🙏🙏🙏राधे राधे जी 🙏🙏🙏 हार कभी मानती नहीं रूकने कभी देती नहीं, नींद आती है मगर जागती रहतीं हैं उम्मीदें और ये उम्मीदें ही हैं... जो सोने नहीं देतीं। करवटें बदलतीं हैं उम्मीदें एक राह छूटती है तो एक और नई राह बना लेती हैं उम्मीदें...... जब कभी थककर मन होता है रूक जाने का तो थकने कहाँ देती हैं ये उम्मीदें? ये उम्मीदें ही हैं जो चलते रहने को प्रेरित करतीं हैं। ये उम्मीदें ही है जो हार न मानने की ज़द्दोज़हद कराती है। सच,ये उम्मीदें न होतीं तो इंसान कब का हार गया होता, टूटकर बिखर गया होता ज़िंदगी के तूफानों से... ज़िंदगी के आगाज़ से लेकर अंज़ाम तक उम्मीदों पर ही टिकी है जिंदगी। दिल अब पहले सा मासूम नहीं रहा, पत्थर तो नहीं बना "पर मोम भी नहीं रहा.." 🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿

🙏🙏🙏राधे राधे जी 🙏🙏🙏

हार कभी मानती नहीं
रूकने कभी देती नहीं,
नींद आती है मगर
जागती रहतीं हैं उम्मीदें
और ये उम्मीदें ही हैं...
जो सोने नहीं देतीं।

करवटें बदलतीं हैं उम्मीदें
एक राह छूटती है तो
एक और नई राह बना
लेती हैं उम्मीदें......
जब कभी थककर मन होता है
रूक जाने का तो थकने कहाँ
देती हैं ये उम्मीदें?

ये उम्मीदें ही हैं जो चलते रहने को
प्रेरित करतीं हैं।
ये उम्मीदें ही है जो हार न मानने
की ज़द्दोज़हद कराती है।
सच,ये उम्मीदें न होतीं तो
इंसान कब का हार गया होता,
टूटकर बिखर गया होता 
ज़िंदगी के तूफानों से...

ज़िंदगी के आगाज़ से लेकर
अंज़ाम तक उम्मीदों पर ही टिकी है जिंदगी।
दिल अब पहले सा मासूम नहीं रहा,
पत्थर तो नहीं बना "पर मोम भी नहीं
रहा.."
🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿🌱🌿

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कामेंट्स

प्रवीण चौहान "२४७" Jan 22, 2021
🦚🦚...!! जय श्री कृष्ण !!...🦚🦚 🦚🦚🦚🍀🍀🙏🏻🍀🍀🦚🦚🦚 ❤❤ कान्हा जी की कृपा और आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहे ❤❤ 💛💛 माता रानी की कृपा से आपका दिन शुभ एवं मंगलमय रहें 💛💛 🥀🥀🥀 जय श्री राधे कृष्ण 🥀🥀🥀 🧡🧡🧡 जय महालक्ष्मी माता🧡🧡🧡 🌼‼🌼 हर हर महादेव 🌼‼🌼

sanjay Sharma Jan 22, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा माता दी या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम शुभ प्रभात जी मेरी बहन आप कैसे हैं बहन आप सदा खुश रहिए और जीवन में सदैव कामयाबी के शिखर पर अग्रसर रहे ईश्वर मेरी बहन के घर में धन ऐश्वर्य की प्राप्ति होती रहें सुख समृद्धि और खुशहाली सदैव आपके साथ विराजमान हो

sanjay choudhary Jan 22, 2021
🙏🙏 जय माता दी 🙏🙏 ।।। शुभ प्र्भात् जी ।।।। 🌹🌹 *“दिखावा”और “झूठ”बोलकर* *व्यवाहर बनाने से अच्छा हैं*, *“सच” बोलकर “दुश्मन” बना लो।* *आपके साथ कभी “विश्वाशघात*” *नही होगा*.! *इंसान अपना वो चेहरा तो* *खूब सजाता है जिस पर* *लोगों की नज़र होती है* *मगर आत्मा को सजाने की* *कोशिश कोई नही करता* *जिस पर परमात्मा की नजर होती है।* 🌹🙏 आपका दिन मंगलमय हो🙏*�🌿🍇🌿🍇🌿🍇!!*

dinesh patidar Jan 22, 2021
Jay mata di 🌷 suprabhat vandan ji 🙏 Mata rani ki kripa sada aap aur aapke Parivar per Bani rahe 🕉️

Sharmila Singh Jan 22, 2021
जय माता di आपका दिन खुशियों से भरा हो मातारानी की असीम कृपा बनी रहे 🙏🌹

Renu Singh Jan 22, 2021
Jai Mata Di 🌹🙏 Good Morning Pyari Bahena ji 🙏🌹 Mata Rani ki Anant kripa Aap aur Aàpke Pariwar pr hamesha Bni rhe Aàpka Din Shubh V Mangalmay ho Bahena Ji 🙏🌹

Champatlal mali Jan 22, 2021
सुप्रभात जी जय माँ लष्मी माँ जय माता दी जय माँ भवानी जय श्री कृष्ण राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे राधे जी

🚩भास्कर 🚩तिवारी 🚩 Jan 22, 2021
जय माता दी शुभ प्रभात वंदन जी आपका हर पल मंगलमय हो आप सदा सुखी स्वस्थ्य समृद्धिशाली बने रहें 🌹🙏🙏🥀

GOVIND CHOUHAN Jan 22, 2021
JAI SHREE RADHEY RADHEY JIII 🌺 JAI SHREE RADHEY KRISHNA JII 🌺 SUPRABHAT VANDAN JII 🌹🌹🙏🙏

rahul soni.🌹 Jan 22, 2021
💞💞💞 good afternoon ji. 💞💞💞 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿

Mamta Chauhan Feb 24, 2021

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Archana Singh Feb 24, 2021

+208 प्रतिक्रिया 89 कॉमेंट्स • 205 शेयर
Renu Singh Feb 24, 2021

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Neha Sharma, Haryana Feb 24, 2021

*बहुत ही सुंदर कहानी...."अनोखा कन्यादान.... *सुधा.... ये कया है बेटा ...तुम....सबकुछ ठीक तो है तेरे और मोहन के बीच मे ... *हां...मम्मी .....पर आप ये ...मतलब यूं अचानक बेटा तेरी सासूंमा का फोन आया था छ: महीने होने को आए अबतक कोई खुशखबरी .....उन्हें कुछ खटका तो उन्होंने मुझे फोन किया ...सच बता तेरे और मोहन के बीच सबकुछ ठीक तो है ना या कोई और परेशानी ... ऐसा कुछ नहीं है मम्मी जी ....मोहन ने अंदर आते हुए कहा अरे दामाद जी .....मोहन ने आगे बढकर चरण स्पर्श करते हुए कहा.... दरअसल मम्मी जी मैंने ही अभी परिवार को आगे बढाने से मना किया था सुधा को ....बस थोड़ा सा वक्त चाहिए था एक्चुअली गलती मेरी ही है मुझे मां को बता देना चाहिए था खमाखां आप और मम्मी दोनो परेशान हो गई ....माफ कीजियेगा मम्मी .... अरे ...मोहन तुम दामाद नहीं मेरे बेटे हो ....बेटा तुमदोनो को अपनी जिम्मेदारियों को निभाना है जैसा तुमदोनो को ठीक लगे ...अब बूढों को चिंता हुई तो ....खैर खुश रहो तुमदोनो ...ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहे ....दोनो के सिरपर हाथ रखकर मां बोली.... सुधा ने एकबारगी फिर से गुस्सैल नजरों से मोहन को देखा ....मगर मां की ओर देखकर मुस्कुराते हुए कहा ...जी मम्मी .... मां के वापस चले जाने के बाद अकेले में बैठी सुधा को शादी की पहली रात का स्मरण हो उठा.... जब मोहन उसके समीप आया था तो सुधा ने खुदको समेटते हुए साफ इंकार करते हुए कहा था.... मे इसके लिए तैयार नहीं हूं..... तब मोहन ने कहा..... सुधा ....ये हमारे मिलन की रात है और दोनो और से जब समर्पण स्वीकृति हो तभी मिलन पूर्ण रूप से होता है मे तुम्हारे निर्णय का सम्मान करता हूं मगर एक पति के हक से जानना चाहता हूं वजह कया है .... वजह..... मोहनजी ....जानते है मे एक पढीलिखी लडकी हूं आपसे पहले भी मुझे दो लडके से मिलवाया गया था मैंने दोनो को रिजेक्ट कर दिया था और फिर आपसे मिलवाने पर मैंने आपको चुना जानते है कयो ....कयोंकि आपके विचारों ने मुझे आकर्षित किया था आपके दहेज प्रथा के विरुद्ध कहे शब्दों से मे बेहद प्रभावित थी ...और आपने तो साफ साफ दहेज के लिए मना किया था आपके मम्मी पापा ने भी ....जानते है उस वक्त मुझे आप किसी हीरो से कम नहीं लग रहे थे एक ऐसे इंसान की पत्नी बनने पर मुझे गर्व महसूस हो रहा था ....मगर कन्यादान के वक्त जब पापा ने आपको वो पच्चीस लाख का चेक दिया तो आपने माथे से लगाकर उसे आशिर्वाद के रुप मे तुरंत स्वीकार कर लिया ..... आप तो दोमुंहे वाले इंसान निकले ....और ऐसे इंसान के साथ मे कोई रिश्ता ....छी....आज आप हीरो नहीं ब्लकी वो विलेन जैसे दिखाई दे रहे है जो अपना बनकर पीठ मे छुरी घोप देता है .... ओह....तो ये बात है ..... हां....और मे सुबह होते ही यहां से चली जाऊंगी कहा.... कहीं भी ....पापा के घर नहीं जा सकती ....वरना लोगों के तानों से .... ....नहीं पढीलिखी हूं कहीं और चली जाऊंगी ..... अच्छा.... इतना सोचती हो अपने मम्मी पापा के लिए तो कभी सोचा तुम्हारे ऐसा करने पर उन्हें शाबाशी या तारीफें मिलेगी....सुधा ....मे तुम्हारे निर्णय लेने से नहीं रोक सकता ....तुम्हें मेरे साथ कोई सम्बंध नहीं बनाने तो मे तुम्हें बाध्य नहीं करूंगा मगर तुम शादी के बाद मेरी पत्नी स्वरूप मेरी जीवनसाथी हो ....तो एक सुझाव दूंगा.... तुम यही रहो .....एक पत्नी की तरह रिश्ता मत रखो मगर हम दोनो दोस्तों के जैसे तो रह सकते है ना.... यहां रहोगी तो ना केवल तुम्हारे मम्मी पापा ब्लकी मेरी मां को भी सुकून रहेगा ....