प्रस्ताव प्राप्त हो सकेंगे। 🐂 *राशि फलादेश वृष :-* *(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)* फालतू खर्च होगा। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। विवाद को बढ़ावा न दें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। व्यावसायिक योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पाएगा। परिवार की चिंता रहेगी। आय से व्यय अधिक होंगे। अजनबियों पर विश्वास से हानि हो सकती है। 👫🏻 *राशि फलादेश मिथुन :-* *(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)* बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा सफल रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। जोखिम न लें। अपने व्यसनों पर नियंत्रण रखें। पत्नी के बतलाए रास्ते पर चलने से लाभ की संभावना बनती है। यात्रा से लाभ। वाहन-मशीनरी खरीदी के योग हैं। व्यवसाय में अड़चनें आएंगी। 🦀 *राशि फलादेश कर्क :-* *(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)* नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। मान-सम्मान मिलेगा। नेत्र पीड़ा हो सकती है। अधिकारी वर्ग विशेष सहयोग नहीं करेंगे। ऋण लेना पड़ सकता है। यात्रा आज नहीं करें। परिवार के कार्यों को प्राथमिकता दें। आपकी बुद्धिमत्ता सामाजिक सम्मान दिलाएगी। 🦁 *राशि फलादेश सिंह :-* *(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)* धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। कोर्ट व कचहरी के कार्य बनेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। चोट व रोग से बचें। कार्य-व्यवसाय में लाभ होने की संभावना है। दांपत्य जीवन में अनुकूलता रहेगी। सामाजिक समारोहों में भाग लेंगे। सुकर्मों के लाभकारी परिणाम मिलेंगे। 🙎🏻‍♀️ *राशि फलादेश कन्या :-* *(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)* जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। विवाद को बढ़ावा न दें। मितव्ययिता को ध्यान में रखें। कुटुंबियों से संबंध सुधरेंगे। शत्रुओं से सावधान रहें। व्यापार लाभप्रद रहेगा। खर्चों में कमी करें। सश्रम किए गए कार्य पूर्ण होंगे। ⚖ *राशि फलादेश तुला :-* *(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)* भ्रम की स्थिति बन सकती है। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। कानूनी अड़चन दूर होगी। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य संबंधी समस्या हल हो सकेगी। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। अपनी वस्तुएँ संभालकर रखें। रुका धन मिलेगा। 🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-* *(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)* भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। अर्थ संबंधी कार्यों में सफलता से हर्ष होगा। सुखद भविष्य का स्वप्न साकार होगा। विचारों से सकारात्मकता बढ़ेगी। दुस्साहस न करें। व्यापार में इच्छित लाभ होगा। 🏹 *राशि फलादेश धनु :-* *(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)* स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। अच्छे लोगों से भेंट होगी जो आपके हितचिंतक रहेंगे। योजनाएं फलीभूत होंगी। नौकरी में पदोन्नाति के योग हैं। आलस्य से बचकर रहें। परिवार की मदद मिलेगी। 🐊 *राशि फलादेश मकर :-* *(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)* कष्ट, भय, चिंता व बेचैनी का माहौल बन सकता है। दु:खद समाचार मिल सकता है, धैर्य रखें। किसी के भरोसे न रहकर अपना कार्य स्वयं करें। महत्वपूर्ण कार्यों में हस्तक्षेप से नुकसान की आशंका है। परिवार में तनाव रहेगा। व्यापार-व्यवसाय मध्यम रहेगा। 🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-* *(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)* पुराना रोग उभर सकता है। प्रयास सफल रहेंगे। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। यात्रा का शुभ योग होने के साथ ही कठिन कार्य में भी सफलता मिल सकेगी। रिश्तेदारों से संपत्ति संबंधी विवाद हो सकता है। व्यापार-नौकरी में लाभ होगा। 🐋 *राशि फलादेश मीन :-* *(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)* पुराने मित्र व संबंधियों से मुलाकात होगी। शुभ समाचार मिलेंगे। मान बढ़ेगा। प्रसन्नता रहेगी। मन में उत्साह रहेगा, जिससे कार्य की गति बढ़ेगी। आपके कार्यों को समाज में प्रशंसा मिलेगी। भागीदारी में आपके द्वारा लिए गए निर्णयों से लाभ होगा। ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ *🎊🎉🎁 आज जिनका जन्मदिवस या विवाह की वर्षगांठ हैं, उन सभी प्रिय मित्रो को कोटिशः शुभकामनायें🎁🎊🎉* ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ और ज़रा इन बातों पर भी ज़रूर ध्यान दें मित्रों...! अगर...??? 1) खूब मेहनत के बाद भी या व्यापार-व्यवसाय में पर्याप्त इन्वेस्टमेंट करने के बाद भी आप अकारण आर्थिक दृष्टी से निरंतर पिछड़ते ही जा रहे हैं....? 2) एक ही नौकरी में लम्बे समय तक कार्य नहीं कर पाते हैं या वहां दिल से काम करते हुए भी आपको कोई पूछता ही नहीं है...? आपकी प्रमोशन ड्यू है कब से लेकिन आप बस दूसरों को आगे बढ़ते देख कर अपने नसीब को कोस रहे हैं...? आपके प्रतिद्वंदी अलग से परेशान करते रहते हैं...? 3) आपस में निरंतर अकारण क्लेश होता रहता है..? 4) शेयर मार्किट से कमाना चाहते हैं पर हर बार नुकसान उठा बैठते हैं...? 5) बीमारी आपको छोड़ ही नहीं रही है...? घर का हर एक व्यक्ति किसी न किसी बीमारी से त्रस्त है...? आमदनी का एक बड़ा हिस्सा हमेशां इसी पर खर्च हो जाता है...? 6) अकारण ही विवाह योग्य बच्चों के विवाह में दिक्कतें आ रही हैं...? 7) शत्रुओं ने आपकी रात की नींद और दिन का चैन हराम किया हुआ है...? 8) पैतृक सम्पति विवाद सुलझ ही नहीं रहा है...? और संपति केवास्तविक हकदार आप हैं तथा आप इसे अपने हक में सुलझना चाहते हैं...? 9) विदेश यात्रा या विदेश में सेटलमेंट को लेकर बहुत समय से परेशान हैं...? 10) आपको डरावने सपने आते हैं..? सपने में सांप या भूत-प्रेत या ऐसे ही नींद उड़ाने वाले दृश्य दीखते हैं...? 11) फिल्म या मीडिया में बहुत समय से संघर्ष के बाद भी सफलता​ नहीं मिल रही...? 12) राजनीति को ही आप अपना कैरियर बनाना चाहते हैं पर आपको कुछ भी समझ नहीं आ रहा...? यदि हाँ...??? तो यह सब अकारण ही नहीं है...! इसके पीछे बहुत ठोस कारण हैं जो कि आपकी जन्म कुंडली या आपके घर-आफिस का वास्तु देखकर या आपकी जन्मकुंडली भी ना होने की स्थिति में हमारे दीर्घ अध्ययन और प्रैक्टिकल ज्योतिषीय अनुभव के आधार पर अन्य विधियों से जाने जा सकते हैं...? तो अब आप और देरी ना करें और तुरंत हमें फोन करें...! आपकी उन्नति निश्चित है और आपकी मंजिल अब दूर नहीं...! ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※ प्रस्तुति: आचार्य मदन टी.कौशिक मुंबई (सिरसा-हरियाणा वाले, मूल निकास: गौड़ बंगाल एवं तत्पश्चात ढाणी भालोट-झुंझनूँ-राज.) (चयनित/Appointed/) ज्योतिष एवं वास्तु शोध वैज्ञानिक एवं पूर्व विभागाध्यक्ष: TARF, Dadar-Mumbai साभार: बाँके बिहारी (धुरंधर वैदिक विद्वानों का अद्वितीय वैश्विकमंच) कार्यकारी अध्यक्ष: एस्ट्रो-वर्ल्ड मुंबई व सिरसा (सभी दैहिक दैविक भौतिक समस्याओं का एक ही जगह सटीक निदान व स्थायी समाधान) अध्यक्ष: सातफेरे डॉट कॉम मुंबई व सिरसा (आपके अपनों के दिव्य एवं सुसंस्कारी वैवाहिक जीवन की झटपट शुरूआत हेतु अनूठा संस्थान) नोट: हमारी या हमारे संस्थान 'एस्ट्रो-वर्ल्ड' तथा आपके अपनों के वैवाहिक जीवन सम्बन्धी सभी समस्याओं का एकमात्र हल एवं विश्व के इस सबसे अनूठे मंच 'सातफेरे डॉट