salini nagre
salini nagre Jun 9, 2018

भोग तो बहुत देखे होंगे आपने जेसे 56 भोग और आज जो में आपको दिखाने जा रहा हूँ वो आपने कभी नही देखा होगा। 6056भोग वृन्दावन धाम में बिहारी जी के

#बृज_रज...💕💛💕

श्री वृंदावन में एक विरक्त संत रहते थे जिनका नाम था पूज्य श्री सेवादास जी महाराज । श्री सेवादास जी महाराज ने अपने जीवन मे किसी भी वस्तु का संग्रह नही किया । एक लंगोटी , कमंडल , माला और श्री शालिग्राम जी इतना ही साथ रखते थे । एक छोटी से कुटिया बना रखी थी जिसमे एक बाद सा सुंदर संदूक रखा हुआ था । संत जी बहुत कम ही कुटिया के भीतर बैठकर भजन करते थे , अपना अधिकतम समय वृक्ष के नीचे भजन मे व्यतीत करते थे । यदि कोई संत आ जाये तो कुटिया के भीतर उनका आसान लागा देते थे । एक समय वहां एक बदमाश व्यक्ति आय और उसकी दृष्टि कुटिया के भीतर रखी उस सुंदर संदुक पर पडी । उसने सोचा कि अवश्य ही महात्मा को कोई खजाना प्राप्त हुआ होगा जिसे यहां छुपा रखा है । महात्मा को धन का क्या काम ?मौका पाते ही इसे चुरा लूंगा ।

एक दिन बाबाजी कुटिया के पीछे भजन कर रहे थे । अवसर पाकर उस चोर ने कुटिया के भीतर प्रवेश किया और संदुक को तोड़ मरोड़ कर खोला । उस संदुक के भीतर एक और छोटी संदुक रखी थी । चोर ने उस संदुक को भी खोल तब देखा कि उसके भीतर भी एक और छोटी संदुक रखी है । ऐसा करते करते उसे कई संदुक प्राप्त हुई और अंत मे एक छोटी संदुक उसे प्राप्त हुई । उसने वह संदुक खोली और देखकर बडा दुखी हो गया । उसमे केवल मिट्टी रखी थी । अत्यंत दुख में भरकर वह कुटिया के बाहर निकल ही रहा था की उस समय श्री सेवादास जी वहां पर आ गए । श्री सेवादास जी ने चोर से कहा – तुम इतने दुखी क्यो हो ? चोर ने कहा – इनती सुंदर संदुक मे कोई क्या मिट्टी भरकर रखता है ? बड़े अजीब महात्मा हो।

श्री सेवादास जी बोले – अत्यंतर श्रेष्ठ मुल्यवान वस्तु को संदुक मे ही रखना तो उचित है । चोर बोला – ये मिट्टी कौनसी मूल्यवान वस्तु है ? बाबा बोले – ये कोई साधारण मिट्टी नही है , यह तो पवित्र श्री वृंदावन रज है । यहां की रज के प्रताप से अनेक संतो ने भगवान् श्री कृष्ण को प्राप्त किया है । यह रज प्राप्त करने के लिए देवता भी ललचाते है । यहां की रज को श्रीकृष्ण के चरणकमलों का स्पर्श प्राप्त है । श्रीकृष्ण ने तो इस रज को अपनी श्रीमुख मे रखा है । चोर को बाबा की बात कुछ अधिक समझ नही आयी और वह कुटिया से बहार जाने लगा । बाबा ने कहा – सुनो ! इतना कष्ट करके खाली हाथ जा रहे हो , मेहनत का फल भी तो तुम्हे मिलना चाहिए । चोर ने कहा – क्यों हँसी मजाक करते है , आप के पास देने के लिए है भी क्या ?

