🥀🍃🥀🍃🥀"किसी पर भी अटूट भरोसा नहीं करना चाहिए..... क्योंकि नमक और चीनी का रंग सदैव एक जैसा होता है"🥀🍃🥀🍃🥀"जय श्री राधे राधे प्रेम से बोलो राधे राधे"🤗🌹🙌👌🙏🏻

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कामेंट्स

🔴 Suresh Kumar 🔴 Apr 16, 2021
राधे राधे जी 🙏 शुभ प्रभात वंदन बंसी वाले की कृपा आप पर सदा बनी रहे मेरी प्यारी बहन 🙏

DR A.K.Choudhary 7888825900 Apr 16, 2021
Jai Mata rani ki happy GOOD MORNING ji my dear sister very nice post bhut sunder 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

shamdhu Singh tomar Apr 17, 2021
@jyoti98 🌴🌴🌴जय🌴🌴🌴 🌷🌷🌷🌷श्री🌷🌷🌷🌷 🌹🌹🌹कृष्णा🌹🌹🌹🌹

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SunitaSharma May 11, 2021

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Riya May 12, 2021

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sarla rana May 12, 2021

. “नाम जप" भक्त भगवान् के मिलन की अपेक्षा भगवान् के भजन को अधिक प्रिय समझता है। भजन जब जीवन बन जाता है तब उसके बिना रहा नहीं जाता है। कोई कहे भी के छोड़ दो तब कहेंगे कि छोड़े कैसे रहा नहीं जाता है। एक महात्मा की सच्ची घटना का उल्लेख यहाँ कर दें। चैतन्य महाप्रभु के शिष्यों में एक सज्जन थे। उनका नाम-जप का इतना अभ्यास था, उनकी जीभ इतनी अभ्यस्त हो गयी थी और उनको इतना मजा-आनन्द आता था कि सोने में भी उनका नाम जप होता रहता था। जब नींद में भी जप हो तो जाग्रत अवस्था में क्यों न हो। एक दिन वह जंगल में शौच के लिये गये। उनका नाम जप चल रहा था। एक सज्जन उनके पीछे हो लिये। जो दोष देखने वाले होते हैं, उनका काम ही यही होता है। ऐसा मैंने भी देखा है कि जब ध्यान करते हैं तब कई लोग कहते हैं कि अमुक-अमुक व्यक्ति सो रहा था, मैंने देखा है। मैंने पूछा कि आप क्या कर रहे थे ? दूसरे के दोष बिना हुए और बिना जाने-समझे कहने में उन्हें आनन्द मिलता है। खैर, उस व्यक्ति ने आकर महाप्रभु से कहा- महाराज ! यह आदमी इतना गन्दा है कि शौच करते हुए भी भगवान् का नाम लेता है। महाप्रभु ने कहा- ऐसा करता है ? उसने कहा- हाँ, ऐसा करया है। महाप्रभु ने कहा- उसे बुलाओ। वे सज्जन आये तब महाप्रभु ने कहा- यह कह रहा है कि तुम शौच करते हुए भी भगवान् का नाम लेते हो। वे बोले- हाँ ऐसा करता हूँ। महाप्रभु ने कहा- ऐसा नहीं करना चाहिये। उन्होंने कहा-ठीक है। फिर दूसरे दिन जब वे महात्मा शौच को गये तब फिर वह गया और देखा कि वे शौच कर रहे हैं और जीभ पकड़े हुए बैठे हैं। उसने आकर फिर महाप्रभु से कहा- महाराज ! वह तो अत्यन्त भ्रष्ट है। कल तो केवल बोल ही रहा था परन्तु आज तो शौच करते हुए हाथ-मुख में ड़ाले हुए था। महाप्रभु ने कहा-ऐसी बात है तब उसे बुलाओ। वह आया तो महाप्रभु ने कहा-ये कह रहे हैं कि तुम शौच करते हुए हाथ मुँह में हाथ रखे थे। उन्होंने कहा- महाराज ! ये ठीक कह रहे हैं। परन्तु आपने ही तो कहा था कि शौच करते समय नाम मत लेना।मेरी जीभ मानती ही नहीं तो मैं क्या करूँ ? आपकी आज्ञा थी इसलिये जीभ पकड़कर बैठा था। महाप्रभु ने कहा-अब तुम जाओ और हमेशा जप किया करो। इस प्रकार जप जिसके जीवन का स्वभाव बन जाता है वह भजन है। अगर भजन न रहे तो जीवन न रहे। भगवान् की स्मृति ही जीवन है। ----------:::×:::---------- - श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार (श्रीभाईजी) 'सरस प्रसंग' "जय जय श्री राधे" ****************************************** "श्रीजी की चरण सेवा" की सभी धार्मिक, आध्यात्मिक एवं धारावाहिक पोस्टों के लिये हमारे पेज से जुड़े रहें तथा अपने सभी भगवत्प्रेमी मित्रों को भी आमंत्रित करें👇 https://www.facebook.com/%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE-724535391217853/

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Pooja Dixit May 11, 2021

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Ravita Devi May 13, 2021

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Riya May 11, 2021

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