देखो हमदोनों की ये दोस्ती दो परिवारों में सदैव सुकून और सम्मान बनाए रखेगी ... हां ....मे तुम्हें इसके लिए वचन देता हूं मे तुम्हें तुम्हारी स्वीकृति के बिना कभी भी छूने की कोशिश भी नहीं करूंगा ......सुधा ....बाहर दुनिया की नजरों में हमदोनों पति पत्नी का रुप बनाए रहेंगे मगर इस कमरे के अंदर केवल और केवल दो दोस्त बने रहेंगे जो एकदूसरे को बिना छुए बिना लडे अलग अलग रहेंगे ...मे वहां सोफे पर सोऊंगा तुम यहां बेड पर सो जाओ..... मगर.... मे ऐसे ..... सुधा ....कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने मम्मी पापा और मेरी मम्मी के बारे मे जरूर सोच लेना ....अन्यथा कल पछताने के आलावा कुछ नहीं बचेगा.... साल छ: महीने में दोनो परिवारों को समझा बुझा देगे हमारे बीच नहीं बन रही और ..... आगे तुम समझदार हो ....कहकर मोहन चादर तकिया लिए सोफे पर जा लेट गया था..... सुधा को भी उस वक्त मोहन की बातें सही लगी थी ....और उसने भी यही रहने का निर्णय ले लिया.... सचमुच मोहन अपने वचन पर अडिग रहा उसने कभी सुधा को छूने की कोशिश नहीं की .... ऐसे ही आज छ: महीने पूरे होने को आए थे दोनो ने अबतक कोई खुशखबरी नहीं दी थी तो मोहन की माता जी ने अपनी समधन सुधा की मम्मी से बातचीत की थी जिसके परिणाम स्वरूप वो सुधा से मिलने आई थी..... मगर अब सुधा ने निर्णय किया वो कल ही वकील से मिलकर मोहन से तलाक लेने की प्रक्रिया की शुरूआत करेगी ....अगले दिन वो एक वकील के पास पहुंची। सुधा अपने वकील के पास पहुंची और मोहन से तलाक के लिए बातचीत कर उसे नोटिस के जरिए सूचना देने की कार्यवाही में लग गई ...अचानक उसके मोबाइल पर बेल बजी....हैलो मम्मी...कया..... फोन हाथ से छूट गया ..... सुधा जी....सुधा जी .....कया हुआ ..... वकील साहब ....पापा ....पापा ....कहकर फूटफूटकर रोने लगी..... सुधा की माताजी ने फोन किया था उसके पिताजी अब इस दुनिया में नहीं रहे .... सुधा तुरंत अपने घर पहुंची ....कुछ ही देर मे मोहन और उसकी माता जी भी वहां पहुंच गई .... इसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को पूरा किया गया .....अभी पंद्रह दिन ही बीते थे की सुधा के भैया भाभी ने सुधा से कहा.... सुधा ....पापा तो रहे नहीं ....तो हम सोच रहे है मां को किसी वृद्ध आश्रम..... कया..... ये आप दोनो कैसी बातें कर रहे है ....भैया वो मां है आपकी जन्म देनेवाली ....और पापा के जाते ही आप दोनो ....छी....कितनी घटिया सोच है आपकी ....और हां मत भूलो पापा की संपत्ति मे उनकी पत्नी यानी मां का बराबर का हक है ..... कया ....हक...संपत्ति..... वो तो कबकी हमारे नाम पर हो गई थी खुद मां ने पापा से साइन करवाकर दिए थे ..... खैर..... तुम चाहो कोर्ट जाओ या जहन्नुम मे ....मगर अब ये घर हमारा है और कुछ दिन तक रह सकती हो मगर जल्द ही अपना इंतजाम कर लेना ......समझी ....मां की चमची ....कहकर दोनो दूसरे कमरे में चले गए.... अब सुधा को समझ नहीं आ रहा था वो कया करे ....पापा रहे नहीं मां को ऐसे कहा अकेले छोडें ...ऊपर से उसने मोहन से तलाक की कार्यवाही ....ओह नो.....तभी उसने वकील को फोन किया.... हैलो ....जी....मतलब आपने नोटिस..... उफ्फ..... ये मैंने कया किया .....अब मां को लेकर कहा जाऊंगी.... अचानक घरके बाहर गाडी आकर रुकी .....सुधा ने देखा.... ये ...