रूक्मिणी ः प्रसंग

🚩||ॐ||🚩
                  रुक्मिणी-प्रसंग
                     ★१★
             ◆~~~~~~~~~◆
    योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व एवं कृतित्व अमलात्मा महात्माओं तक का आदर्श रहा है, किंतु निहित स्वार्थ के वशीभूत प्राणी उनके लोकेतर उदात्त चरित्र पर उँगली उठाकर अपनी दूषित मनोवृति का ही परिचय देते हैं। एक का आरोप है कि अपनी पत्नी रुक्मिणी का परित्याग कर वे राधा के साथ रमण करते रहे। ऐसे मनगढ़न्त निष्कर्ष निकाल लेना उनके अज्ञान का ही द्योतक है।
      वीतराग महर्षि द्वैपायन व्यास द्वारा रचित श्रीकृष्ण चरितामृत श्रीमद्भागवत में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का विवरण मिलता है। गोकुल में नन्दराय जी के यहाँ ग्यारह वर्षों तक बाल-लीलायें कर बारहवें वर्ष के प्रवेष में श्रीकृष्ण मथुरा चले आये, कंस का अंत किया , शिक्षा प्राप्त की, राजकीय कार्यों में सहयोग देने लगे। अपने दामाद की मृत्यु का समाचार सुनकर मगध नरेश जरासंघ ने मथुरा पर भयंकर आक्रमण किये। उसे पराजित करने पर भी श्रीकृष्ण ने उसका अंत नही किये। हलधर बोले- कन्हैया! इसे मारते क्यों नहीं? छोड़ क्यों देते हो? श्रीकृष्ण ने कहा-दाऊ! यह हमारे नाना लगते हैं, पूज्यनीय हैं। एकांत में श्रीकृष्ण ने कहा- दाऊ! पृथ्वी पर बहुत से निशाचर फैले हुए हैं।हम एक-एक को कहाँ तक ढूंढ़ते फिरेंगे? यह पराजित और क्रोधान्ध जरासंघ उन सबको एकत्र कर यहाँ लाता रहेगा,उन्हें समाप्त करने के पश्चात अंत मे इसका भी क्रम आयेगा। जरासंघ अठ्ठारह बार मथुरा पर आक्रमण करता गया। श्रीकृष्ण ने मथुरा छोड़कर द्वारिका में राजधानी का निर्माण किया, जनता को यहाँ भेज दिया। स्वयं जरासंघ को युद्ध के लिए ललकारते हुए एक पहाड़ पे चढ़े और दूसरी ओर से द्वारिका की ओर निकल गये।
      दाऊ ने कहा- कन्हैया! तुम भाग रहे हो, लोग तुम्हें रणछोड़ कहेंगे, किंतु मैं कायरों की तरह भाग नहीं सकता। श्रीकृष्ण ने कहा- दाऊ! मैं भाग नहीं रह हूँ, यह युद्धनीति है। अभी उन्हें खुश हो लेने दें। उनका अंत अभी नहीं आया है। उनकी मृत्यु में किंचित् विलंब है। जरासंघ और उसकी सेना ने उस पहाड़ी को चारों ओर से घेर लिया,उसमें आग लगा दी। दावानल जैसी विभीषिका से धायँ-धायँ पूरा पहाड़ जलने लगा। खुशी मनाता हुआ जरासंघ लौट गया कि उन दोनों ग्वालों को मैंने भून डाला।
       राजकुमारी रुक्मिणी का स्वयंबर होने लगा।उसके पिता उसका विवाह चेदि नरेश शिशुपाल से करना चाहते थे। रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण में अनुरक्त थी। उसने श्रीकृष्ण से रक्षा की याचना की। श्रीकृष्ण वहाँ गये और रुक्मिणी को लेकर चले आये, उससे विधिवत विवाह किये। शादी-विवाहों द्वारा पड़ोसी नरेशों की मैत्री और सहायता से राजतंत्र को सुदृढ करना तत्कालीन प्रथा थी जिसके कारण श्रीकृष्ण के प्रासाद में आठ पटरानियाँ थीं। इतने वर्षों में श्रीकृष्ण एक बार भी लौटकर मथुरा या वृंदावन गये ही नहीं। राधा के संरक्षण में गोपियाँ भजन-चिन्तन करती रही! फिर भी लोगों का आछेप है कि रुक्मिणी जैसी पत्नी के होते हुए भी वे राधा के साथ रमण करते रहे।
          गीता के एकादश अध्याय के चौवालिसवें श्लोक की व्याख्या के क्रम में  'यथार्थ गीता'  में कहा है कि श्रीकृष्ण ने गीता में ओम् शब्द जपने का निर्देश दिया है किन्तु लोगों की भावुकतावश  'राधे राधे श्याम मिला दे' की ध्वनि से वृंदावन गूँजता ही रहता है। राधा एक बार बिछड़ी तो श्याम से फिर नहीं मिल पायी तो तुम्हें  कैसे मिला दें? कुछलोगों ने प्रश्न किया कि महाराज जी ने ऐसा क्यों लिख दिया? राधा एक बार प्रभास क्षेत्र में श्याम से मिली थीं। हमने बताया- मरनी-करनी में तो सभी श्रद्धांजलि देने आते हैं, यह कोई मिलना हुआ?
     राधा रमण- यह यौगिक शब्द है। महात्मा लोग स्वांस में रमण करते हैं, योगाचार में रमण करते हैं। जहाँ राधा है, वहीं कृष्ण हैं। अर्थात्  'र' की धारा में रमण करते हैं, भगवान उन्हीं के साथ हैं। राधा भजनानंदियों की आदर्श हैं। सबको राधा की तरह सदैव श्रीकृष्ण के चिन्तन में तल्लीन रहना चाहिए।
~~~~~~~~~~~~~~~~
[ 'श्री परमहंस आश्रम सक्तेषगढ़'
के साहित्य "मर्यादा के दृष्टिकोण से" 'भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण' से लोक-हित में साभार प्रस्तुत ]
>~~~~~~~~~~~~~~~<
भगवन्! त्रुटियों हेतु क्षमा निवेदित।
~~~~~~~~~~~~~~~~
🍁ॐ श्री परमात्मने नमः🍁
-----------------------------------------
http://yatharthgeeta.com
-----------------------------------------
                    

+56 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 36 शेयर

+3 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 1 शेयर

+17 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 30 शेयर
Virtual Temple Mar 27, 2020

+5 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 4 शेयर

+23 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 43 शेयर

+6 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 2 शेयर

+15 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 55 शेयर
harishgangrade Mar 25, 2020

+15 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 27 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB