श्री साँवलिया सेठ (राज.)

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Mahaveer kumar brahmbhatt Nov 6, 2017
साँवलिया सेठ मंदिर (मँड़पिया )चितौड़गढ़ से 40 कि.मी. उदयपुर रोड़ पर

*क्या यह सत्य है ना कि भगवान न जाने कब किसी को किसी का भगवान बना कर भेज देते हैं? *8 साल का एक बच्चा 1 रूपये का सिक्का मुट्ठी में लेकर एक दुकान पर जाकर कहा, *क्या आपके दुकान में ईश्वर मिलेंगे? *दुकानदार ने यह बात सुनकर सिक्का नीचे फेंक दिया और बच्चे को निकाल दिया। *बच्चा पास की दुकान में जाकर 1 रूपये का सिक्का लेकर *चुपचाप खड़ा रहा! *ए लड़के.. 1 रूपये में तुम क्या चाहते हो? *मुझे ईश्वर चाहिए। आपके दुकान में है? *दूसरे दुकानदार ने भी भगा दिया। *लेकिन, उस अबोध बालक ने हार नहीं मानी। एक दुकान से दूसरी दुकान, दूसरी से तीसरी, ऐसा करते करते कुल चालीस दुकानों के चक्कर काटने के बाद एक बूढ़े दुकानदार के पास पहुंचा। उस बूढ़े दुकानदार ने पूछा, *तुम ईश्वर को क्यों खरीदना चाहते हो? क्या करोगे ईश्वर लेकर? *पहली बार एक दुकानदार के मुंह से यह प्रश्न सुनकर बच्चे के चेहरे पर आशा की किरणें लहराईं৷ लगता है इसी दुकान पर ही ईश्वर मिलेंगे ! *बच्चे ने बड़े उत्साह से उत्तर दिया, *इस दुनिया में मां के अलावा मेरा और कोई नहीं है। मेरी मां दिनभर काम करके मेरे लिए खाना लाती है। मेरी मां अब अस्पताल में हैं। अगर मेरी मां मर गई तो मुझे कौन खिलाएगा ? डाक्टर ने कहा है कि अब सिर्फ ईश्वर ही तुम्हारी मां को बचा सकते हैं। क्या आपके दुकान में ईश्वर मिलेंगे? हां, मिलेंगे...! कितने पैसे हैं तुम्हारे पास? सिर्फ एक रूपए। *कोई दिक्कत नहीं है। एक रूपए में ही ईश्वर मिल सकते हैं। दुकानदार बच्चे के हाथ से एक रूपए लेकर उसने पाया कि एक रूपए में एक गिलास पानी के अलावा बेचने के लिए और कुछ भी नहीं है। *इसलिए उस बच्चे को फिल्टर से एक गिलास पानी भरकर दिया और कहा, यह पानी पिलाने से ही तुम्हारी मां ठीक हो जाएगी। अगले दिन कुछ मेडिकल स्पेशलिस्ट उस अस्पताल में गए। बच्चे की मां का अॉप्रेशन हुआ। और बहुत जल्द ही वह स्वस्थ हो उठीं। *डिस्चार्ज के कागज़ पर अस्पताल का बिल देखकर उस महिला के होश उड़ गए। डॉक्टर ने उन्हें आश्वासन देकर कहा, "टेंशन की कोई बात नहीं है। एक वृद्ध सज्जन ने आपके सारे बिल चुका दिए हैं। साथ में एक चिट्ठी भी दी है"। महिला चिट्ठी खोलकर पढ़ने लगी, उसमें लिखा था- "मुझे धन्यवाद देने की कोई आवश्यकता नहीं है। आपको तो स्वयं ईश्वर ने ही बचाया है ... मैं तो सिर्फ एक ज़रिया हूं। यदि आप धन्यवाद देना ही चाहती हैं तो अपने अबोध बच्चे को दिजिए जो सिर्फ एक रूपए लेकर नासमझों की तरह ईश्वर को ढूंढने निकल पड़ा। *उसके मन में यह दृढ़ विश्वास था कि एकमात्र ईश्वर ही आपको बचा सकते है। विश्वास इसी को ही कहते हैं। ईश्वर को ढूंढने के लिए करोड़ों रुपए दान करने की ज़रूरत नहीं होती, यदि मन में अटूट विश्वास हो तो वे एक रूपए में भी मिल सकते हैं।" *आइए, इस महामारी से बचने के लिए हम सभी मन से ईश्वर को ढूंढे ... उनसे प्रार्थना करें... उनसे माफ़ी मांगे..! 🌹🙏*जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌹

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white beauty Jul 31, 2020

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white beauty Jul 31, 2020

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अध्यात्म और वास्तुकला की अनूठी मिसाल: जमुआ-देवघर मार्ग में मिर्जागंज-जगन्नाथडीह में स्थित जलीय सूर्य मंदिर झारखंड के गौरव के रूप में जाना जाता है। यह आध्यात्मिक आस्था के साथ-साथ अपने उत्कृष्ट बनावट की वजह से भी आकर्षण का केंद्र है। मुख्य पथ के किनारे तालाब के बीच स्थित इस मंदिर के गर्भ-गृह तक पहुंचने के लिए 60 फीट लंबे आरसीसी पुल से गुजरना पड़ता है। दिल्ली के लोटस टेंपल की तर्ज पर निर्मित वास्तुकला की अनुपम धरोहर इस मंदिर की कल्पना एक कमलपुष्प रूपी रथ के रूप में की गई है। गर्भ-गृह में रथ पर सवार भगवान भाष्कर के साथ-साथ माँ गायत्री, हनुमान, शिव, राम-सीता, राधा-कृष्ण, दुर्गा, गणेश जौसे देवी-देवताओं की संगमरमर की नयनाभिराम मूर्तियां विराजमान हैं। छह द्वार युक्त मंदिर को कमलपुष्प समान छह क्षैतिज वाह्य पंखुड़ियों के बीच अंगुफित कलि रूप में बनाया गया है। मंदिर के चारों ओर कोणार्क मंदिर की तर्ज पर रथ के छह पहिए बने हैं तथा सिंह द्वार पर इंद्रधनुष सा सात अलग-अलग रंगों के सात गम्य मुद्रा में अश्व बनाकर लगाम सारथी बने अरुण के हाथों में थमाई गई है।

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