ये तो मोहन की गाडी..... मोहन गाडी से उतरा और मां से आकर बोला.... मां ....अब सभी क्रियाओं की समाप्ति हो गई है आपकी इच्छाओं के लिए मे चुप था मगर अब आप मेरे साथ चलेगी बस ....जो जरूरी हो ले लीजिए .... मां अपने कुछ कपडो और पति के समान को समेटने लगी तबतक मोहन सुधा के पास आकर बोला.... सुधा.... ये लो तुम्हारे तलाक के पेपर्स .....चाहता तो नहीं था मगर .... इसके आगे कुछ बोल पाता तबतक मां आ गई.... चलो बेटा .... जी ....कहकर मां के हाथों से समान ले लिया.... वहीं सुधा सोच रही थी जब तलाक के पेपर्स पर मोहनजी ने साइन कर दिए तो फिर ये हमें कहा लेकर जा रहे है और कयो....मगर मां पर पहले ही पापा के चले जाने का दुख ...अगर कुछ कहा तो कहीं मां भी .....नहीं.... नहीं.... सोचकर उसने चुप्पी साधे रहने मे ही भलाई समझी.... मोहन ने घरके बाहर आकर गाडी रोकी ....सुधा मां को लिए जैसे ही घरमे घुसने लगी तो मोहन ने रोका .....सुधा.... वहां नहीं यहां .....मां अपने घरमे रहेगी... कया...... मगर हमारा घर तो ये है वो तो किसी और का.... सुधा ....वो हमारा घर है और हमारी दोनो मांओं का भी ....मगर ये .....ये घर केवल मां का है .... कहकर दरवाजा खोलकर मां को अंदर ले गया जहां पहले से सुधा के माता पिता की बडी से तस्वीर लगी थी ...मां को कमरे में बिठाकर मोहन सुधा संग दरवाजे के गेट पर आया और सुधा को देखकर बोला.... जानती हो सुधा....शादी की पहली रात तुमनें मुझसे वो पच्चीस लाख को लेकर...... सुधा मे शुरू से ही दहेज विरोधी रहा हूं आज भी उसपर अडिग हूं मगर शादी से दो दिन पहले तुम्हारे पापा मेरे पास आए थे और उन्होंने उसी वक्त मुझे तुम्हारे भैया भाभी के बारे मे उनके लालचवश घर कारोबार हथियाने की चल रहे षड्यंत्रों के बारे मे बताया.... मैंने उनसे उनपर ऐसा ना करने के लिए कोर्ट जाने की बात भी कहीं तो वह बोले..... बेटा ....हमारे बाद भी तो सबकुछ उसीका है मुझे अपनी फिक्र नहीं जबतक हूं ये दोनो कुछ नहीं कर सकते जानते है मे सबकुछ वापिस कैसे ले सकता हूं मगर मेरे बाद मेरी पत्नी ....वो सीधी है बेटे बहु ने उसे अपनी बातों से उलझा कर ....खैर ...वो ममता है उसकी ...मगर बेटा कल जब मे नहीं रहूंगा तो ये उसकी ममता का खयाल नहीं करेंगे उसे निकाल बाहर कर देगे.... तो आप मुझसे कया चाहते है पापा जी ..... बेटा ....शादी के वक्त एक अनोखे कन्यादान के रुप मे मेरे हाथों पच्चीस लाख रु ....ले लेना ....मेरे बाद मेरी पत्नी के भविष्य के लिए .....वो दरदर की ठोकरें ना खाए बेटा.... और हां....इसबात का मेरे मरने तक किसी से जिक्र मत करना तुम्हें इस बूढे बाप की कसम... सुधा ....ना चाहते हुए भी मुझे वो रु लेने पडे .....और इसीलिए ....मे तुम्हें कुछ बता भी नहीं पाया.... सुधा पापा की बातों को मानकर मैंने इसमें कुछ रकम जोडकर अपने साथ वाला घर खरीद लिया ....अब मां यहां बिना किसी के रौब के स्वेच्छा से जैसे चाहे रह सकती हैं ..... बाकी ....हमारा घर इनका अपना है .....और मुझे दोनो मांओं के साथ रहकर दोनो के प्यार और आशीर्वाद के साये में जीवन व्यतीत करना है..... मोहनजी..... दौडते हुए सुधा मोहन के पैरों में गिर गई... मुझे माफ कर दीजिए ...मुझे माफ ...... मगर तुम्हें तो.....मोहन बोला.... नहीं चाहिए .....नहीं चाहिए.... कहकर पेपर्स फाड दिए ...... सुधा .....पत्नी की जगह कदमों में नहीं पति के दिल मे होती है कहकर मोहन ने सुधा को सीने से लगा लिया... *एक सुंदर रचना......👍🌸 *जय-जय श्री राधेकृष्णा*🙏🌸🌸