श्री सेवादास जी कहने लगे -मेरे पास तो देने के लिए कुछ है नही परंतु इस ब्रज रज मे सब कुछ प्रदान करने की सामर्थ्य है । चोर बोला – मिट्टी किसीको भला क्या दे सकती है ? विश्वास हो तो यह रज स्वयं प्रभु से मिला सकती है ।चोरी करना तो तुम्हारा काम धंदा है और महात्मा के यहां से खाली हाथ जाएगा तो यह भी ठीक नही । जाते जाते यह प्रसाद लेकर जा । इतना कहकर श्री सेवादास जी ने थोड़ी से ब्रज रज लेकर उसे चोर के माथे पर लगा दिया । माथे पर रज का स्पर्श होते ही वह चोर भाव मे भरकर भगवान् के पवित्र नामो का उच्चारण करने लगा – श्री राधा कृष्ण ,केशव , गोविंद गोविंद । उसका हृदय निर्मल हो गया और वह महात्मा के चरणों मे गिर गया । महात्मा ने उसे हरिनाम जप और संत सेवा का उपदेश दिया देकर उसका जीवन कृष्णमय बना दिया ।🌹🌹

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कामेंट्स

PDJOSHI Jan 26, 2020

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Jaipanday Panday Jan 25, 2020

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Neha Sharma, Haryana Jan 27, 2020

