M.S.Chauhan
M.S.Chauhan Jan 13, 2021

*शुभ दिन गुरुवार* *जय हरि विष्णुदेव* *आपको सपरिवार मकर संक्रान्ति की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें* *"हरिद्वार कुम्भ मेला" उसके "साही स्नान" और महत्व* 83 वर्षों के बाद पहली बार 12 साल की जगह 11 साल में आयोजित हो रहा है कुंभ मेला… कुंभ मेला, दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है. शास्त्रों के अनुसार, पृथ्वी पर 12 स्थानों में से चार स्थान भारत में हैं, हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक. इसलिए हर 12वें वर्ष में कुंभ का आयोजन इन चार स्थानों पर किया जाता है. हालांकि, कुंभ मेले के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि यह 11वें वर्ष में हरिद्वार में होने जा रहा है. 2021 में लगने वाला कुंभ मेला इस साल हरिद्वार में होने वाला है क्योंकि ग्रह-गोचर चल रहे हैं. अमृत योग का निर्माण काल गणना के अनुसार होता है, जब कुंभ राशि का गुरु आर्य के सूर्य में परिवर्तित होता है. अर्थात गुरु, कुंभ राशि में नहीं होंगे. इसलिए इस बार 11वें साल में कुंभ का आयोजन हो रहा है. 83 वर्षों की अवधि के बाद, इस वर्ष यह अवसर आ रहा है. इससे पहले, इस तरह की सह-घटना वर्ष 1760, 1885 और 1938 में हुई थी. इस साल कुंभ मेले की शुरुआत 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति से हो रही है. कुंभ मेला हिंदुओं के सबसे शुभ और सबसे बड़े अनुष्ठानों में से एक है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस तरह की परंपरा समुंद्र मंथन के बाद से शुरू हुई जब अमृत की बूंदें मृदुलोक सहित 12 स्थानों में बिखरी हुई थीं. कहते हैं इस अमृत कलश के लिए भगवान और दानवों के बीच रस्साकशी भी हुई थी. इस साल यह भव्य आयोजन 14 जनवरी से शुरू होने जा रहा है और अप्रैल 2021 तक जारी रहेगा. उम्मीद की जा रही है कि कुंभ मेले के दौरान पवित्र गंगा में डुबकी लगाने के लिए लाखों भक्त इकट्ठे होंगे. गंगा स्नान का महत्व शास्त्रों के अनुसार जो भी व्यक्ति कुंभ मेले के दौरान गंगा में स्नान करता है तो उन्हें मोक्ष प्राप्त होता हैं. और कहते हैं कि सभी पाप और रोगों से मुक्ति मिल जाती है. आपको जानकारी देना चाहेंगे कि इस साल कुंभ मेले के दौरान 4 शाही स्नान होंगे और इसमें 13 अखाड़े भाग लेंगे. इन अखाड़ों से झांकी निकाली जाएंगी. इस झांकी में सबसे आगे नागा बाबा होंगे और महंत, मंडलेश्वर, महामंडलेश्वर और आचार्य महामंडलेश्वर नागा बाबाओं का अनुसरण करेंगे. शाही स्नान व सामन्य स्नान 2021 की तिथियां इस प्रकार है- 👉मकर संक्रांति (स्नान) – जनवरी 14, 2021 👉मौनी अमावस्या (स्नान) –फरवरी 11, 2021 👉वसंत पंचमी (स्नान) –फरवरी 16, 2021 👉माघ पूर्णिमा (स्नान)–फरवरी 27, 2021 👉महा शिवरात्रि (शाही स्नान)- मार्च 11, 2021 👉सोमवती अमावस्या (शाही स्नान) –अप्रैल 12, 2021 👉बैशाखी (शाही स्नान) –अप्रैल 14, 2021 👉रामनवमी(स्नान) –अप्रैल 21, 2021 👉चैत्र पूर्णिमा (शाही स्नान) –अप्रैल 27, 2021

*शुभ दिन गुरुवार* 
*जय हरि विष्णुदेव*
*आपको सपरिवार मकर संक्रान्ति की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें*
*"हरिद्वार कुम्भ मेला" उसके "साही स्नान" और महत्व*
83 वर्षों के बाद पहली बार 12 साल की जगह 11 साल में आयोजित हो रहा है कुंभ मेला…

कुंभ मेला, दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है. शास्त्रों के अनुसार, पृथ्वी पर 12 स्थानों में से चार स्थान भारत में हैं, हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक. इसलिए हर 12वें वर्ष में कुंभ का आयोजन इन चार स्थानों पर किया जाता है. हालांकि, कुंभ मेले के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि यह 11वें वर्ष में हरिद्वार में होने जा रहा है.