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*जय श्री राधे कृष्णा जी* *शुभरात्रि वंदन * *_⭕♦️परमात्मा से सम्बन्ध♦️⭕_* एक बार एक पंडित जी ने एक दुकानदार के पास पांच सौ रुपये रख दिए। उन्होंने सोचा कि जब मेरी बेटी की शादी होगी तो मैं ये पैसा ले लूंगा। कुछ सालों के बाद जब बेटी सयानी हो गई, तो पंडित जी उस दुकानदार के पास गए। लेकिन दुकानदार ने नकार दिया और बोला- आपने कब मुझे पैसा दिया था? बताइए! क्या मैंने कुछ लिखकर दिया है? पंडित जी उस दुकानदार की इस हरकत से बहुत ही परेशान हो गए और बड़ी चिंता में डूब गए। फिर कुछ दिनों के बाद पंडित जी को याद आया, कि क्यों न राजा से इस बारे में शिकायत कर दूं। ताकि वे कुछ फैसला कर देंगे और मेरा पैसा मेरी बेटी के विवाह के लिए मिल जाएगा। फिर पंडित जी राजा के पास पहुंचे और अपनी फरियाद सुनाई। राजा ने कहा- कल हमारी सवारी निकलेगी और तुम उस दुकानदार की दुकान के पास में ही खड़े रहना। दूसरे दिन राजा की सवारी निकली। सभी लोगों ने फूलमालाएं पहनाईं और किसी ने आरती उतारी। पंडित जी उसी दुकान के पास खड़े थे। जैसे ही राजा ने पंडित जी को देखा, तो उसने उन्हें प्रणाम किया और कहा- गुरु जी! आप यहां कैसे? आप तो हमारे गुरु हैं। आइए! इस बग्घी में बैठ जाइए। वो दुकानदार यह सब देख रहा था। उसने भी आरती उतारी और राजा की सवारी आगे बढ़ गई। थोड़ी दूर चलने के बाद राजा ने पंडित जी को बग्घी से नीचे उतार दिया और कहा- पंडित जी! हमने आपका काम कर दिया है। अब आगे आपका भाग्य। उधर वो दुकानदार यह सब देखकर हैरान था, कि पंडित जी की तो राजा से बहुत ही अच्छी सांठ-गांठ है। कहीं वे मेरा कबाड़ा ही न करा दें। दुकानदार ने तत्काल अपने मुनीम को पंडित जी को ढूंढ़कर लाने को कहा। पंडित जी एक पेड़ के नीचे बैठकर कुछ विचार-विमर्श कर रहे थे। मुनीम जी बड़े ही आदर के साथ उन्हें अपने साथ ले आए। दुकानदार ने आते ही पंडित जी को प्रणाम किया और बोला- पंडित जी! मैंने काफी मेहनत की और पुराने खातों को‌ देखा, तो पाया कि खाते में आपका पांच सौ रुपया जमा है। और पिछले दस सालों में ब्याज के बारह हजार रुपए भी हो गए हैं। पंडित जी! आपकी बेटी भी तो मेरी बेटी जैसी ही है। अत: एक हजार रुपये आप मेरी तरफ से ले जाइए, और उसे बेटी की शादी में लगा दीजिए। इस प्रकार उस दुकानदार ने पंडित जी को तेरह हजार पांच सौ रुपए देकर बड़े ही प्रेम के साथ विदा किया। *_⭕♦️तात्पर्य♦⭕_* *जब मात्र एक राजा के साथ सम्बन्ध होने भर से हमारी विपदा दूर जो जाती है,* *तो हम अगर इस दुनिया के राजा यानि कि दीनदयाल परमात्मा से अपना सम्बन्ध जोड़ लें*, *तो हमें कोई भी समस्या, कठिनाई या फिर हमारे साथ किसी भी तरह के अन्याय का तो कोई प्रश्न ही नही।* *🙏जय श्री राधे कृष्णा..🙏*

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vineeta tripathi Feb 24, 2021

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