*जय श्री राधेकृष्णा*🥀🥀🙏 *शुभ प्रभात् वंदन*🥀🥀🙏 *स्नान कब और कैसे करें घर की समृद्धि बढ़ाना हमारे हाथ में है। सुबह के स्नान को धर्म शास्त्र में चार उपनाम दिए हैं। *1* *मुनि स्नान।* जो सुबह 4 से 5 के बीच किया जाता है। . *2* *देव स्नान।* जो सुबह 5 से 6 के बीच किया जाता है। . *3* *मानव स्नान।* जो सुबह 6 से 8 के बीच किया जाता है। . *4* *राक्षसी स्नान।* जो सुबह 8 के बाद किया जाता है। ▶मुनि स्नान सर्वोत्तम है। ▶देव स्नान उत्तम है। ▶मानव स्नान सामान्य है। ▶राक्षसी स्नान धर्म में निषेध है। . किसी भी मानव को 8 बजे के बाद स्नान नहीं करना चाहिए। . *मुनि स्नान .......* 👉घर में सुख ,शांति ,समृद्धि, विद्या , बल , आरोग्य , चेतना , प्रदान करता है। . *देव स्नान ......* 👉 आप के जीवन में यश , कीर्ती , धन, वैभव, सुख ,शान्ति, संतोष , प्रदान करता है। . *मानव स्नान.....* 👉काम में सफलता ,भाग्य, अच्छे कर्मों की सूझ, परिवार में एकता, मंगलमय , प्रदान करता है। . *राक्षसी स्नान.....* 👉 दरिद्रता , हानि , क्लेश ,धन हानि, परेशानी, प्रदान करता है । . किसी भी मनुष्य को 8 के बाद स्नान नहीं करना चाहिए। . पुराने जमाने में इसी लिए सभी सूरज निकलने से पहले स्नान करते थे। *खास कर जो घर की स्त्री होती थी।* चाहे वो स्त्री माँ के रूप में हो, पत्नी के रूप में हो, बहन के रूप में हो। . घर के बड़े बुजुर्ग यही समझाते सूरज के निकलने से पहले ही स्नान हो जाना चाहिए। . *ऐसा करने से धन, वैभव लक्ष्मी, आप के घर में सदैव वास करती है।* . उस समय...... एक मात्र व्यक्ति की कमाई से पूरा हरा भरा परिवार पल जाता था, और आज मात्र पारिवार में चार सदस्य भी कमाते हैं तो भी पूरा नहीं होता। . उस की वजह हम खुद ही हैं। पुराने नियमों को तोड़ कर अपनी सुख सुविधा के लिए हमने नए नियम बनाए हैं। . प्रकृति ......का नियम है, जो भी उस के नियमों का पालन नहीं करता, उस का दुष्परिणाम सब को मिलता है। . इसलिए अपने जीवन में कुछ नियमों को अपनायें और उन का पालन भी करें । . आप का भला हो, आपके अपनों का भला हो। . मनुष्य अवतार बार बार नहीं मिलता। . अपने जीवन को सुखमय बनायें। जीवन जीने के कुछ जरूरी नियम बनायें। ☝ *याद रखियेगा !* 👇 *संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है।* *सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोएं।* *पर संस्कार नहीं दिए तो वे जिंदगी भर रोएंगे।* मृत्यु उपरांत एक सवाल ये भी पूछा जायेगा कि अपनी अँगुलियों के नाम बताओ । जवाब:- अपने हाथ की छोटी उँगली से शुरू करें :- (1)जल (2) पथ्वी (3)आकाश (4)वायु (5) अग्नि ये वो बातें हैं जो बहुत कम लोगों को मालूम होंगी । 5 जगह हँसना करोड़ों पाप के बराबर है 1. श्मशान में 2. अर्थी के पीछे 3. शोक में 4. मन्दिर में 5. कथा में सिर्फ 1 बार ये message भेजो बहुत लोग इन पापों से बचेंगे ।। अकेले हो? परमात्मा को याद करो । परेशान हो? ग्रँथ पढ़ो । उदास हो? कथाएं पढ़ो। टेन्शन में हो? भगवत् गीता पढ़ो । फ्री हो? अच्छी चीजें करो हे परमात्मा हम पर और समस्त प्राणियों पर कृपा करो...... *सूचना* क्या आप जानते हैं ? हिन्दू ग्रंथ रामायण, गीता, आदि को सुनने,पढ़ने से कैन्सर नहीं होता है बल्कि कैन्सर अगर हो तो वो भी खत्म हो जाता है। व्रत,उपवास करने से तेज बढ़ता है, सरदर्द और बाल गिरने से बचाव होता है । आरती----के दौरान ताली बजाने से दिल मजबूत होता है । ये मैसेज असुर भेजने से रोकेगा मगर आप ऐसा नहीं होने दें और मैसेज सब नम्बरों को भेजें । श्रीमद् भगवद्गीता, भागवत्पुराण और रामायण का नित्य पाठ करें। . ''कैन्सर" एक खतरनाक बीमारी है... बहुत से लोग इसको खुद दावत देते हैं ... बहुत मामूली इलाज करके इस बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है ... अक्सर लोग खाना खाने के बाद "पानी" पी लेते हैं ... खाना खाने के बाद "पानी" ख़ून में मौजूद "कैन्सर "का अणु बनाने वाले '''सैल्स'''को '''आक्सीजन''' पैदा करता है... ''हिन्दु ग्रंथों में बताया गया है कि... खाने से पहले 'पानी' पीना अमृत" है... खाने के बीच मे 'पानी' पीना शरीर की 'पूजा' है ... खाना खत्म होने से पहले 'पानी' पीना "औषधि'' है... खाने के बाद 'पानी' पीना बीमारियों का घर है... बेहतर है खाना खत्म होने के कुछ देर बाद 'पानी' पीयें ... ये बात उनको भी बतायें जो आपको 'जान' से भी ज्यादा प्यारे हैं ... हरि हरि जय जय श्री हरि !!! रोज एक सेब नो डाक्टर । रोज पांच बादाम, नो कैन्सर । रोज एक निंबू, नो पेट बढ़ना । रोज एक गिलास दूध, नो बौना (कद का छोटा)। रोज 12 गिलास पानी, नो चेहरे की समस्या । रोज चार काजू, नो भूख । रोज मन्दिर जाओ, नो टेन्शन । रोज कथा सुनो मन को शान्ति मिलेगी । "चेहरे के लिए ताजा पानी"। "मन के लिए गीता की बातें"। "सेहत के लिए योग"। और खुश रहने के लिए परमात्मा को याद किया करो । अच्छी बातें फैलाना पुण्य का कार्य है....किस्मत में करोड़ों खुशियाँ लिख दी जाती हैं । जीवन के अंतिम दिनों में इन्सान एक एक पुण्य के लिए तरसेगा ।

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Gopal Jalan Jan 25, 2020

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Sonu Tomar Jan 25, 2020

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Mahesh Bhargava Jan 26, 2020

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Arun Jha Jan 27, 2020

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parm Krishna Jan 24, 2020

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