2021 में लगने वाला कुंभ मेला इस साल हरिद्वार में होने वाला है क्योंकि ग्रह-गोचर चल रहे हैं. अमृत योग का निर्माण काल गणना के अनुसार होता है, जब कुंभ राशि का गुरु आर्य के सूर्य में परिवर्तित होता है. अर्थात गुरु, कुंभ राशि में नहीं होंगे. इसलिए इस बार 11वें साल में कुंभ का आयोजन हो रहा है.

83 वर्षों की अवधि के बाद, इस वर्ष यह अवसर आ रहा है. इससे पहले, इस तरह की सह-घटना वर्ष 1760, 1885 और 1938 में हुई थी.
इस साल कुंभ मेले की शुरुआत 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति से हो रही है. कुंभ मेला हिंदुओं के सबसे शुभ और सबसे बड़े अनुष्ठानों में से एक है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस तरह की परंपरा समुंद्र मंथन के बाद से शुरू हुई जब अमृत की बूंदें मृदुलोक सहित 12 स्थानों में बिखरी हुई थीं. कहते हैं इस अमृत कलश के लिए भगवान और दानवों के बीच रस्साकशी भी हुई थी. इस साल यह भव्य आयोजन 14 जनवरी से शुरू होने जा रहा है और अप्रैल 2021 तक जारी रहेगा.

उम्मीद की जा रही है कि कुंभ मेले के दौरान पवित्र गंगा में डुबकी लगाने के लिए लाखों भक्त इकट्ठे होंगे.

गंगा स्नान का महत्व
शास्त्रों के अनुसार जो भी व्यक्ति कुंभ मेले के दौरान गंगा में स्नान करता है तो उन्हें मोक्ष प्राप्त होता हैं. और कहते हैं कि सभी पाप और रोगों से मुक्ति मिल जाती है.

आपको जानकारी देना चाहेंगे कि इस साल कुंभ मेले के दौरान 4 शाही स्नान होंगे और इसमें 13 अखाड़े भाग लेंगे. इन अखाड़ों से झांकी निकाली जाएंगी. इस झांकी में सबसे आगे नागा बाबा होंगे और महंत, मंडलेश्वर, महामंडलेश्वर और आचार्य महामंडलेश्वर नागा बाबाओं का अनुसरण करेंगे.

शाही स्नान व सामन्य स्नान 2021 की तिथियां इस प्रकार है-

👉मकर संक्रांति (स्नान) – जनवरी 14, 2021
👉मौनी अमावस्या (स्नान) –फरवरी 11, 2021
👉वसंत पंचमी (स्नान) –फरवरी 16, 2021
👉माघ पूर्णिमा (स्नान)–फरवरी 27, 2021
👉महा शिवरात्रि (शाही स्नान)- मार्च 11, 2021
👉सोमवती अमावस्या (शाही स्नान) –अप्रैल 12, 2021
👉बैशाखी (शाही स्नान) –अप्रैल 14, 2021
👉रामनवमी(स्नान) –अप्रैल 21, 2021
👉चैत्र पूर्णिमा (शाही स्नान) –अप्रैल 27, 2021

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कामेंट्स

neeraj Jan 13, 2021
Happy makar sankranti🌹good morning🌹🌹

Seema Sharma. Himachal (chd) Jan 13, 2021
*उत्तरायण का सूर्य आपके स्वप्नों को नयी ऊष्मा प्रदान करे,* *आपके यश एवं कीर्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि हो,* *आप परिजनों सहित स्वस्थ रहें, दीर्घायु हों, यही कामना है।* शुभ रात्रि जी 🙏😊 *परिवार में सभी को लोहड़ी और मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ I* 🙏🙏🙏🙏🙏

आशुतोष Jan 13, 2021
।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। शुभ गुरुवार सुप्रभात भगवान सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश के कारण जीवन में प्रकाश वृद्धि के प्रतीक एवं समरसता का संदेश देने वाले मकर संक्रांति महापर्व की आप को एवं आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं । ।। जय श्री कृष्ण ।।

🌹सुविचार 🌹 Jan 14, 2021
🌹शुभ गुरुवार 🌹 🙏जय श्री हरि विष्णु 🙏 आप सभी को मकर संक्रांति के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ

hindusthani mohan sen Jan 14, 2021
✨✨✨✨✨✨✨✨✨ 💐💐💐💐💐💐💐💐💐 _*हर पतंग जानती है*_ _*अंत में कचरे मे जाना है*_ _*लेकिन उसके पहले हमे*_ _*आसमान छूकर दिखाना है*_ _*" बस ज़िंदगी भी यही चाहती है "*_ ✨✨✨✨✨✨✨✨✨ *🎀 _शुभ मकर सक्रांति 🎀_* _*आपको ओर आपके परिवार को मकर सक्रांति की*_ _*हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं*_ 🎍🎍🎍🎍🎍🎍🎍🎍🎍 हिंदुस्तानी मोहन सेन 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

M.S.Chauhan Jan 17, 2021

*शुभ दिन सोमवार* *ॐ नमः शिवाय* *🙏हर हर महादेव🙏* *सत्यम् शिवम् सुन्दरम्* *भाई-बहनों, शास्त्रो का महावाक्य है सत्यम् शिवम् सुन्दरम् , मानव जीवन के यही तीन मूल्य हैं, जो सत्य है वही शिव है और जो शिव है वहीं सुंदर है, पश्चिम का सौंदर्यशास्त्री यह मानकर चलता है कि सुंदरता द्रष्टा की दृष्टि में है, यानी सौंदर्य बोध नितांत व्यक्तिनिष्ठ है, परन्तु अध्यात्म सुन्दरता की इस परिभाषा को खारिज कर देती है, वह सत्य, शिव और सुन्दर को सर्वथा वस्तुनिष्ठ मानती है, मूल्य सापेक्ष न होकर निरपेक्ष हैं।* *मनुष्य इसलिये मनुष्य है, क्योंकि वह मूल्यों के अधीन है, मूल्य उसकी विशिष्ट संपत्ति है, सुन्दर क्या है? जो शिव है वही सुंदर है, अर्थात जिसमें शिवत्व नहीं है, उसमें सौंदर्य भी नहीं है, "यस्मिन् शिवत्वंनास्तितस्मिन सुन्दरम् अपिनास्तिएव" हमारे मन को सुख देने वाली चीज सुंदर है, यह सुंदरता की बचकानी परिभाषा है, सुख और दु:ख संस्कारगत होने के नाते व्यक्तिनिष्ठ हैं, अनुकूल वेदना का नाम सुख है और प्रतिकूल वेदना का नाम दु:ख है।* *एक ही चीज किसी को सुख देती है और किसी को दु:ख, परंतु सुंदरता तो वस्तुनिष्ठ ही है, हमारे शास्त्र कहते है कि जो कल्याणकारी है वही सुंदर है, यह जरूरी नहीं है कि सुखद चीज सुंदर भी हो, गीता कहती है कि भोग का सुख भ्रामक है और अंतत: दु:ख वर्धक है, ये हि "संस्पर्शजाभोगा दु:खयोनयएवते" ऐसा सुख भी होता है जो शुरू में अमृत जैसा लगता है, किंतु उसका परिणाम विष तुल्य होता है।* *यदि क्षणिक सौंदर्यबोध आगे चलकर दीर्घकालीन दु:ख का कारण बने तो वह कतई सुंदर नहीं है, कष्टकर होने के नाते वर्तमान में साधना भले ही असुंदर लगे, किन्तु प्रगति में सहायक होने के नाते अंतत: वही सुन्दर है, गीता भी कहती है- "यत्तदग्रे विषामिवपरिणामेमृतोपमम्" यहाँ यह सवाल उठ सकता है कि जो कष्ट देने वाला है वह सुन्दर कैसे हो सकता है?* *यदि कोई कष्टकर अभ्यास दीर्घकालीन सौन्दर्य का बोध कराने में समर्थ है तो वह तप है इसलिये सुन्दर है, प्रमाद जनित सुख सुन्दर हो ही नहीं सकता, चूंकि तप विकास में हेतु है, अत: सुन्दर है, इस प्रकार सुन्दरं की परिभाषा निश्चित हुई, "यत् शिवंतत् सुन्दरम्" शिव का अर्थ है मंगल, जिसका अर्थ है कल्याण, इस प्रकार शिव में उत्कर्ष है, विकास यानी प्रगति है।