Komal dagar
Komal dagar Mar 26, 2020

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कामेंट्स

simran Mar 26, 2020

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champalal m kadela Mar 26, 2020

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शुभप्रभात🙏🏻🙏🏻 #माँ_दुर्गा की नौ शक्तियों का।। दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है।। दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ।। ब्रह्म का अर्थ है, तपस्या, तप का आचरण करने वाली भगवती। जिस कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया, इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमण्डल रहता है। अपने पूर्व जन्म में ये राजा हिमालय के घर पुत्री रुप में उत्पन्न हुई थी। भगवान शंकर को पति रुप में प्राप्त करने के लिए इन्होने घोर तपस्या की थी। माँ दुर्गा का यह दूसरा स्वरुप भक्तों और सिद्धों को अनन्त फ़ल देने वाला कहा गया है। #माँ_ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।। 🚩🔱जय माता ब्रह्मचारणी🔱🚩

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🎎🌲🌹शुभ नवरात्रि🌹🌲🎎 ❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️❇️ 🙏🌋नवरात्रि का दूसरा दिन🌋🙏 ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️ 🚩👣🐯जय माँ ब्रह्मचारिणी🐯👣🚩 🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 🚩🐚🌹ॐ विष्णु देवाय नमः 🌹🐚🚩 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🔔🌿🌷शुभ गुरुवार🌷🌿🔔 ⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️⚛️ 🏖🍁🌻सुप्रभात🌻🍁🏖 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 👣 या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। 🐯 नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। 🎭मङ्गलमयी सुबह की शुरुआत माता रानी के चरण कमलों के दर्शनों के साथ🎭 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣 2.🦁 ब्रह्मचारिणी देवी 🌹दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। 💐देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ।। 🐯 माँ दुर्गा का दूसरा स्वरुप ब्रह्मचारिणी है | यहाँ ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाला | 🎎माता का स्वरूप :- माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप शांत और ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है | उनके बाएं हाथ में कमंडल और दायें हाथ में जप की माला रहती है | माता शक्ति के दुसरे स्वरुप की पूजा करने से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। माँ ब्रह्चारिणी के स्वरुप का वर्णन इस श्लोक में देखने को मिलता है | 🚩 मंत्र: ऊँ देवी ब्रह्मचारीय नमः चार देवी ब्रह्मचारिण्यै नम:।। ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा का महत्त्व माँ दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप अनन्त फल देने वाला है। इनकी सच्चे मन से भक्ति करने से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। 🌷दुर्गा पूजा के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन स्वाधिष्ठान चक्र में होता है। इस चक्र में अवस्थित मन वाला योगी उनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है। जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्त्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता है। माँ ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से उसे सर्वत्र सिद्धि और विजय प्राप्त होती है। 🎎 ध्यान :- वन्दे वांछित लाभय चन्द्रार्घकृत शेखरम्। जपला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभम ण्ड गौरवर्ण स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्रम्। धवल परिधाना ब्रह्मरूप पुष्पलंकार भूषिताम् ब्रह्म परम वंदना पल्लवराधरण कांत कपोला पीन। पयोधराम् कमनीया लावण्य स्मरिलन निम्ननाभि नितम्बनीम् कम 🎭स्तोत्र पाठ :- तपश्चारिणी त्वहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधर्मचारिणी प्रणमाम्यम् ब्रह्म शंकरप्रिया त्वहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी। शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणम्यहम् ब्रह्म 🦁 कवच :- त्रिपुरा में ह्रदय पातु ललाटे पातु शंकरभामिनी। अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्ध च कपोलो ातु पंचदशी कण्ठे पातु मध्यदेशे पातु महेश्वरी ठे षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पाद्यो। अंग प्रत्यंग सतत पातु ब्रह्मचारिणी। 🚩👣🌹जय माता दी🌹👣🚩 🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯🐯

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Shanti Pathak Mar 26, 2020

🌹🌹जय माता दी 🌹🌹 🌹🌹जय मां ब्रह्मचारिणी 🌹🌹 🌹🌹सुप्रभात वंदन जी,शुभ वृहस्पतिवार 🌹🌹 नवरात्र के दूसरे दिन इस विधि से करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा मां ब्रह्मचारिणी इनको ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है. कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के कारण भी इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है. इस विधी से करें मां ब्रह्मचारिणी की उपासना कलश स्थापना के साथ ही 25 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरु हो गई है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है. नवरात्र के पहले दिन जहां मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाती है वहीं दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है. इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी. इस कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना जाता है. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं. मां ब्रह्मचारिणी इनको ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है. कठोर साधना और ब्रह्म में लीन रहने के कारण भी इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है. विद्यार्थियों के लिए और तपस्वियों के लिए इनकी पूजा बहुत ही शुभ फलदायी होती है. जिनका स्वाधिष्ठान चक्र कमजोर हो उनके लिए भी मां ब्रह्मचारिणी की उपासना अत्यंत अनुकूल होती है. क्या है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि? - मां ब्रह्मचारिणी की उपासना के समय पीले अथवा सफेद वस्त्र धारण करें. - मां को सफेद वस्तुएं अर्पित करें, जैसे- मिसरी, शक्कर या पंचामृत. - ज्ञान और वैराग्य का कोई भी मंत्र जपा जा सकता है. - वैसे मां ब्रह्मचारिणी के लिए "ॐ ऐं नमः" का जाप करें. - जलीय आहार और फलाहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए. स्वाधिष्ठान चक्र के कमजोर होने पर क्या होता है? - व्यक्ति के अंदर अविश्वास रहता है. - ऐसे लोगों को हमेशा बुरा होने का भय होता है. - ऐसे लोग कभी कभी काफी क्रूर होते हैं. - साथ ही कभी कभी बहुत कामुक होते हैं. स्वाधिष्ठान चक्र को मजबूत करने के लिए क्या करें? - रात्रि को सफेद वस्त्र धारण करें. - सफेद आसन पर बैठें तो उत्तम होगा. - इसके बाद देवी को सफेद फूल अर्पित करें. - पहले अपने गुरु का स्मरण करें. - इसके बाद आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाएं. - ध्यान के बाद देवी या अपने गुरु से स्वाधिष्ठान चक्र को मजबूत करने की प्रार्थना करें.

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jatan kurveti Mar 26, 2020

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