कॉम' मुंबई या सिरसा की किसी भी प्रकार की गरिमापूर्ण सेवा जैसे वैज्ञानिकतापूर्ण ज्योतिष-वास्तु मार्गदर्शन, सभी प्रकार के मुहूर्त शोधन, नामकरण संस्कार, विवाह संस्कार या अन्य कोई भी वैदिक पूजा-अनुष्ठान आयोजित करवाने, रत्न अभिमन्त्रण, सभी राशिरत्न-उपरत्न, मणि-माणिक्य, दक्षिणावर्ती शँख (जो कि घर में विधिवत रखने मात्र से ही बदल दे आपका भाग्य हमेशां-2 के लिए...!), सियारसिंगी, भुजयुग्म (हत्थाजोड़ी, जो तिज़ोरी आपकी कभी ख़ाली ना होने दे), नागकेसर, विविध प्रकार के वास्तु पिरामिडज एवं अन्य कई प्रकार की सौभाग्यवर्धक वस्तुओं की प्राप्ति हेतु हमारे... सम्पर्क सूत्र: 9987815015 / 9991610514 ईमेल आई डी: [email protected] 🌺आपका दिन आदि वैद्य (भगवान धन्वंतरि जी) की कृपा से परम मंगलमय हो मित्रो! *🚩जयतु जयतु हिन्दुराष्ट्रम🚩* 🇮🇳🇮🇳 *भारत माता की जय* 🚩🚩 ।। 🐚 *शुभम भवतु* 🐚 ।। ※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※

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💢 घरेलू उपाय ================================== 💢जुकाम से नाक बंद हो जाना : ठंड या बारिश के मौसम में जुकाम के कारण नाक बंद हो जाती है। ऐसे मौसम में यह समस्या एक आम बात है। इससे बचाव के लिए अजवाय को भून कर पीस ले। उसे एक सूती कपड़े में बांधकर इनहेलर बना लें। इसे बच्चों को सुघांते रहे इससे निकलने वाली सुगंध नाक को खोलने में मदद करती है। 💢रात को सोते समय रोज आंवले का चूर्ण शहद या पानी से लेने से पेट साफ रहता है और आंखों से संबंधित रोगों में लाभ मिलता है। सूखे आंवले को शुद्ध घी में तलकर पीस लें, इस चूर्ण का सिर पर लेप करने से नकसीर में लाभ मिलता है। 💢पपीते के छिलकों को सुखाकर और पीसकर चूर्ण बना लीजिए। इस चूर्ण में ग्लिसीरीन मिलाकर दिन में दो बार फटी हुई एड़ियों में लगाने से बहुत जल्दी फायदा होता है। 💢भोजन करने से पहले दो या तीन पके टमाटरों को काटकर उसमें पिसी हुई कालीमिर्च, सेंधा नमक एवं हरा धनिया मिलाकर खाएं। इससे चेहरे पर लाली आती है व पौरूष शक्ति बढ़ती है। 💢पेट में कीड़े होने पर सुबह खाली पेट टमाटर में पिसी हुई कालीमिर्च लगाकर खाने से लाभ होता है।या उसमे हींग का छौंका लगा दीजिये ,अब उसे पी जाइए, सारे कीड़े मर जायेंगे. 💢बालों को स्वस्थ रखने और उनको बीमारी इत्यादि से बचाने के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे ना सिर्फ आपके बालों में चमक आएगी बल्कि आपके बाल किसी भी होने वाली बीमारी से भी बच पाएंगे। 💢त्वचा पर कहीं भी फुंसी उठने पर, काली मिर्च पानी के साथ पत्थर पर घिस कर अनामिका अंगुली से सिर्फ फुंसी पर लगाने से फुंसी बैठ जाती है। 💢सिरदर्द होने पर दालचीनी को पानी के साथ महीन पीसकर माथे पर पतला लेप कर लगा लीजिए। लेप सूख जाने पर उसे हटा लीजिए। 3-4 लेप लगाने पर सिरदर्द होना बंद हो जाएगा। 💢चेहरे की झांई- कुछ दिनों तक चेहरे पर मटर के आटे का उबटन मलते रहने से झांई और धब्बे समाप्त हो जाते है। 💢आंवला का सेवन करने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। 💢सुबह नाश्ते में आंवले का मुरब्बा खाने आपका शरीर स्वस्थ बना रहता है। 🌀टेंशन ..... 💢जब आप घर में हों तो बच्चों के साथ खूब मस्ती करें, उछल-कूद करें, यह क्रिया आपको एनर्जी देगी और मन प्रफुल्लित रखेगी। वैसे भी बच्चों के साथ सारे टेंशन दूर हो जाते हैं। 🌀मुँहासे ...... 💢हल्दी, बेसन का उबटन बनाकर चेहरे पर लगाने से भी मुँहासे दूर होते हैं। 💢नीम की पत्तियों के चूर्ण में मुलतानी मिट्टी और गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बना लें व इसे चेहरे पर लगाएँ। 💢नीम की जड़ को पीसकर मुँहासों पर लगाने से भी वे ठीक हो जाते हैं। 💢काली मिट्टी को घिसकर मुँहासों पर लगाने से भी वे नष्ट हो जाते हैं।

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