* *शास्त्र बाहरी प्रगति का तिरस्कार नहीं करता है, अपितु सम्मान से उसे अभ्युदय कहता है, अशिक्षा से शिक्षा की ओर, दरिद्रता से समृद्धि की ओर, अपयश से यश की ओर, निस्तेज से तेजस्विता की ओर बढना प्रगति है, समृद्धि के पीछे कर्मकौशल होता है, प्रतिष्ठा किसी को उपहार में नहीं मिल जाती, विद्वान ही विद्वान के श्रम को जानता है- "विद्वान* *जानातिविद्वज्जन परिश्रम:"* *श्रम तो स्वयं सुंदर है, क्योंकि वह तप है।* *भीतरी प्रगति का भी प्रस्थान बिंदु जीवन मूल्य है, जीवत्व से ब्रह्मत्व की ओर जाना ही आध्यात्मिक प्रगति है, सत्व में स्थित होना प्रगति है, विनम्रता में अवस्थित होना प्रगति है, भक्ति में प्रतिष्ठित होना प्रगति है, शिवत्व का अर्थ ही है प्रगति या कल्याण, अत: दोस्तों! यह मानकर चलों कि जो शिव है वही सुंदर है, यह जीवन दर्शन की प्रमाणित मंगलमयी कसौटी है।* *आखिर शिवं का हेतु क्या है? भारतीय ऋषि कहते है सत्यं, वेदान्त की भाषा में सत्यम् शिवम् सुन्दरम् में हेतु फलात्मक सम्बंध है, इसका अर्थ हुआ- "यत् सत्यं तत् शिवम् यत् शिवंतत् सुंदरम्" शास्त्र को समझना हमारी बुद्धि की जिम्मेदारी है, शास्त्र को समझने के साथ-साथ उससे हमारे अनुभव का भी तालमेल बैठना चाहिये, यदि ऐसा नहीं होता है तो काम बिगडने लगता है।* *ऋषियों की तरह हमें भी सत्य की गहराई में प्रवेश करना चाहिये, वे कहाँ करते थे कि सत्य को छोडने का मतलब है ईश्वर को छोडना, ऋषियों ने सत्य को केवल समझा ही नहीं, अपितु जीवन में उसका भरपूर प्रयोग भी किया, यही कारण है कि वह सत्यनिष्ठ से भी आगे प्रयोगनिष्ठ बन गयें, रामायण और महाभारत हमारे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ हैं।* *जहाँ रामायण पारिवारिक सौहार्द का पर्याय है, वहीं महाभारत पारिवारिक कलह का, नीति को लेकर दोनों में अंतर है, नीति कहती है कि अपंग को राजा नहीं बनाया जा सकता, इसीलिये बडे भाई होने के बावजूद जन्मांध धृतराष्ट्र को राजा नहीं बनाया गया और पाण्डु को राजा बना दिया गया, बाद में धृतराष्ट्र को हस्तिनापुर का प्रतिनिधि बनाकर पाण्डु वन चले गये।* *इस सत्य को धृतराष्ट्र ने कभी नहीं स्वीकार किया और इसे अपने खिलाफ षड्यंत्र मानता रहा, यदि धृतराष्ट्र ने इस सत्य को स्वीकार कर लिया होता कि राजवंश पाण्डु का चलना चाहिये तो महाभारत होने का प्रश्न ही न उठता, धृतराष्ट्र शिवत्व की तलाश जीवन भर असत्य में करता रहा, उसकी इस उलटी चाल से कौरव वंश का नाश हो गया, इधर मर्यादा पुरुष भरत ने कभी भी सत्य को नहीं छोड़ा।* *भरतजी ने भरी सभा में घोषणा की कि सब सम्पत्ति रघुपति की है और आगे विनम्रता दिखाते हुए कहा कि "हित हमार सिय पति सेवकाई" सर्वसम्मति से राजा घोषित होने के बाद भी श्रीरामजी के आदेश पर वे अयोध्या के प्रतिनिधि ही बने रहे, इस प्रकार भरत के सत्याग्रह से रामायण निकली और धृतराष्ट्र के असत्याग्रह से महाभारत, भाई-बहनों, जिस सुंदरता से शिव न प्रकट हो वह छलावा है, और जिस शिव से सत्य न प्रकट हो वह अमंगलकारी है।* *जय महादेव!* *ओऊम् नम: शिवाय्* 🙏🌼🌷👏🌷🌼🙏

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Anilkumar Tailor Jan 17, 2021

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Anilkumar Tailor Jan 16, 2021

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Anilkumar Tailor Jan 15, 2021

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