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Gour....
Gour.... Jun 18, 2019

जय श्री राम जी *********

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कामेंट्स

ವೆಂಕಟೇಶ (venkatesh) Jun 18, 2019
🙏🙏🙏🌷🌺🌹 Jai Sri Radha Krishna Sri Hanuman ki krupa aap aur aapki parivar sada bani rahe good night sweet dreams vandan ji 🌷🌷

Malkhan Singh UP Jun 18, 2019
: *🌹।‌‌।ॐ।। जय श्री राम ।।ॐ।।🌹* *श्री राम जी का आशीर्वाद एवं श्री हनुमान जी का साथ आप और आप के परिवार पर सदैव बना रहे। 🌹🌲🙏आपका हर पल शुभ हो।🙏🌲🌹* *।।ॐ।। ऊँ श्री हनुमते नमः।।ॐ।।*

Gour.... Jun 18, 2019
@mksinghgkp जय श्री राधे जय श्री कृष्णा जी। शुभ रात्रि जी। आपकी आने वाली सुबह बहुत सुन्दर हो जी।

Gour.... Jun 18, 2019
@दुर्गावाहिनीदल जय श्री राम जी। जय श्री राधे जय श्री कृष्णा जी। शुभ रात्रि जी। आपकी आने वाली सुबह बहुत सुन्दर हो जी।

Gour.... Jun 18, 2019
@aanand जय श्री राम जी। जय श्री राधे जय श्री कृष्णा जी। शुभ रात्रि जी। आपकी आने वाली सुबह बहुत सुन्दर हो जी।

Gour.... Jun 18, 2019
@mohan1734 जय श्री राम जी। जय श्री राधे जय श्री कृष्णा जी। शुभ रात्रि जी। आपकी आने वाली सुबह बहुत सुन्दर हो जी।

Gour.... Jun 18, 2019
@jagadish जय श्री राम जी। जय श्री राधे जय श्री कृष्णा जी। शुभ रात्रि जी। आपकी आने वाली सुबह बहुत सुन्दर हो जी।

Gour.... Jun 18, 2019
@ವೆಂಕಟೇಶ जय श्री राम जी। जय श्री राधे जय श्री कृष्णा जी। शुभ रात्रि जी। आपकी आने वाली सुबह बहुत सुन्दर हो जी।

Gour.... Jun 18, 2019
@नवीनचौहान2 जय श्री राम जी। जय श्री राधे जय श्री कृष्णा जी। शुभ रात्रि जी। आपकी आने वाली सुबह बहुत सुन्दर हो जी।

sheo shankar Jun 18, 2019
Jay Jay Sri Ram Jay Sri Ram Jay Sri Ram Jay Sri Ram Jay Sri Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Ram Hare Hare Hare Jay Sri Ram

Gour.... Jun 18, 2019
@sheoshankar6 जय श्री राम जी। जय श्री राधे जय श्री कृष्णा जी। शुभ रात्रि जी। आपकी आने वाली सुबह बहुत सुन्दर हो जी।

Gour.... Jun 18, 2019
@नवीनचौहान2 जय श्री राम जी। जय श्री राधे जय श्री कृष्णा जी। शुभ रात्रि जी। आपकी आने वाली सुबह बहुत सुन्दर हो जी।

Vijay Pandey Jun 20, 2019
राम राम जी भाई शुभ रात्रि मंगलमय हो ठाकुर जी का आशीर्वाद आप और आपके परिवार पर सदैव बना

Dharma Saini Jun 20, 2019
🚩जय श्री राम🚩 🙏🙏🙏🙏🙏

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Baban sawan Jul 18, 2019

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Babita Sharma Jul 18, 2019

ॐ नमः शिवाय 🔱 क्यों करते हैं भगवान की आरती? आरती का अर्थ होता है – व्याकुल होकर भगवान को याद करना, उनका स्तवन करना। आरती, पूजा के अंत में धूप, दीप, कर्पूर से की जाती है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। हिंदू धर्म में अग्नि को शुद्ध माना गया है। आरती एक विज्ञान है। आरती के साथ – साथ ढोल – नगाड़े, तुरही, शंख, घंटा आदि वाद्य भी बजते हैं। इन वाद्यों की ध्वनि से रोगाणुओं का नाश होता है। वातावरण पवित्र होता है। दीपक और धूप की सुगंध से चारों ओर सुगंध का फैलाव होता है। पर्यावरण सुगंध से भर जाता है। पूजा में आरती का इतना महत्व क्यों हैं इसका जवाब स्कंद पुराण में मिलता है। इस पुराण में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति मंत्र नहीं जानता, पूजा की विधि नहीं जानता लेकिन सिर्फ आरती कर लेता है तो भगवान उसकी पूजा को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लेते हैं। आरती करते हुए भक्त के मान में ऐसी भावना होनी चाहिए, मानो वह पंच-प्राणों की सहायता से ईश्वर की आरती उतार रहा हो। घी की ज्योति जीव के आत्मा की ज्योति का प्रतीक मानी जाती है। यदि भक्त अंतर्मन से ईश्वर को पुकारते हैं, तो यह पंचारती कहलाती है। आरती प्रायः दिन में एक से पांच बार की जाती है। इसे हर प्रकार के धामिक समारोह एवं त्यौहारों में पूजा के अंत में करते हैं। आरती करने का समय 1-मंगला आरती-यह आरती भगवान् को सूर्योदय से पहले उठाते समय करनी चाहिए. 2 श्रृगार आरती-यह आरती भगवान् जी के श्रृंगार,पूजन आदि करने के बाद करनी चाहिए. 3- राजभोग आरती-यह आरती दोपहर को भोग लगाते समय करनी चाहिए,और भगवान् जी की आराम की व्यवस्था कर देनी चाहिए. 4-संध्या आरती-यह आरती शाम को भगवान् जी को उठाते समय करनी चाहिए. 5-शयन आरती -यह आरती भगवान् जी को रात्री में सुलाते समय करनी चाहिए. एक पात्र में शुद्ध घी लेकर उसमें विषम संख्या (जैसे ३, ५ या ७) में बत्तियां जलाकर आरती की जाती है। इसके अलावा कपूर से भी आरती कर सकते हैं। मान्यता अनुसार ईश्वर की शक्ति उस आरती में समा जाती है, जिसका अंश भक्त मिल कर अपने अपने मस्तक पर ले लेते हैं। आरती से वातावरण में मौजूद नकारत्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। आरती के पूर्ण होते ही इस दिव्य व अलौकिक मंत्र को विशेष रूप से बोला जाता है: कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।। इसका अर्थ इस प्रकार है- कर्पूरगौरं- कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले। करुणावतारं- करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं। संसारसारं- समस्त सृष्टि के जो सार हैं। भुजगेंद्रहारम्- इसका अर्थ है जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं। सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभवानी सहितं नमामि- इसका अर्थ है कि जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं, उनको मेरा नमन है। मंत्र का पूरा अर्थ- जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव माता भवानी सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करें और उन्हें मेरा नमन है। भगवान शिव की ये स्तुति शिव-पार्वती विवाह के समय विष्णुजी द्वारा गाई हुई मानी गई है। अमूमन ये माना जाता है कि शिव शमशान वासी हैं, उनका स्वरुप बहुत भयंकर और अघोरी वाला है। लेकिन, ये स्तुति बताती है कि उनका स्वरुप बहुत दिव्य है। शिव को सृष्टि का अधिपति माना गया है, वे मृत्युलोक के देवता हैं। उन्हें पशुपतिनाथ भी कहा जाता है, पशुपति का अर्थ है संसार के जितने भी जीव हैं (मनुष्य सहित) उन सब का अधिपति। ये स्तुति इसी कारण से गाई जाती है कि जो इस समस्त संसार का अधिपति है, वो हमारे मन में वास करे। शिव श्मशान वासी हैं, जो मृत्यु के भय को दूर करते हैं। हमारे मन में शिव वास करें, मृत्यु का भय दूर हो। ॐ नमः शिवाय 🔱 हर हर महादेव 🌿🌿

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meenu pradeep pandey Jul 18, 2019

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Sanjay Singh Jul 18, 2019

+23 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 7 शेयर
neetu mishra Jul 18, 2019

+15 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 3 शेयर
Dalsinghmeena Jul 18, 2019

+23 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 0 शेयर
Jyoti Pandey Jul 18, 2019

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Lalan Singh Jul 18, 2019

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